लातेहार में पीवीयूएनएल बनहरदी कोयला खनन परियोजना द्वारा आयोजित दो माह के सिलाई प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हो गया है। 15 जून 2026 को हुए इस कार्यक्रम में पीवीयूएनएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री अशोक कुमार सहगल ने 40 प्रशिक्षित महिलाओं को सिलाई मशीनों का वितरण किया। इस पहल का उद्देश्य स्थानीय समुदाय की महिलाओं को स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करना है। इस अवसर पर बनहरदी कोयला खनन परियोजना के महाप्रबंधक श्री निरोद कुमार मलिक, एजीएम (माइनिंग) श्री असीम मिश्रा, एजीएम (एलए/आर एंड आर) श्री आर. बी. सिंह, और एजीएम (इन्फ्रा) श्री सिद्धार्थ शंकर सहित अन्य अधिकारीगण, स्थानीय ग्रामीण और मीडिया प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रत्येक बैच में 20-20 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था, जिसमें कुल 40 प्रशिक्षार्थियों ने सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा किया। कार्यक्रम के दौरान सभी 40 प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए, साथ ही उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली पाँच प्रतिभागियों को स्मृति-चिह्न और शॉल देकर सम्मानित किया गया। मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री अशोक कुमार सहगल ने इस अवसर पर कहा कि पीवीयूएनएल स्थानीय समुदायों के सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह सिलाई प्रशिक्षण और मशीनों का वितरण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनके परिवारों की आजीविका को सुदृढ़ करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। कार्यक्रम का समापन सभी प्रतिभागियों के उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाओं के साथ किया गया।
लातेहार में पीवीयूएनएल बनहरदी कोयला खनन परियोजना द्वारा आयोजित दो माह के सिलाई प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हो गया है। 15 जून 2026 को हुए इस कार्यक्रम में पीवीयूएनएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री अशोक कुमार सहगल ने 40 प्रशिक्षित महिलाओं को सिलाई मशीनों का वितरण किया। इस पहल का उद्देश्य स्थानीय समुदाय की महिलाओं को स्वरोजगार
और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करना है। इस अवसर पर बनहरदी कोयला खनन परियोजना के महाप्रबंधक श्री निरोद कुमार मलिक, एजीएम (माइनिंग) श्री असीम मिश्रा, एजीएम (एलए/आर एंड आर) श्री आर. बी. सिंह, और एजीएम (इन्फ्रा) श्री सिद्धार्थ शंकर सहित अन्य अधिकारीगण, स्थानीय ग्रामीण और मीडिया प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रत्येक
बैच में 20-20 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था, जिसमें कुल 40 प्रशिक्षार्थियों ने सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा किया। कार्यक्रम के दौरान सभी 40 प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए, साथ ही उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली पाँच प्रतिभागियों को स्मृति-चिह्न और शॉल देकर सम्मानित किया गया। मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री अशोक कुमार सहगल ने इस अवसर पर कहा कि पीवीयूएनएल स्थानीय
समुदायों के सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह सिलाई प्रशिक्षण और मशीनों का वितरण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनके परिवारों की आजीविका को सुदृढ़ करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। कार्यक्रम का समापन सभी प्रतिभागियों के उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाओं के साथ किया गया।
- लातेहार में पीवीयूएनएल बनहरदी कोयला खनन परियोजना द्वारा आयोजित दो माह के सिलाई प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हो गया है। 15 जून 2026 को हुए इस कार्यक्रम में पीवीयूएनएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री अशोक कुमार सहगल ने 40 प्रशिक्षित महिलाओं को सिलाई मशीनों का वितरण किया। इस पहल का उद्देश्य स्थानीय समुदाय की महिलाओं को स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करना है। इस अवसर पर बनहरदी कोयला खनन परियोजना के महाप्रबंधक श्री निरोद कुमार मलिक, एजीएम (माइनिंग) श्री असीम मिश्रा, एजीएम (एलए/आर एंड आर) श्री आर. बी. सिंह, और एजीएम (इन्फ्रा) श्री सिद्धार्थ शंकर सहित अन्य अधिकारीगण, स्थानीय ग्रामीण और मीडिया प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रत्येक बैच में 20-20 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था, जिसमें कुल 40 प्रशिक्षार्थियों ने सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा किया। कार्यक्रम के दौरान सभी 40 प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए, साथ ही उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली पाँच प्रतिभागियों को स्मृति-चिह्न और शॉल देकर सम्मानित किया गया। मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री अशोक कुमार सहगल ने इस अवसर पर कहा कि पीवीयूएनएल स्थानीय समुदायों के सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह सिलाई प्रशिक्षण और मशीनों का वितरण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनके परिवारों की आजीविका को सुदृढ़ करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। कार्यक्रम का समापन सभी प्रतिभागियों के उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाओं के साथ किया गया।4
- लोहरदगा स्थित ललित नारायण स्टेडियम अब नशेड़ियों का अड्डा बन गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, रोजाना बच्चे इस स्टेडियम में अभ्यास करने के लिए आते हैं। हालांकि, रात के समय शराबी लोग यहाँ शराब पीकर बोतलें तोड़कर चले जाते हैं, जिससे बच्चों की सुरक्षा और अभ्यास का माहौल प्रभावित हो रहा है।1
- एक पोस्ट के माध्यम से हैरानी व्यक्त करते हुए सवाल उठाया गया है कि आखिर क्यों किसी स्थिति को 'मौत का कुआं' बनाकर छोड़ दिया जाता है।1
- झारखंड के लातेहार जिले में चंदवा के पास स्थित एक चूल्हा पानी द्वार पूरी तरह से जर्जर अवस्था में है।1
- लातेहार में स्थानीय मुखिया शशि कुजूर ने उपायुक्त से मुलाकात कर ग्रामीणों की समस्याओं से अवगत कराया, जिसमें जर्जर सड़क के निर्माण की मांग प्रमुख थी। मुखिया शशि कुजूर ने इस संबंध में उपायुक्त को एक ज्ञापन भी सौंपा, जिसमें क्षेत्र की जर्जर सड़क के निर्माण की मांग उठाई गई। उपायुक्त ने शीघ्र सड़क निर्माण कराने का आश्वासन दिया है, जिससे क्षेत्रवासियों में उम्मीद जगी है और वे जल्द निर्माण कार्य शुरू होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।1
- लातेहार नगर पंचायत का 'ठंडा पानी' केंद्र अब केवल एक शोपीस बनकर रह गया है, जिससे राहगीरों को पानी नहीं मिल पा रहा है। इस केंद्र के बोर्ड पर ठंडे पानी का वादा किया गया है, लेकिन वहाँ रखे घड़ों में पानी उपलब्ध नहीं है। इस स्थिति ने लातेहार नगर पंचायत की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।1
- लातेहार प्रखंड के अंतर्गत लातेहार रेलवे स्टेशन नवरंग चौक स्थित बाजकुम हनुमान मंदिर ग्राउंड में बाजकुम क्रिकेट क्लब द्वारा आयोजित बाजकुम चैंपियन ट्रॉफी के दूसरे सीजन का उद्घाटन किया गया। इस प्रतियोगिता का पहला मैच महुवामिलन और मननचोटाग के बीच खेला गया, जिसमें महुवामिलन ने जीत दर्ज की। क्रिकेट मैच का शुभारंभ डुरूआ स्कूल के प्रधानाध्यापक चंदन कुमार सिंह ने फीता काटकर किया। इस अवसर पर रणधीर सर, क्लब के अध्यक्ष अनीश कुमार सिंह, उपाध्यक्ष आशीष कु चंद्रवंशी, रोहित राज, सुमित गुप्ता, अंशु कुमार, शुभम् गुप्ता, प्रिंस सिंह, आकाश गिरी, मनीष वर्मा और अन्य लोग उपस्थित थे।1
- करीब 10 साल पहले जिन गांवों में नक्सलियों का भारी दबदबा होता था, वहाँ के ग्रामीण आज भी पत्ता बेचकर ही अपना जीवनयापन कर रहे हैं। यह स्थिति उन पुराने दिनों की याद दिलाती है और यह सवाल उठाती है कि 10 साल पहले इन नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लोग किन परिस्थितियों में अपना जीवन गुजारते थे।1