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गढ़वा जिले के कांडी प्रखंड के डुमरसोता गांव की लालपति देवी सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। उनका दिव्यांग बेटा इलाज के लिए आर्थिक मदद की गुहार लगा रहा था। इस संकट में 'फेसबुक परिवार' नामक सोशल मीडिया समूह और स्थानीय लोगों ने मुख्य रूप से आगे आकर उनकी मदद की। इस समूह ने मिलकर इस बेघर महिला के मकान पर रहने योग्य सीट डालकर खुशियां बांटीं। इस पूरे मामले को लेकर तीखा आक्रोश व्यक्त किया गया है कि इस प्रकार की सेवा और मदद के लिए ही सभी पंचायतों के मुखिया और सरपंच चुने गए हैं। प्रखंड विकास अधिकारी को तत्काल सुविधा मुहैया करानी चाहिए थी, लेकिन सरकार सोई हुई है। इसे ही भारत और झारखंड की असली सच्चाई बताया गया है।

10 hrs ago
user_Ramashankar sharma
Ramashankar sharma
Voice of people गढ़वा, गढ़वा, झारखंड•
10 hrs ago

गढ़वा जिले के कांडी प्रखंड के डुमरसोता गांव की लालपति देवी सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। उनका दिव्यांग बेटा इलाज के लिए आर्थिक मदद की गुहार लगा रहा था। इस संकट में 'फेसबुक परिवार' नामक सोशल मीडिया समूह और स्थानीय लोगों ने मुख्य रूप से आगे आकर उनकी मदद की। इस समूह ने मिलकर इस बेघर महिला के मकान पर रहने योग्य सीट डालकर खुशियां बांटीं। इस पूरे मामले को लेकर तीखा आक्रोश व्यक्त किया गया है कि इस प्रकार की सेवा और मदद के लिए ही सभी पंचायतों के मुखिया और सरपंच चुने गए हैं। प्रखंड विकास अधिकारी को तत्काल सुविधा मुहैया करानी चाहिए थी, लेकिन सरकार सोई हुई है। इसे ही भारत और झारखंड की असली सच्चाई बताया गया है।

More news from गढवा and nearby areas
  • गढ़वा में काली मंदिर प्रांगण का हाल पूरी तरह बेहाल है, जहां चारों तरफ कचरा, कीचड़ फैला हुआ है और चापानल भी खराब पड़ा है। इस बदहाली के बीच क्षेत्र के नेता, मंत्री, अधिकारी और समाजसेवी सभी मौके से गायब हैं। इन सभी लोगों को लेकर यह तीखा आक्रोश है कि ये सब केवल चुनाव के समय ही प्रकट होंगे, जबकि इस समय मंदिर परिसर की इस दुर्दशा पर ध्यान देने वाला कोई नहीं है।
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    गढ़वा में काली मंदिर प्रांगण का हाल पूरी तरह बेहाल है, जहां चारों तरफ कचरा, कीचड़ फैला हुआ है और चापानल भी खराब पड़ा है। इस बदहाली के बीच क्षेत्र के नेता, मंत्री, अधिकारी और समाजसेवी सभी मौके से गायब हैं। इन सभी लोगों को लेकर यह तीखा आक्रोश है कि ये सब केवल चुनाव के समय ही प्रकट होंगे, जबकि इस समय मंदिर परिसर की इस दुर्दशा पर ध्यान देने वाला कोई नहीं है।
    user_Shital vishwakarma
    Shital vishwakarma
    पत्रकार बिश्नुनपुर, गढवा•
    3 hrs ago
  • झारखंड के गढ़वा में साइकिल के लिए बच्चों से ₹50 की वसूली किए जाने का मामला सामने आया है। बच्चों से इस तरह पैसे वसूले जाने के बाद वहां काफी हंगामा खड़ा हो गया। इस हंगामे के बाद शिक्षक ने बच्चों से लिए गए पैसे वापस लौटा दिए हैं।
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    झारखंड के गढ़वा में साइकिल के लिए बच्चों से ₹50 की वसूली किए जाने का मामला सामने आया है। बच्चों से इस तरह पैसे वसूले जाने के बाद वहां काफी हंगामा खड़ा हो गया। इस हंगामे के बाद शिक्षक ने बच्चों से लिए गए पैसे वापस लौटा दिए हैं।
    user_Active line News
    Active line News
    Court reporter गढ़वा, गढ़वा, झारखंड•
    7 hrs ago
  • गढ़वा जिले के कांडी प्रखंड के डुमरसोता गांव की लालपति देवी सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। उनका दिव्यांग बेटा इलाज के लिए आर्थिक मदद की गुहार लगा रहा था। इस संकट में 'फेसबुक परिवार' नामक सोशल मीडिया समूह और स्थानीय लोगों ने मुख्य रूप से आगे आकर उनकी मदद की। इस समूह ने मिलकर इस बेघर महिला के मकान पर रहने योग्य सीट डालकर खुशियां बांटीं। इस पूरे मामले को लेकर तीखा आक्रोश व्यक्त किया गया है कि इस प्रकार की सेवा और मदद के लिए ही सभी पंचायतों के मुखिया और सरपंच चुने गए हैं। प्रखंड विकास अधिकारी को तत्काल सुविधा मुहैया करानी चाहिए थी, लेकिन सरकार सोई हुई है। इसे ही भारत और झारखंड की असली सच्चाई बताया गया है।
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    गढ़वा जिले के कांडी प्रखंड के डुमरसोता गांव की लालपति देवी सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। उनका दिव्यांग बेटा इलाज के लिए आर्थिक मदद की गुहार लगा रहा था। इस संकट में 'फेसबुक परिवार' नामक सोशल मीडिया समूह और स्थानीय लोगों ने मुख्य रूप से आगे आकर उनकी मदद की। इस समूह ने मिलकर इस बेघर महिला के मकान पर रहने योग्य सीट डालकर खुशियां बांटीं।

इस पूरे मामले को लेकर तीखा आक्रोश व्यक्त किया गया है कि इस प्रकार की सेवा और मदद के लिए ही सभी पंचायतों के मुखिया और सरपंच चुने गए हैं। प्रखंड विकास अधिकारी को तत्काल सुविधा मुहैया करानी चाहिए थी, लेकिन सरकार सोई हुई है। इसे ही भारत और झारखंड की असली सच्चाई बताया गया है।
    user_Ramashankar sharma
    Ramashankar sharma
    Voice of people गढ़वा, गढ़वा, झारखंड•
    10 hrs ago
  • गढ़वा जिले के रंका प्रखंड अंतर्गत कटरा पंचायत के दमारन गांव में सरकार की सोलर संचालित जल नल योजना ग्रामीणों के लिए राहत के बजाय बड़ी परेशानी का कारण बन गई है। गांव के यादव टोला में स्थापित यह जल नल योजना पिछले करीब डेढ़ वर्ष से खराब पड़ी है, लेकिन अब तक इसकी मरम्मत की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इस योजना के बंद होने से यहां के लगभग 50 परिवारों को मिलने वाला शुद्ध पेयजल पूरी तरह ठप हो गया है। मंगलवार सुबह ग्रामीणों और महिलाओं ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि पानी के लिए अब उन्हें करीब एक किलोमीटर दूर स्थित दमारन विद्यालय पर निर्भर होना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार संबंधित विभाग और अधिकारियों को इसकी लिखित व मौखिक सूचना दी, जहां से हर बार एक सप्ताह के भीतर मरम्मत कराने का केवल आश्वासन ही मिला। डेढ़ वर्ष बीत जाने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। भीषण गर्मी और बरसात के मौसम में भी महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को पानी के लिए इतनी लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है, जिससे उनका दैनिक जीवन बेहद कष्टदायक हो गया है।
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    गढ़वा जिले के रंका प्रखंड अंतर्गत कटरा पंचायत के दमारन गांव में सरकार की सोलर संचालित जल नल योजना ग्रामीणों के लिए राहत के बजाय बड़ी परेशानी का कारण बन गई है। गांव के यादव टोला में स्थापित यह जल नल योजना पिछले करीब डेढ़ वर्ष से खराब पड़ी है, लेकिन अब तक इसकी मरम्मत की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इस योजना के बंद होने से यहां के लगभग 50 परिवारों को मिलने वाला शुद्ध पेयजल पूरी तरह ठप हो गया है।

मंगलवार सुबह ग्रामीणों और महिलाओं ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि पानी के लिए अब उन्हें करीब एक किलोमीटर दूर स्थित दमारन विद्यालय पर निर्भर होना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार संबंधित विभाग और अधिकारियों को इसकी लिखित व मौखिक सूचना दी, जहां से हर बार एक सप्ताह के भीतर मरम्मत कराने का केवल आश्वासन ही मिला। डेढ़ वर्ष बीत जाने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। भीषण गर्मी और बरसात के मौसम में भी महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को पानी के लिए इतनी लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है, जिससे उनका दैनिक जीवन बेहद कष्टदायक हो गया है।
    user_Sunil singh
    Sunil singh
    रंका, गढ़वा, झारखंड•
    15 min ago
  • गढ़वा के चिनिया प्रखंड अंतर्गत रानीचेरी गांव में सोमवार को झारखंड वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, गढ़वा दक्षिणी वन प्रमंडल के तत्वावधान में 77वें वन महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि गढ़वा-रंका विधानसभा क्षेत्र के विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर डीएफओ एबिन बेनी अब्राहम, रेंजर अजय टोप्पो, जिला परिषद सदस्य बनारसी सिंह, उप प्रमुख सुनैना देवी, समाजसेवी मोहम्मद फरीद खां, विधायक प्रतिनिधि रिंकू तिवारी, मुखिया गोपाल यादव, महावीर सिंह और विजय सिंह सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। वन विभाग की ओर से सभी अतिथियों का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया गया। कार्यक्रम के दौरान "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के तहत लोगों से अधिक से अधिक वृक्ष लगाने और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। मुख्य अतिथि विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी ने वन महोत्सव को सभी उत्सवों में सबसे बड़ा बताते हुए कहा कि जंगल है तो जल है और जल है तो जीवन है। उन्होंने चेतावनी दी कि अंधाधुंध वृक्षों की कटाई के कारण ही जंगली हाथी और अन्य वन्यजीव गांवों की ओर आने को मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार के इन जागरूकता कार्यक्रमों की सराहना करते हुए हर व्यक्ति से जंगल बचाने में योगदान देने की अपील की। वहीं, समाजसेवी मोहम्मद फरीद खां ने कहा कि लोग केवल महुआ के पेड़ को उसकी आय के कारण बचाते हैं, जबकि जंगल का हर पेड़ मानव जीवन के लिए अमूल्य है। समारोह का सफल संचालन संजय प्रसाद ने किया। कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों ने मिलकर पौधा रोपण किया और अधिक से अधिक पौधे लगाने का संकल्प लिया। इस मौके पर भाजपा नेता कपिल प्रसाद, शिवलाल सिंह, सुरेंद्र प्रसाद, गरीबा शाह, गुड्डू यादव, छोटू यादव सहित वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
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    गढ़वा के चिनिया प्रखंड अंतर्गत रानीचेरी गांव में सोमवार को झारखंड वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, गढ़वा दक्षिणी वन प्रमंडल के तत्वावधान में 77वें वन महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि गढ़वा-रंका विधानसभा क्षेत्र के विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर डीएफओ एबिन बेनी अब्राहम, रेंजर अजय टोप्पो, जिला परिषद सदस्य बनारसी सिंह, उप प्रमुख सुनैना देवी, समाजसेवी मोहम्मद फरीद खां, विधायक प्रतिनिधि रिंकू तिवारी, मुखिया गोपाल यादव, महावीर सिंह और विजय सिंह सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। वन विभाग की ओर से सभी अतिथियों का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया गया।

कार्यक्रम के दौरान "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के तहत लोगों से अधिक से अधिक वृक्ष लगाने और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। मुख्य अतिथि विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी ने वन महोत्सव को सभी उत्सवों में सबसे बड़ा बताते हुए कहा कि जंगल है तो जल है और जल है तो जीवन है। उन्होंने चेतावनी दी कि अंधाधुंध वृक्षों की कटाई के कारण ही जंगली हाथी और अन्य वन्यजीव गांवों की ओर आने को मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार के इन जागरूकता कार्यक्रमों की सराहना करते हुए हर व्यक्ति से जंगल बचाने में योगदान देने की अपील की। वहीं, समाजसेवी मोहम्मद फरीद खां ने कहा कि लोग केवल महुआ के पेड़ को उसकी आय के कारण बचाते हैं, जबकि जंगल का हर पेड़ मानव जीवन के लिए अमूल्य है।

समारोह का सफल संचालन संजय प्रसाद ने किया। कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों ने मिलकर पौधा रोपण किया और अधिक से अधिक पौधे लगाने का संकल्प लिया। इस मौके पर भाजपा नेता कपिल प्रसाद, शिवलाल सिंह, सुरेंद्र प्रसाद, गरीबा शाह, गुड्डू यादव, छोटू यादव सहित वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
    user_Hemant Kumar
    Hemant Kumar
    चिनिया, गढ़वा, झारखंड•
    4 hrs ago
  • गुजरात के भरूच पखा जान में जमकर बारिश हुई है। यहाँ 21 जुलाई 2026 की शाम को 4:25 बजे बहुत भारी बारिश दर्ज की गई।
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    गुजरात के भरूच पखा जान में जमकर बारिश हुई है। यहाँ 21 जुलाई 2026 की शाम को 4:25 बजे बहुत भारी बारिश दर्ज की गई।
    user_SatSahib Ashish Ramdas ji
    SatSahib Ashish Ramdas ji
    खरौंधी, गढ़वा, झारखंड•
    1 hr ago
  • कनहर सिंचाई परियोजना, जिसे अमवार बांध के नाम से भी जाना जाता है, को बनने में काफी लंबा समय लगा है। इस परियोजना के सफल होने के कारण कुल 21 गांव जलमग्न हो चुके हैं, जिसमें झारखंड के 4 गांव, छत्तीसगढ़ के 6 गांव और सोनभद्र के 11 गांव शामिल हैं। इन जलमग्न हुए गांवों के लोगों को अन्य जगहों पर विस्थापित किया गया है। हालांकि, विस्थापित किए गए इन लोगों को मिलने वाली सुविधाएं अब तक सुचारू रूप से मुहैया नहीं कराई जा रही हैं। विस्थापितों को मिलने वाले भूमि समतलीकरण, पेयजल योजना, स्वास्थ्य चिकित्सा, रोजगार और शिक्षा जैसी जरूरी सुविधाएं सुचारू रूप से न मिलने के कारण विस्थापितों में भारी नाराजगी का माहौल बना हुआ है। विस्थापितों के इसी दर्द को ईश्वर चंद्र निराला ने बयां किया है।
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    कनहर सिंचाई परियोजना, जिसे अमवार बांध के नाम से भी जाना जाता है, को बनने में काफी लंबा समय लगा है। इस परियोजना के सफल होने के कारण कुल 21 गांव जलमग्न हो चुके हैं, जिसमें झारखंड के 4 गांव, छत्तीसगढ़ के 6 गांव और सोनभद्र के 11 गांव शामिल हैं। इन जलमग्न हुए गांवों के लोगों को अन्य जगहों पर विस्थापित किया गया है।

हालांकि, विस्थापित किए गए इन लोगों को मिलने वाली सुविधाएं अब तक सुचारू रूप से मुहैया नहीं कराई जा रही हैं। विस्थापितों को मिलने वाले भूमि समतलीकरण, पेयजल योजना, स्वास्थ्य चिकित्सा, रोजगार और शिक्षा जैसी जरूरी सुविधाएं सुचारू रूप से न मिलने के कारण विस्थापितों में भारी नाराजगी का माहौल बना हुआ है। विस्थापितों के इसी दर्द को ईश्वर चंद्र निराला ने बयां किया है।
    user_संजय श्रीवास्तव ( ब्यूरो चीफ)
    संजय श्रीवास्तव ( ब्यूरो चीफ)
    Dudhi, Sonbhadra•
    15 min ago
  • झारखंड के गढ़वा जिले में जल सहियाओं ने बेहद कम वेतन और महीनों से बकाया मानदेय के विरोध में 20 जुलाई 2026 को गढ़वा समाहरणालय पर धरना-प्रदर्शन किया। जल सहियाएं लंबे समय से अपनी सेवाओं के बदले उचित वेतन देने और सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिए जाने की मांग कर रही हैं। इसी सिलसिले में अपनी आवाज बुलंद करने के लिए सभी जल सहियाएं समाहरणालय पर एकत्रित हुईं। आंदोलनकारी जल सहियाओं की मुख्य मांग है कि उनके मानदेय में भारी वृद्धि की जाए। उनका स्पष्ट नारा है कि "₹2000 में दम नहीं, ₹18000 से कम नहीं" और वे राज्य के न्यूनतम मजदूरी के बराबर यानी ₹18,000 मासिक मानदेय की मांग कर रही हैं। इसके साथ ही, पिछले कई महीनों और कुछ मामलों में सालों से बकाया मानदेय तथा प्रोत्साहन राशि का तुरंत भुगतान करने, सेवाकाल के दौरान मृत्यु होने पर ₹20 लाख का बीमा या मुआवजा देने और 65 वर्ष तक सेवा की गारंटी देने की मांग भी पुरजोर तरीके से उठाई गई है। जल सहियाओं का यह भी कहना है कि पेयजल एवं स्वच्छता से जुड़े कार्य ठेकेदारों के बजाय उनके माध्यम से कराए जाने को प्राथमिकता दी जाए।
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    झारखंड के गढ़वा जिले में जल सहियाओं ने बेहद कम वेतन और महीनों से बकाया मानदेय के विरोध में 20 जुलाई 2026 को गढ़वा समाहरणालय पर धरना-प्रदर्शन किया। जल सहियाएं लंबे समय से अपनी सेवाओं के बदले उचित वेतन देने और सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिए जाने की मांग कर रही हैं। इसी सिलसिले में अपनी आवाज बुलंद करने के लिए सभी जल सहियाएं समाहरणालय पर एकत्रित हुईं।

आंदोलनकारी जल सहियाओं की मुख्य मांग है कि उनके मानदेय में भारी वृद्धि की जाए। उनका स्पष्ट नारा है कि "₹2000 में दम नहीं, ₹18000 से कम नहीं" और वे राज्य के न्यूनतम मजदूरी के बराबर यानी ₹18,000 मासिक मानदेय की मांग कर रही हैं। इसके साथ ही, पिछले कई महीनों और कुछ मामलों में सालों से बकाया मानदेय तथा प्रोत्साहन राशि का तुरंत भुगतान करने, सेवाकाल के दौरान मृत्यु होने पर ₹20 लाख का बीमा या मुआवजा देने और 65 वर्ष तक सेवा की गारंटी देने की मांग भी पुरजोर तरीके से उठाई गई है। जल सहियाओं का यह भी कहना है कि पेयजल एवं स्वच्छता से जुड़े कार्य ठेकेदारों के बजाय उनके माध्यम से कराए जाने को प्राथमिकता दी जाए।
    user_Ramashankar sharma
    Ramashankar sharma
    Voice of people गढ़वा, गढ़वा, झारखंड•
    23 hrs ago
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