✍️ADSP इरफान नासिर खान की कलम से....✍️मेरे माता-पिता ने हमें हमेशा एक ही बात सिखाई – “ईमानदारी से मेहनत करो, बाकी सब ऊपरवाला देख लेगा।” ✍️ADSP इरफान नासिर खान की कलम से....✍️ मेरे प्यारे साथियों, आज मैं आपके सामने किसी बड़े अधिकारी की तरह नहीं, बल्कि उसी गाँव के एक साधारण बेटे की तरह खड़ा हूँ, जिसने इसी मिट्टी में खेलना सीखा, इसी मिट्टी से अपने सपनों को ताकत दी और इसी मिट्टी की खुशबू से अपने जीवन की दिशा पाई। आज का दिन मेरे लिए बहुत भावुक क्षण है। क्योंकि जब इंसान अपनी यात्रा को पीछे मुड़कर देखता है, तो उसे एहसास होता है कि उसकी सफलता केवल उसकी अपनी नहीं होती। उसके पीछे उसके माता-पिता का संघर्ष, परिवार का त्याग, दोस्तों का साथ और गाव समाज का आशीर्वाद होता है। मैं भी एक बिल्कुल साधारण और बहुत ही बदमाश छात्र था। गाँव के घर में मेरा बचपन बीता। मेरे माता-पिता ने हमें हमेशा एक ही बात सिखाई – “ईमानदारी से मेहनत करो, बाकी सब ऊपरवाला देख लेगा।” मेरे जीवन की सबसे बड़ी पूँजी वही संस्कार थे जो मुझे अपने माता-पिता परिवार और संघर्ष के साथियो से मिले। जब मैं छोटा था, तब गाँव में जब भी कोई पुलिस अधिकारी आता था, तो उसे देखकर मेरे मन में भी एक अलग ही भावना पैदा होती थी। जैसा कि सभी लोगों के साथ भी सामन्यतः यही होता है वर्दी की गरिमा, अनुशासन और समाज के लिए खड़े होने का साहस मुझे बहुत प्रेरित करता था। तभी से सपना जन्मा जिसे माँ बाप भाइयों और बहनों ने साकार करने में सक्षम बनाया लेकिन दोस्तों सपना देखना आसान होता है, उसे सच करना आसान नहीं होता। पढ़ाई करते समय भी कई कठिनाइयाँ भटकाव सामने आएं। लेकिन उन परिस्थितियों ने मुझे कमजोर नहीं बनाया, बल्कि मजबूत बनाया। लेकिन जीवन की राह में चुनौतियाँ भी कम नहीं थीं। पहली बार परीक्षा दी — असफलता मिली। दूसरी बार तीसरी बार......— फिर असफलता। उस समय बहुत निराशा हुई। कई लोगों ने कहा कि यह रास्ता आसान नहीं है, और शायद यह मेरे बस की बात भी नहीं है। लेकिन उसी समय मेरे माता-पिता भैया ने और संघर्ष के दोस्तों ( सभी का नाम लेना चाहते हैं लेकिन सम्भव नहीं फिर कभी)ने मुझे संभाला। उन्होंने कहा — “अगर हार मान ली तो कहानी यहीं खत्म हो जाएगी।” उनके शब्द मेरे लिए नई ऊर्जा बन गए। मैंने फिर से मेहनत शुरू की। दिन-रात की मेहनत, संघर्ष और विश्वास ने आखिरकार रंग दिखाया। एक दिन वह भी आया जब मुझे पता चला कि मेरा चयन DSP के पद पर हो गया है। उस दिन की खुशी शब्दों में बयान करना मुश्किल है। जब मैंने पहली बार वर्दी पहनी, तो मेरे मन में गर्व भी था और जिम्मेदारी का एहसास भी। वर्दी केवल सम्मान नहीं देती, बल्कि जिम्मेदारी भी देती है। उस दिन मैंने खुद से एक वादा किया कि मैं इस वर्दी की गरिमा को हमेशा
✍️ADSP इरफान नासिर खान की कलम से....✍️मेरे माता-पिता ने हमें हमेशा एक ही बात सिखाई – “ईमानदारी से मेहनत करो, बाकी सब ऊपरवाला देख लेगा।” ✍️ADSP इरफान नासिर खान की कलम से....✍️ मेरे प्यारे साथियों, आज मैं आपके सामने किसी बड़े अधिकारी की तरह नहीं, बल्कि उसी गाँव के एक साधारण बेटे की तरह खड़ा हूँ, जिसने इसी मिट्टी में खेलना सीखा, इसी मिट्टी से अपने सपनों को ताकत दी और इसी मिट्टी की खुशबू से अपने जीवन की दिशा पाई। आज का दिन मेरे लिए बहुत भावुक क्षण है। क्योंकि जब इंसान अपनी यात्रा को पीछे मुड़कर देखता है, तो उसे एहसास होता है कि उसकी सफलता केवल उसकी अपनी नहीं होती। उसके पीछे उसके माता-पिता का संघर्ष, परिवार का त्याग, दोस्तों का साथ और गाव समाज का आशीर्वाद होता है। मैं भी एक बिल्कुल साधारण और बहुत ही बदमाश छात्र था। गाँव के घर में मेरा बचपन बीता। मेरे माता-पिता ने हमें हमेशा एक ही बात सिखाई – “ईमानदारी से मेहनत करो, बाकी सब ऊपरवाला देख लेगा।” मेरे जीवन की सबसे बड़ी पूँजी वही संस्कार थे जो मुझे अपने माता-पिता परिवार और संघर्ष के साथियो से मिले। जब मैं छोटा था, तब गाँव में जब भी कोई पुलिस अधिकारी आता था, तो उसे देखकर मेरे मन में भी एक अलग ही भावना पैदा होती थी। जैसा कि सभी लोगों के साथ भी सामन्यतः यही होता है वर्दी की गरिमा, अनुशासन और समाज के लिए खड़े होने का साहस मुझे बहुत प्रेरित करता था। तभी से सपना जन्मा जिसे माँ बाप भाइयों और बहनों ने साकार करने में सक्षम बनाया लेकिन दोस्तों सपना देखना आसान होता है, उसे सच करना आसान नहीं होता। पढ़ाई करते समय भी कई कठिनाइयाँ भटकाव सामने आएं। लेकिन उन परिस्थितियों ने मुझे कमजोर नहीं बनाया, बल्कि मजबूत बनाया। लेकिन जीवन की राह में चुनौतियाँ भी कम नहीं थीं। पहली बार परीक्षा दी — असफलता मिली। दूसरी बार तीसरी बार......— फिर असफलता। उस समय बहुत निराशा हुई। कई लोगों ने कहा कि यह रास्ता आसान नहीं है, और शायद यह मेरे बस की बात भी नहीं है। लेकिन उसी समय मेरे माता-पिता भैया ने और संघर्ष के दोस्तों ( सभी का नाम लेना चाहते हैं लेकिन सम्भव नहीं फिर कभी)ने मुझे संभाला। उन्होंने कहा — “अगर हार मान ली तो कहानी यहीं खत्म हो जाएगी।” उनके शब्द मेरे लिए नई ऊर्जा बन गए। मैंने फिर से मेहनत शुरू की। दिन-रात की मेहनत, संघर्ष और विश्वास ने आखिरकार रंग दिखाया। एक दिन वह भी आया जब मुझे पता चला कि मेरा चयन DSP के पद पर हो गया है। उस दिन की खुशी शब्दों में बयान करना मुश्किल है। जब मैंने पहली बार वर्दी पहनी, तो मेरे मन में गर्व भी था और जिम्मेदारी का एहसास भी। वर्दी केवल सम्मान नहीं देती, बल्कि जिम्मेदारी भी देती है। उस दिन मैंने खुद से एक वादा किया कि मैं इस वर्दी की गरिमा को हमेशा
- Post by SASHAKT BHARAT NEWS181
- Gill Smart Gorakhpur branch se Abdul Rahman / call . WhatsApp +95294654201
- मेरे विद्यालय के सामनें एक गरीब🙎♂️बालक जो हमारा प्यारा🤝मित्र है,वह अपने दिल की बात करते हुए होली में अपनें लिए पठानी सूट पहननें की मांग की जिसको मै मना नहीं कर सका और उसकी मांग की पूर्ति की।👍 🛕भगवान भोलेनाथ जी🙏एवं आप लोगों का 🫳आर्शिवाद बालक मित्र पर बना रहे और मै उसके दिल की हर मुराद पूरा करता रहूं।👏2
- बलरामपुर में करीब 20 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद एक बार फिर भव्य ‘बलरामपुर महोत्सव’ का आयोजन1
- बस्ती से माननीय सांसद श्री राम प्रसाद चौधरी जी ने बेरोज़गारी के मुद्दे को लेकर सदन मे अपनी बात को लोकसभा सदन मे रखा ।1
- बस्ती/लखनऊ | अजीत मिश्रा (खोजी) उत्तर प्रदेश में सुशासन का दम भरने वाली सरकार की नाक के नीचे जो हुआ, उसने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ और जनसेवा के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। जनता की समस्याओं को सुनने के लिए बनाई गई '1076 मुख्यमंत्री हेल्पलाइन' आज खुद वेंटिलेटर पर नजर आ रही है। विडंबना देखिए, जो बेटियां दूसरों की शिकायतें दर्ज कर उन्हें न्याय दिलाती थीं, आज जब उन्होंने अपने हक के लिए आवाज उठाई, तो उन्हें न्याय की जगह खाकी की 'बदसलूकी' मिली। सड़कों पर घसीटी गईं 'शक्ति' स्वरूपा बेटियां राजधानी की सड़कों से आई तस्वीरें विचलित करने वाली हैं। अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही महिला कर्मचारियों को यूपी पुलिस ने जिस तरह से खदेड़ा और उनके साथ धक्का-मुक्की की, वह शर्मनाक है। क्या 15 हजार रुपये वेतन और 50 मिनट के ब्रेक की मांग करना इतना बड़ा अपराध है कि उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया जाए? मिशन शक्ति के विज्ञापनों पर करोड़ों खर्च करने वाली सरकार को अपनी इन बेटियों का दर्द क्यों नहीं दिख रहा? 1076: भरोसे का कत्ल और 'जाली' रिपोर्ट का खेल सूत्रों की मानें तो 1076 हेल्पलाइन अब केवल खानापूर्ति का केंद्र बनकर रह गई है। एक तरफ जनता का इस हेल्पलाइन से भरोसा पहले ही उठ चुका है क्योंकि शिकायतों पर जमीनी कार्रवाई के बजाय 'जाली रिपोर्ट' लगाकर फाइलें बंद कर दी जाती हैं। अब इस विभाग के कर्मचारियों का भी सिस्टम से मोहभंग हो गया है। जब विभाग के भीतर ही शोषण का बोलबाला हो, तो वे जनता को क्या राहत दिलाएंगे? महंगाई के दौर में 15 हजार के लिए 'जंग' आज के दौर में जहां महंगाई आसमान छू रही है, वहां 15 हजार रुपये की मामूली तनख्वाह के लिए इन लड़कियों को सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। 10-10 घंटे की शिफ्ट और नाममात्र का ब्रेक—यह आधुनिक बंधुआ मजदूरी नहीं तो और क्या है? प्रशासन की यह तानाशाही बता रही है कि अपराध और भ्रष्टाचार का घड़ा अब भर चुका है और यह कभी भी फूट सकता है। सवाल: क्या मुख्यमंत्री तक इन बेटियों की आवाज पहुंचने से पहले ही पुलिस के दम पर दबा दी जाएगी? 'जाली रिपोर्ट' के खेल में शामिल अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी? क्या यही है उत्तर प्रदेश का 'महिला सशक्तिकरण'? प्रशासन को समझना होगा कि लाठी के दम पर आवाजें दबाई जा सकती हैं, लेकिन असंतोष की आग को नहीं बुझाया जा सकता।1
- 🙏👍1
- नौकरी दिलाने के नाम पर 7.80 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का भांडाफोड़, दो गिरफ्तार।1
- बलरामपुर जिले के हुसैनाबाद क्षेत्र के अंतर्गत पांचूड़ीह गांव में आज एक बड़ा हादसा हो गया। गांव के एक किसान की खड़ी फसल में अचानक भीषण आग लग गई, जिससे पूरी फसल जलकर राख हो गई। बताया जा रहा है कि आग इतनी तेज थी कि देखते ही देखते पूरा खेत इसकी चपेट में आ गया। स्थानीय लोगों ने आग बुझाने की काफी कोशिश की, लेकिन आग पर काबू पाना मुश्किल हो गया। इस हादसे में किसान को भारी नुकसान हुआ है। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका है। 👉 प्रशासन से मुआवजे की मांग की जा रही है।1