दिल्ली के बेला एस्टेट में SIR के बाद 729 में से 728 नाम ड्राफ्ट लिस्ट से गायब: राहुल गांधी का ‘वोट चोरी’ का आरोप, चुनाव आयोग की सफाई—घर तोड़ने के बाद ‘शिफ्टेड’ मार्क हुए, फॉर्म-6 से दोबारा नाम जुड़ सकता है स्वतंत्र न्यूज छत्तीसगढ़/नई दिल्ली/रायपुर। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोमवार (28 सितंबर 2026) को दिल्ली के यमुना किनारे स्थित बेला एस्टेट की झुग्गियों का दौरा किया और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस बस्ती में रहने वाले 728 लोगों में से SIR (Special Intensive Revision) के बाद मतदाता सूची में सिर्फ एक नाम बचा है और 727 नाम काट दिए गए। राहुल गांधी ने इसे “वोट चोरी का तरीका” करार दिया। राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा— “यमुना किनारे बेला एस्टेट में 728 लोग रहते हैं। SIR के बाद वोटर लिस्ट में सिर्फ एक नाम बचा—बाकी 727 नाम काट दिए गए। ये लोग दशकों से यहाँ रह रहे हैं। 2024 लोकसभा और 2025 दिल्ली चुनाव में वोट डाल चुके हैं। 2023 में इनके घर तोड़ दिए गए थे, लेकिन ये कहीं नहीं गए, यहीं रह रहे हैं।” उन्होंने एसडीएम से फोन पर बात की और कहा कि “मकान होने या न होने का वोट के अधिकार से कोई रिश्ता नहीं है। CEC ज्ञानेश कुमार खुद कह चुके हैं कि ‘हाउस नंबर 0’ बेघरों के लिए है। फिर भी 727 नाम काट दिए गए।” उन्होंने CEC ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि “ज्ञानेश कुमार जाएंगे, लेकिन जिस सिस्टम ने उनसे ये करवाया, उसका भी हिसाब होगा।” पूर्ण तथ्य क्या कहते हैं? 1. आंकड़े सही हैं, लेकिन ‘कट गए’ का मतलब ड्राफ्ट रोल से बाहर होना है चांदनी चौक विधानसभा क्षेत्र के बूथ पार्ट नंबर 38 (जेजे बेला एस्टेट-विजय घाट) में पहले 729 मतदाता दर्ज थे। 31 अगस्त 2026 को जारी ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल में इनमें से सिर्फ 1 नाम बचा। बाकी 728 नाम ASDD कैटेगरी (Absent, Shifted, Dead, Duplicate) में डाल दिए गए। इनमें से ज्यादातर (लगभग 632) को “permanently shifted” और कुछ को dead या duplicate मार्क किया गया। राहुल गांधी 728/727 का आंकड़ा इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि आधिकारिक रिकॉर्ड 729/728 का है—फर्क मामूली है। 2. घर तोड़े जाने के बाद एड्रेस नहीं मिला दिल्ली चुनाव अधिकारियों की सफाई साफ है। बेला एस्टेट यमुना फ्लडप्लेन (जोन-ओ) पर था। कोर्ट के आदेश पर 2022-23 में झुग्गियां तोड़ी गईं। BLO जब पुराने पते पर गए तो मकान नहीं मिले। इसलिए नाम “शिफ्टेड” कैटेगरी में डाल दिए गए। अधिकारियों का कहना है कि “ordinary resident” का स्टेटस बदल गया था। कुछ रिपोर्टों में यह भी आया कि कुछ स्थानीय अधिकारियों ने “अनअथराइज्ड” कॉलोनी होने का हवाला दिया, लेकिन चुनाव कानून में वोट का अधिकार मकान के “अनअथराइज्ड” होने से नहीं जुड़ा। 3. ये फाइनल डिलीशन नहीं है ड्राफ्ट रोल से नाम गायब होना अंतिम कटौती नहीं है। दावे-आपत्ति की प्रक्रिया चल रही है। पात्र मतदाता फॉर्म-6 भरकर नाम फिर से जुड़वा सकते हैं। बेघर लोगों के लिए “हाउस नंबर 0” का प्रावधान है। दिल्ली मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने भी बेला एस्टेट के निवासियों से फॉर्म-6 भरने की अपील की है। कई निवासी पहले ही फॉर्म जमा कर रहे हैं। 4. निवासियों का पक्ष झुग्गीवासी कहते हैं कि घर टूटने के बाद भी वे पास ही (ज्यादातर गीता कॉलोनी फ्लाईओवर के नीचे या आसपास) रह रहे हैं। BLO ने उनसे एनुमरेशन फॉर्म भी लिए थे, फिर भी नाम ड्राफ्ट में नहीं आए। वे “शिफ्टेड” मार्क को गलत बताते हैं। स्वतंत्र नज़रिया—मुद्दे पर बात SIR का मकसद मतदाता सूची साफ करना है—मृत, शिफ्टेड, डुप्लिकेट नाम हटाना। बेला एस्टेट जैसा केस इसलिए विवादास्पद है क्योंकि एक पूरे बूथ का 99.8% नाम ड्राफ्ट से गायब हो गया। जब घर तोड़े जाएं तो पुराना पता नहीं मिलना स्वाभाविक है, लेकिन अगर लोग उसी इलाके में रह रहे हैं तो “हाउस नंबर 0” या मौजूदा निवास के आधार पर नाम आसानी से जुड़ना चाहिए। राहुल गांधी का “वोट चोरी” वाला आरोप राजनीतिक है। वहीं चुनाव आयोग की प्रक्रिया कानूनी है, लेकिन जमीनी स्तर पर संचार और फॉलो-अप कमजोर साबित हो रहा है। ड्राफ्ट रोल अंतिम नहीं है—इसलिए “727 नाम हमेशा के लिए कट गए” कहना अधूरा सच है। अंतिम सूची 4 दिसंबर के आसपास आने वाली है। स्वतंत्र न्यूज़ छत्तीसगढ़ का संदेश: मतदाता सूची साफ होनी चाहिए, लेकिन गरीब और बेघर लोगों को वोट का अधिकार आसानी से वापस मिलना भी चाहिए। फॉर्म-6 भरने की प्रक्रिया सरल और तेज हो। मुद्दा प्रक्रिया का है, “चोरी” का नहीं—जब तक फाइनल रोल नहीं आता। पूर्ण तथ्य, बिना झुकाव। स्वतंत्र न्यूज़ छत्तीसगढ़—हमेशा आपके साथ। #swatantrashort #swatantraupdates #स्वतंत्रन्यूज़छत्तीसगढ़ #swatantranewschhattisgarh #news #shorts #swatantralive Vinod Kumar Pandey SWATANTRA NEWS CHHATTISGARH
दिल्ली के बेला एस्टेट में SIR के बाद 729 में से 728 नाम ड्राफ्ट लिस्ट से गायब: राहुल गांधी का ‘वोट चोरी’ का आरोप, चुनाव आयोग की सफाई—घर तोड़ने के बाद ‘शिफ्टेड’ मार्क हुए, फॉर्म-6 से दोबारा नाम जुड़ सकता है स्वतंत्र न्यूज छत्तीसगढ़/नई दिल्ली/रायपुर। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोमवार (28 सितंबर 2026) को दिल्ली के यमुना किनारे स्थित बेला एस्टेट की झुग्गियों का दौरा किया और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस बस्ती में रहने वाले 728 लोगों में से SIR (Special Intensive Revision) के बाद मतदाता सूची में सिर्फ एक नाम बचा है और 727 नाम काट दिए गए। राहुल गांधी ने इसे “वोट चोरी का तरीका” करार दिया। राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा— “यमुना किनारे बेला एस्टेट में 728 लोग रहते हैं। SIR के बाद वोटर लिस्ट में सिर्फ एक नाम बचा—बाकी 727 नाम काट दिए गए। ये लोग दशकों से यहाँ रह रहे हैं। 2024 लोकसभा और 2025 दिल्ली चुनाव में वोट डाल चुके हैं। 2023 में इनके घर तोड़ दिए गए थे, लेकिन ये कहीं नहीं गए, यहीं रह रहे हैं।” उन्होंने एसडीएम से फोन पर बात की और कहा कि “मकान होने या न होने का वोट के अधिकार से कोई रिश्ता नहीं है। CEC ज्ञानेश कुमार खुद कह चुके हैं कि ‘हाउस नंबर 0’ बेघरों के लिए है। फिर भी 727 नाम काट दिए गए।” उन्होंने CEC ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि “ज्ञानेश कुमार जाएंगे, लेकिन जिस सिस्टम ने उनसे ये करवाया, उसका भी हिसाब होगा।” पूर्ण तथ्य क्या कहते हैं? 1. आंकड़े सही हैं, लेकिन ‘कट गए’ का मतलब ड्राफ्ट रोल से बाहर होना है चांदनी चौक विधानसभा क्षेत्र के बूथ पार्ट नंबर 38 (जेजे बेला एस्टेट-विजय घाट) में पहले 729 मतदाता दर्ज थे। 31 अगस्त 2026 को जारी ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल में इनमें से सिर्फ 1 नाम बचा। बाकी 728 नाम ASDD कैटेगरी (Absent, Shifted, Dead, Duplicate) में डाल दिए गए। इनमें से ज्यादातर (लगभग 632) को “permanently shifted” और कुछ को dead या duplicate मार्क किया गया। राहुल गांधी 728/727 का आंकड़ा इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि आधिकारिक रिकॉर्ड 729/728 का है—फर्क मामूली है। 2. घर तोड़े जाने के बाद एड्रेस नहीं मिला दिल्ली चुनाव अधिकारियों की सफाई साफ है। बेला एस्टेट यमुना फ्लडप्लेन (जोन-ओ) पर था। कोर्ट के आदेश पर 2022-23 में झुग्गियां तोड़ी गईं। BLO जब पुराने पते पर गए तो मकान नहीं मिले। इसलिए नाम “शिफ्टेड” कैटेगरी में डाल दिए गए। अधिकारियों का कहना है कि “ordinary resident” का स्टेटस बदल गया था। कुछ रिपोर्टों में यह भी आया कि कुछ स्थानीय अधिकारियों ने “अनअथराइज्ड” कॉलोनी होने का हवाला दिया, लेकिन चुनाव कानून में वोट का अधिकार मकान के “अनअथराइज्ड” होने से नहीं जुड़ा। 3. ये फाइनल डिलीशन नहीं है ड्राफ्ट रोल से नाम गायब होना अंतिम कटौती नहीं है। दावे-आपत्ति की प्रक्रिया चल रही है। पात्र मतदाता फॉर्म-6 भरकर नाम फिर से जुड़वा सकते हैं। बेघर लोगों के लिए “हाउस नंबर 0” का प्रावधान है। दिल्ली मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने भी बेला एस्टेट के निवासियों से फॉर्म-6 भरने की अपील की है। कई निवासी पहले ही फॉर्म जमा कर रहे हैं। 4. निवासियों का पक्ष झुग्गीवासी कहते हैं कि घर टूटने के बाद भी वे पास ही (ज्यादातर गीता कॉलोनी फ्लाईओवर के नीचे या आसपास) रह रहे हैं। BLO ने उनसे एनुमरेशन फॉर्म भी लिए थे, फिर भी नाम ड्राफ्ट में नहीं आए। वे “शिफ्टेड” मार्क को गलत बताते हैं। स्वतंत्र नज़रिया—मुद्दे पर बात SIR का मकसद मतदाता सूची साफ करना है—मृत, शिफ्टेड, डुप्लिकेट नाम हटाना। बेला एस्टेट जैसा केस इसलिए विवादास्पद है क्योंकि एक पूरे बूथ का 99.8% नाम ड्राफ्ट से गायब हो गया। जब घर तोड़े जाएं तो पुराना पता नहीं मिलना स्वाभाविक है, लेकिन अगर लोग उसी इलाके में रह रहे हैं तो “हाउस नंबर 0” या मौजूदा निवास के आधार पर नाम आसानी से जुड़ना चाहिए। राहुल गांधी का “वोट चोरी” वाला आरोप राजनीतिक है। वहीं चुनाव आयोग की प्रक्रिया कानूनी है, लेकिन जमीनी स्तर पर संचार और फॉलो-अप कमजोर साबित हो रहा है। ड्राफ्ट रोल अंतिम नहीं है—इसलिए “727 नाम हमेशा के लिए कट गए” कहना अधूरा सच है। अंतिम सूची 4 दिसंबर के आसपास आने वाली है। स्वतंत्र न्यूज़ छत्तीसगढ़ का संदेश: मतदाता सूची साफ होनी चाहिए, लेकिन गरीब और बेघर लोगों को वोट का अधिकार आसानी से वापस मिलना भी चाहिए। फॉर्म-6 भरने की प्रक्रिया सरल और तेज हो। मुद्दा प्रक्रिया का है, “चोरी” का नहीं—जब तक फाइनल रोल नहीं आता। पूर्ण तथ्य, बिना झुकाव। स्वतंत्र न्यूज़ छत्तीसगढ़—हमेशा आपके साथ। #swatantrashort #swatantraupdates #स्वतंत्रन्यूज़छत्तीसगढ़ #swatantranewschhattisgarh #news #shorts #swatantralive Vinod Kumar Pandey SWATANTRA NEWS CHHATTISGARH
- प्रेमानंद महाराज के शिष्य दीपक लोधी की संदिग्ध मौत: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने उठाई गहन जांच की मांग स्वतंत्र न्यूज छत्तीसगढ़/वृंदावन (मथुरा) में संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य दीपक लोधी (उर्फ रसिक दुलारी शरण) की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले में अब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने भी आवाज उठाई है। उन्होंने मामले की गहरी और निष्पक्ष जांच कर पूरी सच्चाई सामने लाने की मांग की है। घटना क्या हुई? 25 सितंबर 2026 को सुबह करीब 10:30-10:36 बजे वृंदावन के बाराह घाट मार्ग स्थित गुरु कृपा कुंज आश्रम की चौथी मंजिल से दीपक लोधी गिर गए। उन्हें गंभीर हालत में निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। दीपक मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के परसवाड़ा गांव के रहने वाले थे। करीब दो साल पहले वे घर छोड़कर वृंदावन आए थे और प्रेमानंद महाराज से दीक्षा लेने के बाद रसिक दुलारी शरण के नाम से आश्रम में रहने लगे थे। पोस्टमॉर्टम और जांच में सामने आई बातें पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार मौत का मुख्य कारण अत्यधिक रक्तस्राव (ब्लीडिंग) बताया गया है। शरीर पर गिरने से आई चोटों के अलावा प्राइवेट पार्ट पर कट के निशान भी मिले। पुलिस को उनके कमरे से खून से सना इलेक्ट्रिक ग्राइंडर (टाइल कटिंग ग्राइंडर) मिला। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल, डायरी और अन्य साक्ष्य कब्जे में लेकर जांच शुरू की है। प्राथमिक तौर पर आत्महत्या का मामला बताया जा रहा है, लेकिन सभी पहलुओं की जांच जारी है। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का बयान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि कमरे से इलेक्ट्रिक ग्राइंडर मिलने और अंग कटने जैसी बातें सामने आने के बाद इसे केवल सामान्य गिरना या धक्का लगना नहीं माना जा सकता। इसके पीछे कोई गंभीर वजह हो सकती है। उन्होंने गहरी जांच कर पूरी सच्चाई सामने लाने की मांग की। परिजनों की मांग मृतक के परिवार (जबलपुर से) ने मामले को संदिग्ध बताते हुए निष्पक्ष जांच और सीबीआई जांच की मांग की है। परिजनों का कहना है कि दीपक नशे आदि की कोई आदत नहीं रखते थे और धार्मिक स्वभाव के थे। वे पिछले करीब दो साल से परिवार से मिलने या फोन पर बात करने से भी दूर रहे थे। पुलिस की स्थिति मथुरा पुलिस (सीओ संदीप कुमार) ने बताया कि सीसीटीवी में गिरने का दृश्य दिखता है। सभी साक्ष्य फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं। आत्महत्या या अन्य कारण, दोनों पहलुओं की जांच चल रही है। स्वतंत्र न्यूज़ छत्तीसगढ़ की टिप्पणी: यह मामला सिर्फ एक मौत का नहीं, बल्कि आश्रम व्यवस्था, शिष्यों की मानसिक स्थिति, सुरक्षा और जांच की पारदर्शिता से जुड़े बड़े सवाल खड़े करता है। पूर्ण तथ्य सामने आने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना सही नहीं होगा। हम इस मामले की निरंतर निगरानी रखेंगे और अपडेट देते रहेंगे। स्रोत: विभिन्न विश्वसनीय समाचार रिपोर्ट्स (एटीवी भारत, आज तक, नवभारत टाइम्स, टीवी9 आदि) और पुलिस बयान पर आधारित। मुद्दों पर बात, स्वतंत्रता के साथ स्वतंत्र न्यूज़ छत्तीसगढ़ #swatantrashort #swatantraupdates #स्वतंत्रन्यूज़छत्तीसगढ़ #swatantranewschhattisgarh #news #shorts #swatantralive Vinod Kumar Pandey SWATANTRA NEWS CHHATTISGARH1
- रसमडा में घर की अलमारी से सोने के आभूषण चोरी करने वाला आरोपी गिरफ्तार, चोरी की संपत्ति बरामद रसमडा में घर की अलमारी से सोने के आभूषण चोरी करने वाला आरोपी गिरफ्तार, चोरी की संपत्ति बरामद ▪️ *रसमडा निवासी प्रार्थी के घर की अलमारी से सोने के आभूषण चोरी होने की रिपोर्ट पर अंजोरा चौकी पुलिस ने अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की।* ▪️ *विवेचना के दौरान संदेही पी. विकास राव को हिरासत में लेकर पूछताछ करने पर उसके द्वारा चोरी की घटना स्वीकार की गई।* ▪️ *आरोपी द्वारा चोरी किए गए सोने के आभूषण अपने घर में छिपाकर रखना बताया गया, जिन्हें पुलिस टीम द्वारा बरामद किया गया।* ▪️ *पुलिस ने आरोपी पी. विकास राव को दिनांक 27.09.2026 को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमाण्ड पर माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया।* ▪️ *प्रकरण में अपराध क्रमांक 845/2026 धारा 305(क) BNS के तहत वैधानिक कार्यवाही की गई है।* मुख्य बिंदु दिनांक 25.09.2026 को रसमदा निवासी सरोज निषाद द्वारा घर की अलमारी से सोने के आभूषण चोरी होने की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। अंजोरा चौकी पुलिस द्वारा त्वरित विवेचना करते हुए संदेही को हिरासत में लेकर चोरी की संपत्ति बरामद की गई तथा आरोपी को न्यायिक रिमाण्ड पर भेजा गया। संक्षिप्त विवरण दिनांक 25.09.2026 को प्रार्थी सरोज निषाद, उम्र 38 वर्ष, निवासी रसमडा द्वारा रिपोर्ट दर्ज कराई गई कि उनके निवास स्थान की अलमारी से अज्ञात व्यक्ति द्वारा सोने की दो ईयरिंग एवं सोने की एक ठूसी माला चोरी कर ली गई है। रिपोर्ट पर अपराध क्रमांक 845/2026, धारा 305(क) BNS पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। विवेचना के दौरान अंजोरा चौकी पुलिस द्वारा संदेही पी. विकास राव, उम्र 30 वर्ष, निवासी रसमडा को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पूछताछ में आरोपी द्वारा चोरी की घटना स्वीकार करते हुए चोरी किए गए आभूषण अपने घर में छिपाकर रखना बताया गया। आरोपी के घर से चोरी किए गए सोने के आभूषण बरामद किए गए। आरोपी को दिनांक 27.09.2026 को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमाण्ड पर माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। मॉडस ऑपरेंडी (अपराध करने का तरीका) आरोपी द्वारा प्रार्थी के निवास स्थान की अलमारी से सोने के आभूषण चोरी कर उन्हें अपने घर में छिपाकर रखा गया था। घटना स्थल रसमडा, चौकी अंजोरा, थाना पुलगांव, जिला दुर्ग। आरोपी का नाम 1. पी. विकास राव, उम्र 30 वर्ष, निवासी रसमदा, चौकी अंजोरा, थाना पुलगांव, जिला दुर्ग। जप्त सामग्री 1. सोने की 02 नग ईयरिंग। 2. सोने की 01 नग ठूसी माला। सराहनीय कार्य उक्त कार्यवाही में चौकी अंजोरा में पदस्थ अधिकारी एवं कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। दुर्ग पुलिस की अपील दुर्ग पुलिस आम नागरिकों से अपील करती है कि घर में रखे मूल्यवान आभूषण एवं अन्य संपत्ति की सुरक्षा के लिए आवश्यक सावधानी बरतें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल निकटतम पुलिस थाना अथवा पुलिस को दें। —0000—2
- शिवसेना मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला दहन कर पद से बर्खास्त किए जाने की मांग को लेकर महामहिम राष्ट्रपति भारत सरकार नई दिल्ली के नाम से जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा शिवसेना मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला दहन कर पद से बर्खास्त किए जाने की मांग को लेकर महामहिम राष्ट्रपति भारत सरकार नई दिल्ली के नाम से जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा बेमेतरा....शिवसेना (U.B.T.) पार्टी के छत्तीसगढ़ प्रदेश महासचिव दाऊ राम चौहान ने कहा कि हम, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) छत्तीसगढ़ इकाई के प्रतिनिधि, इस ज्ञापन के माध्यम से देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता, गरिमा और संविधान की रक्षा को लेकर अपनी अत्यंत गंभीर चिंता और रोष प्रकट करने के लिए उपस्थित हुए हैं। भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) देश के लोकतंत्र का वह स्तंभ है जिस पर निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी चुनाव कराने की सर्वोच्च जिम्मेदारी है। परंतु, अत्यंत खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि वर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल के दौरान चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। प्रमुख बिंदु एवं आपत्तियां: निष्पक्षता का अभाव: चुनाव आयोग की कार्यशैली से यह प्रतीत होता है कि संस्था शासक दल के दबाव में कार्य कर रही है, जिससे निष्पक्ष चुनावों पर संदेह उत्पन्न होता है। संवैधानिक मर्यादा का हनन: निष्पक्ष चुनाव कराना संविधान की मूल भावना है, किंतु वर्तमान नेतृत्व के तहत चुनाव आयोग ने कई स्तरों पर अपनी संवैधानिक गरिमा और तटस्थता से समझौता किया है। कार्रवाई में दोहरा मापदंड: आदर्श आचार संहिता और चुनावी नियमों के उल्लंघन के मामलों में निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय एकपक्षीय रुख अपनाया गया है, जो लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है। चौहान ने बताया कि यह प्रदेश प्रमुख डॉ. आनंद मल्होत्रा के आदेशन अनुसार किया गया आगे चौहान ने कहा कि हमारी मांग: उपरोक्त गंभीर परिस्थितियों और देश के करोड़ों नागरिकों का निर्वाचन आयोग पर से विश्वास डगमगाने के कारण, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) छत्तीसगढ़ इकाई पुरजोर मांग करती है कि: 1. मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार को तत्काल प्रभाव से उनके पद से बर्खास्त किया जाए। 2. चुनाव आयोग की स्वायत्तता और निष्पक्षता को पुनः स्थापित करने के लिए एक पारदर्शी और स्वतंत्र जांच कराई जाए। हमें पूर्ण विश्वास है कि आप देश के संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए इस अतिसंवेदनशील विषय पर त्वरित और उचित कदम उठाएंगे उक्त कार्यक्रम में प्रदेश महासचिव दाऊ राम चौहान, जिला सचिव कुलदीप आडील, ग्राम अध्यक्ष हरीश डहरिया, ग्राम सचिव मुन्ना बघेल, सूरज कोशले, संजय आडील, मुकेश बघेल, मनोज बघेल, आदि शिवसैनिक उपस्थित रहा !4
- 28 सितंबर को रायपुर में निकलेगी भव्य गणेश झांकी ++ Comment में बताओ कौन-कौन आ रहे हो ? 28 सितंबर को रायपुर में निकलेगी भव्य गणेश झांकी ++ Comment में बताओ कौन-कौन आ रहे हो ?1
- भोथीडीह में भाजपा कार्यकर्ताओं ने सुनी प्रधानमंत्री मोदी के ‘मन की बात चंपारण/नवापारा-राजिम। भारतीय जनता पार्टी चंपारण-तामासिवनी मंडल द्वारा बूथ क्रमांक 87 ग्राम भोथीडीह में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 138वें संस्करण का सामूहिक श्रवण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान भाजपा पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों एवं कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री के संबोधन को ध्यानपूर्वक सुना। कार्यक्रम में जनपद पंचायत अभनपुर के सभापति ब्रह्मानंद साहू, जिला कार्यकारिणी सदस्य गोविंद नारायण साहू, मंडल महामंत्री आशाराम साहू एवं खिलेंद्र साहू, सोशल मीडिया प्रभारी रूपेश निर्मलकर, सहप्रभारी रीवन लाल यादव, कार्यालय प्रभारी बलराम साहू, युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष नीलकंठ निर्मलकर, उपाध्यक्ष माखन लाल साहू एवं महामंत्री रविकांत तारक उपस्थित रहे। इसी क्रम में किसान मोर्चा मंडल अध्यक्ष लीलू राम साहू, महामंत्री परस राम साहू, ओबीसी मोर्चा मंडल महामंत्री शोभाराम साहू, महिला मोर्चा मंडल अध्यक्ष कविता साहू, उपाध्यक्ष रोशनी साहू, प्रचार-प्रसार मंत्री दुर्गा लहरी सहित विशाखा साहू, भारती मानिकपुरी एवं हीरा साहू भी कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम में महावीर साहू, धनेश कुमार साहू, बेनीराम साहू, अरुण कुमार साहू, लूरचंद साहू सहित बूथ अध्यक्ष मोहन लाल साहू, तोष राम साहू, नामेश्वर तारक एवं वरुण कुमार साहू समेत बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ताओं की उपस्थिति रही। कार्यकर्ताओं ने कहा कि ‘मन की बात’ के माध्यम से प्रधानमंत्री देशवासियों से विभिन्न विषयों पर संवाद करते हैं, जिससे समाज के अलग-अलग वर्गों के कार्यों एवं उपलब्धियों को जानने का अवसर मिलता है। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित कार्यकर्ताओं ने संगठनात्मक गतिविधियों को मजबूत करने और जनसेवा के कार्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।1
- चाकू दिखाकर लोगों को डराने वाले दो आरोपी गिरफ्तार, जेल भेजे गए केसीजी जिले के छुईखदान थाना क्षेत्र में आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई छुईखदान, 28 सितंबर 2026। छुईखदान पुलिस ने चाकू दिखाकर लोगों को डराने-धमकाने और दहशत फैलाने के मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने दोनों के कब्जे से स्टील के चाकू जब्त कर आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई की। पुलिस के अनुसार, आरोपी विक्रम दास मानिकपुरी शासकीय अस्पताल के सामने आने-जाने वाले लोगों को चाकू दिखाकर डरा-धमका रहा था। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और उसके कब्जे से एक स्टील का चाकू जब्त किया। आरोपी के खिलाफ अपराध क्रमांक 362/2026, धारा 25, 27 आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई की गई। इसी तरह बिरेन्द्र नेताम छुईखदान के प्रतिक्षालय के पास चाकू दिखाकर लोगों में दहशत फैला रहा था। पुलिस ने उसके कब्जे से एक स्टील का बटनदार चाकू जब्त किया। उसके खिलाफ अपराध क्रमांक 363/2026, धारा 25, 27 आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई की गई। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेएमएफसी न्यायालय छुईखदान में पेश किया गया, जहां से न्यायालय के आदेश पर उन्हें उपजेल सलोनी भेज दिया गया। कार्रवाई में छुईखदान पुलिस स्टाफ का सराहनीय योगदान रहा।2
- पंडरिया विधानसभा के धर्मगढ़ सोसाइटी में प्राधिकृत समिति प्रबंधक ललित सेंगर सोसाइटी में ही बैठकर जाम झलकते हुए नजर आये.. पंडरिया विधानसभा के धर्मगढ़ सोसाइटी में प्राधिकृत समिति प्रबंधक ललित सेंगर सोसाइटी में ही बैठकर जाम झलकते हुए नजर आये..1
- सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: TMC के नाम और ‘फूल-घास’ सिंबल विवाद पर चुनाव आयोग 3 महीने में फैसला करे स्वतंत्र न्यूज छत्तीसगढ़/नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (28 सितंबर 2026) को ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और उसके आरक्षित चुनाव चिह्न ‘फूल और घास’ (Flowers and Grass) को लेकर दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच चल रहे विवाद पर चुनाव आयोग को स्पष्ट समय-सीमा दे दी है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने निर्देश दिया कि दोनों पक्ष अगले 4 हफ्तों के अंदर अपनी दलीलें, दस्तावेज और अतिरिक्त हलफनामे जमा कर लें। इसके बाद चुनाव आयोग 3 महीने के भीतर अंतिम फैसला करे। यानी कुल प्रक्रिया लगभग चार महीने में पूरी होनी चाहिए। कोर्ट ने साफ कहा कि यह 3 महीने की समय-सीमा दलीलें पूरी होने के बाद शुरू होगी। चुनाव आयोग ने 6 महीने का समय मांगा था, लेकिन कोर्ट ने इसे पर्याप्त नहीं माना और कहा— “तीन महीने काफी हैं।” जरूरत पड़ने पर आयोग दोबारा कोर्ट आ सकता है। क्या है विवाद? पार्टी के अंदर दो गुट सक्रिय हैं— एक ममता बनर्जी के नेतृत्व में और दूसरा बागी गुट (सूत्रों में अरुप रॉय/रितब्रत बनर्जी गुट का जिक्र)। दोनों ही खुद को असली TMC बता रहे हैं। 17 सितंबर 2026 को चुनाव आयोग ने अंतरिम आदेश में दोनों गुटों को मूल नाम ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ और आरक्षित चिह्न ‘फूल और घास’ इस्तेमाल करने से रोक दिया था। उपचुनावों के लिए अस्थायी व्यवस्था की गई: ममता गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चिह्न मिला। बागी गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चिह्न मिला। ये दोनों व्यवस्थाएं केवल अंतरिम हैं। अंतिम फैसला चुनाव चिह्न (आरक्षण और आबंटन) आदेश 1968 के पैरा 15 के तहत आयोग को करना है। ममता बनर्जी ने आयोग के इस अंतरिम फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। कोर्ट ने किसी भी पक्ष के पक्ष में राय नहीं दी और कहा कि सभी दलीलें आयोग के सामने खुली रहेंगी। स्वतंत्र न्यूज छत्तीसगढ़ का नजरिया यह मामला सिर्फ पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं है। पार्टी के नाम और चिह्न का विवाद लोकतंत्र की प्रक्रिया पर असर डालता है। सुप्रीम कोर्ट ने समय-सीमा तय करके दोनों पक्षों और आयोग को जवाबदेही दी है। अब देखना होगा कि दोनों गुट 4 हफ्तों में अपनी दलीलें कितनी मजबूती से पेश करते हैं और आयोग कितनी निष्पक्षता से फैसला करता है। स्वतंत्र न्यूज छत्तीसगढ़ हमेशा पूर्ण तथ्यों और स्वतंत्रता के साथ आपके साथ। (स्रोत: सुप्रीम कोर्ट का आदेश, चुनाव आयोग के अंतरिम निर्देश और विश्वसनीय समाचार रिपोर्ट्स) #swatantrashort #swatantraupdates #स्वतंत्रन्यूज़छत्तीसगढ़ #swatantranewschhattisgarh #news #shorts #swatantralive Vinod Kumar Pandey SWATANTRA NEWS CHHATTISGARH1