पीरो में सर्टिफिकेट के खेल में फंसा एमएलसी चुनाव: वोट के बदले कागज, मैदान में दिखी नई चाल! भोजपुर-बक्सर एमएलसी चुनाव में मतदान की तिथि नजदीक आते ही पीरो में सियासी सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है। चुनावी मैदान में प्रत्याशियों के बीच जीत की होड़ अब नए-नए हथकंडों के सहारे और भी दिलचस्प होती जा रही है। गुरुवार की दोपहर 3:00 के करीब एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे चुनावी माहौल में हलचल मचा दी है। सूत्रों के अनुसार, कुछ प्रत्याशी वोट सुनिश्चित करने के लिए प्रतिनिधियों के मूल सर्टिफिकेट अपने पास रखवा रहे हैं और इसे जीत का पक्का आधार मान रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि सर्टिफिकेट जमा करवाने वाले प्रतिनिधि अब उनके “पक्के वोटर” बन चुके हैं। हालांकि, दूसरी ओर स्थानीय जनप्रतिनिधि भी कम चालाक नहीं दिख रहे हैं। कई वार्ड सदस्यों ने इसका तोड़ निकालते हुए रंगीन फोटोकॉपी का सहारा ले लिया है। वे अलग-अलग प्रत्याशियों को सर्टिफिकेट की कॉपी देकर सभी को संतुष्ट करने में जुटे हैं, ताकि किसी को नाराज न करना पड़े। इस अनोखे “सर्टिफिकेट गेम” को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है। राजनीतिक जानकार इसे चुनावी नैतिकता पर सवाल खड़ा करने वाला नया ट्रेंड मान रहे हैं। वहीं आम जनता भी इस पूरे घटनाक्रम को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं कर रही है। अब देखना दिलचस्प होगा कि मतदान के दिन यह “कागजी रणनीति” किस प्रत्याशी के लिए कितनी कारगर साबित होती है। फिलहाल, भोजपुर-बक्सर एमएलसी चुनाव में यह नया पैंतरा चर्चा का सबसे बड़ा विषय बना हुआ है।
पीरो में सर्टिफिकेट के खेल में फंसा एमएलसी चुनाव: वोट के बदले कागज, मैदान में दिखी नई चाल! भोजपुर-बक्सर एमएलसी चुनाव में मतदान की तिथि नजदीक आते ही पीरो में सियासी सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है। चुनावी मैदान में प्रत्याशियों के बीच जीत की होड़ अब नए-नए हथकंडों के सहारे और भी दिलचस्प होती जा रही है। गुरुवार की दोपहर 3:00 के करीब एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे चुनावी माहौल में हलचल मचा दी है। सूत्रों के अनुसार, कुछ प्रत्याशी वोट सुनिश्चित करने के लिए प्रतिनिधियों के मूल सर्टिफिकेट अपने पास रखवा रहे हैं और इसे जीत का पक्का आधार मान रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि सर्टिफिकेट जमा करवाने वाले प्रतिनिधि अब उनके “पक्के वोटर” बन चुके हैं। हालांकि, दूसरी ओर स्थानीय जनप्रतिनिधि भी कम चालाक नहीं दिख रहे हैं। कई वार्ड सदस्यों ने इसका तोड़ निकालते हुए रंगीन फोटोकॉपी का सहारा ले लिया है। वे अलग-अलग प्रत्याशियों को सर्टिफिकेट की कॉपी देकर सभी को संतुष्ट करने में जुटे हैं, ताकि किसी को नाराज न करना पड़े। इस अनोखे “सर्टिफिकेट गेम” को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है। राजनीतिक जानकार इसे चुनावी नैतिकता पर सवाल खड़ा करने वाला नया ट्रेंड मान रहे हैं। वहीं आम जनता भी इस पूरे घटनाक्रम को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं कर रही है। अब देखना दिलचस्प होगा कि मतदान के दिन यह “कागजी रणनीति” किस प्रत्याशी के लिए कितनी कारगर साबित होती है। फिलहाल, भोजपुर-बक्सर एमएलसी चुनाव में यह नया पैंतरा चर्चा का सबसे बड़ा विषय बना हुआ है।
- गड़हनी सीएचसी का औचक निरीक्षण: ‘चमकी को धमकी’ और कालाजार उन्मूलन पर सख्त निर्देश, लापरवाही पर जीरो टॉलरेंस जिले में बढ़ती गर्मी और स्वास्थ्य विभाग के अलर्ट के बीच गुरुवार को दोपहर 3 बजे के करीब गड़हनी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में उस समय हड़कंप मच गया, जब जिला मलेरिया अधिकारी (डीएमओ) भोजपुर अचानक निरीक्षण के लिए पहुंच गए। औचक निरीक्षण के दौरान उन्होंने ‘चमकी को धमकी’ अभियान और कालाजार उन्मूलन कार्यक्रम की जमीनी हकीकत को परखा और स्वास्थ्य कर्मियों को कड़े निर्देश दिए। निरीक्षण का फोकस खासतौर पर चमकी बुखार से बचाव को लेकर चल रहे जागरूकता अभियान पर रहा। डीएमओ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गांव-गांव तक “तीन धमकियां—खिलायें, जगायें और अस्पताल ले जायें” का संदेश हर हाल में पहुंचना चाहिए। उन्होंने आशा और एएनएम कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर अभिभावकों को जागरूक करने का निर्देश दिया, ताकि किसी भी बच्चे को समय पर इलाज मिल सके और जान बचाई जा सके। कालाजार उन्मूलन कार्यक्रम की समीक्षा के दौरान अधिकारी ने डोजियर, मरीजों के फॉलो-अप और दवा वितरण की व्यवस्था की बारीकी से जांच की। रिकॉर्ड संतोषजनक पाए गए, लेकिन उन्होंने साफ चेतावनी दी कि डेटा अपडेट में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अस्पताल में दवाओं की उपलब्धता को लेकर भी डीएमओ ने सख्ती दिखाई। ओआरएस, एंटी-मलेरिया दवाएं और चमकी बुखार से संबंधित जरूरी दवाओं का भौतिक सत्यापन किया गया। उन्होंने निर्देश दिया कि किसी भी स्थिति में दवाओं की कमी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि लापरवाही सीधे मरीजों की जिंदगी पर असर डालती है। निरीक्षण के दौरान प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक और प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरक भी मौजूद रहे। डीएमओ ने सभी स्वास्थ्यकर्मियों को निर्देशित करते हुए कहा कि अस्पताल में आने वाले हर बुखार मरीज की गंभीरता से जांच की जाए और क्षेत्र में सक्रिय सर्वे के माध्यम से संदिग्ध मरीजों की पहचान तेज की जाए। इसके साथ ही 102 एम्बुलेंस सेवा और आपातकालीन बेड की स्थिति को हमेशा दुरुस्त रखने का भी निर्देश दिया गया, ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटने में देरी न हो।1
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण से पहले बिहार को मिली 'सौगात' पर चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने तंज कसा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बिहार ने उन्हें राजा बनाया है, तो सिर्फ अरवा-उसीना चावल नहीं बल्कि विकास योजनाएं क्यों नहीं दी गईं।1
- रोहतास के नटवार थाना क्षेत्र में शादी के महज एक साल बाद एक नवविवाहिता ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतका के मायके वालों ने ससुराल पक्ष पर प्रताड़ना का आरोप लगाया है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पति और सास को हिरासत में लेकर जांच शुरू कर दी है।2
- आरा में मोटरसाइकिल और ट्रैक्टर की टक्कर में एक युवक की जान चली गई। इस दर्दनाक हादसे के बाद मृतक के परिजनों ने सड़क जाम कर जमकर हंगामा किया, जिससे इलाके में तनाव बढ़ गया।1
- बिहार के आरा-बक्सर MLC उपचुनाव के लिए महागठबंधन ने अपनी रणनीति तेज कर दी है। भाकपा माले ने आज संयुक्त उम्मीदवार सोनू राय के समर्थन में जन-प्रतिनिधि कन्वेंशन आयोजित किया।1
- रोहतास के काराकाट में श्रीलक्ष्मी नारायण महायज्ञ और हनुमंत प्राण-प्रतिष्ठा से पहले भव्य कलश शोभायात्रा निकाली गई। श्री जीयर स्वामी जी महाराज के सानिध्य में हाथी, घोड़े और ऊंटों संग हजारों श्रद्धालु भक्ति में सराबोर दिखे। इस आयोजन से पूरे क्षेत्र में धार्मिक उत्साह और आध्यात्मिक उल्लास का अद्भुत वातावरण बन गया।2
- भोजपुर के आरा में एसपीपी पब्लिक स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहा है। यह स्कूल 12 वर्षों से सीबीएसई पैटर्न पर कम फीस में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देकर अभिभावकों की पहली पसंद बना हुआ है, साथ ही गरीब छात्रों को विशेष सुविधाएँ भी प्रदान करता है।1
- पीरो में सर्टिफिकेट के खेल में फंसा एमएलसी चुनाव: वोट के बदले कागज, मैदान में दिखी नई चाल! भोजपुर-बक्सर एमएलसी चुनाव में मतदान की तिथि नजदीक आते ही पीरो में सियासी सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है। चुनावी मैदान में प्रत्याशियों के बीच जीत की होड़ अब नए-नए हथकंडों के सहारे और भी दिलचस्प होती जा रही है। गुरुवार की दोपहर 3:00 के करीब एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे चुनावी माहौल में हलचल मचा दी है। सूत्रों के अनुसार, कुछ प्रत्याशी वोट सुनिश्चित करने के लिए प्रतिनिधियों के मूल सर्टिफिकेट अपने पास रखवा रहे हैं और इसे जीत का पक्का आधार मान रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि सर्टिफिकेट जमा करवाने वाले प्रतिनिधि अब उनके “पक्के वोटर” बन चुके हैं। हालांकि, दूसरी ओर स्थानीय जनप्रतिनिधि भी कम चालाक नहीं दिख रहे हैं। कई वार्ड सदस्यों ने इसका तोड़ निकालते हुए रंगीन फोटोकॉपी का सहारा ले लिया है। वे अलग-अलग प्रत्याशियों को सर्टिफिकेट की कॉपी देकर सभी को संतुष्ट करने में जुटे हैं, ताकि किसी को नाराज न करना पड़े। इस अनोखे “सर्टिफिकेट गेम” को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है। राजनीतिक जानकार इसे चुनावी नैतिकता पर सवाल खड़ा करने वाला नया ट्रेंड मान रहे हैं। वहीं आम जनता भी इस पूरे घटनाक्रम को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं कर रही है। अब देखना दिलचस्प होगा कि मतदान के दिन यह “कागजी रणनीति” किस प्रत्याशी के लिए कितनी कारगर साबित होती है। फिलहाल, भोजपुर-बक्सर एमएलसी चुनाव में यह नया पैंतरा चर्चा का सबसे बड़ा विषय बना हुआ है।1