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फतेहाबाद के एमएम कॉलेज गेट पर कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर 24वें दिन भी प्रदर्शन जारी रखा। इस दौरान, उन्होंने अर्धनग्न प्रदर्शन करते हुए अपनी बात रखी। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं, तो वे अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर चले जाएंगे।
Sanjay kumar
फतेहाबाद के एमएम कॉलेज गेट पर कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर 24वें दिन भी प्रदर्शन जारी रखा। इस दौरान, उन्होंने अर्धनग्न प्रदर्शन करते हुए अपनी बात रखी। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं, तो वे अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर चले जाएंगे।
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- पर्यावरण संरक्षण और ईंधन की बचत का महत्वपूर्ण संदेश देने के उद्देश्य से, जींद की डीसी डॉ. वैशाली शर्मा की पहल के बाद, गुरुवार को उचाना के एसडीएम रमित यादव भी ई-रिक्शा से अपने कार्यालय पहुंचे। उन्होंने पीडब्ल्यूडी विश्राम गृह, जो उनका अस्थायी आवास है, से लगभग तीन किलोमीटर का सफर अपने स्टाफ के साथ ई-रिक्शा में तय किया। एसडीएम को इस तरह कार्यालय पहुँचते देख वहाँ मौजूद कर्मचारी और आमजन आश्चर्यचकित रह गए। इस पहल के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा समय-समय पर दिए गए पर्यावरण संरक्षण और पेट्रोल-डीजल की बचत के संदेश से मिली प्रेरणा है। एसडीएम रमित यादव ने इस दौरान सभी कर्मचारियों और आमजन से अपील की कि वे अधिक से अधिक इलेक्ट्रिक वाहनों तथा सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें। उन्होंने जोर दिया कि पर्यावरण संरक्षण और ईंधन की बचत के लिए हर व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। रमित यादव ने बताया कि प्रशासनिक अधिकारी होने के नाते सिर्फ नीतियां बनाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन पर स्वयं अमल करना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि ई-रिक्शा और सार्वजनिक परिवहन अपनाने से न केवल ईंधन की बचत होती है और प्रदूषण कम होता है, बल्कि इससे आमजन को होने वाली परेशानियों और सड़क की वास्तविक स्थिति को समझने का भी अवसर मिलता है। उन्होंने जींद की डीसी डॉ. वैशाली शर्मा के ई-रिक्शा उपयोग और उचाना के विधायक देवेंद्र चतरभुज अत्री के लगातार बस में सफर करने जैसे उदाहरण भी साझा किए, जो सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा दे रहे हैं। एसडीएम ने अधिकारियों, कर्मचारियों और आमजन से आह्वान किया कि वे पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधरोपण करें, सार्वजनिक परिवहन का अधिक से अधिक उपयोग करें और इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाकर हरित भविष्य के निर्माण में अपना सक्रिय योगदान दें।1
- धौलपुर जिले के राजाखेड़ा में वन विभाग ने एक नीलगाय का सफल रेस्क्यू कर उसे सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया, जिससे आमजन को नीलगाय के आतंक से राहत मिली है। यह नीलगाय एक निजी स्कूल के आसपास घूमकर लोगों पर हमला करती थी, जिससे आम जनता में चिंता का माहौल था। राजाखेड़ा वन विभाग के कर्मचारी अमर तिवारी ने बताया कि एक निजी स्कूल स्टाफ ने उन्हें सूचित किया था कि नीलगाय स्कूल परिसर के पास घूमती है और लोगों को देखकर हमला करने के लिए दौड़ती है। स्कूल स्टाफ ने वन विभाग से नीलगाय को दूरदराज के जंगलों में छोड़ने का आग्रह किया था, ताकि स्कूल के बच्चों और स्थानीय निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। बुधवार को इसी नीलगाय के हमले में राजाखेड़ा में एक अधेड़ महिला गंभीर रूप से घायल हो गई थी, जिसे इलाज के लिए राजाखेड़ा के शहीद राघवेंद्र सिंह समुदाय स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया था। क्षेत्रीय वन अधिकारी राजाखेड़ा के निर्देशन में वन विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। स्कूल स्टाफ और ग्रामीणों की मदद से तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद नीलगाय को सफलतापूर्वक काबू में किया गया। इसके बाद वन विभाग की टीम ने नीलगाय को वाहन से धौलपुर स्थित केशर बाग सेंचुरी पहुंचाया और वहां सुरक्षित रूप से जंगल में छोड़ दिया। वन विभाग के इस त्वरित और संवेदनशील प्रयास से क्षेत्र के निवासियों ने राहत की सांस ली है।1
- हरियाणा सिंचाई विभाग द्वारा लिफ्ट परियोजना के माध्यम से नोहर फीडर में ड्रेनेज का पानी डालने की प्रस्तावित योजना को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इस गंभीर मामले पर नोहर विधायक अमित चाचाण ने बुधवार, 24 जून को स्थानीय सिंचाई विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली पर एक बार फिर सवाल उठाते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की। विधायक चाचाण ने बुधवार को हुई दिशा की बैठक में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। विधायक अमित चाचाण ने आरोप लगाया कि यह मामला अत्यंत गंभीर है, बावजूद इसके स्थानीय सिंचाई विभाग के अधिकारी लंबे समय तक निष्क्रिय बने रहे। उन्होंने स्पष्ट किया कि हरियाणा सरकार ने राजस्थान सरकार से आवश्यक एनओसी प्राप्त किए बिना ही नोहर फीडर में ड्रेनेज का पानी डालने के उद्देश्य से लिफ्ट परियोजना का निर्माण शुरू कर दिया है। चाचाण ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि अनुमति के बिना हरियाणा नोहर फीडर जैसी अंतरराज्यीय नहर व्यवस्था में किसी भी प्रकार का निर्माण या हस्तक्षेप नहीं कर सकता। उन्होंने अधिकारियों की वर्तमान कार्यप्रणाली पर भी निशाना साधा, यह कहते हुए कि अब विभागीय अधिकारी केवल पत्राचार तक सीमित रहकर मामले की गंभीरता को कम करने का प्रयास कर रहे हैं। विधायक ने यह भी बताया कि राजस्थान के उच्च सिंचाई अधिकारियों के निरीक्षण के बावजूद हरियाणा की ओर से निर्माण कार्य जारी है। उनका दावा है कि विभाग तभी हरकत में आया जब उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र भेजा, जबकि इससे पहले अधिकारियों को इस पूरे मामले की जानकारी तक नहीं थी। विधायक ने आगाह किया कि यदि इस परियोजना के माध्यम से ड्रेनेज का पानी नोहर फीडर में छोड़ा गया, तो इसके क्षेत्र की कृषि, भूजल गुणवत्ता और आमजन के स्वास्थ्य पर गंभीर और दूरगामी प्रतिकूल परिणाम सामने आ सकते हैं। उन्होंने क्षेत्र के किसानों की चिंताओं को पूरी तरह जायज ठहराया और उनके साथ खड़े होने का आश्वासन दिया। अमित चाचाण ने स्थानीय सिंचाई विभाग के अधिकारियों की लापरवाही और अकर्मण्यता की जांच की मांग की और कहा कि विभाग को उच्च स्तर पर हरियाणा सरकार से बातचीत करके इस मामले का समाधान निकालना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि परियोजना निर्माण के दौरान अधिकारियों द्वारा कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई गई, जिससे उनकी गंभीरता पर प्रश्नचिह्न लगता है। विधायक ने चेतावनी दी कि यदि बिना अनुमति के ड्रेनेज का पानी नोहर फीडर में छोड़ा गया, तो इसका व्यापक विरोध किया जाएगा और क्षेत्र के हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।1
- एक बेजुबान जीव ने पेरेंटिंग का सबसे महत्वपूर्ण सबक सिखाया है। यह अनुभव हर माता-पिता के लिए बेहद जरूरी बताया गया है, जिसे प्रत्येक माता-पिता को अवश्य देखना चाहिए।1
- हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन ने हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा के संबंध में भिवानी में एक पत्रकार वार्ता की।1
- किसान सभा हरियाणा ने एक बड़ा ऐलान किया है, जिसके तहत उन्होंने सिंचाई मंत्री के कार्यालय का घेराव किया। इस कार्रवाई के बाद यह जानने का आह्वान किया गया है कि किसान सभा की प्रमुख मांगें क्या हैं।1
- फतेहाबाद के एमएम कॉलेज गेट पर कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर 24वें दिन भी प्रदर्शन जारी रखा। इस दौरान, उन्होंने अर्धनग्न प्रदर्शन करते हुए अपनी बात रखी। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं, तो वे अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर चले जाएंगे।1
- वेनेजुएला में आए भूकंप के कारण व्यापक विनाश हुआ है, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस त्रासदी में 1 लाख लोगों की मौत होने की आशंका जताई जा रही है, हालांकि अभी तक इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य जारी है, ताकि पीड़ितों तक जल्द से जल्द मदद पहुंचाई जा सके।1