स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने डूंगरपुर के एसबीपी राजकीय महाविद्यालय में निर्माणाधीन नए भवन में खराब और निम्न गुणवत्ता वाले पत्थरों के उपयोग पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। एसएफआई इकाई सचिव अनिल ने इस मामले को विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा बताते हुए निर्माण कार्य की पारदर्शिता और गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। जिलाध्यक्ष जितेश कुमार ने जोर देकर कहा कि महाविद्यालय में हो रहा यह निर्माण कार्य हजारों विद्यार्थियों के भविष्य की बुनियाद है, और इसमें घटिया सामग्री का उपयोग भ्रष्टाचार तथा प्रशासन की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। एसएफआई ने आरोप लगाया है कि निर्माण कार्य में पारदर्शिता की कमी है और गुणवत्ता पर प्रभावी निगरानी नहीं की जा रही है, जिससे यह भवन भविष्य में गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। इसी संदर्भ में, एसएफआई ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर भवन निर्माण की निगरानी के लिए एक संयुक्त देखरेख समिति के गठन की मांग की है। इस समिति में सभी छात्र संगठनों के पदाधिकारी, सेवानिवृत्त इंजीनियर एवं तकनीकी विशेषज्ञ, महाविद्यालय के पूर्व छात्र, बुद्धिजीवी एवं सामाजिक प्रतिनिधि, तथा महाविद्यालय प्रशासन के सदस्य शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि निर्माण कार्य में पारदर्शिता बनी रहे और गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके। एसएफआई इकाई सचिव अनिल कुमार ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही इस मामले में ठोस कार्रवाई नहीं हुई और घटिया निर्माण कार्य पर रोक नहीं लगी, तो एसएफआई आंदोलन करेगी, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। इस दौरान महेश, गोविंद मलवात, रणजीत आमलिया, विशाल, गोकुल, विपिन भराड़ा सहित कई एसएफआई कार्यकर्ता मौजूद रहे।
स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने डूंगरपुर के एसबीपी राजकीय महाविद्यालय में निर्माणाधीन नए भवन में खराब और निम्न गुणवत्ता वाले पत्थरों के उपयोग पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। एसएफआई इकाई सचिव अनिल ने इस मामले को विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा बताते हुए निर्माण कार्य की पारदर्शिता और गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। जिलाध्यक्ष जितेश कुमार ने जोर देकर कहा कि महाविद्यालय में हो रहा यह निर्माण कार्य हजारों विद्यार्थियों के भविष्य की बुनियाद है, और इसमें घटिया सामग्री का उपयोग भ्रष्टाचार तथा प्रशासन की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। एसएफआई ने आरोप लगाया है कि निर्माण कार्य में पारदर्शिता की कमी है और गुणवत्ता पर प्रभावी निगरानी नहीं की जा रही है, जिससे यह भवन भविष्य में गंभीर समस्याओं का कारण बन
सकता है। इसी संदर्भ में, एसएफआई ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर भवन निर्माण की निगरानी के लिए एक संयुक्त देखरेख समिति के गठन की मांग की है। इस समिति में सभी छात्र संगठनों के पदाधिकारी, सेवानिवृत्त इंजीनियर एवं तकनीकी विशेषज्ञ, महाविद्यालय के पूर्व छात्र, बुद्धिजीवी एवं सामाजिक प्रतिनिधि, तथा महाविद्यालय प्रशासन के सदस्य शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि निर्माण कार्य में पारदर्शिता बनी रहे और गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके। एसएफआई इकाई सचिव अनिल कुमार ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही इस मामले में ठोस कार्रवाई नहीं हुई और घटिया निर्माण कार्य पर रोक नहीं लगी, तो एसएफआई आंदोलन करेगी, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। इस दौरान महेश, गोविंद मलवात, रणजीत आमलिया, विशाल, गोकुल, विपिन भराड़ा सहित कई एसएफआई कार्यकर्ता मौजूद रहे।
- देश की स्वतंत्रता के बाद पश्चिम बंगाल का विधानसभा चुनाव भारतीय राजनीति में अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया, जिसे न केवल सत्ता परिवर्तन का विषय बल्कि राष्ट्रवादी विचारधारा, लोकतांत्रिक मूल्यों और हिंदू समाज की अपेक्षाओं से भी जुड़ा हुआ बताया गया। इस महत्वपूर्ण चुनाव में पूरे देश की विशेष निगाहें भवानीपुर विधानसभा सीट पर टिकी थीं, जिसकी जिम्मेदारी भारतीय जनता पार्टी ने राजस्थान के डूंगरपुर जिले के मांडली और वर्तमान में गुजरात के सूरत निवासी डॉ. प्रकाश चंद्र पटेल (चौधरी) को प्रभारी के रूप में सौंपी। डॉ. पटेल ने लगभग साढ़े तीन माह तक पश्चिम बंगाल में रहकर संगठन को मजबूत करने और चुनावी अभियान को गति देने का कार्य किया। उस समय पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा, भय और आतंक का वातावरण था, लेकिन इन कठिन परिस्थितियों के बीच भी उन्होंने पूरी निष्ठा और साहस के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। उन्होंने बूथ प्रबंधन से लेकर कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण, संगठन विस्तार, जनसंपर्क अभियान और चुनावी रणनीति के प्रभावी क्रियान्वयन तक हर स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने प्रत्येक बूथ तक पहुंचकर कार्यकर्ताओं में नया उत्साह, आत्मविश्वास और विजय का संकल्प जगाया। उनके नेतृत्व, संगठनात्मक क्षमता और अथक परिश्रम के परिणामस्वरूप, भारतीय जनता पार्टी ने भवानीपुर सीट पर उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की। भवानीपुर की इस ऐतिहासिक विजय में डॉ. प्रकाश चंद्र पटेल का महत्वपूर्ण योगदान माना गया है, और उनका नाम प्रमुखता से लिया जाता है। पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ नेता एवं मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी जी ने भी विभिन्न मंचों से अनेक अवसरों पर डॉ. प्रकाश चंद्र पटेल के कार्यों की सराहना की है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से उनके योगदान का उल्लेख करते हुए संगठन के प्रति उनकी निष्ठा और कार्यक्षमता की प्रशंसा की। हाल ही में पश्चिम बंगाल में आयोजित एक सम्मान समारोह में भी मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी जी ने मंच से डॉ. पटेल का अभिनंदन करते हुए उनके योगदान को सम्मानपूर्वक स्वीकार किया। यह गुजरात और विशेष रूप से सूरत के लिए गर्व का विषय है कि वहाँ के एक समर्पित कार्यकर्ता ने राष्ट्रीय स्तर पर इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी का सफलतापूर्वक निर्वहन कर अपनी संगठनात्मक क्षमता का परिचय दिया। डॉ. प्रकाश चंद्र पटेल का यह योगदान समर्पण, साहस, संगठन कौशल और राष्ट्रहित में निरंतर कार्य करने की एक प्रेरणादायी मिसाल है। उनका जीवन और कार्यशैली उन हजारों कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो संगठन और राष्ट्रसेवा को अपना सर्वोच्च दायित्व मानते हैं।3
- गुरुवार को पंचायत समिति झोंथरी में पंचायतीराज मंत्रालयिक कर्मचारी संगठन की जिला शाखा ने ब्लॉक स्तरीय महा सद्बुद्धि यज्ञ का आयोजन किया। यह यज्ञ राजस्थान के मंत्रालयिक कर्मचारियों के सम्मान, अधिकारों और न्यायोचित मांगों के समर्थन में किया गया, जिससे उनके आंदोलन को एक नई दिशा और ऊर्जा मिली। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मंत्रालयिक कर्मचारियों ने हिस्सा लिया, अपनी एकजुटता प्रदर्शित की और सरकार तक अपनी मांगों को प्रभावी ढंग से पहुंचाने का संकल्प लिया। यज्ञ के दौरान, कर्मचारियों ने 'एक परिवार एक संकल्प' की भावना के साथ संगठन की मजबूती, सम्मान, स्वाभिमान और कर्मचारियों के भविष्य की लड़ाई को लेकर एकजुट रहने का संदेश दिया। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि मंत्रालयिक कर्मचारियों की लंबित मांगों का समाधान होने तक उनका आंदोलन पूरी ताकत के साथ जारी रहेगा। महा सद्बुद्धि यज्ञ के माध्यम से सरकार से कर्मचारियों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की गई। ब्लॉक अध्यक्ष मुकेश कुमार डिंडोर ने कर्मचारियों की एकता को उनकी सबसे बड़ी शक्ति बताया, वहीं संगठन के पदाधिकारियों ने आगामी आंदोलनों में भी सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। कर्मचारियों ने 'हमारा परिवार, हमारी ताकत, एवं हमारा संगठन हमारी पहचान' के संकल्प को दोहराते हुए आंदोलन को सफल बनाने का संदेश दिया। इस अवसर पर जिला महामंत्री रमेशचंद्र यादव, वासुदेव रोत, लक्ष्मणलाल रोत, सुरेशचंद्र रोत, गेरीलाल रोत, निश्चल पंड्या, दिनेश खराड़ी, गंगा बरांडा, भरत आमलिया, दिनेश कलासुआ, सूरजमल कटारा, रमेश कोटेड, रमेश कटारा, देवीलाल रोत, संतोष सिंग सहित पंचायत समिति झोंथरी के अनेक मंत्रालयिक कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में संगठन पदाधिकारियों ने घोषणा की कि यह आंदोलन आने वाले समय के इतिहास का आधार बनेगा और कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष निरंतर जारी रहेगा।4
- गनोड़ा गांव से जो तस्वीरें आ रही हैं, वे बेहद विहंगम हैं। मुकेश जी भट्ट द्वारा आयोजित इस 'गंगोतापन' के पावन कार्यक्रम में आज जनसैलाब उमड़ पड़ा है।गनोड़ा क्षेत्र में ऐतिहासिक हुजूम; भक्ति और भाईचारे की दिखी अनोखी मिसाल! LIVE BREAKING NEWS 24*7 अपडेट vagadnews "नमस्कार, आप देख रहे हैं न्यूज़ 24! इस वक्त की एक बड़ी और पावन खबर राजस्थान से आ रही है। गनोड़ा गांव में आज श्रद्धा, आस्था और सामाजिक जुड़ाव का एक अनूठा संगम देखने को मिला है। गनोड़ा तहसील के अंतर्गत आने वाले गनोड़ा गांव में आज मुकेश जी भट्ट द्वारा आयोजित 'गंगोतापन' कार्यक्रम में आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा, जिसने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय कर दिया है। आइए आपको सीधे ले चलते हैं गनोड़ा गांव के इस भव्य आयोजन में..." मुख्य सुर्खियां (Ticker/Flash Lines): BREAKING: गनोड़ा तहसील के गनोड़ा गांव में मुकेश जी भट्ट के 'गंगोतापन' कार्यक्रम में उमड़ा आस्था का सैलाब! BIG NEWS: धार्मिक और सांस्कृतिक रंग में रंगा गनोड़ा गांव; हज़ारों श्रद्धालुओं की जुटी भारी भीड़! EXCLUSIVE: मुकेश जी भट्ट द्वारा आयोजित इस पावन महोत्सव में श्रद्धा के साथ उमड़े लोग! LATEST UPDATE: गनोड़ा क्षेत्र में ऐतिहासिक हुजूम; भक्ति और भाईचारे की दिखी अनोखी मिसाल! न्यूज़ रिपोर्टर (ग्राउंड रिपोर्ट): "जी हां, इस वक्त गनोड़ा तहसील के गनोड़ा गांव से जो तस्वीरें आ रही हैं, वे बेहद विहंगम हैं। मुकेश जी भट्ट द्वारा आयोजित इस 'गंगोतापन' के पावन कार्यक्रम में आज जनसैलाब उमड़ पड़ा है। पूरा गनोड़ा गांव इस समय उत्सव के माहौल में डूबा हुआ है। इस भव्य धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन में दूर-दूर से लोग मुकेश जी भट्ट के इस पुनीत कार्य में सहभागी बनने पहुंचे हैं। बुजुर्गों का आशीर्वाद, पारम्परिक उत्साह और हज़ारों लोगों की यह मौजूदगी यह साफ बयां कर रही है कि यह आयोजन गनोड़ा के इतिहास में एक यादगार अध्याय बन चुका है। न्यूज़ 24 की टीम गनोड़ा गांव से इस भव्य उत्सव की हर हलचल आप तक लगातार पहुंचा रही है।"1
- Post by Bapulal Ahari1
- पिपलोदा में टंट्या भील की प्रतिमा स्थापित की गई है। इस अवसर पर इंजीनियर विलेश खराड़ी ने अपनी शुभकामनाएँ और बधाई दी।1
- पुलिस मुख्यालय जयपुर द्वारा संचालित विशेष अभियान 'उमंग-VII' के तहत गुरुवार को डूंगरपुर में बाल श्रम के विरुद्ध एक बड़ी संयुक्त कार्रवाई की गई। जिला पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक खींव सिंह के दिशा-निर्देशानुसार, डूंगरपुर पुलिस और चाइल्ड हेल्पलाइन की टीमों ने दोवड़ा थाना सर्किल के विभिन्न बाजारों और दुकानों पर सघन चेकिंग की, जिसके परिणामस्वरूप दो बाल श्रमिकों को बालश्रम से मुक्त कराया गया। कार्रवाई के बाद, मुक्त कराए गए दोनों बच्चों को बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष और प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट भावेश कुमार जैन के समक्ष पेश किया गया। प्रशासन ने बच्चों से अवैध रूप से श्रम करवाने वाले संबंधित नियोक्ताओं के खिलाफ नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई करने की बात कही है। इस संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन में मानव तस्करी विरोधी एवं गुमशुदा प्रकोष्ठ डूंगरपुर के प्रभारी बलदेव सिंह सउनि, दोवड़ा थाने से डायालाल सउनि, कांस्टेबल हर्षवर्धन सिंह, शैलेश, चाइल्ड हेल्पलाइन डूंगरपुर टीम के सदस्य हिमांशु जैन और सृष्टि सेवा समिति के सदस्य सुरेन्द्र ढोली ने सक्रिय भूमिका निभाई।1
- नव निर्वाचित राज्यसभा सांसद डॉ. सतीश पूनिया का राज्यसभा सदस्य बनने के बाद पहली बार डूंगरपुर के सीमलवाड़ा आगमन पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने भव्य और गर्मजोशी से स्वागत किया। मोतली मोड़ पर भाजपा जिलाध्यक्ष अशोक पटेल, पूर्व राज्यमंत्री सुशील कटारा, भाजपा नेता बंशीलाल कटारा सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने उनका अभिनंदन किया। इसके बाद, डॉ. पूनिया शहर स्थित राजमाता विजयराजे सिंधिया ऑडिटोरियम में आयोजित 'विकसित भारत प्रबुद्धजन सम्मेलन' में शामिल हुए, जहां भाजयुमो जिला अध्यक्ष कल्पेश भारती और महिला मोर्चा के नेतृत्व में उनका स्वागत किया गया। सम्मेलन को संबोधित करते हुए डॉ. पूनिया ने कांग्रेस और उसके वरिष्ठ नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस आज वैचारिक और नेतृत्व संकट से जूझ रही है और संसद से लेकर सड़क तक जनता के मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने की उसकी क्षमता खत्म हो चुकी है। पूनिया ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के कुछ नेता विदेशों में जाकर भारत के लोकतंत्र और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि को धूमिल करने का प्रयास करते हैं। डॉ. पूनिया ने आगे कहा कि कांग्रेस का राजनीतिक एजेंडा अब केवल भ्रम फैलाने और देश के खिलाफ नकारात्मक माहौल बनाने तक सीमित रह गया है, लेकिन देश की जनता ऐसे प्रयासों को भली-भांति समझ चुकी है और अब भ्रम की राजनीति को स्वीकार नहीं करेगी। विपक्षी दलों द्वारा भाजपा पर नेताओं को तोड़ने के आरोपों का जवाब देते हुए डॉ. पूनिया ने स्पष्ट किया कि भाजपा किसी को तोड़ने का काम नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों को यह सोचने की आवश्यकता है कि उनके नेता और कार्यकर्ता उन्हें छोड़कर भाजपा में क्यों शामिल हो रहे हैं। यह स्थिति विपक्षी दलों के नेतृत्व संकट और संगठनात्मक कमजोरी का परिणाम है, जबकि भाजपा की नीतियों और राष्ट्रहित के कार्यों से प्रभावित होकर लोग स्वेच्छा से पार्टी से जुड़ रहे हैं। अपने संबोधन में, डॉ. पूनिया ने केंद्र सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने एक बार स्वयं स्वीकार किया था कि सरकार द्वारा भेजे गए एक रुपये में से केवल 15 पैसे ही जनता तक पहुंचते हैं। इसके विपरीत, उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसी व्यवस्था बनाई है कि योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंच रहा है। उन्होंने करोड़ों जनधन खातों के खुलने, किसानों को किसान सम्मान निधि के लाभ, लाखों किलोमीटर सड़क निर्माण और मुद्रा योजना के माध्यम से युवाओं को रोजगार व स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का जिक्र किया। डॉ. पूनिया ने यह भी बताया कि आज भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय पासपोर्ट की प्रतिष्ठा बढ़ी है। डॉ. पूनिया ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश ने कई ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं, जिनमें अयोध्या में राम मंदिर निर्माण, जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाना और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण कदम शामिल हैं। उन्होंने जोर दिया कि इन निर्णयों ने विश्व स्तर पर भारत की शक्ति और दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय दिया है। उन्होंने कहा कि भारत का लोकतंत्र आज दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक शक्ति के रूप में स्थापित है और विश्व की निगाहें भारत की ओर लगी हुई हैं। सम्मेलन में, डॉ. पूनिया ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के लक्ष्य को जनभागीदारी से जोड़ा। उन्होंने आह्वान किया कि इस संकल्प को साकार करने में समाज के प्रत्येक वर्ग — गरीब, किसान, युवा, महिलाएं, बुद्धिजीवी और हर वर्ग — की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने इसे केवल सरकार का कार्यक्रम नहीं, बल्कि 140 करोड़ देशवासियों का राष्ट्रीय संकल्प बताया, जिसे जनआंदोलन के रूप में आगे बढ़ाना होगा। इस अवसर पर भाजपा के संभाग प्रभारी एवं प्रदेश उपाध्यक्ष नाहर सिंह जोधा, सांसद मन्नालाल रावत, विधायक शंकर लाल डेचा, भाजपा जिला अध्यक्ष अशोक पटेल रणोली, पूर्व मंत्री सुशील कटारा, भाजपा जिला संगठन प्रभारी जोगेंद्र सिंह राजपुरोहित, अनिता कटारा, निवर्तमान जिला प्रमुख सूर्या अहारी, भाजपा महामंत्री पंकज जैन, सुरमाल परमार, ईश्वरलाल लबाना, सम्मेलन संयोजक शांतिलाल पंड्या तथा नगर मंडल अध्यक्ष नयन सुथार सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं पदाधिकारी मंच पर मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत भाजपा जिलाध्यक्ष अशोक पटेल रणोली के स्वागत उद्बोधन से हुई, जिसके बाद नाहर सिंह जोधा ने भी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। अंत में सांसद मन्नालाल रावत ने आभार व्यक्त किया। सम्मेलन में निवर्तमान सभापति अमृतलाल कलासुआ सहित जिलेभर से बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन, सामाजिक प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि एवं भाजपा कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। सम्मेलन पूरे समय राष्ट्र निर्माण, विकसित भारत के संकल्प और केंद्र सरकार की उपलब्धियों पर केंद्रित रहा, वहीं डॉ. सतीश पूनिया के संबोधन ने राजनीतिक रूप से भी व्यापक चर्चा को जन्म दिया।3
- गुजरात के वडोदरा शहर में कोटांबी स्टेडियम के निकट एक स्लीपर बस की खड़े ट्रक से भीषण टक्कर में धम्बोला निवासी महेंद्र भोगीलाल पंड्या (68) की बुधवार सुबह मौत हो गई। उनकी मृत्यु की खबर से परिजनों और परिचितों में दुख का माहौल छा गया था। गुरुवार को जैसे ही उनका पार्थिव शरीर धम्बोला पहुंचा, पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई और गमगीन माहौल ने सबकी आँखें नम कर दीं। महेंद्र पंड्या गौसेवा से जुड़े कार्य के सिलसिले में सूरत जा रहे थे जब यह दर्दनाक हादसा हुआ। गुरुवार को धम्बोला में उनके अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण, रिश्तेदार और शुभचिंतक उमड़ पड़े। सबसे भावुक क्षण वह था जब महेंद्र पंड्या के पुत्र विशेष रूप से जर्मनी से धम्बोला पहुंचे और अपने पिता को अंतिम विदाई देते हुए मुखाग्नि दी, जिससे श्मशान घाट पर उपस्थित सभी लोगों की आँखें नम हो गईं। ग्रामीणों ने बताया कि महेंद्र पंड्या सरल, मिलनसार और समाजसेवी प्रवृत्ति के व्यक्ति थे, जिनका क्षेत्र में विशेष सम्मान था। उनकी अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक शामिल हुए। पूरे कस्बे में शोक का माहौल बना रहा और लोगों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।1
- उदयपुर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल दूध तलाई में एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया, जहाँ 630 मीटर लंबी और लगभग 70 फीट ऊंची जिप लाइन पर सवार दो पर्यटक बीच रास्ते में फंस गए. बताया जा रहा है कि तेज हवा के बावजूद जिप लाइन का संचालन जारी रखा गया था, जिसके कारण पर्यटक हवा में ही अटक गए. करीब 8 मिनट तक दोनों पर्यटक इतनी ऊंचाई पर फंसे रहे और मदद के लिए आवाज लगाते रहे, जिससे मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया. बाद में जिप लाइन संचालक की रेस्क्यू टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दोनों पर्यटकों को सुरक्षित नीचे उतारा. इस घटना ने एडवेंचर गतिविधियों की सुरक्षा व्यवस्था और संचालन मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ऐसे रोमांचक खेलों में मौसम संबंधी सावधानियों और सुरक्षा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करना आवश्यक माना जा रहा है.1