हजारीबाग जिले के ईचाक प्रखंड अंतर्गत डाढ़ा पंचायत का आरा गांव इन दिनों आम की खुशबू से सराबोर है। यह गांव 2000 से अधिक आम के पेड़ों और दर्जनों बागानों के लिए अपनी एक विशेष पहचान बना चुका है। स्थानीय किसान पिछले लगभग 30 वर्षों से इस क्षेत्र में आम की खेती कर रहे हैं। यहां दूधिया मालदा, दसहरी, लंगड़ा, सुकुल और मिट्ठू सहित कई किस्मों के आमों का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। किसानों के अनुसार, पेड़ों पर मंजर आते ही दूर-दूर से व्यापारी इन बागानों का सौदा करने पहुंच जाते हैं। यहां के आम न केवल झारखंड के कई जिलों में भेजे जाते हैं, बल्कि इनकी आपूर्ति बिहार के पटना, गया, नवादा और बिहार शरीफ तक भी होती है। आम की यह खेती आरा गांव के लोगों के लिए रोजगार और आय का एक प्रमुख साधन बन गई है। किसान इसे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक समृद्धि का एक बेहतरीन माध्यम मानते हैं।
हजारीबाग जिले के ईचाक प्रखंड अंतर्गत डाढ़ा पंचायत का आरा गांव इन दिनों आम की खुशबू से सराबोर है। यह गांव 2000 से अधिक आम के पेड़ों और दर्जनों बागानों के लिए अपनी एक विशेष पहचान बना चुका है। स्थानीय किसान पिछले लगभग 30 वर्षों से इस क्षेत्र में आम की खेती कर रहे हैं। यहां दूधिया मालदा, दसहरी, लंगड़ा, सुकुल और मिट्ठू सहित कई किस्मों के आमों का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। किसानों के अनुसार, पेड़ों पर मंजर आते ही दूर-दूर से व्यापारी इन बागानों का सौदा करने पहुंच जाते हैं। यहां के आम न केवल झारखंड के कई जिलों में भेजे जाते हैं, बल्कि इनकी आपूर्ति बिहार के पटना, गया, नवादा और बिहार शरीफ तक भी होती है। आम की यह खेती आरा गांव के लोगों के लिए रोजगार और आय का एक प्रमुख साधन बन गई है। किसान इसे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक समृद्धि का एक बेहतरीन माध्यम मानते हैं।
- हजारीबाग जिले के पेलावल में 23 रक्तवीरों ने एक महत्वपूर्ण कार्य करते हुए मासूमों की जिंदगी बचाई है। इस पुनीत कार्य को इंसानियत का सबसे बड़ा उत्सव बताया जा रहा है, जहाँ रक्तदाताओं ने जीवनदान देकर मानवीयता की उत्कृष्ट मिसाल पेश की।1
- हजारीबाग जिले के ईचाक प्रखंड अंतर्गत डाढ़ा पंचायत का आरा गांव इन दिनों आम की खुशबू से सराबोर है। यह गांव 2000 से अधिक आम के पेड़ों और दर्जनों बागानों के लिए अपनी एक विशेष पहचान बना चुका है। स्थानीय किसान पिछले लगभग 30 वर्षों से इस क्षेत्र में आम की खेती कर रहे हैं। यहां दूधिया मालदा, दसहरी, लंगड़ा, सुकुल और मिट्ठू सहित कई किस्मों के आमों का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। किसानों के अनुसार, पेड़ों पर मंजर आते ही दूर-दूर से व्यापारी इन बागानों का सौदा करने पहुंच जाते हैं। यहां के आम न केवल झारखंड के कई जिलों में भेजे जाते हैं, बल्कि इनकी आपूर्ति बिहार के पटना, गया, नवादा और बिहार शरीफ तक भी होती है। आम की यह खेती आरा गांव के लोगों के लिए रोजगार और आय का एक प्रमुख साधन बन गई है। किसान इसे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक समृद्धि का एक बेहतरीन माध्यम मानते हैं।1
- हजारीबाग जिले के ईचाक प्रखंड के अंतर्गत आने वाले डाढ़ा पंचायत का आरा गांव इन दिनों आम की मनमोहक खुशबू से सराबोर है। इस गांव में 2000 से भी अधिक आम के पेड़ और दर्जनों बागान किसानों की कड़ी मेहनत की कहानी कहते हैं। यहां दूधिया मालदा, दसहरी, लंगड़ा, सुकुल और मिट्ठू जैसी आम की कई बेहतरीन किस्में उगाई जाती हैं। किसानों के अनुसार, जैसे ही आम के पेड़ों में मंजर आने शुरू होते हैं, व्यापारी बगीचों का सौदा करने के लिए गांव पहुंच जाते हैं। आरा गांव के इन स्वादिष्ट आमों को झारखंड के विभिन्न जिलों के साथ-साथ बिहार के कई शहरों में भी भेजा जाता है। आम की खेती अब इस गांव के किसानों के लिए आय और रोजगार का एक प्रमुख स्रोत बन चुकी है, जिसने गांव की आर्थिक तस्वीर बदल दी है।1
- झारखंड के शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रबंधन की घोर लापरवाही का एक मामला सामने आया है, जहाँ एक लिफ्ट बीच रास्ते में ही फँस गई और उसके भीतर एक गंभीर मरीज तड़पता रहा। अस्पताल प्रबंधन ने इस घटना में उपायुक्त के आदेशों को भी ठेंगा दिखाया। बरकट्ठा से आए पीड़ित नारायण दास नामक इस गंभीर मरीज के परिजनों को हालात की गंभीरता देखते हुए खुद ही मोर्चा संभालना पड़ा, क्योंकि अस्पताल की तरफ से कोई त्वरित समाधान नहीं मिला। यह घटना अस्पताल में सुविधाओं के रखरखाव और प्रशासनिक निर्देशों के पालन पर गंभीर सवाल उठाती है।1
- हजारीबाग में झील परिसर को 'नो व्हीकल ज़ोन' बनाने के मुद्दे पर एक बड़ा खुलासा हुआ है। उपमहापौर अविनाश कुमार यादव ने स्पष्ट किया है कि नगर निगम की बैठक में झील परिसर को 'नो व्हीकल ज़ोन' घोषित करने का कोई प्रस्ताव पारित नहीं हुआ था। उनके अनुसार, निगम ने केवल इस विषय पर निर्णय लेने के लिए जिला प्रशासन से अनुरोध किया था और नगर निगम ने खुद इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी थी। उपमहापौर ने यह भी कहा कि 'नो व्हीकल ज़ोन' बनने से आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि जनता की सुविधा और जनभावनाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इस खुलासे के बाद हजारीबाग में 'नो व्हीकल ज़ोन' पर चल रही बहस और तेज हो गई है। यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या झील परिसर को पूरी तरह वाहनों से मुक्त करना चाहिए, या सीमित वाहनों की अनुमति देकर लोगों की सुविधा बनाए रखनी चाहिए। लोगों से सीधे पूछा जा रहा है कि यदि उनकी गाड़ी झील परिसर तक नहीं जा सके, तो क्या वे इस फैसले का समर्थन करेंगे। झील परिसर में 'नो व्हीकल ज़ोन' का मुद्दा अब जनता के हित में है या परेशानी का नया कारण, इस पर गरमागरम बहस छिड़ी हुई है।1
- झारखंड के हजारीबाग जिले में खुलेआम अवैध और प्रतिबंधित लॉटरी का कारोबार फल-फूल रहा है, जिसके कारण क्षेत्र के युवा तेजी से बर्बादी की कगार पर पहुँच रहे हैं। यह स्थिति गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है, जहाँ प्रतिबंधित गतिविधियों का खुला संचालन हो रहा है। स्थानीय युवा लॉटरी, गेमिंग और ऑनलाइन लॉटरी जैसे अवैध धंधों का शिकार बन रहे हैं, जिससे उनका भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है। इस अवैध कारोबार के बावजूद, हजारीबाग प्रशासन की इस पर अनदेखी स्पष्ट रूप से सामने आ रही है, जिस पर लोग सवाल उठा रहे हैं।1
- झारखंड के रामगढ़ में झारखंड क्रांतिकारी महा मोर्चा के केंद्रीय कार्यालय का भव्य उद्घाटन किया गया। इस महत्वपूर्ण अवसर पर संगठन के विस्तार का संकल्प लिया गया, जिससे भविष्य में इसकी गतिविधियों और पहुँच में वृद्धि होगी।1
- हजारीबाग स्थित चमेली झरने को उसकी मनमोहक सुंदरता के बावजूद 'मौत का गर्त' बताया गया है। इस विरोधाभासी स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए, यह इंगित किया गया है कि जहाँ एक ओर प्रकृति कष्ट में है और रो रही है, वहीं दूसरी ओर विकास के दावे मुस्कुराते हुए दिखाई दे रहे हैं, जो इस गंभीर विडंबना को उजागर करता है।1