दमोह में एक धोखाधड़ी मामले में आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने से परेशान पीड़ित आज बुधवार दोपहर 3 बजे पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे। नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी के इस मामले में हाईकोर्ट के आदेश के चार माह बीत जाने के बाद भी आरोपी को पकड़ा नहीं जा सका है। आवेदक देवेंद्र अहिरवाल और सीमा अहिरवाल ने पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगी को ज्ञापन सौंपकर मामले में शीघ्र कार्रवाई की मांग की। उन्होंने बताया कि वे 28 जुलाई 2025 से सीएम हेल्पलाइन, जनसुनवाई सहित विभिन्न स्तरों पर लगातार शिकायतें कर रहे हैं। इसके बाद हाईकोर्ट के रिट क्रमांक 5004/2026 पर 24 फरवरी 2026 को आरोपी शैलेन्द्र वर्मा के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए गए थे। पीड़ितों का आरोप है कि एफआईआर 8 मार्च 2026 को दर्ज होने के बावजूद न्यायालय के आदेशानुसार सभी धाराएं नहीं लगाई गईं और 115 दिन बीत जाने के बाद भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जांच अधिकारी लगातार जल्द कार्रवाई का आश्वासन देते रहे, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। पीड़ितों ने एसपी से निष्पक्ष जांच कर आरोपी के विरुद्ध शीघ्र कानूनी कार्रवाई करने और उनके लाखों रुपये वापस दिलाए जाने की मांग की है।
दमोह में एक धोखाधड़ी मामले में आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने से परेशान पीड़ित आज बुधवार दोपहर 3 बजे पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे। नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी के इस मामले में हाईकोर्ट के आदेश के चार माह बीत जाने के बाद भी आरोपी को पकड़ा नहीं जा सका है। आवेदक देवेंद्र अहिरवाल और सीमा अहिरवाल ने पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगी को ज्ञापन सौंपकर मामले में शीघ्र कार्रवाई की मांग की। उन्होंने बताया कि वे 28 जुलाई 2025 से सीएम हेल्पलाइन, जनसुनवाई सहित विभिन्न स्तरों पर लगातार शिकायतें कर रहे हैं। इसके बाद हाईकोर्ट के रिट क्रमांक 5004/2026 पर 24 फरवरी 2026 को आरोपी शैलेन्द्र वर्मा के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए गए थे। पीड़ितों का आरोप है कि एफआईआर 8 मार्च 2026 को दर्ज होने के बावजूद न्यायालय के आदेशानुसार सभी धाराएं नहीं लगाई गईं और 115 दिन बीत जाने के बाद भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जांच अधिकारी लगातार जल्द कार्रवाई का आश्वासन देते रहे, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। पीड़ितों ने एसपी से निष्पक्ष जांच कर आरोपी के विरुद्ध शीघ्र कानूनी कार्रवाई करने और उनके लाखों रुपये वापस दिलाए जाने की मांग की है।
- दमोह में नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की धोखाधड़ी के मामले में, हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद आरोपी की गिरफ्तारी न होने से परेशान पीड़ित आज बुधवार दोपहर 3 बजे पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुँचे। आवेदक देवेंद्र अहिरवाल और सीमा अहिरवाल ने पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगी को एक ज्ञापन सौंपकर मामले में शीघ्र और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है। पीड़ितों ने अपने ज्ञापन में बताया कि वे 28 जुलाई 2025 से सीएम हेल्पलाइन, जनसुनवाई सहित विभिन्न स्तरों पर इस मामले की शिकायत कर रहे हैं। इसके बाद, हाईकोर्ट ने रिट क्रमांक 5004/2026 पर 24 फरवरी 2026 को आरोपी शैलेन्द्र वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। हालांकि, 8 मार्च 2026 को एफआईआर दर्ज होने के बावजूद, पीड़ितों का आरोप है कि न्यायालय के आदेशानुसार सभी आवश्यक धाराएं नहीं लगाई गईं। इस एफआईआर को दर्ज हुए अब 115 दिन से अधिक बीत चुके हैं, लेकिन आरोपी की गिरफ्तारी अभी तक नहीं हो पाई है। पीड़ितों ने आरोप लगाया कि जांच अधिकारी लगातार जल्द कार्रवाई का आश्वासन देते रहे, मगर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिससे वे अत्यधिक परेशान हैं। पीड़ितों ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि इस मामले में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए, आरोपी के विरुद्ध त्वरित कानूनी कार्रवाई हो और उनके लाखों रुपये वापस दिलाए जाएँ।1
- जनपद पंचायत तेंदूखेड़ा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) मनीष बागरी के दुखद निधन पर मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने गहरा शोक व्यक्त किया है।1
- एक बड़े करिश्मे के तहत लुटेरों को उनकी औकात दिखा दी गई है। यह घटना भगवान की शक्ति का परिणाम बताई जा रही है, और एक वीडियो में भगवान राम की इसी शक्ति के कुछ अंशों को दिखाया गया है।1
- सी न्यूज़ भारत 16 जुलाई 2026 को लखनऊ के ताजमहल होटल में दिखाई देगा।1
- सागर जिले की बंडा तहसील के सिविल अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था को शर्मसार करने वाला एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। यहां एक डॉक्टर पर इलाज में घोर लापरवाही का आरोप लगा है, जिसके चलते 19 महीने के मासूम बच्चे की आँखों की रोशनी हमेशा के लिए चली गई है। पीड़ित पिता ने थाना बंडा में शिकायत दर्ज कराकर दोषी डॉक्टर और जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। जानकारी के अनुसार, ग्राम भूसा कमलपुर निवासी इंद्रराज विश्वकर्मा 29 मई 2026 को अपने 1 वर्ष 7 महीने के बेटे विनय विश्वकर्मा को सर्दी और आँखों में लालिमा की शिकायत के बाद सिविल अस्पताल बंडा लेकर पहुंचे थे। ओपीडी पर्ची बनवाने के बाद बच्चे को ड्यूटी पर मौजूद शासकीय चिकित्सक को दिखाया गया। पीड़ित पिता का आरोप है कि डॉक्टर ने बच्चे की जांच के बाद आँख में कफ साफ करने वाला ड्रॉप डाल दिया, साथ ही पैरासिटामोल सिरप, एक इंजेक्शन और अन्य दवाइयां दीं। परिजन 3 से 4 घंटे तक अस्पताल में रुके रहे, लेकिन बच्चे की हालत में सुधार होने के बजाय वह और बिगड़ती चली गई। बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे तत्काल जिला अस्पताल सागर रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों ने मामले को गंभीर बताते हुए उच्च चिकित्सा संस्थान ले जाने की सलाह दी। इसके बाद परिजन बच्चे को एम्स भोपाल लेकर पहुंचे। एम्स भोपाल के विशेषज्ञ डॉक्टरों की जांच के बाद सामने आया कि गलत इलाज या चिकित्सकीय लापरवाही के कारण मासूम विनय की आँखों की रोशनी पूरी तरह समाप्त हो चुकी है और बच्चा अब नेत्रहीन हो गया है। इस जानकारी ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया। इंद्रराज विश्वकर्मा ने थाना बंडा में दिए आवेदन में बताया कि सिविल अस्पताल बंडा में ड्यूटी पर तैनात संबंधित डॉक्टर द्वारा गंभीर लापरवाही बरती गई, जिसके चलते उनके बेटे की दृष्टि चली गई। उन्होंने कहा कि वे डॉक्टर को चेहरे से पहचानते हैं, लेकिन नाम नहीं जानते। पीड़ित परिवार ने पुलिस प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने शिकायत आवेदन स्वीकार कर मामले की जांच शुरू कर दी है।1
- ढलती हुई शाम का अपना एक अनूठा अंदाज़ होता है, जिसमें हर रंग के भीतर कोई अनकहा रहस्य छिपा होता है। यह वह समय है जब दिल में बस जाने वाली यादें जीवन भर के लिए सबसे ख़ूबसूरत एहसास बन जाती हैं। सूरज के ढलने पर वातावरण में गहरा सुकून छा जाता है, और दिन भर का सारा शोर कहीं दूर बिखर जाता है। शाम चुपके से यादों का दीप जला देती है, जिससे मन किसी अपने के ख़्यालों में खो जाता है। शाम की ठंडी हवा जब छूकर गुज़रती है, तो वह बीती हुई हर बात को फिर से ताज़ा कर देती है। यह हवा कभी मुस्कानें लाती है, तो कभी आँखों में आँसू भी ले आती है, मगर हर शाम जीवन का एक नया और महत्वपूर्ण सबक़ सिखा जाती है।2
- दमोह जिले के हटा विकासखंड के हिनौता गाँव में लगभग 1.23 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित नवीन स्कूल भवन के लोकार्पण समारोह में निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर विवाद सामने आया है। इस कार्यक्रम के दौरान भाजपा ग्रामीण मंडल अध्यक्ष गोपाल पटेल ने मंच से ही भवन निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए ठेकेदार और संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार विकास कार्यों पर करोड़ों खर्च करती है, लेकिन निर्माण एजेंसियों की लापरवाही से सरकारी मंशा विफल हो रही है। मंडल अध्यक्ष गोपाल पटेल ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि वर्तमान में कई सरकारी भवन गुणवत्ता से समझौता करके बनाए जा रहे हैं। उन्होंने अंग्रेजों के समय के भवनों की मजबूती का हवाला देते हुए टिप्पणी की कि उनकी उम्र आज भी बरकरार है, जबकि नए भवनों की आयु 10-20 साल भी नहीं होती। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से भी निर्माण कार्यों की निगरानी में सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया। इसके अतिरिक्त, पटेल ने कार्यक्रम के शिलालेख और आमंत्रण पत्र में जनपद पंचायत अध्यक्ष गंगाराम पटेल का नाम शामिल न किए जाने पर भी अपनी नाराजगी जताई। जानकारी के अनुसार, इस स्कूल भवन का निर्माण लोक निर्माण विभाग की भवन शाखा द्वारा किया गया है, जिसके पास क्षेत्र में अन्य शैक्षणिक भवनों के निर्माण की भी जिम्मेदारी है। विभाग में उपयंत्री का पद खाली होने और एसडीओ के तबादले के कारण निर्माण कार्यों की निगरानी प्रभावित होने की बात भी सामने आई है, वहीं संबंधित ठेकेदार का नाम पहले भी अनियमितताओं के मामलों में चर्चा में रह चुका है। मंच से यह मुद्दा उठने के बाद, कार्यक्रम की मुख्य अतिथि हटा विधायक उमा देवी खटीक ने भी भवन की गुणवत्ता पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि जब तक आवश्यक सुधार कार्य पूरे नहीं हो जाते, तब तक भवन का हैंडओवर स्वीकार न किया जाए। विधायक ने जोर देकर कहा कि सरकारी धन के उपयोग में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस सार्वजनिक विवाद के बाद निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, विभागीय निगरानी और जवाबदेही को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं, और अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विभाग भवन में सुधार कराता है या पूरे मामले की गहन जांच कराता है।1
- दमोह जिले में संचालित 108 एंबुलेंस सेवा से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। पत्रकार अरविंद सिंह लोधी द्वारा बनाई गई एक वीडियो रिकॉर्डिंग के बाद सरकारी आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जिसमें कथित तौर पर एंबुलेंस चालक और उसके सहयोगी की गतिविधियां रिकॉर्ड हुई हैं। पत्रकार के अनुसार, यह घटना मंगलवार रात करीब 8:30 बजे ग्राम पंचायत परासई के अंतर्गत आने वाले ग्राम लखनी की है, जहाँ वाहन क्रमांक CG04 NZ 1431 की 108 एंबुलेंस आकर रुकी थी। वीडियो में कथित रूप से एंबुलेंस का चालक, जिसकी पहचान बृजेश शुक्ला के रूप में बताई जा रही है, एक दुकान से मोबाइल लेकर 108 कंट्रोल रूम पर कॉल करता हुआ दिखाई देता है। इसके बाद यह कॉल एंबुलेंस स्टाफ तक पहुँचती है और एंबुलेंस में मौजूद दूसरा कर्मचारी भी बातचीत करता हुआ नजर आता है। पत्रकार का आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया के माध्यम से एक कथित फर्जी इवेंट दर्ज किया गया। यदि जांच में यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह सरकारी संसाधनों, डीजल और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा के दुरुपयोग का एक गंभीर मामला हो सकता है। इस घटना से यह बड़ा सवाल खड़ा होता है कि यदि एंबुलेंस वास्तविक मरीजों की बजाय ऐसे कथित इवेंट में व्यस्त रहती है, तो किसी सड़क दुर्घटना के शिकार, प्रसूता या अन्य गंभीर मरीज को समय पर सहायता कैसे मिल पाएगी, जबकि ऐसी स्थिति में देरी किसी की जान पर भारी पड़ सकती है। यह मामला अब जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और 108 एंबुलेंस सेवा संचालित करने वाली एजेंसी के लिए गहन जांच का विषय बन गया है। आवश्यक है कि वीडियो की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि क्या वास्तव में सेवा के नियमों का उल्लंघन हुआ है। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि जनता का 108 जैसी जीवनरक्षक सेवा पर भरोसा कायम रह सके। (यह समाचार उपलब्ध वीडियो और पत्रकार द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है, जिनकी आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभाग की जांच के बाद ही होगी।)1