बांदा में हुई पहली तेज बारिश ने ही नगर पालिका परिषद की तैयारियों के दावों की पोल खोलकर रख दी है। वार्ड संख्या-20 सेढू तलैया में कुछ ही घंटों की बारिश के बाद सड़कें तालाब बन गईं और लोगों के घरों में पानी घुस गया, जिससे पूरा इलाका किसी डूब क्षेत्र में तब्दील हो गया। हर साल होने वाले जलभराव और प्रशासनिक बैठकों के बावजूद हालात पहले से भी बदतर हो गए हैं, जिसने विकास के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद बाक़र ने आरोप लगाया है कि यह वार्ड वर्षों से प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार रहा है। यहां आज भी दर्जनों सड़कें कच्ची हैं, नालियां अधूरी पड़ी हैं, अधिकांश गलियों में पेयजल पाइपलाइन नहीं है और स्ट्रीट लाइटें महीनों से बंद पड़ी हैं। स्थानीय लोगों द्वारा लगातार शिकायतें किए जाने के बाद भी नगर पालिका का मार्ग प्रकाश विभाग गहरी नींद में सोया हुआ है। इस बदहाली का सबसे बड़ा कारण यह है कि हुसैनगंज, शंकर नगर, आजाद नगर, कालूकुआं और ईदगाह रोड जैसे घनी आबादी वाले इलाकों का पानी आज भी करीब 20 साल पुराने और महज चार फीट चौड़े जर्जर नाले के सहारे बहाया जा रहा है। आबादी कई गुना बढ़ने के बावजूद नाले की क्षमता नहीं बढ़ाई गई, जिससे थोड़ी ही बारिश में पूरा इलाका जलमग्न हो जाता है। स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि जलभराव के साथ नाले के सांप और जहरीले जीव लोगों के घरों तक पहुंच रहे हैं, जिससे बच्चों का स्कूल और कोचिंग जाना भी बेहद जोखिम भरा हो गया है। हालांकि बीते 9 जुलाई को जलभराव की समीक्षा बैठक कर निर्देश जारी किए गए थे, लेकिन इस बारिश ने साबित कर दिया कि कागजी रणनीतियां पूरी तरह फेल हो चुकी हैं। वार्डवासियों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि लोहिया पुल से निम्मी पार तक के नाले को अतिक्रमण मुक्त कराकर उसे कम से कम 20 फीट चौड़ा करने के लिए तत्काल बजट स्वीकृत किया जाए और एक महीने के भीतर निर्माण कार्य शुरू कराया जाए। जनता का स्पष्ट कहना है कि उन्हें अब कोरे आश्वासन, निरीक्षण और भाषण नहीं, बल्कि धरातल पर दिखाई देने वाला ठोस समाधान चाहिए।
बांदा में हुई पहली तेज बारिश ने ही नगर पालिका परिषद की तैयारियों के दावों की पोल खोलकर रख दी है। वार्ड संख्या-20 सेढू तलैया में कुछ ही घंटों की बारिश के बाद सड़कें तालाब बन गईं और लोगों के घरों में पानी घुस गया, जिससे पूरा इलाका किसी डूब क्षेत्र में तब्दील हो गया। हर साल होने वाले जलभराव और प्रशासनिक बैठकों के बावजूद हालात पहले से भी बदतर हो गए हैं, जिसने विकास के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद बाक़र ने आरोप लगाया है कि यह वार्ड वर्षों से प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार रहा है। यहां आज भी दर्जनों सड़कें कच्ची हैं, नालियां अधूरी पड़ी हैं, अधिकांश गलियों में पेयजल पाइपलाइन नहीं है और स्ट्रीट लाइटें महीनों से बंद पड़ी हैं। स्थानीय लोगों द्वारा लगातार शिकायतें किए जाने के बाद भी नगर पालिका का मार्ग प्रकाश विभाग गहरी नींद में सोया हुआ है। इस बदहाली का सबसे बड़ा कारण यह है कि हुसैनगंज, शंकर नगर, आजाद नगर, कालूकुआं और ईदगाह रोड जैसे घनी आबादी वाले इलाकों का पानी आज भी करीब 20 साल पुराने और महज चार फीट चौड़े जर्जर नाले के सहारे बहाया जा रहा है। आबादी कई गुना बढ़ने के बावजूद नाले की क्षमता नहीं बढ़ाई गई, जिससे थोड़ी ही बारिश में पूरा इलाका जलमग्न हो जाता है। स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि जलभराव के साथ नाले के सांप और जहरीले जीव लोगों के घरों तक पहुंच रहे हैं, जिससे बच्चों का स्कूल और कोचिंग जाना भी बेहद जोखिम भरा हो गया है। हालांकि बीते 9 जुलाई को जलभराव की समीक्षा बैठक कर निर्देश जारी किए गए थे, लेकिन इस बारिश ने साबित कर दिया कि कागजी रणनीतियां पूरी तरह फेल हो चुकी हैं। वार्डवासियों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि लोहिया पुल से निम्मी पार तक के नाले को अतिक्रमण मुक्त कराकर उसे कम से कम 20 फीट चौड़ा करने के लिए तत्काल बजट स्वीकृत किया जाए और एक महीने के भीतर निर्माण कार्य शुरू कराया जाए। जनता का स्पष्ट कहना है कि उन्हें अब कोरे आश्वासन, निरीक्षण और भाषण नहीं, बल्कि धरातल पर दिखाई देने वाला ठोस समाधान चाहिए।
- बांदा में हुई पहली तेज बारिश ने ही नगर पालिका परिषद की तैयारियों के दावों की पोल खोलकर रख दी है। वार्ड संख्या-20 सेढू तलैया में कुछ ही घंटों की बारिश के बाद सड़कें तालाब बन गईं और लोगों के घरों में पानी घुस गया, जिससे पूरा इलाका किसी डूब क्षेत्र में तब्दील हो गया। हर साल होने वाले जलभराव और प्रशासनिक बैठकों के बावजूद हालात पहले से भी बदतर हो गए हैं, जिसने विकास के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद बाक़र ने आरोप लगाया है कि यह वार्ड वर्षों से प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार रहा है। यहां आज भी दर्जनों सड़कें कच्ची हैं, नालियां अधूरी पड़ी हैं, अधिकांश गलियों में पेयजल पाइपलाइन नहीं है और स्ट्रीट लाइटें महीनों से बंद पड़ी हैं। स्थानीय लोगों द्वारा लगातार शिकायतें किए जाने के बाद भी नगर पालिका का मार्ग प्रकाश विभाग गहरी नींद में सोया हुआ है। इस बदहाली का सबसे बड़ा कारण यह है कि हुसैनगंज, शंकर नगर, आजाद नगर, कालूकुआं और ईदगाह रोड जैसे घनी आबादी वाले इलाकों का पानी आज भी करीब 20 साल पुराने और महज चार फीट चौड़े जर्जर नाले के सहारे बहाया जा रहा है। आबादी कई गुना बढ़ने के बावजूद नाले की क्षमता नहीं बढ़ाई गई, जिससे थोड़ी ही बारिश में पूरा इलाका जलमग्न हो जाता है। स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि जलभराव के साथ नाले के सांप और जहरीले जीव लोगों के घरों तक पहुंच रहे हैं, जिससे बच्चों का स्कूल और कोचिंग जाना भी बेहद जोखिम भरा हो गया है। हालांकि बीते 9 जुलाई को जलभराव की समीक्षा बैठक कर निर्देश जारी किए गए थे, लेकिन इस बारिश ने साबित कर दिया कि कागजी रणनीतियां पूरी तरह फेल हो चुकी हैं। वार्डवासियों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि लोहिया पुल से निम्मी पार तक के नाले को अतिक्रमण मुक्त कराकर उसे कम से कम 20 फीट चौड़ा करने के लिए तत्काल बजट स्वीकृत किया जाए और एक महीने के भीतर निर्माण कार्य शुरू कराया जाए। जनता का स्पष्ट कहना है कि उन्हें अब कोरे आश्वासन, निरीक्षण और भाषण नहीं, बल्कि धरातल पर दिखाई देने वाला ठोस समाधान चाहिए।1
- हमीरपुर के मौदहा तहसील सभागार में महीने के तीसरे शनिवार को आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में कुल 52 फरियादियों ने अपनी शिकायतें दर्ज कराईं। इस बैठक की संयुक्त रूप से अध्यक्षता चित्रकूटधाम मंडल के मंडलायुक्त अजीत कुमार और पुलिस उपमहानिरीक्षक राजेश एस. ने की। दर्ज कराई गई शिकायतों में से केवल दो मामलों का मौके पर ही निस्तारण किया जा सका, जबकि बाकी बची शिकायतों के समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। समाधान दिवस में सबसे ज्यादा शिकायतें पूर्ति विभाग, राजस्व विभाग और बिजली विभाग से जुड़ी रहीं। इसके अलावा किसानों को सिंचाई के लिए समय पर पानी न मिलने, राशन कार्ड न बनने, यूनिट जोड़ने-घटाने में गड़बड़ी, भूमि कब्जा, प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ न मिलने और पुलिस से संबंधित मामले भी सामने आए। इस दौरान परिसीमन के बाद काछिन डेरा का लंबित मामला भी प्रमुखता से उठाया गया, जो फत्तेपुर ग्राम पंचायत को नगर पालिका मौदहा में शामिल किए जाने के बाद से न तो नगर पालिका क्षेत्र में है और न ही ग्राम पंचायत में, जिससे वहां के स्थानीय लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने में परेशानी हो रही है। मंडलायुक्त अजीत कुमार ने किसानों को पर्याप्त बिजली और सिंचाई का पानी उपलब्ध कराने के साथ-साथ सभी शिकायतों का शासन की मंशा के अनुरूप पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए। वहीं, पुलिस उपमहानिरीक्षक राजेश एस. ने भी स्पष्ट किया कि शिकायतों के निस्तारण में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी विभागों को निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्रवाई कर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी।1
- उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के अतर्रा अंतर्गत ग्राम गुमाई का बायपास मार्ग इन दिनों नरक के रास्ते में तब्दील हो चुका है, जिसने प्रशासन के दावों की पोल खोलकर रख दी है। इस मार्ग पर घुटनों तक कीचड़ भरा हुआ है और यहाँ की पुलिया लगातार धंसती जा रही है। ऐसी खतरनाक और दयनीय स्थिति के बीच स्थानीय ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर इस रास्ते पर चलने को मजबूर हैं।4
- उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में बबेरू के सांडासानी गांव में एक पति-पत्नी के बीच हो रहे झगड़े को समझाने गए बुजुर्ग के साथ बेरहमी से मारपीट की गई। इस मारपीट में बुजुर्ग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इसके बाद उन्हें इलाज के लिए भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान बुजुर्ग की मौत हो गई।1
- बरसात का मौसम शुरू होते ही हमीरपुर जिले में संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन और मौदहा बांध विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। यमुना और बेतवा नदियों से घिरे इस जिले में प्रत्येक वर्ष बाढ़ की आशंका बनी रहती है। इसी खतरे को देखते हुए दोनों नदियों के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मौदहा बांध विभाग ने समय रहते बाढ़ सुरक्षा से जुड़े सभी इंतजाम पूरे कर लिए हैं। विभाग द्वारा तटबंधों की साफ-सफाई कराने के साथ-साथ कमजोर एवं कटान संभावित स्थलों पर मिट्टी भराई का कार्य कराया गया है। इसके अलावा आपदा की स्थिति में तत्काल उपयोग के लिए बालू से भरी बोरियां, बोल्डर और अन्य आवश्यक सामग्री का पर्याप्त भंडारण भी सुनिश्चित किया गया है। विभागीय अधिकारी लगातार संवेदनशील क्षेत्रों की विशेष निगरानी कर रहे हैं और तटबंधों का निरीक्षण जारी है। आपात स्थितियों से निपटने के लिए कर्मचारियों की ड्यूटी निर्धारित कर उन्हें 24 घंटे सतर्क रहने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। बांध विभाग का दावा है कि नदियों के जलस्तर में अचानक वृद्धि होने पर तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया जाएगा और जन-धन की सुरक्षा के लिए विभाग पूरी तरह तैयार है।2
- उत्तराखंड की रहने वाली मानवी ने देहरादून-ऋषिकेश हाईवे परियोजना के लिए करीब 4 हजार पेड़ों की कटाई के विरोध में अपना मुंडन करा लिया है। मानवी ने इस हाईवे परियोजना के तहत इतनी बड़ी संख्या में काटे जा रहे पेड़ों के खिलाफ अपना यह कड़ा विरोध जताया है।1
- उत्तर प्रदेश के बांदा में नगर पालिका परिषद के वार्ड नंबर 20 स्थित सेढू तलैया नाला थोड़ी देर की बारिश में ही पूरी तरह से टापू बन गया है। इसके चलते इलाके के अधिकतर मकान पानी में डूब गए हैं और सड़कों पर भारी जलभराव हो गया है, जिससे राहगीरों और कोचिंग जाने वाले बच्चों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद बाकर ने आरोप लगाया है कि यह वार्ड प्रदेश सरकार द्वारा नागरिकों को दी जाने वाली सभी मूलभूत सुविधाओं से पूरी तरह से वंचित है। इस वार्ड की स्थिति अत्यंत दयनीय बनी हुई है, जहां दर्जनों कच्ची सड़कें और कच्ची नालियां हैं, और किसी भी गली में पानी की पाइपलाइन तक नहीं है। मार्ग प्रकाश विभाग की घोर लापरवाही के कारण क्षेत्र में दो दर्जन से अधिक लाइटें बुझी और खराब पड़ी हैं। स्थानीय निवासियों द्वारा पिछले 3 महीने से लगातार शिकायत करने के बावजूद पोड़ा बाग, बसंत नगर और सेढू तलैया आदि मोहल्लों की लाइटें दुरुस्त नहीं कराई गई हैं। पूरे वार्ड में गंदगी का साम्राज्य है और जगह-जगह कूड़े के बड़े-बड़े अंबार लगे हैं। इसके अलावा, हुसैनगंज, शंकर नगर, आजाद नगर, कालूकुआं और ईदगाह रोड के हजारों घरों का पानी 20 वर्ष पुराने और महज 4 फीट चौड़े जर्जर नाले से बहाया जाता है। इस बदहाली के कारण नालों से लगातार सांप और जहरीले कीड़े-मकोड़े निकलकर लोगों के घरों और सड़कों पर आ रहे हैं। जलभराव की इस गंभीर समस्या को लेकर 9 जुलाई को मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के बाद जिलाधिकारी द्वारा बैठक भी बुलाई गई थी, लेकिन बिना धरातल पर काम किए स्थिति जस की तस बनी हुई है। छोटी काली देवी मंदिर के पास चोक पड़ी पुलिया की भी अब तक सफाई नहीं कराई गई है। मामले को लेकर अधिशासी अधिकारी नगर पालिका को पत्र दिया गया है। वहीं, वार्ड के सैकड़ों नागरिकों ने जिलाधिकारी महोदय से मांग की है कि लोहिया पुल से लेकर निम्मी पार नाले तक के मार्ग को अतिक्रमण से तत्काल मुक्त कराया जाए और इस नाले को 20 फीट चौड़ा किया जाए। स्थानीय लोगों ने इसके लिए तुरंत बजट आवंटित करने और एक महीने के भीतर नाला निर्माण कार्य को तेजी से पूरा करने की मांग की है।4
- हमीरपुर जिले के सुमेरपुर थाना क्षेत्र के कुंडौरा गांव में पिता की डांट के बाद घर से लापता हुआ किशोर तीन दिन बाद अपनी बुआ के घर मिला है। किशोर के मिलने के बाद परिजनों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। किशोर की मां का आरोप है कि बेटा बुआ के घर पर ही था, लेकिन इस बात की जानकारी को तीन दिनों तक उनके परिवार से छिपाकर रखा गया। किशोर अपने पिता की डांट के बाद अचानक घर से निकल गया था, जिसके बाद से ही परिजन लगातार उसकी खोजबीन कर रहे थे। इस मामले को लेकर अब पीड़ित माता-पिता ने सुमेरपुर थाने में तहरीर दी है और मामले की निष्पक्ष जांच के साथ-साथ कार्रवाई की मांग की है। पुलिस माता-पिता की शिकायत के आधार पर मामले की जांच में जुट गई है।1
- उत्तर प्रदेश के बांदा जिले की बबेरू पुलिस ने फर्जी दस्तावेज के आधार पर दो अलग-अलग पासपोर्ट बनवाने वाले अभियुक्त को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। आरोपी ने फर्जी कागजातों का इस्तेमाल कर दो अलग-अलग पासपोर्ट तैयार करवाए थे। इस मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अभियुक्त को गिरफ्तार किया और उसे सलाखों के पीछे भेज दिया है।1