झारखंड के गुमला जिले के सिसई में अत्यधिक बस किराया बढ़ाए जाने को लेकर आदिवासी संगठनों ने कड़ा विरोध जताया है। जनजाति सुरक्षा मंच के प्रखंड अध्यक्ष सोमेश्वर उरांव ने बसों के किराए में मनमानी बढ़ोतरी पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने बताया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में केवल ₹5 से ₹6 तक की वृद्धि हुई है, जबकि बसों का किराया सीधे तौर पर ₹30, ₹40 और ₹50 बढ़ा दिया गया है, जिससे ग्रामीण जनता पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है। उरांव ने इस स्थिति को झारखंड सरकार और प्रशासन की उदासीनता का परिचायक बताया, क्योंकि ग्रामीण जनता पहले से ही महंगाई की मार झेल रही है और किराया बढ़ने से उन्हें और अधिक आर्थिक संकटों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब और किसान निजी वाहनों का खर्च वहन नहीं कर सकते, उनके लिए बसें ही यात्रा का एकमात्र विकल्प हैं। इतना ही नहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रैक्टर से खेतों की जुताई का चार्ज भी ₹1000 प्रति घंटा से बढ़ाकर ₹1200 प्रति घंटा कर दिया गया है, यानी सीधे ₹200 की वृद्धि हुई है, जिसे उन्होंने अन्नदाताओं के साथ अन्याय बताया। आदिवासी नेता सोमेश्वर उरांव ने झारखंड सरकार पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि सरकार की अनदेखी के कारण यहां के किसानों और गरीबों की जीडीपी लगातार गिर रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के '25 साल की युवा झारखंड, समृद्ध व विकसित बन रहा है' के बयान को 'मुंगेरीलाल के हसीन सपने जैसा' बताया। सोमेश्वर उरांव ने झारखंड सरकार, प्रशासन और झारखंड बस ऑनर एसोसिएशन से मांग की है कि सभी जगहों के लिए नई और उचित किराया दरें निर्धारित की जाएं, ताकि आम जनमानस को राहत मिल सके और बस व ट्रैक्टर मालिक मनमानी तरीके से किराया वसूली न कर सकें।
झारखंड के गुमला जिले के सिसई में अत्यधिक बस किराया बढ़ाए जाने को लेकर आदिवासी संगठनों ने कड़ा विरोध जताया है। जनजाति सुरक्षा मंच के प्रखंड अध्यक्ष सोमेश्वर उरांव ने बसों के किराए में मनमानी बढ़ोतरी पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने बताया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में केवल ₹5 से ₹6 तक की वृद्धि हुई है, जबकि बसों का किराया सीधे तौर पर ₹30, ₹40 और ₹50 बढ़ा दिया गया है, जिससे ग्रामीण जनता पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है। उरांव ने इस स्थिति को झारखंड सरकार और प्रशासन की उदासीनता का परिचायक बताया, क्योंकि ग्रामीण जनता पहले से ही महंगाई की मार झेल रही है और किराया बढ़ने से उन्हें और अधिक आर्थिक संकटों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब और किसान निजी वाहनों का खर्च वहन नहीं कर सकते, उनके लिए बसें ही यात्रा का एकमात्र
विकल्प हैं। इतना ही नहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रैक्टर से खेतों की जुताई का चार्ज भी ₹1000 प्रति घंटा से बढ़ाकर ₹1200 प्रति घंटा कर दिया गया है, यानी सीधे ₹200 की वृद्धि हुई है, जिसे उन्होंने अन्नदाताओं के साथ अन्याय बताया। आदिवासी नेता सोमेश्वर उरांव ने झारखंड सरकार पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि सरकार की अनदेखी के कारण यहां के किसानों और गरीबों की जीडीपी लगातार गिर रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के '25 साल की युवा झारखंड, समृद्ध व विकसित बन रहा है' के बयान को 'मुंगेरीलाल के हसीन सपने जैसा' बताया। सोमेश्वर उरांव ने झारखंड सरकार, प्रशासन और झारखंड बस ऑनर एसोसिएशन से मांग की है कि सभी जगहों के लिए नई और उचित किराया दरें निर्धारित की जाएं, ताकि आम जनमानस को राहत मिल सके और बस व ट्रैक्टर मालिक मनमानी तरीके से किराया वसूली न कर सकें।
- झारखंड के गुमला जिले के सिसई में अत्यधिक बस किराया बढ़ाए जाने को लेकर आदिवासी संगठनों ने कड़ा विरोध जताया है। जनजाति सुरक्षा मंच के प्रखंड अध्यक्ष सोमेश्वर उरांव ने बसों के किराए में मनमानी बढ़ोतरी पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने बताया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में केवल ₹5 से ₹6 तक की वृद्धि हुई है, जबकि बसों का किराया सीधे तौर पर ₹30, ₹40 और ₹50 बढ़ा दिया गया है, जिससे ग्रामीण जनता पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है। उरांव ने इस स्थिति को झारखंड सरकार और प्रशासन की उदासीनता का परिचायक बताया, क्योंकि ग्रामीण जनता पहले से ही महंगाई की मार झेल रही है और किराया बढ़ने से उन्हें और अधिक आर्थिक संकटों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब और किसान निजी वाहनों का खर्च वहन नहीं कर सकते, उनके लिए बसें ही यात्रा का एकमात्र विकल्प हैं। इतना ही नहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रैक्टर से खेतों की जुताई का चार्ज भी ₹1000 प्रति घंटा से बढ़ाकर ₹1200 प्रति घंटा कर दिया गया है, यानी सीधे ₹200 की वृद्धि हुई है, जिसे उन्होंने अन्नदाताओं के साथ अन्याय बताया। आदिवासी नेता सोमेश्वर उरांव ने झारखंड सरकार पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि सरकार की अनदेखी के कारण यहां के किसानों और गरीबों की जीडीपी लगातार गिर रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के '25 साल की युवा झारखंड, समृद्ध व विकसित बन रहा है' के बयान को 'मुंगेरीलाल के हसीन सपने जैसा' बताया। सोमेश्वर उरांव ने झारखंड सरकार, प्रशासन और झारखंड बस ऑनर एसोसिएशन से मांग की है कि सभी जगहों के लिए नई और उचित किराया दरें निर्धारित की जाएं, ताकि आम जनमानस को राहत मिल सके और बस व ट्रैक्टर मालिक मनमानी तरीके से किराया वसूली न कर सकें।2
- आज दिनांक 15/06/2826 को राजधानी राँची के प्रमुख हरमू क्षेत्र में नगर निगम की टीम ने अवैध अतिक्रमण के खिलाफ एक बड़ा अभियान चलाया। भारी पुलिस बल और बुलडोजर (JCB) के साथ पहुंची निगम की टीम ने सड़क के दोनों किनारों पर अवैध रूप से बनाए गए दुकानों के छज्जों, शेड और फुटपाथ पर जमे अस्थायी दुकानों को ध्वस्त कर दिया। इस अचानक हुई कार्रवाई से पूरे हरमू इलाके में दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों के बीच हड़कंप मच गया। नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक, हरमू रोड और उसके आसपास के रिहायशी इलाकों में लंबे समय से सड़क किनारे अतिक्रमण के कारण रोजाना भीषण ट्रैफिक जाम की स्थिति बन रही थी। स्थानीय निवासियों और राहगीरों को हो रही भारी परेशानी की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद नगर आयुक्त के निर्देश पर ट्रैफिक जाम से निजात दिलाने के लिए यह त्वरित कार्रवाई की गई। अभियान के दौरान, नाली और फुटपाथ को घेरकर बनाए गए पक्के और कच्चे निर्माण को बुलडोजर से ढहा दिया गया। कई दुकानदारों का सड़क पर रखा सामान जब्त किया गया, साथ ही मौके पर ही कई लोगों से जुर्माना भी वसूला गया। निगम की टीम ने लाउडस्पीकर से सख्त लहजे में चेतावनी दी कि यदि दोबारा उसी जगह पर अतिक्रमण पाया गया, तो कानूनी कार्रवाई करते हुए प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाएगी।2
- गुमला जिले में नालसा और झालसा के निर्देशानुसार, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार गुमला, श्री अजीत कुमार सिंह के मार्गदर्शन में विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस के अवसर पर एक गहन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। 90 दिवसीय जागरूकता अभियान के तहत, जिला विधिक सेवा प्राधिकार गुमला ने ओल्ड एज होम गुमला में विशेष तौर पर कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें पीएलवी (पैरा लीगल वालंटियर) भी शामिल रहे। इस अवसर पर एक मेडिकल कैंप लगाया गया जहाँ बुजुर्गों का स्वास्थ्य परीक्षण कर आवश्यकतानुसार दवाएँ वितरित की गईं। प्रधान जिला जज और डालसा टीम ने बुजुर्गों के बीच मिठाइयाँ और बिस्किट भी बांटे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री अजीत कुमार सिंह ने बताया कि विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस एक वैश्विक स्वास्थ्य सेवा कार्यक्रम है, जो प्रतिवर्ष 15 जून को मनाया जाता है। उन्होंने आज के परिवेश पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बच्चे बड़े होने पर माता-पिता से दूरी बनाने लगते हैं, जिससे परिवारों में बिखराव आता है। श्री सिंह ने परिवार में बुजुर्ग माता-पिता की छाया के महत्व पर जोर दिया, क्योंकि भारतीय दादा-दादी छोटे बच्चों को भावनात्मक सुरक्षा प्रदान करते हैं, जिससे माता-पिता अपने करियर और व्यक्तिगत लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित कर पाते हैं और परिवार का विकास होता है। उन्होंने वृद्ध व्यक्तियों के लिए राष्ट्रीय नीति और वरिष्ठ नागरिकों के लिए भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम की शुरुआत का उल्लेख किया, जो वृद्धों को आर्थिक और भावनात्मक सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। साथ ही, उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा भी बुजुर्गों के हितों की रक्षा के लिए बनाए गए प्रावधानों की जानकारी दी और आश्वस्त किया कि विधिक सेवा प्राधिकार गुमला हमेशा उनकी सेवा में उपस्थित रहता है, और आवश्यकता पड़ने पर सहायता ली जा सकती है। इस अवसर पर, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकार, श्री राम कुमार लाल गुप्ता ने ओल्ड एज होम में बुजुर्गों के लिए सरकार द्वारा की गई अच्छी व्यवस्थाओं की सराहना की और उनसे आराम से रहने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की कठिनाई होने पर बुजुर्ग जिला विधिक सेवा प्राधिकार को सूचित कर सहायता प्राप्त कर सकते हैं। श्री गुप्ता ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई कि वे जिला जज के निर्देश पर हमेशा वृद्ध आश्रम आते रहते हैं, बुजुर्गों के दुख-दर्द सुनते हैं और उन्हें दूर करने का प्रयास करते हैं, और भविष्य में भी वृद्धजनों की सेवा के लिए तत्पर रहेंगे। एलएडीसी के प्रमुख डीएन ओहदार ने भी वृद्धजनों को संबोधित करते हुए कानूनी संबंधी महत्वपूर्ण बातें बताईं। सभा का संचालन स्थाई लोक अदालत के सदस्य श्री शंभू सिंह ने किया। इस कार्यक्रम में एलएडीसी श्री जितेंद्र सिंह, डीएलएसए के प्रकाश पांडे, पीएलबी प्रेम कुमार शाह, कुंदन तिवारी, एनोस बाखला, विनय कुमार तथा संस्था के सचिव रिजोईस एरिक, वार्डन ज्योति प्रमिला केरकेटा आदि सहित अन्य कई लोग शामिल थे।1
- 15 जून को गुमला के सिविल सर्जन डॉ. शंभू नाथ चौधरी ने जिले के नागरिकों को डेंगू से सुरक्षित रहने और इस बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए 'सजगता और स्वच्छता' पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। डॉ. चौधरी ने बताया कि डेंगू फैलाने वाला 'एडीज' मच्छर साफ और ठहरे हुए पानी में पनपता है, और यह ज्यादातर दिन के समय काटता है। उन्होंने गुमला वासियों से अपील की कि वे मच्छरों के पनपने वाली जगहों को नष्ट करें, हर रविवार कूलर साफ करें, गमलों, पुराने टायरों, टूटे-फूटे बर्तनों और छतों पर कबाड़ में पानी जमा न होने दें। साथ ही, पानी के बर्तनों को ढककर रखने, गड्ढों और नालियों की सफाई करने तथा खुद को मच्छरों के काटने से बचाने के उपाय अपनाएं। डॉ. चौधरी ने यह भी बताया कि डेंगू के मच्छर दिन के उजाले, खासकर सुबह और शाम को, ज्यादा सक्रिय होते हैं, इसलिए शरीर को पूरी तरह से ढकने वाले हल्के रंग के कपड़े (फुल स्लीव शर्ट और फुल पैंट) पहनें। दिन में सोते समय भी मच्छरदानी का उपयोग करने और घर से बाहर निकलते समय या घर के अंदर भी मच्छर भगाने वाली क्रीम, स्प्रे या लिक्विड (जैसे ओडोमॉस) का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। डॉ. चौधरी ने डेंगू के लक्षणों को पहचानने का आग्रह करते हुए बताया कि यदि किसी को अचानक तेज बुखार (103°F - 104°F), सिर में तेज दर्द और आंखों के पीछे दर्द, जोड़ों और मांसपेशियों में गंभीर दर्द, जी मिचलाना या उल्टी होना, या त्वचा पर लाल चकत्ते उभर आएं तो इसे हल्के में न लें। उन्होंने एक विशेष चेतावनी भी दी कि बुखार होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के दर्दनिवारक दवाएं (जैसे एस्पिरिन, इबुप्रोफेन या कॉम्बिफ्लेम) बिल्कुल न लें, क्योंकि ये दवाएं शरीर में प्लेटलेट्स कम होने की स्थिति में रक्तस्राव का खतरा बढ़ा सकती हैं। बुखार होने पर केवल पैरासिटामोल लेने और तुरंत नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र या सदर अस्पताल गुमला में संपर्क करने की सलाह दी गई है। उन्होंने गंभीर डेंगू के संकेतों के बारे में भी बताया, जिसमें लगातार उल्टी होना या पेट में तेज दर्द, मसूड़ों या नाक से खून आना, अत्यधिक कमजोरी, सुस्ती या सांस लेने में तकलीफ होना और मल का रंग काला होना शामिल है। डॉ. चौधरी ने आम लोगों से कहा कि घबराएं नहीं, बल्कि सतर्क रहें। सदर अस्पताल और स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में डेंगू की जांच (NS1/IgM) और इलाज की पूरी व्यवस्था उपलब्ध है। उन्होंने अंत में कहा कि 'सजगता और स्वच्छता' से ही डेंगू का बचाव संभव है।1
- एक पोस्ट के माध्यम से हैरानी व्यक्त करते हुए सवाल उठाया गया है कि आखिर क्यों किसी स्थिति को 'मौत का कुआं' बनाकर छोड़ दिया जाता है।1
- लोहरदगा स्थित ललित नारायण स्टेडियम अब नशेड़ियों का अड्डा बन गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, रोजाना बच्चे इस स्टेडियम में अभ्यास करने के लिए आते हैं। हालांकि, रात के समय शराबी लोग यहाँ शराब पीकर बोतलें तोड़कर चले जाते हैं, जिससे बच्चों की सुरक्षा और अभ्यास का माहौल प्रभावित हो रहा है।1
- झारखंड के लातेहार जिले में चंदवा के पास स्थित एक चूल्हा पानी द्वार पूरी तरह से जर्जर अवस्था में है।1
- खूंटी जिले के कर्रा स्थित प्लस टू उच्च विद्यालय द्वारा सोमवार को नशा मुक्ति अभियान के तहत एक जागरूकता प्रभात फेरी का आयोजन किया गया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों और आमजन के बीच नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलाना तथा समाज को नशामुक्त बनाने का संदेश देना था। इस प्रभात फेरी में विद्यालय के सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों ने हाथों में जागरूकता संबंधी तख्तियां और बैनर लेकर विभिन्न नारों के माध्यम से लोगों से नशे से दूर रहने, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और युवा पीढ़ी को नशे की लत से बचाने का आह्वान किया। विद्यालय परिसर से शुरू हुई यह प्रभात फेरी आसपास के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी, जिसकी स्थानीय लोगों ने भी सराहना की।1