बरसते पानी में सड़क निर्माण! एमपीआरटीसी और ठेकेदार की मनमानी से करोड़ों रुपये दांव पर, जिम्मेदारों पर उठे सवाल *बरसते पानी में सड़क निर्माण! एमपीआरटीसी और ठेकेदार की मनमानी से करोड़ों रुपये दांव पर, जिम्मेदारों पर उठे सवाल* मनगवां। नेशनल हाईवे-130 पर मनगवां से हनुमना मार्ग में लगातार बारिश के बीच सड़क निर्माण कार्य जारी रहने से निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि एमपीआरटीसी के अधिकारी और संबंधित ठेकेदार बारिश में भी निर्माण कार्य कराकर सरकारी धन की खुली बर्बादी कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों द्वारा इसे "टेंपरेरी कार्य" बताकर उच्च अधिकारियों और प्रशासन को गुमराह किया जा रहा है, जबकि बरसात में किया गया निर्माण भविष्य में सड़क की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। लोगों का आरोप है कि करोड़ों रुपये की लागत से बनने वाली सड़क का कार्य तकनीकी मानकों की अनदेखी कर किया जा रहा है, जिससे सरकारी राशि पानी की तरह बहाई जा रही है क्षेत्रवासियों ने सवाल उठाया है कि आखिर एमपीआरटीसी और संबंधित ठेकेदार को बारिश के दौरान सड़क निर्माण की अनुमति किस आधार पर दी गई। यदि निर्माण कार्य निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं है तो इसकी जिम्मेदारी कौन तय करेगा? स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) तथा संबंधित विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, निर्माण कार्य की गुणवत्ता की तकनीकी जांच करवाने और दोषी अधिकारियों व ठेकेदार के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस मामले पर ध्यान नहीं दिया गया तो सार्वजनिक धन की हानि के साथ-साथ आम जनता को भी भविष्य में खराब सड़क का खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
बरसते पानी में सड़क निर्माण! एमपीआरटीसी और ठेकेदार की मनमानी से करोड़ों रुपये दांव पर, जिम्मेदारों पर उठे सवाल *बरसते पानी में सड़क निर्माण! एमपीआरटीसी और ठेकेदार की मनमानी से करोड़ों रुपये दांव पर, जिम्मेदारों पर उठे सवाल* मनगवां। नेशनल हाईवे-130 पर मनगवां से हनुमना मार्ग में लगातार बारिश के बीच सड़क निर्माण कार्य जारी रहने से निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि एमपीआरटीसी के अधिकारी और संबंधित ठेकेदार बारिश में भी निर्माण कार्य कराकर सरकारी धन की खुली बर्बादी कर रहे हैं। ग्रामीणों का
कहना है कि अधिकारियों द्वारा इसे "टेंपरेरी कार्य" बताकर उच्च अधिकारियों और प्रशासन को गुमराह किया जा रहा है, जबकि बरसात में किया गया निर्माण भविष्य में सड़क की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। लोगों का आरोप है कि करोड़ों रुपये की लागत से बनने वाली सड़क का कार्य तकनीकी मानकों की अनदेखी कर किया जा रहा है, जिससे सरकारी राशि पानी की तरह बहाई जा रही है क्षेत्रवासियों ने सवाल उठाया है कि आखिर एमपीआरटीसी और संबंधित ठेकेदार को बारिश के दौरान सड़क निर्माण की अनुमति किस आधार पर
दी गई। यदि निर्माण कार्य निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं है तो इसकी जिम्मेदारी कौन तय करेगा? स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) तथा संबंधित विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, निर्माण कार्य की गुणवत्ता की तकनीकी जांच करवाने और दोषी अधिकारियों व ठेकेदार के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस मामले पर ध्यान नहीं दिया गया तो सार्वजनिक धन की हानि के साथ-साथ आम जनता को भी भविष्य में खराब सड़क का खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
- गांव की पीड़ा कैमरे में कैद, अब प्रशासन की परीक्षा — प्रधान, सचिव और जिम्मेदार व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल* *पहली ही बारिश में डूबा विकास! जगदीशपुर का रास्ता बना दलदल, वीडियो ने खोली ज़मीनी हकीकत* *गांव की पीड़ा कैमरे में कैद, अब प्रशासन की परीक्षा — प्रधान, सचिव और जिम्मेदार व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल* जगदीशपुर,बारा/प्रयागराज। यमुनानगर क्षेत्र की बारा तहसील अंतर्गत ग्राम सभा जगदीशपुर से सामने आई तस्वीरें किसी प्राकृतिक आपदा की नहीं, बल्कि विकास के उन दावों की हकीकत बयां कर रही हैं जो पहली ही बरसात में पानी- पानी होते दिखाई दे रहे हैं। हल्की बारिश के बाद गांव का प्रमुख आवागमन मार्ग पूरी तरह जलमग्न हो गया। सड़क की पहचान तक मिट गई। चारों ओर कीचड़, पानी और फिसलन का ऐसा आलम है कि पैदल चलना भी किसी जोखिम से कम नहीं। बच्चे स्कूल जाएं तो कैसे, बुजुर्ग निकलें तो किस सहारे और रोजमर्रा के कामकाज के लिए ग्रामीण आखिर किस रास्ते से जाएं? यह सवाल अब पूरे गांव की जुबान पर है। मौके से सामने आया वीडियो स्वयं इस बात की गवाही दे रहा है कि बरसात की शुरुआत में ही हालात इतने भयावह हैं तो यदि लगातार मूसलाधार वर्षा हुई, तब इस गांव की तस्वीर कैसी होगी, इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि रास्ता जलभराव की चपेट में है और ग्रामीणों का आवागमन गंभीर रूप से प्रभावित हो चुका है। यह केवल पानी भरने की घटना नहीं, बल्कि वर्षों से लंबित समस्या की जीवंत तस्वीर है, जो हर बारिश में गांव के लोगों की मुश्किलें बढ़ा देती है। जब यह मामला मीडिया के संज्ञान में आया तो प्रशासन का पक्ष जानने के लिए उपजिलाधिकारी बारा से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन किसी कारणवश उनका मोबाइल स्विच ऑफ मिला। इसके बाद तहसीलदार बारा से वार्ता की गई। तहसीलदार ने स्पष्ट किया कि मामला अभी उनके संज्ञान में नहीं था। उन्होंने भरोसा दिलाया कि शुक्रवार को स्वयं मौके का निरीक्षण कराया जाएगा और जो भी आवश्यक कार्रवाई होगी, वह नियमानुसार सुनिश्चित की जाएगी। इससे ग्रामीणों में उम्मीद जगी है कि अब उनकी वर्षों पुरानी समस्या केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि धरातल पर भी समाधान की दिशा में कदम बढ़ेंगे। इस पूरे घटनाक्रम ने ग्राम पंचायत व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। यदि यह समस्या वर्षों से चली आ रही है तो क्या ग्राम प्रधान ने समय रहते इसकी जानकारी संबंधित विभागों तक पहुंचाई? यदि किसी स्तर पर चूक हुई तो ग्राम पंचायत सचिव ने अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन क्यों नहीं किया। क्या विकास योजनाओं की समीक्षा केवल कागजों तक सीमित रह गई? आखिर वह कौन-सी कड़ी है जहां से व्यवस्था कमजोर पड़ जाती है और उसका खामियाजा हर साल ग्रामीणों को भुगतना पड़ता है? अब गांव के लोगों की निगाहें शुक्रवार पर टिकी हैं। सभी को इंतजार है कि अधिकारी मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का आकलन करें, जिम्मेदारी तय करें और वर्षों से चली आ रही इस समस्या का स्थायी समाधान निकालें। मीडिया भी इस पूरे प्रकरण की हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए है। शुक्रवार को मौके पर जो दिखाई देगा, जो सुना जाएगा और जिस स्तर पर कार्रवाई होगी, वही बिना किसी लाग-लपेट के जनता के सामने रखा जाएगा। क्योंकि कैमरा कभी झूठ नहीं बोलता और पहली ही बरसात में सामने आई यह तस्वीरें अपने आप में बहुत कुछ कह रही हैं।1
- बारा विकसित भारत के दावो के बीच खुले आसमान के नीचे गुजर रही जिंदगी मदरहा रेलवे स्टेशन के आसपास बेघरों की मजबूरी बारा प्रयागराज, एक तरफ सरकार विकसित भारत की बात कर रही है,वहीं बारा तहसील क्षेत्र में आज भी सैकड़ों लोग बुनियादी सुविधाओं के अभाव में खुले आसमान के नीचे जीवन जीने को मजबूर हैं।सबसे बदतर हालत मदरहा रेलवे स्टेशन के आसपास देखने को मिल रही है। यहां पटरी के किनारे, प्लेटफार्म और स्टेशन परिसर के बाहर दर्जनों परिवार टेंट, तिरपाल और प्लास्टिक लगाकर रहते हैं। न पक्का छत, न शौचालय, न पीने के साफ पानी की व्यवस्था।सरकार की योजनाएं हम तक नहीं पहुंची यहां रहने वाले लोगों का कहना है,हम मजदूरी करके पेट पालते हैं। प्रधान और लेखपाल से कई बार आवास के लिए कहा, लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ। बरसात में तिरपाल भी नहीं बचता। बच्चे बीमार पड़ जाते हैं। एक महिला ने बताया, रात में सांप-बिच्छू का डर लगा रहता है। ठंड और गर्मी दोनों में यही खुले में सोना पड़ता है। आधार कार्ड, राशन कार्ड सब है, फिर भी आवास नहीं मिला। विकास के दावे vs जमीनी हकीकत सरकार द्वारा हर गरीब को पक्का मकान देने का दावा किया जाता है। प्रधानमंत्री आवास योजना के बैनर हर जगह लगे हैं। लेकिन मदरसा स्टेशन के आसपास की तस्वीर कुछ और ही कहानी बता रही है। स्थानीय समाजसेवियों का कहना है कि सर्वे में इन परिवारों का नाम ही नहीं चढ़ता। कुछ का नाम है तो पैसा नहीं आता। दलाल बीच में पैसे मांगते हैं। लोगों की मांग तत्काल आवास पात्र बेघरों को पीएम आवास का लाभ तुरंत दिया जाए मूलभूत सुविधा स्टेशन के पास शौचालय, पीने का पानी और बिजली की व्यवस्था हो जांच आवास योजना में हो रही धांधली की जांच हो प्रशासन से सवाल है कि जब रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थान के पास लोग इस तरह रहने को मजबूर हैं तो विकसित भारत का सपना कैसे साकार होगा इस संबंध में बारा एसडीएम और बीडीओ से बात करने का प्रयास किया गया।1
- पहली ही बारिश में डूबी शिक्षा की राह, सेमरी तरहार में दलदल से जूझ रहा बचपन आज ये हाल है, लगातार बारिश हुई तो कैसे पहुंचेगा नौनिहाल? जिम्मेदारों की खामोशी पर उठे तीखे सवाल सेमरी तरहार,बारा/प्रयागराज। यमुनानगर क्षेत्र की बारा तहसील अंतर्गत शंकरगढ़ विकासखंड के ग्राम सभा सेमरी तरहार से सामने आई तस्वीरें विकास के दावों की परतें खोलने के लिए काफी हैं। यहां स्थित प्राथमिक विद्यालय में कक्षा एक से पांच तक पढ़ने वाले मासूम बच्चों के लिए शिक्षा की राह अब सड़क नहीं, बल्कि दलदल में बदल चुकी है। बरसात का मौसम अभी पूरी तरह चरम पर भी नहीं पहुंचा है, लेकिन विद्यालय तक जाने वाली डामर सड़क पहले ही जलभराव और कीचड़ में डूब चुकी है। सड़क जगह-जगह से उखड़ गई है और उस पर भरा पानी किसी तालाब का आभास करा रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि अभी यह स्थिति है, तो लगातार कई दिनों तक मूसलाधार बारिश होने पर इस मार्ग की क्या दशा होगी और मासूम बच्चे विद्यालय तक आखिर कैसे पहुंचेंगे? यह खबर विद्यालय की नहीं, बल्कि विद्यालय तक पहुंचने वाले बदहाल मार्ग की हकीकत बयान कर रही है। छोटे-छोटे बच्चे रोज इसी कीचड़, फिसलन और जलभराव से होकर शिक्षा का दीप जलाने निकलते हैं। हर कदम पर फिसलने और चोटिल होने का खतरा बना रहता है। आखिर बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? क्या किसी मासूम के घायल होने के बाद ही इस सड़क की सुध ली जाएगी? ग्रामीणों का कहना है कि बरसात शुरू होते ही यह मार्ग पूरी तरह बदहाल हो जाता है। जलनिकासी की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं होने से सड़क पर पानी जमा रहता है और आवागमन मुश्किल हो जाता है। यदि आने वाले दिनों में लगातार बारिश हुई, तो यह सड़क पूरी तरह जलमग्न हो सकती है और विद्यालय तक पहुंचना लगभग असंभव हो जाएगा। ऐसे में सबसे अधिक प्रभावित वे मासूम होंगे, जिनके कंधों पर देश का भविष्य टिका है। अब निगाहें जिलाधिकारी प्रयागराज, मुख्य विकास अधिकारी, लोक निर्माण विभाग, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग, खंड विकास अधिकारी शंकरगढ़, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी तथा संबंधित जनप्रतिनिधियों पर टिकी हैं। आवश्यकता केवल निरीक्षण की नहीं, बल्कि तत्काल सड़क के पुनर्निर्माण और प्रभावी जलनिकासी व्यवस्था सुनिश्चित करने की है। क्योंकि विकास के दावों की असली परीक्षा राजधानी के मंचों पर नहीं, बल्कि सेमरी तरहार जैसे गांवों की उन्हीं सड़कों पर होती है, जहां आज भी मासूम बच्चों का भविष्य बारिश के पानी और दलदल के बीच फंसकर रह गया है।1
- सिर कूचकर युवक की निर्मम हत्या, खेत में मिला शव; मेजा के बैरहना कोहडार में सनसनी मेजा, प्रयागराज। मेजा थाना क्षेत्र के बैरहना कोहडार गांव में गुरुवार सुबह दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई। गांव निवासी प्रेमचन्द्र (52) पुत्र ब्रिजनारायण की सिर कूचकर निर्मम हत्या कर दी गई। उनका रक्तरंजित शव उनके ही खेत में पड़ा मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए और क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही मेजा पुलिस तत्काल घटनास्थल पर पहुंची और पूरे इलाके की घेराबंदी कर जांच शुरू कर दी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भरने के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। घटनास्थल से महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए गए हैं तथा फोरेंसिक टीम ने भी मौके का निरीक्षण कर आवश्यक नमूने एकत्र किए। पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर घटना की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। प्रथम दृष्टया मामला पुरानी रंजिश अथवा अन्य विवाद से जुड़ा माना जा रहा है, हालांकि पुलिस सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। घटना के बाद मृतक के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, जबकि गांव में तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। एसीपी मेजा बृजेश पाठक ने बताया कि पीड़ित परिजनों की तहरीर के आधार पर दो आरोपियों को हिरासत में लेकर गहन पूछताछ की जा रही है। दोनों के विरुद्ध संबंधित धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है। मामले में अग्रिम विधिक कार्रवाई प्रचलित है। पुलिस सभी पहलुओं की गहराई से जांच कर रही है और जल्द ही घटना का खुलासा कर आरोपियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। सिर कूचकर युवक की निर्मम हत्या, खेत में मिला शव; मेजा के बैरहना कोहडार में सनसनी मेजा, प्रयागराज। मेजा थाना क्षेत्र के बैरहना कोहडार गांव में गुरुवार सुबह दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई। गांव निवासी प्रेमचन्द्र (52) पुत्र ब्रिजनारायण की सिर कूचकर निर्मम हत्या कर दी गई। उनका रक्तरंजित शव उनके ही खेत में पड़ा मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए और क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही मेजा पुलिस तत्काल घटनास्थल पर पहुंची और पूरे इलाके की घेराबंदी कर जांच शुरू कर दी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भरने के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। घटनास्थल से महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए गए हैं तथा फोरेंसिक टीम ने भी मौके का निरीक्षण कर आवश्यक नमूने एकत्र किए। पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर घटना की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। प्रथम दृष्टया मामला पुरानी रंजिश अथवा अन्य विवाद से जुड़ा माना जा रहा है, हालांकि पुलिस सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। घटना के बाद मृतक के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, जबकि गांव में तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। एसीपी मेजा बृजेश पाठक ने बताया कि पीड़ित परिजनों की तहरीर के आधार पर दो आरोपियों को हिरासत में लेकर गहन पूछताछ की जा रही है। दोनों के विरुद्ध संबंधित धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है। मामले में अग्रिम विधिक कार्रवाई प्रचलित है। पुलिस सभी पहलुओं की गहराई से जांच कर रही है और जल्द ही घटना का खुलासा कर आरोपियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।1