मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आनन-फानन में की जा रही पदोन्नति की प्रक्रिया के कारण मुरैना जिले में शिक्षक सी. आर. (C. R.) फॉर्म बनवाने के लिए परेशान होकर भटक रहे हैं। संकुल प्राचार्यों द्वारा सोशल मीडिया ग्रुपों पर दो दिन के भीतर वर्ष 2019 से 2025 तक के सी. आर. फॉर्म आवश्यक रूप से भरकर संकुल केंद्रों पर जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। इतनी कम समय सीमा मिलने से शिक्षकों में हड़कंप मच गया है, और वे इस दुविधा में हैं कि फॉर्म कहाँ जमा करें। शिक्षकों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि पदोन्नति प्रक्रिया में इस बात के स्पष्ट निर्देश नहीं दिए गए हैं कि स्थानांतरण (ट्रांसफर) होकर आए शिक्षक अपने सी. आर. फॉर्म वर्तमान संकुल से बनवाएं या फिर पूर्व में पदस्थ संकुल से। मुरैना जिले के बानमोर सहित कई संकुल केंद्रों पर जब शिक्षक फॉर्म भरकर ले जा रहे हैं, तो संकुल प्राचार्य यह कहकर उन्हें लौटा रहे हैं कि वे पूर्व में पदस्थ जिले या संकुल से ही इसे बनवाकर जमा करें। शिक्षकों का कहना है कि इतने कम समय में दूसरे जिलों या संकुलों से फॉर्म पूर्ण कराकर जमा करना बिल्कुल भी संभव नहीं है। इसके अलावा, पूर्व में जमा मूल सी. आर. फॉर्म की प्रतियां पहले ही शिक्षकों की क्रमोन्नति के लिए संकुल केंद्रों पर जमा की जा चुकी हैं और अब प्राचार्यों द्वारा फोटोकॉपी को मान्य नहीं किया जा रहा है। इस संबंध में जब संवाददाता एस. सी. रावत ने बानमोर संकुल प्राचार्य नरेश बाबू गोयल से जानकारी चाही, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वे इसे क्यों जारी करेंगे। उनका कहना था कि जो शिक्षक जहां पहले पदस्थ थे, वहीं से सी. आर. फॉर्म बनवाकर जमा करें। जब उनसे पूछा गया कि क्या अन्य जिलों से ट्रांसफर होकर आए कर्मचारी महज दो दिन में यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं, तो उन्होंने कहा कि उनके पास इस बारे में कोई स्पष्ट निर्देश नहीं हैं और निर्देश मिलते ही वे इसे बनाएंगे, जिसके बाद उन्होंने फोन बंद कर दिया। शिक्षकों ने मुरैना के जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। शिक्षकों का आग्रह है कि संकुल प्राचार्यों को निर्देशित किया जाए कि यदि शिक्षक पूर्व में पदस्थ संकुलों से बने सी. आर. फॉर्म की फोटोकॉपी भी जमा करते हैं, तो उसे स्वीकार किया जाए। इसके आधार पर वर्तमान संकुल प्राचार्य ओरिजिनल फॉर्म तैयार कर वरिष्ठ कार्यालय भेजें, ताकि कोई भी शिक्षक पदोन्नति की प्रक्रिया से वंचित न रहे और अधिकारियों की अनदेखी के कारण उनका नुकसान न हो।
मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आनन-फानन में की जा रही पदोन्नति की प्रक्रिया के कारण मुरैना जिले में शिक्षक सी. आर. (C. R.) फॉर्म बनवाने के लिए परेशान होकर भटक रहे हैं। संकुल प्राचार्यों द्वारा सोशल मीडिया ग्रुपों पर दो दिन के भीतर वर्ष 2019 से 2025 तक के सी. आर. फॉर्म आवश्यक रूप से भरकर संकुल केंद्रों पर जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। इतनी कम समय सीमा मिलने से शिक्षकों में हड़कंप मच गया है, और वे इस दुविधा में हैं कि फॉर्म कहाँ जमा करें। शिक्षकों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि पदोन्नति प्रक्रिया में इस बात के स्पष्ट निर्देश नहीं दिए गए हैं कि स्थानांतरण (ट्रांसफर) होकर आए शिक्षक अपने सी. आर. फॉर्म वर्तमान संकुल से बनवाएं या फिर पूर्व में पदस्थ संकुल से। मुरैना जिले के बानमोर सहित कई संकुल केंद्रों पर जब शिक्षक फॉर्म भरकर ले जा रहे हैं, तो संकुल प्राचार्य यह कहकर उन्हें लौटा रहे हैं कि वे पूर्व में पदस्थ जिले या संकुल से ही इसे बनवाकर जमा करें। शिक्षकों का कहना है कि इतने कम समय में दूसरे जिलों या संकुलों से फॉर्म पूर्ण कराकर जमा करना बिल्कुल भी संभव नहीं है। इसके अलावा, पूर्व में जमा मूल सी. आर. फॉर्म की प्रतियां पहले ही शिक्षकों की क्रमोन्नति के लिए संकुल केंद्रों पर जमा की जा चुकी हैं और अब प्राचार्यों द्वारा फोटोकॉपी को मान्य नहीं किया जा रहा है। इस संबंध में जब संवाददाता एस. सी. रावत ने बानमोर संकुल प्राचार्य नरेश बाबू गोयल से जानकारी चाही, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वे इसे क्यों जारी करेंगे। उनका कहना था कि जो शिक्षक जहां पहले पदस्थ थे, वहीं से सी. आर. फॉर्म बनवाकर जमा करें। जब उनसे पूछा गया कि क्या अन्य जिलों से ट्रांसफर होकर आए कर्मचारी महज दो दिन में यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं, तो उन्होंने कहा कि उनके पास इस बारे में कोई स्पष्ट निर्देश नहीं हैं और निर्देश मिलते ही वे इसे बनाएंगे, जिसके बाद उन्होंने फोन बंद कर दिया। शिक्षकों ने मुरैना के जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। शिक्षकों का आग्रह है कि संकुल प्राचार्यों को निर्देशित किया जाए कि यदि शिक्षक पूर्व में पदस्थ संकुलों से बने सी. आर. फॉर्म की फोटोकॉपी भी जमा करते हैं, तो उसे स्वीकार किया जाए। इसके आधार पर वर्तमान संकुल प्राचार्य ओरिजिनल फॉर्म तैयार कर वरिष्ठ कार्यालय भेजें, ताकि कोई भी शिक्षक पदोन्नति की प्रक्रिया से वंचित न रहे और अधिकारियों की अनदेखी के कारण उनका नुकसान न हो।
- ग्वालियर के मुरार स्थित सिद्धेश्वर नगर के आसमानी माता मंदिर बाथम में 12 जुलाई को भव्य आसमानी माता मेले का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम का नेतृत्व कर रहे अध्यक्ष मोनू भारत सिंह बाथम ने सभी समाजबंधुओं और मित्रगणों से अधिक से अधिक संख्या में आयोजन स्थल पर पहुंचने की अपील की है। उन्होंने सभी से माता रानी का आशीर्वाद लेने और इस मेले के माध्यम से समाज में भाईचारे, एकता और श्रद्धा का प्रतीक बनने का आह्वान किया है।1
- मुरैना के जौरा में सेवानिवृत्ति के बाद पहली बार अपने गृहनगर पहुंचे देश के पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश जितेंद्र माहेश्वरी का शनिवार को ऐतिहासिक और अभूतपूर्व स्वागत किया गया। न्यू बस स्टैंड से लेकर मनकामेश्वर महादेव मंदिर तक हजारों नागरिकों का जनसैलाब उनके स्वागत के लिए सड़कों पर उमड़ पड़ा। इस दौरान पूरे मार्ग में स्वागत द्वार, पुष्पवर्षा, ढोल-नगाड़ों, बैंड-बाजों और आतिशबाजी के साथ सामाजिक, धार्मिक, व्यापारिक एवं विभिन्न संगठनों ने उनका माल्यार्पण कर सम्मान किया। स्वागत यात्रा के दौरान पुरानी सब्जी मंडी स्थित मस्जिद के पास मुस्लिम समाज के लोगों ने तिरंगा लहराकर उनका आत्मीय स्वागत किया, जो सामाजिक सद्भाव और जौरा की गंगा-जमुनी संस्कृति का प्रतीक बन गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति माहेश्वरी ने कहा कि उन्होंने जीवनभर अपने कर्तव्य को सर्वोपरि मानते हुए ईमानदारी, निष्ठा और निष्पक्षता के साथ कार्य किया है। उन्होंने युवाओं से कहा कि सफलता का सबसे बड़ा मंत्र कर्म के प्रति समर्पण और ईमानदारी है। अपने संघर्षपूर्ण सफर को याद करते हुए उन्होंने बताया कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा जौरा के शासकीय विद्यालयों में हुई, जिसके बाद उन्होंने मुरैना से स्नातक और ग्वालियर में अपने गुरु वरिष्ठ अधिवक्ता लहोटिया जी के मार्गदर्शन में वकालत की शुरुआत की। उन्होंने अपनी प्रेरणा का श्रेय अपने पिता और बड़े भाई स्वर्गीय कौशल माहेश्वरी को दिया, जो बिना शुल्क के निर्धनों के मुकदमे लड़ते थे। न्यायमूर्ति माहेश्वरी ने जानकारी दी कि सुप्रीम कोर्ट में रहते हुए उन्होंने मनकामेश्वर महादेव मंदिर ट्रस्ट के गठन में सहयोग किया, जिसके माध्यम से आज मंदिर परिसर में बच्चों के लिए आवास सहित निःशुल्क वैदिक पाठशाला संचालित की जा रही है। जौरा के नागरिकों ने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि न्यायपालिका के सर्वोच्च पद तक पहुंचने वाले इस क्षेत्र के पहले व्यक्ति के रूप में न्यायमूर्ति जितेंद्र माहेश्वरी ने पूरे जौरा और मुरैना जिले का नाम देशभर में गौरवान्वित किया है और नई पीढ़ी के सामने संघर्ष, सादगी और ईमानदारी का एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया है।1
- मध्यप्रदेश के भिण्ड प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लहार विधायक श्री अम्बरीश शर्मा के पैतृक गाँव सीकरी जागीर स्थित आवास पहुंचकर उनकी माताजी श्रीमती अरुणा देवी के निधन पर श्रद्धांजलि अर्पित की और शोक व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने स्वर्गीय श्रीमती अरुणा देवी के चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर उन्हें सादर नमन किया। श्रीमती अरुणा देवी का लंबी बीमारी के बाद 09 जून 2026 को देहावसान हो गया था। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शोक संतप्त परिजनों से भेंट कर उन्हें सांत्वना दी और ढाँढ़स बंधाया। उन्होंने ईश्वर से पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने तथा दुःख की इस घड़ी में शोकाकुल परिजनों को संबल प्रदान करने की प्रार्थना की।1
- Post by Deepak Prajapati1
- भिंड और मुरैना अंचल के वीर सपूत शहीद इसेन्द्र सिंह भदौरिया जी का सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया है। किशूपुरा भिंड के रहने वाले इसेन्द्र सिंह सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद वर्तमान में डीएससी महाराजपुरा ग्वालियर एयर फोर्स स्टेशन पर पदस्थ थे। कल अचानक तबियत बिगड़ने के कारण वे वीरगति को समर्पित हो गए। उनकी अंतिम विदाई के दौरान सैन्य सम्मान में 3 बिहार रेजीमेंट, डीएससी प्लाटून और एयरफोर्स के अधिकारियों ने उनके अंतिम दर्शन कर उन्हें अंतिम सलामी दी। इसके साथ ही, अमर शहीद सम्मान सेवा संघ के सेवकों ने भी पुष्पांजलि अर्पित कर उनकी शहादत को सलाम किया। अंचल के इस वीर सपूत के अंतिम संस्कार के दौरान उनके बेटे ने उन्हें मुखाग्नि दी।2
- मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ से अगवा की गई 11वीं कक्षा की एक छात्रा बदमाशों के चंगुल से भागकर सुरक्षित डबरा सिटी थाने पहुंच गई है। डबरा-झांसी हाईवे पर मौका पाकर बदमाशों की कैद से छूटी यह डरी-सहमी छात्रा लोगों से रास्ता पूछते हुए पुलिस थाने पहुंची और पुलिसकर्मियों को अपनी आपबीती सुनाई। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए छात्रा के परिजनों को फोन कर सुरक्षित होने की सूचना दे दी है। यह पूरा सनसनीखेज मामला 8 जुलाई का है, जब टीकमगढ़ जिले के खरगापुर में रहने वाली यह छात्रा कोचिंग पढ़ने जा रही थी। रास्ते में कार सवार अज्ञात बदमाशों ने पता पूछने के बहाने उसे अपने पास बुलाया और जबरन कार में डालकर ले गए। बदमाशों ने उसे तीन दिनों तक अलग-अलग जगहों पर बंधक बनाकर रखा और वे उसे बेचने की फिराक में थे, लेकिन मौका मिलते ही छात्रा उनके चंगुल से सुरक्षित भाग निकली।3
- उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक पुलिसकर्मी और वकील के बीच मारपीट की घटना हुई है।1