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माननीयाें के सगे वाले हैं जिले के सफाई कर्मी -कार्रवाई से फटती है अधिकारियों की... झाड़ू नहीं उठाते सफाई कर्मी - गांवों में कचरे का अंबार अंबेडकर नगर जिले के किसी भी गांव में सफाई कर्मी झाड़ू लगाने कचरा उठाने के लिए नहीं जाते हैं । संचारी रोग सर चढ़कर बोल रहा है । हाहाकार मची हुई है । सफाई कर्मी माननीयों के नात रिश्तेदार और परिवार के सदस्य होने के कारण अधिकारी कार्रवाई उनके खिलाफ नहीं करते हैं । सब मिला कर स्थिति बहुत ही गंभीर है।

14 hrs ago
user_ABN News Plus
ABN News Plus
पत्रकार Ambedkar Nagar, Uttar Pradesh•
14 hrs ago

माननीयाें के सगे वाले हैं जिले के सफाई कर्मी -कार्रवाई से फटती है अधिकारियों की... झाड़ू नहीं उठाते सफाई कर्मी - गांवों में कचरे का अंबार अंबेडकर नगर जिले के किसी भी गांव में सफाई कर्मी झाड़ू लगाने कचरा उठाने के लिए नहीं जाते हैं । संचारी रोग सर चढ़कर बोल रहा है । हाहाकार मची हुई है । सफाई कर्मी माननीयों के नात रिश्तेदार और परिवार के सदस्य होने के कारण अधिकारी कार्रवाई उनके खिलाफ नहीं करते हैं । सब मिला कर स्थिति बहुत ही गंभीर है।

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  • माननीयाें के सगे वाले हैं जिले के सफाई कर्मी -कार्रवाई से फटती है अधिकारियों की... झाड़ू नहीं उठाते सफाई कर्मी - गांवों में कचरे का अंबार अंबेडकर नगर जिले के किसी भी गांव में सफाई कर्मी झाड़ू लगाने कचरा उठाने के लिए नहीं जाते हैं । संचारी रोग सर चढ़कर बोल रहा है । हाहाकार मची हुई है । सफाई कर्मी माननीयों के नात रिश्तेदार और परिवार के सदस्य होने के कारण अधिकारी कार्रवाई उनके खिलाफ नहीं करते हैं । सब मिला कर स्थिति बहुत ही गंभीर है।
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    माननीयाें के सगे वाले हैं जिले के सफाई कर्मी -कार्रवाई से फटती है अधिकारियों की... झाड़ू नहीं उठाते सफाई कर्मी - गांवों में कचरे का अंबार  
अंबेडकर नगर जिले के किसी भी गांव में सफाई कर्मी झाड़ू लगाने कचरा उठाने के लिए नहीं जाते हैं । संचारी रोग सर चढ़कर बोल रहा है । हाहाकार मची हुई है । सफाई कर्मी माननीयों के नात रिश्तेदार और परिवार के सदस्य होने के कारण अधिकारी कार्रवाई उनके खिलाफ नहीं करते हैं । सब मिला कर स्थिति बहुत ही गंभीर है।
    user_ABN News Plus
    ABN News Plus
    पत्रकार Ambedkar Nagar, Uttar Pradesh•
    14 hrs ago
  • अंबेडकरनगर में आउटसोर्स कर्मचारियों को राहत! हर महीने 2-3 तारीख तक मिलेगा मानदेय
    1
    अंबेडकरनगर में आउटसोर्स कर्मचारियों को राहत! हर महीने 2-3 तारीख तक मिलेगा मानदेय
    user_APDP NEWS
    APDP NEWS
    पत्रकार Akbarpur, Ambedkar Nagar•
    16 hrs ago
  • आराध्या श्री फाउंडेशन ने महुंली गांव जिला प्रतापगढ निवासी अमन के सहयोग हेतु बढ़ाया हाथ। आराध्या श्री फाउंडेशन ने महुंली गांव प्रतापगढ़ निवासी अमन की मदद के लिए बढ़ाया हाथ। आराध्या श्री फाउंडेशन ने कल मंगलवार अमन श्रीवास्तव के गांव महुंली जिला प्रतापगढ पहुंचकर मानवीय संवेदना के साथ उनको आर्थिक मदद व घरेलू खाद्य सामग्री प्रदान किया । जिसमें कायस्थ समाज अम्बेडकरनगर का भी सहयोग रहा। प्रतापगढ़ मंहुली गांव में बीते 6 अगस्त 2026 को एक जर्जर मकान की छत गिरने से अमन के परिवार से छह सदस्यों की दबकर मौत हो गई थी। इस हृदय विदारक भयावह खबर के बाद आराध्या श्री फाउंडेशन के सदस्यों ने कल महुंली गांव पहुंचकर मानवीय संवेदना के साथ मदद भरी हाथ बढ़ाया। अजय श्रीवास्तव अध्यक्ष आराध्या श्री फाउंडेशन ने बताया कि बीते 14 अगस्त से फाउंडेशन ने लोगों से मानवीय संवेदना के साथ सहयोग मांगा था।इस बीच सभी के साथ, सहयोग मदद से उक्त कार्य सम्पन्न किया गया। फाउंडेशन लगातार सड़क सुरक्षा, खेल स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण व अन्य क्षेत्रों में कार्य कर रहा है । इस अवसर पर ललित मोहन श्रीवास्तव अध्यक्ष कायस्थ समाज अम्बेडकरनगर,दिनेश श्रीवास्तव, प्रशान्त श्रीवास्तव,अंकुर, विवेक ,राहुल ,अनिल मौजूद रहे।
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    आराध्या श्री फाउंडेशन ने महुंली गांव जिला प्रतापगढ निवासी अमन के सहयोग हेतु बढ़ाया हाथ।
आराध्या श्री फाउंडेशन ने महुंली गांव प्रतापगढ़ निवासी अमन की मदद के लिए बढ़ाया हाथ।
आराध्या श्री फाउंडेशन ने कल मंगलवार अमन श्रीवास्तव के गांव महुंली जिला प्रतापगढ पहुंचकर मानवीय संवेदना के साथ उनको आर्थिक मदद व घरेलू खाद्य सामग्री प्रदान किया । जिसमें कायस्थ समाज अम्बेडकरनगर का भी सहयोग रहा। प्रतापगढ़ मंहुली गांव में बीते 6 अगस्त 2026 को एक जर्जर मकान की छत गिरने से अमन के परिवार से छह सदस्यों की दबकर मौत हो गई थी। इस हृदय विदारक भयावह खबर के बाद आराध्या श्री फाउंडेशन के सदस्यों ने कल महुंली गांव पहुंचकर मानवीय संवेदना के साथ मदद भरी हाथ बढ़ाया।
अजय श्रीवास्तव अध्यक्ष आराध्या श्री फाउंडेशन ने बताया कि बीते 14 अगस्त से फाउंडेशन ने लोगों से मानवीय संवेदना के साथ सहयोग मांगा था।इस बीच सभी के साथ, सहयोग मदद से उक्त कार्य सम्पन्न किया गया। फाउंडेशन लगातार सड़क सुरक्षा, खेल स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण व अन्य क्षेत्रों में कार्य कर रहा है । इस अवसर पर ललित मोहन श्रीवास्तव  अध्यक्ष कायस्थ समाज अम्बेडकरनगर,दिनेश श्रीवास्तव, प्रशान्त श्रीवास्तव,अंकुर, विवेक ,राहुल ,अनिल मौजूद रहे।
    user_अजय कुमार श्रीवास्तव
    अजय कुमार श्रीवास्तव
    Yoga instructor अकबरपुर, अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश•
    20 hrs ago
  • *लाइब्रेरी में पढ़ाई या सिर्फ फोटोशूट?* *बसखारी में ‘दिखावे’ के संचालन का आरोप, पढ़ने वालों की जगह अनपढ़ों को बैठाकर खिंचवाई जा रही तस्वीरें*! *अम्बेडकरनगर/बसखारी।* सरकार की मंशा गांव-गांव में लाइब्रेरी स्थापित कर युवाओं और विद्यार्थियों को बेहतर अध्ययन का माहौल उपलब्ध कराने की है, ताकि ग्रामीण क्षेत्र के छात्र-छात्राएं प्रतियोगी परीक्षाओं समेत अपनी पढ़ाई में आगे बढ़ सकें। लेकिन विकासखंड बसखारी में लाइब्रेरी संचालन को लेकर सामने आ रहे आरोप इस पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ लाइब्रेरियों में वास्तविक रूप से पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या बेहद कम है, लेकिन जब अधिकारियों या अन्य जिम्मेदारों को फोटो भेजने की जरूरत पड़ती है तो आसपास के लोगों को पकड़-पकड़कर लाइब्रेरी में बैठाया जाता है और उनकी तस्वीरें खींचकर यह दिखाने का प्रयास किया जाता है कि लाइब्रेरी में नियमित रूप से विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं। सबसे गंभीर आरोप तो यह है कि कुछ स्थानों पर ऐसे लोगों को भी फोटो के लिए बैठाए जाने की बात सामने आ रही है, जिन्हें ठीक से पढ़ना-लिखना तक नहीं आता। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर लाइब्रेरी का संचालन विद्यार्थियों के भविष्य के लिए हो रहा है या सिर्फ कागजों और तस्वीरों में व्यवस्था को सक्रिय दिखाने के लिए? फोटो खिंची, जिम्मेदारी पूरी? लोगों का कहना है कि कई जगह लाइब्रेरी में किताबें, फर्नीचर और अन्य व्यवस्थाएं तो दिखाई देती हैं, लेकिन नियमित पाठक और अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों की वास्तविक स्थिति की जांच किए जाने की जरूरत है। आरोप है कि निरीक्षण या फोटो भेजने के समय कुछ लोगों को बुलाकर बैठा दिया जाता है और तस्वीरें खींचकर रिकॉर्ड पूरा कर दिया जाता है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या लाइब्रेरी का उद्देश्य सिर्फ फोटो खिंचवाना है या वास्तव में गांव के युवाओं को पढ़ने का अवसर देना? प्रधान और जिम्मेदारों की भूमिका पर भी सवाल स्थानीय स्तर पर लाइब्रेरी संचालन में ग्राम पंचायत और संबंधित जिम्मेदारों की भूमिका भी सवालों के घेरे में बताई जा रही है। यदि वास्तव में फोटोशूट के लिए लोगों को जबरन बैठाया जा रहा है तो यह न केवल सरकारी योजना की मंशा के विपरीत होगा, बल्कि उन विद्यार्थियों के साथ भी अन्याय होगा जिनके भविष्य को बेहतर बनाने के नाम पर सरकारी धन खर्च किया जा रहा है। उज्ज्वल भविष्य की कामना करने वाले जिम्मेदारों को यदि लाइब्रेरी सिर्फ तस्वीरों में चलानी है तो फिर उन तस्वीरों का ‘इनाम’ आखिर किसे दिया जाना चाहिए? यह सवाल अब ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। जांच हुई तो खुल सकती है ‘फोटोशूट वाली लाइब्रेरी’ की हकीकत जरूरत है कि विकासखंड बसखारी की लाइब्रेरियों का अचानक और बिना सूचना के भौतिक सत्यापन कराया जाए। लाइब्रेरी में मौजूद पाठकों की संख्या, रजिस्टर में दर्ज उपस्थिति, उपलब्ध पुस्तकों, फर्नीचर, संचालन के समय तथा वास्तविक अध्ययन गतिविधियों का मिलान कराया जाए। साथ ही यदि फोटो में दिखाई देने वाले लोगों से यह सत्यापित कराया जाए कि वे नियमित पाठक हैं या सिर्फ तस्वीर खिंचवाने के लिए बुलाए गए थे, तो पूरी तस्वीर सामने आ सकती है। अब देखना यह है कि विकासखंड और जिला स्तर के जिम्मेदार अधिकारी इन आरोपों को गंभीरता से लेते हैं या ‘फोटो वाली लाइब्रेरी’ की तस्वीरों को ही हकीकत मानकर आंखें बंद किए रहते हैं। *लाइब्रेरी में पढ़ाई या सिर्फ फोटोशूट?* *बसखारी में ‘दिखावे’ के संचालन का आरोप, पढ़ने वालों की जगह अनपढ़ों को बैठाकर खिंचवाई जा रही तस्वीरें*! *अम्बेडकरनगर/बसखारी।* सरकार की मंशा गांव-गांव में लाइब्रेरी स्थापित कर युवाओं और विद्यार्थियों को बेहतर अध्ययन का माहौल उपलब्ध कराने की है, ताकि ग्रामीण क्षेत्र के छात्र-छात्राएं प्रतियोगी परीक्षाओं समेत अपनी पढ़ाई में आगे बढ़ सकें। लेकिन विकासखंड बसखारी में लाइब्रेरी संचालन को लेकर सामने आ रहे आरोप इस पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ लाइब्रेरियों में वास्तविक रूप से पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या बेहद कम है, लेकिन जब अधिकारियों या अन्य जिम्मेदारों को फोटो भेजने की जरूरत पड़ती है तो आसपास के लोगों को पकड़-पकड़कर लाइब्रेरी में बैठाया जाता है और उनकी तस्वीरें खींचकर यह दिखाने का प्रयास किया जाता है कि लाइब्रेरी में नियमित रूप से विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं। सबसे गंभीर आरोप तो यह है कि कुछ स्थानों पर ऐसे लोगों को भी फोटो के लिए बैठाए जाने की बात सामने आ रही है, जिन्हें ठीक से पढ़ना-लिखना तक नहीं आता। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर लाइब्रेरी का संचालन विद्यार्थियों के भविष्य के लिए हो रहा है या सिर्फ कागजों और तस्वीरों में व्यवस्था को सक्रिय दिखाने के लिए? फोटो खिंची, जिम्मेदारी पूरी? लोगों का कहना है कि कई जगह लाइब्रेरी में किताबें, फर्नीचर और अन्य व्यवस्थाएं तो दिखाई देती हैं, लेकिन नियमित पाठक और अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों की वास्तविक स्थिति की जांच किए जाने की जरूरत है। आरोप है कि निरीक्षण या फोटो भेजने के समय कुछ लोगों को बुलाकर बैठा दिया जाता है और तस्वीरें खींचकर रिकॉर्ड पूरा कर दिया जाता है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या लाइब्रेरी का उद्देश्य सिर्फ फोटो खिंचवाना है या वास्तव में गांव के युवाओं को पढ़ने का अवसर देना? प्रधान और जिम्मेदारों की भूमिका पर भी सवाल स्थानीय स्तर पर लाइब्रेरी संचालन में ग्राम पंचायत और संबंधित जिम्मेदारों की भूमिका भी सवालों के घेरे में बताई जा रही है। यदि वास्तव में फोटोशूट के लिए लोगों को जबरन बैठाया जा रहा है तो यह न केवल सरकारी योजना की मंशा के विपरीत होगा, बल्कि उन विद्यार्थियों के साथ भी अन्याय होगा जिनके भविष्य को बेहतर बनाने के नाम पर सरकारी धन खर्च किया जा रहा है। उज्ज्वल भविष्य की कामना करने वाले जिम्मेदारों को यदि लाइब्रेरी सिर्फ तस्वीरों में चलानी है तो फिर उन तस्वीरों का ‘इनाम’ आखिर किसे दिया जाना चाहिए? यह सवाल अब ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। जांच हुई तो खुल सकती है ‘फोटोशूट वाली लाइब्रेरी’ की हकीकत जरूरत है कि विकासखंड बसखारी की लाइब्रेरियों का अचानक और बिना सूचना के भौतिक सत्यापन कराया जाए। लाइब्रेरी में मौजूद पाठकों की संख्या, रजिस्टर में दर्ज उपस्थिति, उपलब्ध पुस्तकों, फर्नीचर, संचालन के समय तथा वास्तविक अध्ययन गतिविधियों का मिलान कराया जाए। साथ ही यदि फोटो में दिखाई देने वाले लोगों से यह सत्यापित कराया जाए कि वे नियमित पाठक हैं या सिर्फ तस्वीर खिंचवाने के लिए बुलाए गए थे, तो पूरी तस्वीर सामने आ सकती है। अब देखना यह है कि विकासखंड और जिला स्तर के जिम्मेदार अधिकारी इन आरोपों को गंभीरता से लेते हैं या ‘फोटो वाली लाइब्रेरी’ की तस्वीरों को ही हकीकत मानकर आंखें बंद किए रहते हैं।
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    *लाइब्रेरी में पढ़ाई या सिर्फ फोटोशूट?*

*बसखारी में ‘दिखावे’ के संचालन का आरोप, पढ़ने वालों की जगह अनपढ़ों को बैठाकर खिंचवाई जा रही तस्वीरें*!

*अम्बेडकरनगर/बसखारी।*

सरकार की मंशा गांव-गांव में लाइब्रेरी स्थापित कर युवाओं और विद्यार्थियों को बेहतर अध्ययन का माहौल उपलब्ध कराने की है, ताकि ग्रामीण क्षेत्र के छात्र-छात्राएं प्रतियोगी परीक्षाओं समेत अपनी पढ़ाई में आगे बढ़ सकें। लेकिन विकासखंड बसखारी में लाइब्रेरी संचालन को लेकर सामने आ रहे आरोप इस पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ लाइब्रेरियों में वास्तविक रूप से पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या बेहद कम है, लेकिन जब अधिकारियों या अन्य जिम्मेदारों को फोटो भेजने की जरूरत पड़ती है तो आसपास के लोगों को पकड़-पकड़कर लाइब्रेरी में बैठाया जाता है और उनकी तस्वीरें खींचकर यह दिखाने का प्रयास किया जाता है कि लाइब्रेरी में नियमित रूप से विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं।

सबसे गंभीर आरोप तो यह है कि कुछ स्थानों पर ऐसे लोगों को भी फोटो के लिए बैठाए जाने की बात सामने आ रही है, जिन्हें ठीक से पढ़ना-लिखना तक नहीं आता। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर लाइब्रेरी का संचालन विद्यार्थियों के भविष्य के लिए हो रहा है या सिर्फ कागजों और तस्वीरों में व्यवस्था को सक्रिय दिखाने के लिए?

फोटो खिंची, जिम्मेदारी पूरी?

लोगों का कहना है कि कई जगह लाइब्रेरी में किताबें, फर्नीचर और अन्य व्यवस्थाएं तो दिखाई देती हैं, लेकिन नियमित पाठक और अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों की वास्तविक स्थिति की जांच किए जाने की जरूरत है। आरोप है कि निरीक्षण या फोटो भेजने के समय कुछ लोगों को बुलाकर बैठा दिया जाता है और तस्वीरें खींचकर रिकॉर्ड पूरा कर दिया जाता है।

ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या लाइब्रेरी का उद्देश्य सिर्फ फोटो खिंचवाना है या वास्तव में गांव के युवाओं को पढ़ने का अवसर देना?

प्रधान और जिम्मेदारों की भूमिका पर भी सवाल

स्थानीय स्तर पर लाइब्रेरी संचालन में ग्राम पंचायत और संबंधित जिम्मेदारों की भूमिका भी सवालों के घेरे में बताई जा रही है। यदि वास्तव में फोटोशूट के लिए लोगों को जबरन बैठाया जा रहा है तो यह न केवल सरकारी योजना की मंशा के विपरीत होगा, बल्कि उन विद्यार्थियों के साथ भी अन्याय होगा जिनके भविष्य को बेहतर बनाने के नाम पर सरकारी धन खर्च किया जा रहा है।

उज्ज्वल भविष्य की कामना करने वाले जिम्मेदारों को यदि लाइब्रेरी सिर्फ तस्वीरों में चलानी है तो फिर उन तस्वीरों का ‘इनाम’ आखिर किसे दिया जाना चाहिए? यह सवाल अब ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

जांच हुई तो खुल सकती है ‘फोटोशूट वाली लाइब्रेरी’ की हकीकत

जरूरत है कि विकासखंड बसखारी की लाइब्रेरियों का अचानक और बिना सूचना के भौतिक सत्यापन कराया जाए। लाइब्रेरी में मौजूद पाठकों की संख्या, रजिस्टर में दर्ज उपस्थिति, उपलब्ध पुस्तकों, फर्नीचर, संचालन के समय तथा वास्तविक अध्ययन गतिविधियों का मिलान कराया जाए।

साथ ही यदि फोटो में दिखाई देने वाले लोगों से यह सत्यापित कराया जाए कि वे नियमित पाठक हैं या सिर्फ तस्वीर खिंचवाने के लिए बुलाए गए थे, तो पूरी तस्वीर सामने आ सकती है।

अब देखना यह है कि विकासखंड और जिला स्तर के जिम्मेदार अधिकारी इन आरोपों को गंभीरता से लेते हैं या ‘फोटो वाली लाइब्रेरी’ की तस्वीरों को ही हकीकत मानकर आंखें बंद किए रहते हैं।
*लाइब्रेरी में पढ़ाई या सिर्फ फोटोशूट?*
*बसखारी में ‘दिखावे’ के संचालन का आरोप, पढ़ने वालों की जगह अनपढ़ों को बैठाकर खिंचवाई जा रही तस्वीरें*!
*अम्बेडकरनगर/बसखारी।*
सरकार की मंशा गांव-गांव में लाइब्रेरी स्थापित कर युवाओं और विद्यार्थियों को बेहतर अध्ययन का माहौल उपलब्ध कराने की है, ताकि ग्रामीण क्षेत्र के छात्र-छात्राएं प्रतियोगी परीक्षाओं समेत अपनी पढ़ाई में आगे बढ़ सकें। लेकिन विकासखंड बसखारी में लाइब्रेरी संचालन को लेकर सामने आ रहे आरोप इस पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ लाइब्रेरियों में वास्तविक रूप से पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या बेहद कम है, लेकिन जब अधिकारियों या अन्य जिम्मेदारों को फोटो भेजने की जरूरत पड़ती है तो आसपास के लोगों को पकड़-पकड़कर लाइब्रेरी में बैठाया जाता है और उनकी तस्वीरें खींचकर यह दिखाने का प्रयास किया जाता है कि लाइब्रेरी में नियमित रूप से विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं।
सबसे गंभीर आरोप तो यह है कि कुछ स्थानों पर ऐसे लोगों को भी फोटो के लिए बैठाए जाने की बात सामने आ रही है, जिन्हें ठीक से पढ़ना-लिखना तक नहीं आता। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर लाइब्रेरी का संचालन विद्यार्थियों के भविष्य के लिए हो रहा है या सिर्फ कागजों और तस्वीरों में व्यवस्था को सक्रिय दिखाने के लिए?
फोटो खिंची, जिम्मेदारी पूरी?
लोगों का कहना है कि कई जगह लाइब्रेरी में किताबें, फर्नीचर और अन्य व्यवस्थाएं तो दिखाई देती हैं, लेकिन नियमित पाठक और अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों की वास्तविक स्थिति की जांच किए जाने की जरूरत है। आरोप है कि निरीक्षण या फोटो भेजने के समय कुछ लोगों को बुलाकर बैठा दिया जाता है और तस्वीरें खींचकर रिकॉर्ड पूरा कर दिया जाता है।
ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या लाइब्रेरी का उद्देश्य सिर्फ फोटो खिंचवाना है या वास्तव में गांव के युवाओं को पढ़ने का अवसर देना?
प्रधान और जिम्मेदारों की भूमिका पर भी सवाल
स्थानीय स्तर पर लाइब्रेरी संचालन में ग्राम पंचायत और संबंधित जिम्मेदारों की भूमिका भी सवालों के घेरे में बताई जा रही है। यदि वास्तव में फोटोशूट के लिए लोगों को जबरन बैठाया जा रहा है तो यह न केवल सरकारी योजना की मंशा के विपरीत होगा, बल्कि उन विद्यार्थियों के साथ भी अन्याय होगा जिनके भविष्य को बेहतर बनाने के नाम पर सरकारी धन खर्च किया जा रहा है।
उज्ज्वल भविष्य की कामना करने वाले जिम्मेदारों को यदि लाइब्रेरी सिर्फ तस्वीरों में चलानी है तो फिर उन तस्वीरों का ‘इनाम’ आखिर किसे दिया जाना चाहिए? यह सवाल अब ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
जांच हुई तो खुल सकती है ‘फोटोशूट वाली लाइब्रेरी’ की हकीकत
जरूरत है कि विकासखंड बसखारी की लाइब्रेरियों का अचानक और बिना सूचना के भौतिक सत्यापन कराया जाए। लाइब्रेरी में मौजूद पाठकों की संख्या, रजिस्टर में दर्ज उपस्थिति, उपलब्ध पुस्तकों, फर्नीचर, संचालन के समय तथा वास्तविक अध्ययन गतिविधियों का मिलान कराया जाए।
साथ ही यदि फोटो में दिखाई देने वाले लोगों से यह सत्यापित कराया जाए कि वे नियमित पाठक हैं या सिर्फ तस्वीर खिंचवाने के लिए बुलाए गए थे, तो पूरी तस्वीर सामने आ सकती है।
अब देखना यह है कि विकासखंड और जिला स्तर के जिम्मेदार अधिकारी इन आरोपों को गंभीरता से लेते हैं या ‘फोटो वाली लाइब्रेरी’ की तस्वीरों को ही हकीकत मानकर आंखें बंद किए रहते हैं।
    user_Khan Rizwan
    Khan Rizwan
    Farmer अकबरपुर, अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश•
    23 hrs ago
  • आरक्षण था, आरक्षण है और आरक्षण रहेगा!" - Akhilesh Yadav का बड़ा ऐलान | UP Politics
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    आरक्षण था, आरक्षण है और आरक्षण रहेगा!" - Akhilesh Yadav का बड़ा ऐलान | UP Politics
    user_News Update
    News Update
    Local News Reporter बुरहानपुर, आजमगढ़, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • अग्निवीर व्यवस्था खत्म हो, फौज में पक्की नौकरी हो!" - Akhilesh Yadav का केंद्र सरकार पर बड़ा हमला!
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    अग्निवीर व्यवस्था खत्म हो, फौज में पक्की नौकरी हो!" - Akhilesh Yadav का केंद्र सरकार पर बड़ा हमला!
    user_Akash Modanwal
    Akash Modanwal
    Repoter बुरहानपुर, आजमगढ़, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • अतरौलिया: जिस जमीन पर था ट्यूबवेल, वहीं खुल गया ‘पाताल’; बाइक समेत पूरा सामान धरती में समाया #अतरौलिया #तेजापुर #भूधंसाव #जमीनधंसी #ट्यूबवेल #आजमगढ़ #Azamgarh #Atraulia #BreakingNews #ViralNews #LatestNews #UPNews #UPNewsToday #LocalNews #ग्रामीणखबर #किसान #प्रकृतिकहर #हादसा #ViralVideo #NewsUpdate #CMNewsNetwork
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    अतरौलिया: जिस जमीन पर था ट्यूबवेल, वहीं खुल गया ‘पाताल’; बाइक समेत पूरा सामान धरती में समाया
#अतरौलिया #तेजापुर #भूधंसाव #जमीनधंसी #ट्यूबवेल #आजमगढ़ #Azamgarh #Atraulia #BreakingNews #ViralNews #LatestNews #UPNews #UPNewsToday #LocalNews #ग्रामीणखबर #किसान #प्रकृतिकहर #हादसा #ViralVideo #NewsUpdate #CMNewsNetwork
    user_CHANDRESH PATRKAR
    CHANDRESH PATRKAR
    Local News Reporter बुरहानपुर, आजमगढ़, उत्तर प्रदेश•
    15 hrs ago
  • अंबेडकरनगर के शिक्षक राम मिलन गुप्ता को राज्य पुरस्कार | 61 शिक्षकों में तीसरा स्थान अंबेडकरनगर के कंपोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय नसीरपुर छितौना के सहायक अध्यापक राम मिलन गुप्ता का चयन राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए हुआ है। प्रदेश स्तर पर चयनित 61 उत्कृष्ट शिक्षकों में उन्हें तीसरा स्थान मिला है। राम मिलन गुप्ता ने करीब 23 वर्षों के सेवाकाल में विद्यार्थियों की पढ़ाई के साथ-साथ खेल प्रतिभाओं को भी निखारा। उनके मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने राज्य स्तरीय जिम्नास्टिक और हॉकी प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन किया। वहीं 100 से अधिक बच्चों का चयन नवोदय विद्यालय के लिए हुआ है। शिक्षक दिवस पर उन्हें सम्मानित किया जाएगा। अंबेडकरनगर की स्थानीय और महत्वपूर्ण खबरों के लिए चैनल को Subscribe करें। #Ambedkarnagar #RamMilanGupta #TeacherAward #UPNews #AmbedkarnagarNews
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    अंबेडकरनगर के शिक्षक राम मिलन गुप्ता को राज्य पुरस्कार | 61 शिक्षकों में तीसरा स्थान
अंबेडकरनगर के कंपोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय नसीरपुर छितौना के सहायक अध्यापक राम मिलन गुप्ता का चयन राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए हुआ है। प्रदेश स्तर पर चयनित 61 उत्कृष्ट शिक्षकों में उन्हें तीसरा स्थान मिला है।
राम मिलन गुप्ता ने करीब 23 वर्षों के सेवाकाल में विद्यार्थियों की पढ़ाई के साथ-साथ खेल प्रतिभाओं को भी निखारा। उनके मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने राज्य स्तरीय जिम्नास्टिक और हॉकी प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन किया। वहीं 100 से अधिक बच्चों का चयन नवोदय विद्यालय के लिए हुआ है।
शिक्षक दिवस पर उन्हें सम्मानित किया जाएगा।
अंबेडकरनगर की स्थानीय और महत्वपूर्ण खबरों के लिए चैनल को Subscribe करें।
#Ambedkarnagar #RamMilanGupta #TeacherAward #UPNews #AmbedkarnagarNews
    user_APDP NEWS
    APDP NEWS
    पत्रकार Akbarpur, Ambedkar Nagar•
    19 hrs ago
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