जमुई जिले के खैरा प्रखंड के खुटौना गांव स्थित मां काली मंदिर में नौ दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा महायज्ञ का भव्य शुभारंभ एक कलश यात्रा के साथ किया गया। इस अवसर पर 501 सुहागिन महिलाओं और कन्याओं ने कलश यात्रा में भाग लिया, जिससे ढोल-नगाड़ों और 'जय मां काली' के जयघोष से पूरा गांव भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया। यह कलश यात्रा मंदिर परिसर से शुरू हुई और नारियाना क्यूल नदी घाट तक पहुंची, जहाँ महिलाओं ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पवित्र जल भरकर यज्ञ स्थल पर वापसी की। यज्ञाचार्य दीपक पांडेय के मार्गदर्शन में विधि-विधान से कलश स्थापना और संकल्प की प्रक्रिया संपन्न कराई गई। इस महायज्ञ में बजरंगी रावत अपनी धर्मपत्नी के साथ यजमान के रूप में पूजा-अर्चना में शामिल हुए। आयोजकों ने बताया कि अगले नौ दिनों तक प्रतिदिन पूजा-पाठ, हवन, धार्मिक अनुष्ठान और प्रवचन का आयोजन किया जाएगा, जिसमें आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
जमुई जिले के खैरा प्रखंड के खुटौना गांव स्थित मां काली मंदिर में नौ दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा महायज्ञ का भव्य शुभारंभ एक कलश यात्रा के साथ किया गया। इस अवसर पर 501 सुहागिन महिलाओं और कन्याओं ने कलश यात्रा में भाग लिया, जिससे ढोल-नगाड़ों और 'जय मां काली' के जयघोष से पूरा गांव भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया। यह कलश यात्रा मंदिर परिसर से शुरू हुई और नारियाना क्यूल नदी घाट तक पहुंची, जहाँ महिलाओं ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पवित्र जल भरकर यज्ञ स्थल पर वापसी की। यज्ञाचार्य दीपक पांडेय के मार्गदर्शन में विधि-विधान से कलश स्थापना और संकल्प की प्रक्रिया संपन्न कराई गई। इस महायज्ञ में बजरंगी रावत अपनी धर्मपत्नी के साथ यजमान के रूप में पूजा-अर्चना में शामिल हुए। आयोजकों ने बताया कि अगले नौ दिनों तक प्रतिदिन पूजा-पाठ, हवन, धार्मिक अनुष्ठान और प्रवचन का आयोजन किया जाएगा, जिसमें आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
- जमुई बटिया में, किरण गुप्ता ने किसान और आदिवासियों के हक, हिस्से और अधिकारों के मुद्दे पर अपनी बात रखी। इस दौरान, उन्होंने क्षेत्र में पुल की स्थिति को लेकर भी चर्चा की।1
- जमुई जिले के खैरा प्रखंड के खुटौना गांव स्थित मां काली मंदिर में नौ दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा महायज्ञ का भव्य शुभारंभ एक कलश यात्रा के साथ किया गया। इस अवसर पर 501 सुहागिन महिलाओं और कन्याओं ने कलश यात्रा में भाग लिया, जिससे ढोल-नगाड़ों और 'जय मां काली' के जयघोष से पूरा गांव भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया। यह कलश यात्रा मंदिर परिसर से शुरू हुई और नारियाना क्यूल नदी घाट तक पहुंची, जहाँ महिलाओं ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पवित्र जल भरकर यज्ञ स्थल पर वापसी की। यज्ञाचार्य दीपक पांडेय के मार्गदर्शन में विधि-विधान से कलश स्थापना और संकल्प की प्रक्रिया संपन्न कराई गई। इस महायज्ञ में बजरंगी रावत अपनी धर्मपत्नी के साथ यजमान के रूप में पूजा-अर्चना में शामिल हुए। आयोजकों ने बताया कि अगले नौ दिनों तक प्रतिदिन पूजा-पाठ, हवन, धार्मिक अनुष्ठान और प्रवचन का आयोजन किया जाएगा, जिसमें आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।1
- भाकपा माले के नेतृत्व में विस्थापित किसानों के पुनर्वास की मांग को लेकर एक पदयात्रा शुरू की गई है।1
- जमुई में 29 जून, सोमवार से भाकपा माले के नेतृत्व में 75 किलोमीटर लंबी पदयात्रा शुरू हुई। यह यात्रा बरनार जलाशय परियोजना से प्रभावित किसानों के पुनर्वास और मुआवजे की मांग को लेकर की जा रही है। आदिवासी संघर्ष मोर्चा और अखिल भारतीय किसान महासभा के बैनर तले निकाली गई इस पदयात्रा में सैकड़ों विस्थापित किसानों ने हाथों में लाल झंडा लेकर अपनी सात सूत्री मांगों के समर्थन में बिटिया, कालीपहाड़ी, खपरिया और डुमरी होते हुए सोनो चौक तक पैदल मार्च किया, जहाँ एक सभा आयोजित की गई। सभा को संबोधित करते हुए भाकपा माले के बिहार राज्य कमेटी सदस्य बाबू साहब सिंह ने कहा कि बरनार जलाशय निर्माण के कारण सैकड़ों आदिवासी और किसान परिवारों के घर, खेत, स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र और उनकी आजीविका पर गहरा संकट आ गया है। उन्होंने सरकार से मांग की कि वह उचित पुनर्वास और मुआवजे के बिना किसानों की जमीन नहीं ले सकती। सिंह ने प्रभावित परिवारों को खेती योग्य जमीन के बदले जमीन, समुचित पुनर्वास, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी, साथ ही बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की गारंटी देने पर जोर दिया। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय राजमार्ग-333ए के चौड़ीकरण में अधिग्रहित भूमि के लिए वर्तमान एमवीआर के आधार पर पांच गुना मुआवजा देने की भी मांग की गई। सभा की अध्यक्षता किसान महासभा के जिला सचिव शंभू शरण सिंह ने की, जबकि पदयात्रा का नेतृत्व बाबू साहब सिंह, मनोज कुमार पांडेय, बासुदेव राय, संजय राय और कल्लू मरांडी ने किया। इंडियन इंक्लूसिव पार्टी के जिला अध्यक्ष शंभू तांती ने भी इस यात्रा को अपना समर्थन दिया। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार किसानों के प्रतिनिधिमंडल से शीघ्र वार्ता कर उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है, तो इस आंदोलन को और भी व्यापक तथा तीव्र किया जाएगा।2
- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के एक नेता ने एक मंत्री से मांगोबंदर पुल और नरियाना पुल के निर्माण/स्थिति के साथ-साथ बीड़ी मजदूरों की मजदूरी से जुड़े मामलों पर जवाब तलब किया है।1
- ट्रेनों में सीटों के लिए झगड़े की स्थिति उत्पन्न हुई है। हालांकि, इस बात की जानकारी नहीं है कि यह घटना किस विशिष्ट ट्रेन में घटित हुई है।1