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लोहरदगा स्थित ललित नारायण स्टेडियम अब नशेड़ियों का अड्डा बन गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, रोजाना बच्चे इस स्टेडियम में अभ्यास करने के लिए आते हैं। हालांकि, रात के समय शराबी लोग यहाँ शराब पीकर बोतलें तोड़कर चले जाते हैं, जिससे बच्चों की सुरक्षा और अभ्यास का माहौल प्रभावित हो रहा है।
Badri Narayan Sahu
लोहरदगा स्थित ललित नारायण स्टेडियम अब नशेड़ियों का अड्डा बन गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, रोजाना बच्चे इस स्टेडियम में अभ्यास करने के लिए आते हैं। हालांकि, रात के समय शराबी लोग यहाँ शराब पीकर बोतलें तोड़कर चले जाते हैं, जिससे बच्चों की सुरक्षा और अभ्यास का माहौल प्रभावित हो रहा है।
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- एक पोस्ट के माध्यम से हैरानी व्यक्त करते हुए सवाल उठाया गया है कि आखिर क्यों किसी स्थिति को 'मौत का कुआं' बनाकर छोड़ दिया जाता है।1
- लोहरदगा स्थित ललित नारायण स्टेडियम अब नशेड़ियों का अड्डा बन गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, रोजाना बच्चे इस स्टेडियम में अभ्यास करने के लिए आते हैं। हालांकि, रात के समय शराबी लोग यहाँ शराब पीकर बोतलें तोड़कर चले जाते हैं, जिससे बच्चों की सुरक्षा और अभ्यास का माहौल प्रभावित हो रहा है।1
- झारखंड के लातेहार जिले में चंदवा के पास स्थित एक चूल्हा पानी द्वार पूरी तरह से जर्जर अवस्था में है।1
- लातेहार जिले में टोरी-चंदवा एनएच-39 पर बनने वाले फ्लाई ओवरब्रिज के निर्माण में हो रही अत्यधिक देरी से आक्रोशित किसानों और माकपा (मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी) कार्यकर्ताओं ने सोमवार को जिला उपायुक्त (डीसी) से इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगी। माकपा राज्य सचिव प्रकाश विप्लव के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की तस्वीरें लेकर उदयपुरा से समाहरणालय तक 7 किलोमीटर लंबी पदयात्रा की। इस दौरान, उनके पोस्टरों पर स्पष्ट लिखा था कि "शिलान्यास के 5 साल बाद भी काम शुरू नहीं, हमें इच्छा मृत्यु दो।" यह परियोजना मूल रूप से 3 अप्रैल, 2021 को नितिन गडकरी और हेमंत सोरेन द्वारा ऑनलाइन शिलान्यास के साथ शुरू की गई थी, जिसे टोरी आरओबी के नाम से भी जाना जाता है। हालांकि, शिलान्यास के बाद भी, काम अभी तक शुरू नहीं हो सका है, और इसके लिए सात बार निविदाएं जारी की जा चुकी हैं। परियोजना की अनुमानित लागत भी 2021 में ₹43 करोड़ से बढ़कर अब ₹119.71 करोड़ हो गई है। टोरी क्रॉसिंग पर लगातार लगने वाले जाम से किसान और माकपा नेता भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं, जिसके चलते उन्होंने यह चरम कदम उठाया है।1
- लातेहार में पीवीयूएनएल बनहरदी कोयला खनन परियोजना द्वारा आयोजित दो माह के सिलाई प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हो गया है। 15 जून 2026 को हुए इस कार्यक्रम में पीवीयूएनएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री अशोक कुमार सहगल ने 40 प्रशिक्षित महिलाओं को सिलाई मशीनों का वितरण किया। इस पहल का उद्देश्य स्थानीय समुदाय की महिलाओं को स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करना है। इस अवसर पर बनहरदी कोयला खनन परियोजना के महाप्रबंधक श्री निरोद कुमार मलिक, एजीएम (माइनिंग) श्री असीम मिश्रा, एजीएम (एलए/आर एंड आर) श्री आर. बी. सिंह, और एजीएम (इन्फ्रा) श्री सिद्धार्थ शंकर सहित अन्य अधिकारीगण, स्थानीय ग्रामीण और मीडिया प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रत्येक बैच में 20-20 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था, जिसमें कुल 40 प्रशिक्षार्थियों ने सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा किया। कार्यक्रम के दौरान सभी 40 प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए, साथ ही उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली पाँच प्रतिभागियों को स्मृति-चिह्न और शॉल देकर सम्मानित किया गया। मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री अशोक कुमार सहगल ने इस अवसर पर कहा कि पीवीयूएनएल स्थानीय समुदायों के सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह सिलाई प्रशिक्षण और मशीनों का वितरण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनके परिवारों की आजीविका को सुदृढ़ करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। कार्यक्रम का समापन सभी प्रतिभागियों के उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाओं के साथ किया गया।4
- झारखंड के गुमला जिले के सिसई में अत्यधिक बस किराया बढ़ाए जाने को लेकर आदिवासी संगठनों ने कड़ा विरोध जताया है। जनजाति सुरक्षा मंच के प्रखंड अध्यक्ष सोमेश्वर उरांव ने बसों के किराए में मनमानी बढ़ोतरी पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने बताया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में केवल ₹5 से ₹6 तक की वृद्धि हुई है, जबकि बसों का किराया सीधे तौर पर ₹30, ₹40 और ₹50 बढ़ा दिया गया है, जिससे ग्रामीण जनता पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है। उरांव ने इस स्थिति को झारखंड सरकार और प्रशासन की उदासीनता का परिचायक बताया, क्योंकि ग्रामीण जनता पहले से ही महंगाई की मार झेल रही है और किराया बढ़ने से उन्हें और अधिक आर्थिक संकटों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब और किसान निजी वाहनों का खर्च वहन नहीं कर सकते, उनके लिए बसें ही यात्रा का एकमात्र विकल्प हैं। इतना ही नहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रैक्टर से खेतों की जुताई का चार्ज भी ₹1000 प्रति घंटा से बढ़ाकर ₹1200 प्रति घंटा कर दिया गया है, यानी सीधे ₹200 की वृद्धि हुई है, जिसे उन्होंने अन्नदाताओं के साथ अन्याय बताया। आदिवासी नेता सोमेश्वर उरांव ने झारखंड सरकार पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि सरकार की अनदेखी के कारण यहां के किसानों और गरीबों की जीडीपी लगातार गिर रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के '25 साल की युवा झारखंड, समृद्ध व विकसित बन रहा है' के बयान को 'मुंगेरीलाल के हसीन सपने जैसा' बताया। सोमेश्वर उरांव ने झारखंड सरकार, प्रशासन और झारखंड बस ऑनर एसोसिएशन से मांग की है कि सभी जगहों के लिए नई और उचित किराया दरें निर्धारित की जाएं, ताकि आम जनमानस को राहत मिल सके और बस व ट्रैक्टर मालिक मनमानी तरीके से किराया वसूली न कर सकें।2
- लातेहार में स्थानीय मुखिया शशि कुजूर ने उपायुक्त से मुलाकात कर ग्रामीणों की समस्याओं से अवगत कराया, जिसमें जर्जर सड़क के निर्माण की मांग प्रमुख थी। मुखिया शशि कुजूर ने इस संबंध में उपायुक्त को एक ज्ञापन भी सौंपा, जिसमें क्षेत्र की जर्जर सड़क के निर्माण की मांग उठाई गई। उपायुक्त ने शीघ्र सड़क निर्माण कराने का आश्वासन दिया है, जिससे क्षेत्रवासियों में उम्मीद जगी है और वे जल्द निर्माण कार्य शुरू होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।1
- झारखंड में एक ऐसा रेलवे फाटक है जहाँ लोगों को घंटों तक खड़ा रहना पड़ता है, जिससे उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।1