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मध्य प्रदेश के भाण्डेर में स्थित रोहित अल्ट्रासाउंड सेंटर और दतिया में स्थित पीताम्बरा ईएनटी अल्ट्रासोनोग्राफी सेंटर की मशीनों को सील कर दिया गया है।
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मध्य प्रदेश के भाण्डेर में स्थित रोहित अल्ट्रासाउंड सेंटर और दतिया में स्थित पीताम्बरा ईएनटी अल्ट्रासोनोग्राफी सेंटर की मशीनों को सील कर दिया गया है।
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- मध्य प्रदेश के भाण्डेर में स्थित रोहित अल्ट्रासाउंड सेंटर और दतिया में स्थित पीताम्बरा ईएनटी अल्ट्रासोनोग्राफी सेंटर की मशीनों को सील कर दिया गया है।1
- भितरवार में सांदीपनी सीएम राइज (मॉडल) स्कूल तक पहुंचने वाला मार्ग शनिवार को हुई हल्की बारिश के बाद एक बार फिर कीचड़ और दलदल में तब्दील हो गया। इस बदहाल मार्ग के कारण स्कूल आने-जाने वाले सैकड़ों छात्र-छात्राओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। सड़क पर फिसलन इतनी बढ़ गई कि छुट्टी के बाद घर जा रहे विद्यार्थियों की साइकिलें और स्कूटियां कीचड़ में फिसलने लगीं, जिसके कारण कई बच्चों को अपने वाहन हाथ में पकड़कर खींचने पड़े और पैदल चलने वालों को भी काफी कठिनाई हुई। विद्यार्थियों की इस दुर्दशा को देखकर स्कूल की जागरूक शिक्षिका मनीषा राजोरिया ने इस बदहाल सड़क के फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा कर दिए, जो देखते ही देखते व्यापक रूप से वायरल हो गए। इन वीडियो और तस्वीरों में छात्र-छात्राएं किसी तरह कीचड़ से बचकर निकलते और दोपहिया वाहन फिसलते दिखाई दे रहे हैं, जिसने स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्षेत्रवासियों और अभिभावकों के अनुसार, यह समस्या काफी समय से बनी हुई है और कई बार जिम्मेदार अधिकारियों के संज्ञान में लाने के बावजूद इसका कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया। यह विद्यालय क्षेत्र का प्रमुख शिक्षण संस्थान है, जहां रोजाना बड़ी संख्या में छात्र पहुंचते हैं। अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि बारिश के मौसम को देखते हुए इस मार्ग की तत्काल मरम्मत कराई जाए और पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए, ताकि किसी बड़े हादसे से बचा जा सके। अब सभी की निगाहें प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर टिकी हैं कि वे इस गंभीर समस्या का कब तक स्थायी समाधान कराते हैं।2
- एक समय था जब महंगाई को लेकर तत्कालीन सरकार पर लगातार सवाल उठाए जाते थे और पेट्रोल, डीजल, गैस सिलेंडर व रसोई का बढ़ता खर्च चुनावी भाषणों का मुख्य मुद्दा हुआ करता था। लेकिन आज 2026 में महंगाई को लेकर जनता एक बार फिर सवाल पूछ रही है। सोशल मीडिया पर वर्ष 2013 और 2026 की कीमतों की तुलना करने वाले पोस्ट तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें पेट्रोल, डीजल, एलपीजी गैस सिलेंडर और रोजमर्रा की जरूरी चीजों की कीमतों में हुई बढ़ोतरी को दिखाया जा रहा है। हालांकि, अलग-अलग वर्षों की कीमतों की तुलना करते समय वैश्विक कच्चे तेल के दाम, टैक्स, आर्थिक परिस्थितियां और मुद्रास्फीति जैसे कई कारकों को भी ध्यान में रखना जरूरी होता है। इसके बावजूद, आम लोगों का साफ कहना है कि रसोई का खर्च बढ़ा है, जिससे घर चलाना मुश्किल हो गया है और आमदनी के मुकाबले उनके खर्च बहुत तेजी से बढ़े हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा हो रहा है कि क्या महंगाई से जूझ रही जनता को वाकई कोई राहत मिलेगी या फिर किए गए वादे केवल चुनावी भाषणों तक ही सीमित रह जाएंगे? पहले जहां महंगाई को देश का सबसे बड़ा मुद्दा बताया जाता था, वहीं आज 2026 के आंकड़े जनता के सामने हैं और लोग पूछ रहे हैं कि वादे पूरे हुए या सिर्फ भाषण बदल गए हैं।1
- देश की शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में आ खड़ी हुई है। एक तरफ जहां केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का एक ट्वीट सोशल मीडिया पर अपनी स्पेलिंग की गलतियों को लेकर चर्चा में है और वायरल हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ नीट (NEET) समेत कई अन्य परीक्षाओं के विवादों और पेपर लीक के मामलों ने देश के लाखों छात्रों की चिंता को बढ़ा दिया है। इस गंभीर स्थिति के बीच, सीजेपी (CJP) के विरोध प्रदर्शन और आंदोलन लगातार जारी हैं, जिसमें प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और पेपर लीक के दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार आखिर मौन क्यों है? इसके साथ ही, लंबे समय से भूख हड़ताल और आंदोलन से जुड़े रहे महान समाजसेवी सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद सोशल मीडिया पर बहस बेहद तेज हो गई है। उनके समर्थकों ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का मुद्दा बताया है, जबकि प्रशासन ने अपनी कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक बताया है। इन लगातार होते आंदोलनों और विवादों के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर छात्रों का भविष्य कैसे सुरक्षित होगा, ये पेपर लीक कब रुकेंगे और शिक्षा व्यवस्था में जनता का भरोसा कैसे बहाल होगा।1
- Post by Tarun Dixit1