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मोहम्मदी क्षेत्र मे ओलो के साथ बारिश शुरू किसानो की फसलों का भारी नुकसान लगातार ओले बरस रहे हैं जनजीवन आवागमन प्रभावित
Lakhimpur Kheri दस्तक
मोहम्मदी क्षेत्र मे ओलो के साथ बारिश शुरू किसानो की फसलों का भारी नुकसान लगातार ओले बरस रहे हैं जनजीवन आवागमन प्रभावित
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- लखीमपुर खीरी संपादक महेश कुमार पांडे धौरहरा खीरी नगर पंचायत व तहसील धौरहरा अमेठी रोड पर स्थित माननीय काशीराम कॉलोनी पानी की टंकी ध्वस्त होने के कारण गरीब मजलूम व्यक्तियों को स्वच्छ जल की कोई व्यवस्था नहीं है प्रशासनिक अधिकारियों को नहीं दिख रही ध्वस्त टंकियां सरकार के करोड़ों रुपए को बंदर किया जा रहा है1
- लखीमपुर खीरी। बज़्म फ़रोगे अदब की जानिब से हर माह आयोजित होने वाले तरही मुशायरों की श्रृंखला में 20वां मुशायरा बेहद भव्यता और अदबी माहौल के साथ सम्पन्न हुआ। इस मुशायरे की सदारत पूर्व सांसद एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व गृह राज्य मंत्री जफर अली नकवी ने की, जबकि मेहमान-ए-खुसूसी के तौर पर वरिष्ठ शायर मस्त हफीज़ रहमानी ने शिरकत की। अपने सदारती खिताब में जफर अली नकवी ने एक खूबसूरत शेर के साथ अपनी बात की शुरुआत करते हुए कहा, "महफिल तेरी, साकी तेरा — आंखें मेरी, बाकी तेरा" उन्होंने कहा कि साहित्यकार हर दौर में समाज और सत्ता को आईना दिखाने का काम करते रहे हैं। यह वही तबका है जो बेखौफ होकर हुकूमत से सवाल करता है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे समाज की बेहतरी के लिए अपनी कलम को मजबूत करें और सही दिशा देने का कार्य करें। मेहमान-ए-खुसूसी मस्त हफीज़ रहमानी ने कहा कि बज़्म फ़रोगे अदब के साथ कंधे से कंधा मिलाकर बज़्म उर्दू सीतापुर भी खड़ी है। उन्होंने अपने कलाम के जरिए नसीहत देते हुए कहा, "यूँ ही जलोगे तो जल जाएगा बदन सारा, चिराग़ बन के जलोगे तो रौशनी होगी" बज़्म फ़रोगे अदब के सदर आमिर रज़ा पम्मी ने कहा कि कस्बा खीरी हमेशा से अदब का गहवारा रहा है। उन्होंने बताया कि यह संस्था पिछले करीब 50 वर्षों से अदब की शमा रोशन किए हुए है और बुजुर्गों की परंपरा को आगे बढ़ाने का काम कर रही है। मुशायरे का आगाज़ मौलाना जावेद अख्तर ने किया, जबकि निज़ामत इलियास चिश्ती ने बेहतरीन अंदाज़ में की। मुशायरे में डॉ तनवीर इकबाल बिस्वानी, डॉ अफजल, उमर हनीफ, खुश्तर रहमानी, मंसूर माहवार, डॉ एहराज अरमान, नदीम सीतापुरी, रिजवान मारूफ, यासीन इब्ने उमर, नफीस वारसी, बशर हरगावी, शहबाज़ हैरत चिश्ती, डॉ एखलाक, मंजर यासीन, सैयद सलमान अहमद रिजवी, अय्यूब अंसारी, इमरान रज़ा बरकाती, दिलशाद लकवी, हसन अंसारी, आसिफ अंसारी, जावेद अंसारी और रिजवान अंसारी सहित कई शायरों ने अपने शानदार कलाम पेश कर महफिल को देर रात तक सजाए रखा। इस मौके पर समाजवादी पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष अनुराग पटेल सहित सैकड़ों श्रोता मौजूद रहे। मुशायरा देर रात तक कामयाबी के साथ जारी रहा और अदबी माहौल में शानदार तरीके से सम्पन्न हुआ।1
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- कोतवाली सदर क्षेत्रांतर्गत स्वयं के द्वारा गोली लगने से युवक की मृत्यु के संबंध में सहायक पुलिस अधीक्षक/क्षेत्राधिकारी सदर, श्री विवेक कुमार तिवारी की बाइट*1
- कुदरत का कहर: मोहम्मदी खीरी में आसमानी आफत ने मचाई तबाही, ओलों की मार से कराह उठा अन्नदाता! मोहम्मदी-खीरी। इंसान अपनी प्लानिंग करता रह गया और ऊपर वाले ने अपनी इबारत लिख दी। रविवार को मोहम्मदी और आसपास के इलाकों में मौसम ने ऐसा खौफनाक यू-टर्न लिया कि खुशहाली की उम्मीद लगाए बैठे किसानों के चेहरों पर हवाइयां उड़ने लगीं। चिलचिलाती धूप की जगह अचानक काली घटाओं ने डेरा डाला और देखते ही देखते 'सफेद मौत' यानी ओलों की ऐसी बारिश हुई कि खेतों में खड़ी सोना उगलती फसलें मिट्टी में मिल गईं। तेज आंधी और बारिश का 'डेडली कॉम्बो' दोपहर के वक्त अचानक मौसम का मिजाज बिगड़ा। धूल भरी तेज आंधी ने पूरे इलाके को अपनी आगोश में ले लिया। विजिबिलिटी इतनी कम हो गई कि सड़कों पर गाड़ियों की रफ्तार थम गई। लेकिन असली खेल तो उसके बाद शुरू हुआ। आंधी के साथ आई मूसलाधार बारिश और फिर शुरू हुआ बड़े-बड़े ओलों का तांडव। लगभग आधे घंटे तक गिरे इन ओलों ने मोहम्मदी क्षेत्र के कई गांवों में कुदरत का ऐसा कहर बरपाया कि हर तरफ तबाही के निशान नजर आने लगे। गेहूं की 'सुनहरी उम्मीद' पर फिरा पानी सबसे ज्यादा मार गेहूं की फसल पर पड़ी है। जो फसल पककर तैयार होने की कगार पर थी और जिसे देखकर किसान अपनी बिटिया की शादी या कर्ज चुकाने के सपने बुन रहा था, वो अब जमीन पर बिछी नजर आ रही है। जानकारों की मानें तो: * गेहूं: तेज हवा और ओलों की वजह से दाने झड़ गए हैं और फसल गिर गई है, जिससे उत्पादन में भारी गिरावट तय है। * सरसों: कटी रखी या तैयार सरसों की फलियां टूटकर बिखर गई हैं। * आम और बागवानी: आम के बागों में आए बौर (फूल) और छोटी अमिया को इस आंधी-ओले ने बुरी तरह झकझोर दिया है, जिससे बागवानों को भी लाखों का चूना लगना तय है। सन्नाटे में डूबा अन्नदाता खेतों की मेढ़ पर खड़ा किसान आज बेबस है। मोहम्मदी के प्रभावित गांवों के किसानों का कहना है कि उन्होंने साल भर खून-पसीना एक करके फसल तैयार की थी, लेकिन कुदरत के इस 'मसालेदार' सितम ने उनकी कमर तोड़ दी है। बारिश के कारण खेतों में जलभराव की स्थिति है, जिससे बची-कुची फसल के भी सड़ने का डर सता रहा है। > "ऐसा मंजर पहले कभी नहीं देखा। ओले नहीं गिर रहे थे, लग रहा था जैसे पत्थर बरस रहे हों। अब सरकार से ही मुआवजे की आस है, वरना हम तो बर्बाद हो गए।" — एक स्थानीय किसान > अब सबकी निगाहें शासन और प्रशासन की ओर टिकी हैं। किसानों ने मांग की है कि जल्द से जल्द फसलों के नुकसान का सर्वे कराया जाए और उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए। अगर समय रहते मदद न मिली, तो मोहम्मदी का किसान इस आर्थिक चोट से शायद ही उबर पाए। फिलहाल, आसमान में अभी भी बादल छाए हुए हैं और किसानों की धड़कनें तेज हैं कि कहीं कुदरत का ये गुस्सा दोबारा न फूट पड़े।3
- रिश्वत में नकद नारायण, पेड़ा और सेब- अयोध्या के शेरबहादुर वर्मा के बेटे की जमीनी विवाद में हत्या हो चुकी है निष्पक्ष कार्रवाई के लिए पहली बार लेखपाल ने 5 हजार रूपये वसूले फिर भी आरोपियों के पक्ष में रिपोर्ट लगा दी गयी तहसीलदार से फरियाद की तो तहसीलदार ने 2 किलो पेड़ा और 2 किलो सेब काम कराने के लिए लिए, ये भी दिया ऊपर से 5 हजार "नकद नारायण का भोग" भी कागज में लपेटकर भी लगाया मगर काम फिर भी नही हुआ वर्मा जी अब DM से शिकायत करने पहुंचे है1
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