सवाई माधोपुर के चौथ का बरवाड़ा में ग्राम पंचायतों की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले सुरक्षा गार्ड खुद गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। पंचायत समिति क्षेत्र की विभिन्न ग्राम पंचायतों में तैनात इन सुरक्षा गार्डों को पिछले 9 से 15 महीनों से मानदेय नहीं मिला है, जिससे उनके सामने परिवार का खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया है। इस समस्या को लेकर बुधवार को बड़ी संख्या में सुरक्षा गार्ड पंचायत समिति कार्यालय पहुंचे और विकास अधिकारी इंद्राज मीणा को ज्ञापन सौंपकर बकाया मानदेय का जल्द भुगतान कराने की मांग की। सुरक्षा गार्डों का आरोप है कि कई पंचायतों में बजट उपलब्ध होने के बावजूद उनका भुगतान नहीं किया जा रहा है और अधिकारियों को बार-बार समस्या बताने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सुरक्षा गार्डों ने मांग की है कि उनके लंबित मानदेय का तत्काल भुगतान किया जाए और भविष्य में हर महीने नियमित रूप से वेतन जारी किया जाए। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं निकला, तो वे जिला कलेक्टर से मिलकर आंदोलन की रूपरेखा तैयार करेंगे।
सवाई माधोपुर के चौथ का बरवाड़ा में ग्राम पंचायतों की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले सुरक्षा गार्ड खुद गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। पंचायत समिति क्षेत्र की विभिन्न ग्राम पंचायतों में तैनात इन सुरक्षा गार्डों को पिछले 9 से 15 महीनों से मानदेय नहीं मिला है, जिससे उनके सामने परिवार का खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया है। इस समस्या को लेकर बुधवार को बड़ी संख्या में सुरक्षा गार्ड पंचायत समिति कार्यालय पहुंचे और विकास अधिकारी इंद्राज मीणा को ज्ञापन सौंपकर बकाया मानदेय का जल्द भुगतान कराने की मांग की। सुरक्षा गार्डों का आरोप है कि कई पंचायतों में बजट उपलब्ध होने के बावजूद उनका भुगतान नहीं किया जा रहा है और अधिकारियों को बार-बार समस्या बताने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सुरक्षा गार्डों ने मांग की है कि उनके लंबित मानदेय का तत्काल भुगतान किया जाए और भविष्य में हर महीने नियमित रूप से वेतन जारी किया जाए। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं निकला, तो वे जिला कलेक्टर से मिलकर आंदोलन की रूपरेखा तैयार करेंगे।
- सवाई माधोपुर के चौथ का बरवाड़ा में ग्राम पंचायतों की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले सुरक्षा गार्ड खुद गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। पंचायत समिति क्षेत्र की विभिन्न ग्राम पंचायतों में तैनात इन सुरक्षा गार्डों को पिछले 9 से 15 महीनों से मानदेय नहीं मिला है, जिससे उनके सामने परिवार का खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया है। इस समस्या को लेकर बुधवार को बड़ी संख्या में सुरक्षा गार्ड पंचायत समिति कार्यालय पहुंचे और विकास अधिकारी इंद्राज मीणा को ज्ञापन सौंपकर बकाया मानदेय का जल्द भुगतान कराने की मांग की। सुरक्षा गार्डों का आरोप है कि कई पंचायतों में बजट उपलब्ध होने के बावजूद उनका भुगतान नहीं किया जा रहा है और अधिकारियों को बार-बार समस्या बताने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सुरक्षा गार्डों ने मांग की है कि उनके लंबित मानदेय का तत्काल भुगतान किया जाए और भविष्य में हर महीने नियमित रूप से वेतन जारी किया जाए। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं निकला, तो वे जिला कलेक्टर से मिलकर आंदोलन की रूपरेखा तैयार करेंगे।1
- सवाईमाधोपुर के बामनवास अंतर्गत लिवाली गांव में एक अध्यापिका ने मात्र 500 रुपये के शक में समस्त छात्राओं को निर्वस्त्र कर दिया। यह घटना बामनवास क्षेत्र के लिवाली गांव की है, जहां अध्यापिका द्वारा इस कृत्य को अंजाम दिया गया।1
- सवाई माधोपुर में बनास नदी पर पुलिया का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। पुलिया का काम शुरू होने के साथ ही सवाई माधोपुर जाने वाला रास्ता भी पूरी तरह से चालू है। बनास नदी में पुलिया निर्माण का कार्य आरंभ होने के बाद भी इस मार्ग पर आवागमन सुचारू रूप से जारी है।1
- सवाई माधोपुर के खंडार स्थित ग्राम पंचायत नायपुर के सावटा राजकीय माध्यमिक विद्यालय में शिक्षकों की कमी को लेकर आक्रोशित ग्रामीणों ने स्कूल पर ताला लगाकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी ग्रामीणों को मनाने और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए तहसीलदार पुष्कर सिंह खुद मौके पर पहुंचे। तहसीलदार और ग्रामीणों के बीच करीब डेढ़ से दो घंटे तक चली समझाइश और वार्ता के बाद आखिरकार ग्रामीण शांत हुए और उन्होंने आंदोलन को समाप्त करने पर सहमति जताई। मौके पर प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में अब स्थिति पूरी तरह सामान्य हो गई है। हालांकि, ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि स्कूल में जल्द ही शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की गई, तो वे फिर से अपना आंदोलन शुरू कर देंगे।1
- टोंक जिले के उनियारा क्षेत्र में शिक्षकों के तबादले और स्टाफ की कमी से नाराज छात्र-छात्राओं और अभिभावकों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित ग्रामीणों और विद्यार्थियों ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय शिवराजपुरा में तालाबंदी कर दी और स्कूल के बाहर से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 116 (NH-116) पर अवरोधक लगाकर चक्काजाम कर दिया। इस जाम के कारण हाईवे के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। दरअसल, शिक्षा विभाग की हालिया ट्रांसफर प्रक्रिया के तहत शिवराजपुरा स्कूल के प्रधानाचार्य सहित 3 वरिष्ठ अध्यापकों का अन्य जगहों पर तबादला कर दिया गया था। इसके बाद से ही स्कूल में शिक्षकों की भारी कमी हो गई और शिक्षण व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। अध्यापकों की कमी से बच्चों की पढ़ाई बाधित होने के कारण विद्यार्थियों और अभिभावकों में लंबे समय से गहरा असंतोष व्याप्त था, जो उग्र प्रदर्शन के रूप में सामने आया। हाईवे जाम होने की सूचना मिलने के करीब एक घंटे बाद ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (सीबीओ) सीताराम मीणा और उनियारा थाने से सहायक उपनिरीक्षक (ASI) हेमराज पुलिस जाब्ते के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच करीब आधे घंटे तक तीखी बहस और समझाइश का दौर चला। आखिरकार, सीबीओ सीताराम मीणा द्वारा स्कूल में जल्द से जल्द शिक्षकों की वैकल्पिक व्यवस्था करने का लिखित आश्वासन देने के बाद विद्यार्थी शांत हुए। करीब 2 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद हाईवे से जाम हटाया जा सका, जिसके बाद यातायात सुचारू रूप से बहाल हुआ।1
- Post by Ravishankar2
- श्योपुर के ग्राम जावदेश्वर में ग्रामीणों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर श्री रघुनाथ जी महाराज बड़ा मंदिर की लगभग 67 बीघा भूमि से होने वाली आय के दुरुपयोग का गंभीर आरोप लगाया है। ग्रामीणों का आरोप है कि मंदिर की इस भूमि से होने वाली कमाई का उपयोग मंदिर के विकास या रखरखाव पर नहीं किया जा रहा है। इसके विपरीत, मंदिर के पुजारी सोनू शर्मा द्वारा इस आय का निजी उपयोग किया जा रहा है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि मंदिर की भूमि पर पुजारी का कोई मालिकाना हक नहीं है, उन्हें केवल पूजा-अर्चना और सेवा करने का अधिकार मिला हुआ है। ग्रामीणों ने ज्ञापन में नियमों के उल्लंघन का भी खुलासा किया है। उनके अनुसार, तहसीलदार श्योपुर द्वारा 7 मार्च 2025 को एक आदेश जारी किया गया था, जिसके तहत वर्ष 2025-26 के लिए इस भूमि की नीलामी और जुताई नियमानुसार कराई जानी थी। इसके बावजूद, कथित रूप से पुजारी नियमों को दरकिनार कर अपने निजी स्तर पर ही भूमि की जुताई करवा रहे हैं। इस स्थिति से नाराज ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मंदिर की भूमि को तत्काल पुजारी के कब्जे से मुक्त कराया जाए। साथ ही, शासन के तय नियमों के अनुसार इस भूमि की नीलामी कराई जाए ताकि उससे प्राप्त होने वाली आय को मंदिर के विकास और रख-रखाव पर खर्च किया जा सके। ग्रामीणों का कहना है कि इस मामले में शीघ्र कार्रवाई की जाए ताकि मंदिर की वर्तमान जर्जर स्थिति में सुधार हो सके।3
- सवाई माधोपुर के नगर परिषद क्षेत्र में श्रमण संघीय आचार्य सम्राट श्री शिवमुनि जी महाराज साहब की आज्ञानुवर्तिनी एवं यशकंवर जी म.सा. की सुशिष्या, पोरवाल चंद्रिका श्री मनोहर कंवर जी महाराज ने अपनी शिष्या मंडली—तप आराधिका श्री ज्योतिप्रभा जी म.सा. और श्री ऐश्वर्यप्रभा जी म.सा. आदि ठाणा-3 के साथ भव्य मंगल नगर प्रवेश किया। चातुर्मास के लिए आनंद भवन में आगमन हेतु गांव-गांव और नगर-नगर पदविहार करते हुए साध्वी मंडल यहां पहुंचा है। इस अवसर पर प्रातः सवा सात बजे से ही बजरिया, शहर, आलनपुर, मंडी रोड, आवासन मंडल, आदर्श नगर और सूरवाल सहित विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं आस्था सर्किल पर एकत्रित हुए। वहां से भव्य मंगल नगर प्रवेश शोभायात्रा प्रारंभ हुई, जो मुख्य बाजार से होकर भगवान महावीर, आचार्य आत्मानंद, देवेंद्र शिव, शीतल दिवाकर, रामकंवर, महेंद्र भव जल तरणी एवं जय यश गुरुणी के जयघोषों के साथ गुलाब बाग स्थित श्री रामकंवर साधना भवन पहुंची, जहां यह धर्मसभा में परिवर्तित हो गई। धर्मसभा का शुभारंभ साध्वी मंडल द्वारा भगवान शांतिनाथ की प्रार्थना एवं स्तुति से हुआ। इसके बाद साधना भवन महिला मंडल ने स्वागत गीत प्रस्तुत कर साध्वी मंडल का भावभीना अभिनंदन किया और साधना भवन श्रीसंघ ने पधारे सभी श्रावक-श्राविकाओं का स्वागत करते हुए आभार व्यक्त किया। महेंद्र कुमार जैन चौरु के अनुसार, श्री ज्योतिप्रभा जी म.सा. ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में चातुर्मास के आध्यात्मिक महत्व एवं धर्म साधना पर प्रकाश डाला, जबकि श्री ऐश्वर्यप्रभा जी म.सा. ने चातुर्मास के दौरान अधिक से अधिक जप, तप, स्वाध्याय एवं जिनवाणी श्रवण का लाभ लेने की प्रेरणा दी। अंत में पूज्य श्री मनोहर कंवर जी महाराज साहब के मंगल पाठ के साथ यह नगर प्रवेश कार्यक्रम हर्षोल्लास एवं आध्यात्मिक वातावरण में संपन्न हुआ। इस दौरान पुलिस प्रशासन का सहयोग भी अत्यंत सराहनीय रहा, जिसके लिए श्रीसंघ ने प्रशासन का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया।1