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बलिया में सिस्टम की लाचारी: एक पैर से 400 मीटर पैदल चलकर स्कूल जाने को मजबूर 7 साल की रागिनी बलिया के दिघेड़ा ग्राम सभा (रानीपुर गांव) की रहने वाली 7 वर्षीय रागिनी कक्षा एक की छात्रा है। 6 महीने की उम्र में एक सड़क हादसे में उसका एक पैर हमेशा के लिए खराब हो गया था। आर्थिक तंगी के कारण परिवार कृत्रिम पैर (आर्टिफिशियल लेग) लगवाने में असमर्थ है। तमाम दावों के बावजूद स्थानीय प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता का आलम यह है कि रागिनी को अब तक एक ट्राईसाइकिल भी नसीब नहीं हुई है। हर दिन वह अपने एक पैर के सहारे ही 400 मीटर की दूरी तय करके स्कूल जाने को मजबूर है।

18 hrs ago
user_ABHISHEK SINGH
ABHISHEK SINGH
Teacher जयसिंहपुर, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश•
18 hrs ago

बलिया में सिस्टम की लाचारी: एक पैर से 400 मीटर पैदल चलकर स्कूल जाने को मजबूर 7 साल की रागिनी बलिया के दिघेड़ा ग्राम सभा (रानीपुर गांव) की रहने वाली 7 वर्षीय रागिनी कक्षा एक की छात्रा है। 6 महीने की उम्र में एक सड़क हादसे में उसका एक पैर हमेशा के लिए खराब हो गया था। आर्थिक तंगी के कारण परिवार कृत्रिम पैर (आर्टिफिशियल लेग) लगवाने में असमर्थ है। तमाम दावों के बावजूद स्थानीय प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता का आलम यह है कि रागिनी को अब तक एक ट्राईसाइकिल भी नसीब नहीं हुई है। हर दिन वह अपने एक पैर के सहारे ही 400 मीटर की दूरी तय करके स्कूल जाने को मजबूर है।

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  • सुल्तानपुर के हयातनगर में जर्जर सड़क से लोग परेशान: शहीद मान सिंह मार्ग पर गड्ढे, अंत्येष्टि स्थल जाने वाली सड़क भी बनी तालाब सुल्तानपुर के गोसाईंगंज थाना क्षेत्र के हयातनगर में विकास का काम रुका हुआ है। यहां हाईवे से 3.5 किलोमीटर लंबे शहीद मान सिंह मार्ग पर कई गड्ढे हैं। बारिश में पानी भरने से यह सड़क तालाब जैसी हो जाती है। इसके अलावा, महादेवपुर चौराहा से हयातनगर, बीड़ी मधुबन मार्ग जो अंत्येष्टि स्थल और गोमती नदी के किनारे तक जाने वाला तीन किलोमीटर लंबा रास्ता भी गड्ढों से भरा है। शहीद मान सिंह के गेट से दड़ियो तक जाने वाला यह रास्ता पूरी तरह खराब हो गया है। बारिश के दिनों में रास्ते पर पानी भर जाता है और कीचड़ फैलने से पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। स्थानीय निवासियों ने प्रशासनिक अधिकारियों, सचिव और अन्य जिम्मेदार लोगों से कई बार शिकायत की है। अधिकारी कई बार फोटो खिंचवाने और जांच के लिए आए, लेकिन सड़क बनाने का कोई काम शुरू नहीं हुआ। स्थानीय ग्रामीण परमात्मा शर्मा ने बताया कि जब से बरसात शुरू हुई है, तब से सड़क पर चलना मुश्किल हो गया है। कोई उनकी बात सुनने वाला नहीं है। सचिव आए, फोटो लेकर गए, लेकिन उसके बाद क्या हुआ, कुछ पता नहीं चला। उन्होंने बताया कि यह सड़क मान सिंह के गेट से दड़ियो तक जाती है और इसकी हालत बहुत खराब है। कक्षा 8 के छात्र फैज़ खान ने कहा कि यह हयातनगर का रोड है जो दड़ियो तक जाता है। सड़क की हालत इतनी खराब है कि कोई आसानी से आ-जा नहीं पाता। कई बार शिकायत हुई लेकिन कोई इसे बनवा नहीं रहा है। बारिश के मौसम में बहुत ज्यादा परेशानी होती है। एक अन्य स्थानीय निवासी ने बताया कि रास्ते में पानी भरा रहता है, जिससे आना-जाना बंद हो जाता है। यह समस्या लंबे समय से है, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई हल नहीं मिल रहा है। सड़क न बनने से स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि जल्द से जल्द इस सड़क का निर्माण कराया जाए ताकि लोगों को इस समस्या से राहत मिल सके।
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    सुल्तानपुर के हयातनगर में जर्जर सड़क से लोग परेशान: शहीद मान सिंह मार्ग पर गड्ढे, अंत्येष्टि स्थल जाने वाली सड़क भी बनी तालाब
सुल्तानपुर के गोसाईंगंज थाना क्षेत्र के हयातनगर में विकास का काम रुका हुआ है। यहां हाईवे से 3.5 किलोमीटर लंबे शहीद मान सिंह मार्ग पर कई गड्ढे हैं। बारिश में पानी भरने से यह सड़क तालाब जैसी हो जाती है। इसके अलावा, महादेवपुर चौराहा से हयातनगर, बीड़ी मधुबन मार्ग जो अंत्येष्टि स्थल और गोमती नदी के किनारे तक जाने वाला तीन किलोमीटर लंबा रास्ता भी गड्ढों से भरा है।
शहीद मान सिंह के गेट से दड़ियो तक जाने वाला यह रास्ता पूरी तरह खराब हो गया है। बारिश के दिनों में रास्ते पर पानी भर जाता है और कीचड़ फैलने से पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है।
स्थानीय निवासियों ने प्रशासनिक अधिकारियों, सचिव और अन्य जिम्मेदार लोगों से कई बार शिकायत की है। अधिकारी कई बार फोटो खिंचवाने और जांच के लिए आए, लेकिन सड़क बनाने का कोई काम शुरू नहीं हुआ।
स्थानीय ग्रामीण परमात्मा शर्मा ने बताया कि जब से बरसात शुरू हुई है, तब से सड़क पर चलना मुश्किल हो गया है। कोई उनकी बात सुनने वाला नहीं है। सचिव आए, फोटो लेकर गए, लेकिन उसके बाद क्या हुआ, कुछ पता नहीं चला। उन्होंने बताया कि यह सड़क मान सिंह के गेट से दड़ियो तक जाती है और इसकी हालत बहुत खराब है।
कक्षा 8 के छात्र फैज़ खान ने कहा कि यह हयातनगर का रोड है जो दड़ियो तक जाता है। सड़क की हालत इतनी खराब है कि कोई आसानी से आ-जा नहीं पाता। कई बार शिकायत हुई लेकिन कोई इसे बनवा नहीं रहा है। बारिश के मौसम में बहुत ज्यादा परेशानी होती है।
एक अन्य स्थानीय निवासी ने बताया कि रास्ते में पानी भरा रहता है, जिससे आना-जाना बंद हो जाता है। यह समस्या लंबे समय से है, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई हल नहीं मिल रहा है। सड़क न बनने से स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि जल्द से जल्द इस सड़क का निर्माण कराया जाए ताकि लोगों को इस समस्या से राहत मिल सके।
    user_BREAKINGNEWS
    BREAKINGNEWS
    सुल्तानपुर, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश•
    12 hrs ago
  • अंबेडकरनगर के शिक्षक राम मिलन गुप्ता को राज्य पुरस्कार | 61 शिक्षकों में तीसरा स्थान अंबेडकरनगर के कंपोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय नसीरपुर छितौना के सहायक अध्यापक राम मिलन गुप्ता का चयन राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए हुआ है। प्रदेश स्तर पर चयनित 61 उत्कृष्ट शिक्षकों में उन्हें तीसरा स्थान मिला है। राम मिलन गुप्ता ने करीब 23 वर्षों के सेवाकाल में विद्यार्थियों की पढ़ाई के साथ-साथ खेल प्रतिभाओं को भी निखारा। उनके मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने राज्य स्तरीय जिम्नास्टिक और हॉकी प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन किया। वहीं 100 से अधिक बच्चों का चयन नवोदय विद्यालय के लिए हुआ है। शिक्षक दिवस पर उन्हें सम्मानित किया जाएगा। अंबेडकरनगर की स्थानीय और महत्वपूर्ण खबरों के लिए चैनल को Subscribe करें। #Ambedkarnagar #RamMilanGupta #TeacherAward #UPNews #AmbedkarnagarNews
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    अंबेडकरनगर के शिक्षक राम मिलन गुप्ता को राज्य पुरस्कार | 61 शिक्षकों में तीसरा स्थान
अंबेडकरनगर के कंपोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय नसीरपुर छितौना के सहायक अध्यापक राम मिलन गुप्ता का चयन राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए हुआ है। प्रदेश स्तर पर चयनित 61 उत्कृष्ट शिक्षकों में उन्हें तीसरा स्थान मिला है।
राम मिलन गुप्ता ने करीब 23 वर्षों के सेवाकाल में विद्यार्थियों की पढ़ाई के साथ-साथ खेल प्रतिभाओं को भी निखारा। उनके मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने राज्य स्तरीय जिम्नास्टिक और हॉकी प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन किया। वहीं 100 से अधिक बच्चों का चयन नवोदय विद्यालय के लिए हुआ है।
शिक्षक दिवस पर उन्हें सम्मानित किया जाएगा।
अंबेडकरनगर की स्थानीय और महत्वपूर्ण खबरों के लिए चैनल को Subscribe करें।
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    user_APDP NEWS
    APDP NEWS
    पत्रकार Akbarpur, Ambedkar Nagar•
    18 hrs ago
  • आराध्या श्री फाउंडेशन ने महुंली गांव जिला प्रतापगढ निवासी अमन के सहयोग हेतु बढ़ाया हाथ। आराध्या श्री फाउंडेशन ने महुंली गांव प्रतापगढ़ निवासी अमन की मदद के लिए बढ़ाया हाथ। आराध्या श्री फाउंडेशन ने कल मंगलवार अमन श्रीवास्तव के गांव महुंली जिला प्रतापगढ पहुंचकर मानवीय संवेदना के साथ उनको आर्थिक मदद व घरेलू खाद्य सामग्री प्रदान किया । जिसमें कायस्थ समाज अम्बेडकरनगर का भी सहयोग रहा। प्रतापगढ़ मंहुली गांव में बीते 6 अगस्त 2026 को एक जर्जर मकान की छत गिरने से अमन के परिवार से छह सदस्यों की दबकर मौत हो गई थी। इस हृदय विदारक भयावह खबर के बाद आराध्या श्री फाउंडेशन के सदस्यों ने कल महुंली गांव पहुंचकर मानवीय संवेदना के साथ मदद भरी हाथ बढ़ाया। अजय श्रीवास्तव अध्यक्ष आराध्या श्री फाउंडेशन ने बताया कि बीते 14 अगस्त से फाउंडेशन ने लोगों से मानवीय संवेदना के साथ सहयोग मांगा था।इस बीच सभी के साथ, सहयोग मदद से उक्त कार्य सम्पन्न किया गया। फाउंडेशन लगातार सड़क सुरक्षा, खेल स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण व अन्य क्षेत्रों में कार्य कर रहा है । इस अवसर पर ललित मोहन श्रीवास्तव अध्यक्ष कायस्थ समाज अम्बेडकरनगर,दिनेश श्रीवास्तव, प्रशान्त श्रीवास्तव,अंकुर, विवेक ,राहुल ,अनिल मौजूद रहे।
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    आराध्या श्री फाउंडेशन ने महुंली गांव जिला प्रतापगढ निवासी अमन के सहयोग हेतु बढ़ाया हाथ।
आराध्या श्री फाउंडेशन ने महुंली गांव प्रतापगढ़ निवासी अमन की मदद के लिए बढ़ाया हाथ।
आराध्या श्री फाउंडेशन ने कल मंगलवार अमन श्रीवास्तव के गांव महुंली जिला प्रतापगढ पहुंचकर मानवीय संवेदना के साथ उनको आर्थिक मदद व घरेलू खाद्य सामग्री प्रदान किया । जिसमें कायस्थ समाज अम्बेडकरनगर का भी सहयोग रहा। प्रतापगढ़ मंहुली गांव में बीते 6 अगस्त 2026 को एक जर्जर मकान की छत गिरने से अमन के परिवार से छह सदस्यों की दबकर मौत हो गई थी। इस हृदय विदारक भयावह खबर के बाद आराध्या श्री फाउंडेशन के सदस्यों ने कल महुंली गांव पहुंचकर मानवीय संवेदना के साथ मदद भरी हाथ बढ़ाया।
अजय श्रीवास्तव अध्यक्ष आराध्या श्री फाउंडेशन ने बताया कि बीते 14 अगस्त से फाउंडेशन ने लोगों से मानवीय संवेदना के साथ सहयोग मांगा था।इस बीच सभी के साथ, सहयोग मदद से उक्त कार्य सम्पन्न किया गया। फाउंडेशन लगातार सड़क सुरक्षा, खेल स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण व अन्य क्षेत्रों में कार्य कर रहा है । इस अवसर पर ललित मोहन श्रीवास्तव  अध्यक्ष कायस्थ समाज अम्बेडकरनगर,दिनेश श्रीवास्तव, प्रशान्त श्रीवास्तव,अंकुर, विवेक ,राहुल ,अनिल मौजूद रहे।
    user_अजय कुमार श्रीवास्तव
    अजय कुमार श्रीवास्तव
    Yoga instructor अकबरपुर, अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश•
    19 hrs ago
  • *लाइब्रेरी में पढ़ाई या सिर्फ फोटोशूट?* *बसखारी में ‘दिखावे’ के संचालन का आरोप, पढ़ने वालों की जगह अनपढ़ों को बैठाकर खिंचवाई जा रही तस्वीरें*! *अम्बेडकरनगर/बसखारी।* सरकार की मंशा गांव-गांव में लाइब्रेरी स्थापित कर युवाओं और विद्यार्थियों को बेहतर अध्ययन का माहौल उपलब्ध कराने की है, ताकि ग्रामीण क्षेत्र के छात्र-छात्राएं प्रतियोगी परीक्षाओं समेत अपनी पढ़ाई में आगे बढ़ सकें। लेकिन विकासखंड बसखारी में लाइब्रेरी संचालन को लेकर सामने आ रहे आरोप इस पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ लाइब्रेरियों में वास्तविक रूप से पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या बेहद कम है, लेकिन जब अधिकारियों या अन्य जिम्मेदारों को फोटो भेजने की जरूरत पड़ती है तो आसपास के लोगों को पकड़-पकड़कर लाइब्रेरी में बैठाया जाता है और उनकी तस्वीरें खींचकर यह दिखाने का प्रयास किया जाता है कि लाइब्रेरी में नियमित रूप से विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं। सबसे गंभीर आरोप तो यह है कि कुछ स्थानों पर ऐसे लोगों को भी फोटो के लिए बैठाए जाने की बात सामने आ रही है, जिन्हें ठीक से पढ़ना-लिखना तक नहीं आता। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर लाइब्रेरी का संचालन विद्यार्थियों के भविष्य के लिए हो रहा है या सिर्फ कागजों और तस्वीरों में व्यवस्था को सक्रिय दिखाने के लिए? फोटो खिंची, जिम्मेदारी पूरी? लोगों का कहना है कि कई जगह लाइब्रेरी में किताबें, फर्नीचर और अन्य व्यवस्थाएं तो दिखाई देती हैं, लेकिन नियमित पाठक और अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों की वास्तविक स्थिति की जांच किए जाने की जरूरत है। आरोप है कि निरीक्षण या फोटो भेजने के समय कुछ लोगों को बुलाकर बैठा दिया जाता है और तस्वीरें खींचकर रिकॉर्ड पूरा कर दिया जाता है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या लाइब्रेरी का उद्देश्य सिर्फ फोटो खिंचवाना है या वास्तव में गांव के युवाओं को पढ़ने का अवसर देना? प्रधान और जिम्मेदारों की भूमिका पर भी सवाल स्थानीय स्तर पर लाइब्रेरी संचालन में ग्राम पंचायत और संबंधित जिम्मेदारों की भूमिका भी सवालों के घेरे में बताई जा रही है। यदि वास्तव में फोटोशूट के लिए लोगों को जबरन बैठाया जा रहा है तो यह न केवल सरकारी योजना की मंशा के विपरीत होगा, बल्कि उन विद्यार्थियों के साथ भी अन्याय होगा जिनके भविष्य को बेहतर बनाने के नाम पर सरकारी धन खर्च किया जा रहा है। उज्ज्वल भविष्य की कामना करने वाले जिम्मेदारों को यदि लाइब्रेरी सिर्फ तस्वीरों में चलानी है तो फिर उन तस्वीरों का ‘इनाम’ आखिर किसे दिया जाना चाहिए? यह सवाल अब ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। जांच हुई तो खुल सकती है ‘फोटोशूट वाली लाइब्रेरी’ की हकीकत जरूरत है कि विकासखंड बसखारी की लाइब्रेरियों का अचानक और बिना सूचना के भौतिक सत्यापन कराया जाए। लाइब्रेरी में मौजूद पाठकों की संख्या, रजिस्टर में दर्ज उपस्थिति, उपलब्ध पुस्तकों, फर्नीचर, संचालन के समय तथा वास्तविक अध्ययन गतिविधियों का मिलान कराया जाए। साथ ही यदि फोटो में दिखाई देने वाले लोगों से यह सत्यापित कराया जाए कि वे नियमित पाठक हैं या सिर्फ तस्वीर खिंचवाने के लिए बुलाए गए थे, तो पूरी तस्वीर सामने आ सकती है। अब देखना यह है कि विकासखंड और जिला स्तर के जिम्मेदार अधिकारी इन आरोपों को गंभीरता से लेते हैं या ‘फोटो वाली लाइब्रेरी’ की तस्वीरों को ही हकीकत मानकर आंखें बंद किए रहते हैं। *लाइब्रेरी में पढ़ाई या सिर्फ फोटोशूट?* *बसखारी में ‘दिखावे’ के संचालन का आरोप, पढ़ने वालों की जगह अनपढ़ों को बैठाकर खिंचवाई जा रही तस्वीरें*! *अम्बेडकरनगर/बसखारी।* सरकार की मंशा गांव-गांव में लाइब्रेरी स्थापित कर युवाओं और विद्यार्थियों को बेहतर अध्ययन का माहौल उपलब्ध कराने की है, ताकि ग्रामीण क्षेत्र के छात्र-छात्राएं प्रतियोगी परीक्षाओं समेत अपनी पढ़ाई में आगे बढ़ सकें। लेकिन विकासखंड बसखारी में लाइब्रेरी संचालन को लेकर सामने आ रहे आरोप इस पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ लाइब्रेरियों में वास्तविक रूप से पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या बेहद कम है, लेकिन जब अधिकारियों या अन्य जिम्मेदारों को फोटो भेजने की जरूरत पड़ती है तो आसपास के लोगों को पकड़-पकड़कर लाइब्रेरी में बैठाया जाता है और उनकी तस्वीरें खींचकर यह दिखाने का प्रयास किया जाता है कि लाइब्रेरी में नियमित रूप से विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं। सबसे गंभीर आरोप तो यह है कि कुछ स्थानों पर ऐसे लोगों को भी फोटो के लिए बैठाए जाने की बात सामने आ रही है, जिन्हें ठीक से पढ़ना-लिखना तक नहीं आता। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर लाइब्रेरी का संचालन विद्यार्थियों के भविष्य के लिए हो रहा है या सिर्फ कागजों और तस्वीरों में व्यवस्था को सक्रिय दिखाने के लिए? फोटो खिंची, जिम्मेदारी पूरी? लोगों का कहना है कि कई जगह लाइब्रेरी में किताबें, फर्नीचर और अन्य व्यवस्थाएं तो दिखाई देती हैं, लेकिन नियमित पाठक और अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों की वास्तविक स्थिति की जांच किए जाने की जरूरत है। आरोप है कि निरीक्षण या फोटो भेजने के समय कुछ लोगों को बुलाकर बैठा दिया जाता है और तस्वीरें खींचकर रिकॉर्ड पूरा कर दिया जाता है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या लाइब्रेरी का उद्देश्य सिर्फ फोटो खिंचवाना है या वास्तव में गांव के युवाओं को पढ़ने का अवसर देना? प्रधान और जिम्मेदारों की भूमिका पर भी सवाल स्थानीय स्तर पर लाइब्रेरी संचालन में ग्राम पंचायत और संबंधित जिम्मेदारों की भूमिका भी सवालों के घेरे में बताई जा रही है। यदि वास्तव में फोटोशूट के लिए लोगों को जबरन बैठाया जा रहा है तो यह न केवल सरकारी योजना की मंशा के विपरीत होगा, बल्कि उन विद्यार्थियों के साथ भी अन्याय होगा जिनके भविष्य को बेहतर बनाने के नाम पर सरकारी धन खर्च किया जा रहा है। उज्ज्वल भविष्य की कामना करने वाले जिम्मेदारों को यदि लाइब्रेरी सिर्फ तस्वीरों में चलानी है तो फिर उन तस्वीरों का ‘इनाम’ आखिर किसे दिया जाना चाहिए? यह सवाल अब ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। जांच हुई तो खुल सकती है ‘फोटोशूट वाली लाइब्रेरी’ की हकीकत जरूरत है कि विकासखंड बसखारी की लाइब्रेरियों का अचानक और बिना सूचना के भौतिक सत्यापन कराया जाए। लाइब्रेरी में मौजूद पाठकों की संख्या, रजिस्टर में दर्ज उपस्थिति, उपलब्ध पुस्तकों, फर्नीचर, संचालन के समय तथा वास्तविक अध्ययन गतिविधियों का मिलान कराया जाए। साथ ही यदि फोटो में दिखाई देने वाले लोगों से यह सत्यापित कराया जाए कि वे नियमित पाठक हैं या सिर्फ तस्वीर खिंचवाने के लिए बुलाए गए थे, तो पूरी तस्वीर सामने आ सकती है। अब देखना यह है कि विकासखंड और जिला स्तर के जिम्मेदार अधिकारी इन आरोपों को गंभीरता से लेते हैं या ‘फोटो वाली लाइब्रेरी’ की तस्वीरों को ही हकीकत मानकर आंखें बंद किए रहते हैं।
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    *लाइब्रेरी में पढ़ाई या सिर्फ फोटोशूट?*

*बसखारी में ‘दिखावे’ के संचालन का आरोप, पढ़ने वालों की जगह अनपढ़ों को बैठाकर खिंचवाई जा रही तस्वीरें*!

*अम्बेडकरनगर/बसखारी।*

सरकार की मंशा गांव-गांव में लाइब्रेरी स्थापित कर युवाओं और विद्यार्थियों को बेहतर अध्ययन का माहौल उपलब्ध कराने की है, ताकि ग्रामीण क्षेत्र के छात्र-छात्राएं प्रतियोगी परीक्षाओं समेत अपनी पढ़ाई में आगे बढ़ सकें। लेकिन विकासखंड बसखारी में लाइब्रेरी संचालन को लेकर सामने आ रहे आरोप इस पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ लाइब्रेरियों में वास्तविक रूप से पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या बेहद कम है, लेकिन जब अधिकारियों या अन्य जिम्मेदारों को फोटो भेजने की जरूरत पड़ती है तो आसपास के लोगों को पकड़-पकड़कर लाइब्रेरी में बैठाया जाता है और उनकी तस्वीरें खींचकर यह दिखाने का प्रयास किया जाता है कि लाइब्रेरी में नियमित रूप से विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं।

सबसे गंभीर आरोप तो यह है कि कुछ स्थानों पर ऐसे लोगों को भी फोटो के लिए बैठाए जाने की बात सामने आ रही है, जिन्हें ठीक से पढ़ना-लिखना तक नहीं आता। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर लाइब्रेरी का संचालन विद्यार्थियों के भविष्य के लिए हो रहा है या सिर्फ कागजों और तस्वीरों में व्यवस्था को सक्रिय दिखाने के लिए?

फोटो खिंची, जिम्मेदारी पूरी?

लोगों का कहना है कि कई जगह लाइब्रेरी में किताबें, फर्नीचर और अन्य व्यवस्थाएं तो दिखाई देती हैं, लेकिन नियमित पाठक और अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों की वास्तविक स्थिति की जांच किए जाने की जरूरत है। आरोप है कि निरीक्षण या फोटो भेजने के समय कुछ लोगों को बुलाकर बैठा दिया जाता है और तस्वीरें खींचकर रिकॉर्ड पूरा कर दिया जाता है।

ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या लाइब्रेरी का उद्देश्य सिर्फ फोटो खिंचवाना है या वास्तव में गांव के युवाओं को पढ़ने का अवसर देना?

प्रधान और जिम्मेदारों की भूमिका पर भी सवाल

स्थानीय स्तर पर लाइब्रेरी संचालन में ग्राम पंचायत और संबंधित जिम्मेदारों की भूमिका भी सवालों के घेरे में बताई जा रही है। यदि वास्तव में फोटोशूट के लिए लोगों को जबरन बैठाया जा रहा है तो यह न केवल सरकारी योजना की मंशा के विपरीत होगा, बल्कि उन विद्यार्थियों के साथ भी अन्याय होगा जिनके भविष्य को बेहतर बनाने के नाम पर सरकारी धन खर्च किया जा रहा है।

उज्ज्वल भविष्य की कामना करने वाले जिम्मेदारों को यदि लाइब्रेरी सिर्फ तस्वीरों में चलानी है तो फिर उन तस्वीरों का ‘इनाम’ आखिर किसे दिया जाना चाहिए? यह सवाल अब ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

जांच हुई तो खुल सकती है ‘फोटोशूट वाली लाइब्रेरी’ की हकीकत

जरूरत है कि विकासखंड बसखारी की लाइब्रेरियों का अचानक और बिना सूचना के भौतिक सत्यापन कराया जाए। लाइब्रेरी में मौजूद पाठकों की संख्या, रजिस्टर में दर्ज उपस्थिति, उपलब्ध पुस्तकों, फर्नीचर, संचालन के समय तथा वास्तविक अध्ययन गतिविधियों का मिलान कराया जाए।

साथ ही यदि फोटो में दिखाई देने वाले लोगों से यह सत्यापित कराया जाए कि वे नियमित पाठक हैं या सिर्फ तस्वीर खिंचवाने के लिए बुलाए गए थे, तो पूरी तस्वीर सामने आ सकती है।

अब देखना यह है कि विकासखंड और जिला स्तर के जिम्मेदार अधिकारी इन आरोपों को गंभीरता से लेते हैं या ‘फोटो वाली लाइब्रेरी’ की तस्वीरों को ही हकीकत मानकर आंखें बंद किए रहते हैं।
*लाइब्रेरी में पढ़ाई या सिर्फ फोटोशूट?*
*बसखारी में ‘दिखावे’ के संचालन का आरोप, पढ़ने वालों की जगह अनपढ़ों को बैठाकर खिंचवाई जा रही तस्वीरें*!
*अम्बेडकरनगर/बसखारी।*
सरकार की मंशा गांव-गांव में लाइब्रेरी स्थापित कर युवाओं और विद्यार्थियों को बेहतर अध्ययन का माहौल उपलब्ध कराने की है, ताकि ग्रामीण क्षेत्र के छात्र-छात्राएं प्रतियोगी परीक्षाओं समेत अपनी पढ़ाई में आगे बढ़ सकें। लेकिन विकासखंड बसखारी में लाइब्रेरी संचालन को लेकर सामने आ रहे आरोप इस पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ लाइब्रेरियों में वास्तविक रूप से पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या बेहद कम है, लेकिन जब अधिकारियों या अन्य जिम्मेदारों को फोटो भेजने की जरूरत पड़ती है तो आसपास के लोगों को पकड़-पकड़कर लाइब्रेरी में बैठाया जाता है और उनकी तस्वीरें खींचकर यह दिखाने का प्रयास किया जाता है कि लाइब्रेरी में नियमित रूप से विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं।
सबसे गंभीर आरोप तो यह है कि कुछ स्थानों पर ऐसे लोगों को भी फोटो के लिए बैठाए जाने की बात सामने आ रही है, जिन्हें ठीक से पढ़ना-लिखना तक नहीं आता। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर लाइब्रेरी का संचालन विद्यार्थियों के भविष्य के लिए हो रहा है या सिर्फ कागजों और तस्वीरों में व्यवस्था को सक्रिय दिखाने के लिए?
फोटो खिंची, जिम्मेदारी पूरी?
लोगों का कहना है कि कई जगह लाइब्रेरी में किताबें, फर्नीचर और अन्य व्यवस्थाएं तो दिखाई देती हैं, लेकिन नियमित पाठक और अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों की वास्तविक स्थिति की जांच किए जाने की जरूरत है। आरोप है कि निरीक्षण या फोटो भेजने के समय कुछ लोगों को बुलाकर बैठा दिया जाता है और तस्वीरें खींचकर रिकॉर्ड पूरा कर दिया जाता है।
ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या लाइब्रेरी का उद्देश्य सिर्फ फोटो खिंचवाना है या वास्तव में गांव के युवाओं को पढ़ने का अवसर देना?
प्रधान और जिम्मेदारों की भूमिका पर भी सवाल
स्थानीय स्तर पर लाइब्रेरी संचालन में ग्राम पंचायत और संबंधित जिम्मेदारों की भूमिका भी सवालों के घेरे में बताई जा रही है। यदि वास्तव में फोटोशूट के लिए लोगों को जबरन बैठाया जा रहा है तो यह न केवल सरकारी योजना की मंशा के विपरीत होगा, बल्कि उन विद्यार्थियों के साथ भी अन्याय होगा जिनके भविष्य को बेहतर बनाने के नाम पर सरकारी धन खर्च किया जा रहा है।
उज्ज्वल भविष्य की कामना करने वाले जिम्मेदारों को यदि लाइब्रेरी सिर्फ तस्वीरों में चलानी है तो फिर उन तस्वीरों का ‘इनाम’ आखिर किसे दिया जाना चाहिए? यह सवाल अब ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
जांच हुई तो खुल सकती है ‘फोटोशूट वाली लाइब्रेरी’ की हकीकत
जरूरत है कि विकासखंड बसखारी की लाइब्रेरियों का अचानक और बिना सूचना के भौतिक सत्यापन कराया जाए। लाइब्रेरी में मौजूद पाठकों की संख्या, रजिस्टर में दर्ज उपस्थिति, उपलब्ध पुस्तकों, फर्नीचर, संचालन के समय तथा वास्तविक अध्ययन गतिविधियों का मिलान कराया जाए।
साथ ही यदि फोटो में दिखाई देने वाले लोगों से यह सत्यापित कराया जाए कि वे नियमित पाठक हैं या सिर्फ तस्वीर खिंचवाने के लिए बुलाए गए थे, तो पूरी तस्वीर सामने आ सकती है।
अब देखना यह है कि विकासखंड और जिला स्तर के जिम्मेदार अधिकारी इन आरोपों को गंभीरता से लेते हैं या ‘फोटो वाली लाइब्रेरी’ की तस्वीरों को ही हकीकत मानकर आंखें बंद किए रहते हैं।
    user_Khan Rizwan
    Khan Rizwan
    Farmer अकबरपुर, अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश•
    22 hrs ago
  • नवनिर्मित पुल बना राहगीरों के लिए मुसीबत, दलदल में फंस रहे वाहन और स्कूली बच्चे संग्रामपुर, अमेठी। क्षेत्र के टिकरिया गांव के पास नवनिर्मित पुल इन दिनों राहगीरों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। पुल के आसपास मिट्टी और पानी जमा होने से संपर्क मार्ग दलदल में तब्दील हो गया है। रास्ते पर फिसलन होने के कारण ई-रिक्शा, बस, दोपहिया वाहन और स्कूली बच्चों की साइकिलें तक फंस रही हैं। सबसे अधिक परेशानी स्कूल जाने वाले छात्र-छात्राओं को उठानी पड़ रही है। साइकिल से पुल पार करते समय कई बच्चे दलदल में फंस जाते हैं, जिससे उनकी स्कूल ड्रेस कीचड़ से खराब हो जाती है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों में भी चिंता बनी हुई है। वहीं ई-रिक्शा और बस चालकों को भी इस मार्ग से गुजरने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। भारी वाहनों के आवागमन से रास्ते की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। फिसलन के चलते दोपहिया वाहन चालकों के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा भी बना हुआ है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि पुल निर्माण के बाद उसके दोनों ओर संपर्क मार्ग को व्यवस्थित करने और जल निकासी की उचित व्यवस्था कराने में संबंधित विभाग ने लापरवाही बरती है। ग्रामीणों का कहना है कि समस्या की जानकारी होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से पुल के दोनों ओर जमा कीचड़ और दलदल को तत्काल हटवाने, रास्ते पर गिट्टी-मिट्टी डलवाकर आवागमन सुचारु कराने तथा जल निकासी की स्थायी व्यवस्था कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ तो स्कूली बच्चों और राहगीरों के साथ हादसा हो सकता है।
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    नवनिर्मित पुल बना राहगीरों के लिए मुसीबत, दलदल में फंस रहे वाहन और स्कूली बच्चे
संग्रामपुर, अमेठी। क्षेत्र के टिकरिया गांव के पास नवनिर्मित पुल इन दिनों राहगीरों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। पुल के आसपास मिट्टी और पानी जमा होने से संपर्क मार्ग दलदल में तब्दील हो गया है। रास्ते पर फिसलन होने के कारण ई-रिक्शा, बस, दोपहिया वाहन और स्कूली बच्चों की साइकिलें तक फंस रही हैं।
सबसे अधिक परेशानी स्कूल जाने वाले छात्र-छात्राओं को उठानी पड़ रही है। साइकिल से पुल पार करते समय कई बच्चे दलदल में फंस जाते हैं, जिससे उनकी स्कूल ड्रेस कीचड़ से खराब हो जाती है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों में भी चिंता बनी हुई है।
वहीं ई-रिक्शा और बस चालकों को भी इस मार्ग से गुजरने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। भारी वाहनों के आवागमन से रास्ते की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। फिसलन के चलते दोपहिया वाहन चालकों के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा भी बना हुआ है।
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि पुल निर्माण के बाद उसके दोनों ओर संपर्क मार्ग को व्यवस्थित करने और जल निकासी की उचित व्यवस्था कराने में संबंधित विभाग ने लापरवाही बरती है। ग्रामीणों का कहना है कि समस्या की जानकारी होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से पुल के दोनों ओर जमा कीचड़ और दलदल को तत्काल हटवाने, रास्ते पर गिट्टी-मिट्टी डलवाकर आवागमन सुचारु कराने तथा जल निकासी की स्थायी व्यवस्था कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ तो स्कूली बच्चों और राहगीरों के साथ हादसा हो सकता है।
    user_Komal Gupta
    Komal Gupta
    Local News Reporter अमेठी, अमेठी, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • प्रतापगढ़ की सातों सीटों पर कमल खिलाने का संकल्प: सीएम योगी से मिले दिनेश प्रताप सिंह लखनऊ। प्रदेश की राजनीतिक चर्चाओं के बीच उत्तर प्रदेश भाजपा के मुख्य प्रवक्ता एवं पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त दिनेश प्रताप सिंह ने बुधवार को लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान आगामी 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हुई। बैठक में प्रतापगढ़ जिले की सभी सात विधानसभा सीटों पर भाजपा की जीत सुनिश्चित करने की रणनीति और संगठन को और मजबूत करने सहित विभिन्न राजनीतिक विषयों पर सकारात्मक विचार-विमर्श हुआ। दिनेश प्रताप सिंह ने प्रतापगढ़ की सातों विधानसभा सीटों पर भाजपा का परचम लहराने का संकल्प व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं की मेहनत, संगठन की मजबूती और जनता के विश्वास के दम पर 2027 में प्रतापगढ़ की सभी सातों सीटों पर कमल खिलाने का लक्ष्य पूरा किया जाएगा।
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    प्रतापगढ़ की सातों सीटों पर कमल खिलाने का संकल्प: सीएम योगी से मिले दिनेश प्रताप सिंह

लखनऊ। प्रदेश की राजनीतिक चर्चाओं के बीच उत्तर प्रदेश भाजपा के मुख्य प्रवक्ता एवं पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त दिनेश प्रताप सिंह ने बुधवार को लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिष्टाचार भेंट की।

इस दौरान आगामी 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हुई। बैठक में प्रतापगढ़ जिले की सभी सात विधानसभा सीटों पर भाजपा की जीत सुनिश्चित करने की रणनीति और संगठन को और मजबूत करने सहित विभिन्न राजनीतिक विषयों पर सकारात्मक विचार-विमर्श हुआ।

दिनेश प्रताप सिंह ने प्रतापगढ़ की सातों विधानसभा सीटों पर भाजपा का परचम लहराने का संकल्प व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं की मेहनत, संगठन की मजबूती और जनता के विश्वास के दम पर 2027 में प्रतापगढ़ की सभी सातों सीटों पर कमल खिलाने का लक्ष्य पूरा किया जाएगा।
    user_नीरज पांडेय पत्रकार प्रतापगढ़
    नीरज पांडेय पत्रकार प्रतापगढ़
    Local News Reporter पट्टी, प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश•
    6 hrs ago
  • स्कूलों में पानी भरा, बच्ची बोली- डीएम अंकल सड़क बनवा दो: सुल्तानपुर में अतिवृष्टि से बेसिक स्कूलों में जलभराव, धारूपुर के विद्यालयों की छत भी टपकी सुल्तानपुर जिले में लगातार हो रही तेज बारिश के कारण बेसिक शिक्षा परिषद के कई स्कूलों में पानी भर गया है। कुड़वार ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय धारूपुर और उच्च प्राथमिक विद्यालय धारूपुर भी जलभराव की समस्या से जूझ रहे हैं। यहां बारिश के दौरान छत से पानी टपकने की समस्या भी सामने आ रही है। प्राथमिक विद्यालय धारूपुर में 78 और उच्च प्राथमिक विद्यालय धारूपुर में 79 बच्चे पढ़ते हैं। ऐसे में स्कूल परिसर में पानी भरने और छत से पानी टपकने से बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। अभिभावकों और ग्रामीणों का कहना है कि बारिश में स्कूल में पढ़ाई पर असर पड़ता है। साथ ही बच्चों के फिसलने और दूसरी दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। उन्होंने अधिकारियों से स्कूल परिसर से पानी निकालने और जर्जर छत को ठीक कराने की मांग की है। इसी बीच, सुल्तानपुर जिले की लंभुआ विधानसभा के प्रतापपुर कमैचा ब्लॉक की ग्राम पंचायत रामगढ़ से एक वीडियो सामने आया है। इसमें एक छोटी बच्ची ने डीएम से सड़क बनवाने की गुहार लगाई है। बच्ची वीडियो में कहती है, "डीएम अंकल प्लीज हमारी सड़क बनवा दीजिए, हम लोगों को पढ़ने जाने में बहुत समस्या होती है।" पिछले कई सालों से करीब 50-55 घरों के हजारों लोग कीचड़ और दलदल भरे रास्ते से निकलने को मजबूर हैं। छोटे बच्चे आए दिन इस दलदल में गिरते रहते हैं। इसी कीचड़ भरे रास्ते से मासूम बच्चों को स्कूल जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है, लेकिन उनकी परेशानी सुनने वाला कोई नहीं है।
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    स्कूलों में पानी भरा, बच्ची बोली- डीएम अंकल सड़क बनवा दो: सुल्तानपुर में अतिवृष्टि से बेसिक स्कूलों में जलभराव, धारूपुर के विद्यालयों की छत भी टपकी
सुल्तानपुर जिले में लगातार हो रही तेज बारिश के कारण बेसिक शिक्षा परिषद के कई स्कूलों में पानी भर गया है। कुड़वार ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय धारूपुर और उच्च प्राथमिक विद्यालय धारूपुर भी जलभराव की समस्या से जूझ रहे हैं। यहां बारिश के दौरान छत से पानी टपकने की समस्या भी सामने आ रही है।
प्राथमिक विद्यालय धारूपुर में 78 और उच्च प्राथमिक विद्यालय धारूपुर में 79 बच्चे पढ़ते हैं। ऐसे में स्कूल परिसर में पानी भरने और छत से पानी टपकने से बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।
अभिभावकों और ग्रामीणों का कहना है कि बारिश में स्कूल में पढ़ाई पर असर पड़ता है। साथ ही बच्चों के फिसलने और दूसरी दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। उन्होंने अधिकारियों से स्कूल परिसर से पानी निकालने और जर्जर छत को ठीक कराने की मांग की है।
इसी बीच, सुल्तानपुर जिले की लंभुआ विधानसभा के प्रतापपुर कमैचा ब्लॉक की ग्राम पंचायत रामगढ़ से एक वीडियो सामने आया है। इसमें एक छोटी बच्ची ने डीएम से सड़क बनवाने की गुहार लगाई है।
बच्ची वीडियो में कहती है, "डीएम अंकल प्लीज हमारी सड़क बनवा दीजिए, हम लोगों को पढ़ने जाने में बहुत समस्या होती है।" पिछले कई सालों से करीब 50-55 घरों के हजारों लोग कीचड़ और दलदल भरे रास्ते से निकलने को मजबूर हैं।
छोटे बच्चे आए दिन इस दलदल में गिरते रहते हैं। इसी कीचड़ भरे रास्ते से मासूम बच्चों को स्कूल जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है, लेकिन उनकी परेशानी सुनने वाला कोई नहीं है।
    user_BREAKINGNEWS
    BREAKINGNEWS
    सुल्तानपुर, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश•
    16 hrs ago
  • ब्रेकिंग न्यूज राजा भइया के दिशानिर्देशों का सअक्षर पालन कर रहे है चेयरमैन प्रतिनिधि शिवकुमार तिवारी भगवन राजा भइया के दिशानिर्देशों का सअक्षर पालन कर रहे है चेयरमैन प्रतिनिधि शिवकुमार तिवारी भगवन। नगर के गली गली में जाकर जल निकासी की करा रहे है व्यवस्था। नगर पंचायत के कर्मचारियों एवं जेसीबी मशीन से अनवरत जल निकासी की सुनिश्चित हो रही है व्यवस्था। अभी तक किसी मोहल्ले में जलभराव की गंभीर समस्या नहीं हुई उत्पन्न - शिवकुमार तिवारी प्राकृतिक आपदा से कुछ मोहल्ले में जलभराव की समस्या हो सकती थी जिसके दृष्टिगत बड़े नालों की सफाई अनवरत चल रही है - शिवकुमार तिवारी चेयरमैन प्रतिनिधि ने लोगों से बरसात के पानी को ना बांधने वा नगर पंचायत का सहयोग करने की अपील की है।
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    ब्रेकिंग न्यूज राजा भइया के दिशानिर्देशों का सअक्षर पालन कर रहे है चेयरमैन प्रतिनिधि शिवकुमार तिवारी भगवन
राजा भइया के दिशानिर्देशों का सअक्षर पालन कर रहे है चेयरमैन प्रतिनिधि शिवकुमार तिवारी भगवन।
नगर के गली गली में जाकर जल निकासी की करा रहे है व्यवस्था।
नगर पंचायत के कर्मचारियों एवं जेसीबी मशीन से अनवरत जल निकासी की सुनिश्चित हो रही है व्यवस्था।
अभी तक किसी मोहल्ले में जलभराव की गंभीर समस्या नहीं हुई उत्पन्न - शिवकुमार तिवारी 
प्राकृतिक आपदा से कुछ मोहल्ले में जलभराव की समस्या हो सकती थी जिसके दृष्टिगत बड़े नालों की सफाई अनवरत चल रही है - शिवकुमार तिवारी 
चेयरमैन प्रतिनिधि ने लोगों से बरसात के पानी को ना बांधने वा नगर पंचायत का सहयोग करने की अपील की है।
    user_नीरज पांडेय पत्रकार प्रतापगढ़
    नीरज पांडेय पत्रकार प्रतापगढ़
    Local News Reporter पट्टी, प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश•
    6 hrs ago
  • माननीयाें के सगे वाले हैं जिले के सफाई कर्मी -कार्रवाई से फटती है अधिकारियों की... झाड़ू नहीं उठाते सफाई कर्मी - गांवों में कचरे का अंबार अंबेडकर नगर जिले के किसी भी गांव में सफाई कर्मी झाड़ू लगाने कचरा उठाने के लिए नहीं जाते हैं । संचारी रोग सर चढ़कर बोल रहा है । हाहाकार मची हुई है । सफाई कर्मी माननीयों के नात रिश्तेदार और परिवार के सदस्य होने के कारण अधिकारी कार्रवाई उनके खिलाफ नहीं करते हैं । सब मिला कर स्थिति बहुत ही गंभीर है।
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    माननीयाें के सगे वाले हैं जिले के सफाई कर्मी -कार्रवाई से फटती है अधिकारियों की... झाड़ू नहीं उठाते सफाई कर्मी - गांवों में कचरे का अंबार  
अंबेडकर नगर जिले के किसी भी गांव में सफाई कर्मी झाड़ू लगाने कचरा उठाने के लिए नहीं जाते हैं । संचारी रोग सर चढ़कर बोल रहा है । हाहाकार मची हुई है । सफाई कर्मी माननीयों के नात रिश्तेदार और परिवार के सदस्य होने के कारण अधिकारी कार्रवाई उनके खिलाफ नहीं करते हैं । सब मिला कर स्थिति बहुत ही गंभीर है।
    user_ABN News Plus
    ABN News Plus
    पत्रकार Ambedkar Nagar, Uttar Pradesh•
    14 hrs ago
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