देवघर में संत समाज की ऐतिहासिक घोषणा : कालकानंद गिरी बनीं जमशेदपुर किन्नर अखाड़ा की महामंडलेश्वर, देश-विदेश से मिल रही बधाइयाँ बीकानेर में आयोजित बीकानेर थिएटर फेस्टिवल के दसवें संस्करण में उदयपुर के रंगमंच और साहित्य का उल्लेखनीय प्रतिनिधित्व देखने को मिला। इस अवसर पर उदयपुर के रंगमंच से नाट्य निर्देशक सुनील टांक तथा वरिष्ठ साहित्यकार कुंदन माली को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया। देश के प्रतिष्ठित रंग समारोहों में शामिल यह महोत्सव **राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के भारत रंग महोत्सव के बाद देश का दूसरा बड़ा नाट्य उत्सव माना जाता है। नाटकों के इस महाकुंभ के रूप में प्रसिद्ध यह उत्सव इस वर्ष यह महोत्सव छह दिनों तक चला, जिसमें देशभर से रंगकर्मी अपनी नाट्य प्रस्तुतियों के साथ शामिल हुए। महोत्सव में लगभग 30 से अधिक रंगमंचीय प्रस्तुतियाँ और करीब 50 नुक्कड़ नाटक मंचित किए गए। इसके साथ ही रंगमंच और साहित्य से जुड़े विषयों पर कई रंग चर्चाएँ आयोजित की गईं, जिनमें देश के अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकारों और रंगकर्मियों ने भाग लिया। इनमें प्रमुख रूप से नंद किशोर आचार्य, प्रदीप भटनागर, अर्जुन देव चारण, गोपाल आचार्य, मधु आचार्य, हरीश बी. शर्मा तथा सुरेन्द्र धारणिया सहित अनेक साहित्यकार और नाटककार उपस्थित रहे। महोत्सव का समर्पण राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के पूर्व निदेशक देवेंद्र राज अंकुर को समर्पित किया गया और उनकी उपस्थिति में इस महोत्सव का शुभारंभ हुआ। इस आयोजन को सुदेश व्यास और उनकी टीम ने निरंतर प्रयासों से राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। महोत्सव के दौरान निर्मोही व्यास सम्मान अजय कुमार को प्रदान किया गया। साथ ही राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के रंगमंडल प्रमुख राजेश सिंह की उपस्थिति में एनएसडी रंगमंडल की ओर से रामगोपाल बजाज के अंधायुग जैसे कई कालजयी नाटकों के मंचन हुए तो वहीं दूसरी और फिल्म सरफरोश, स्वदेश, मकड़ी, जंगल फिल्मों के अभिनेता मकरंद देशपांडे ने नाटक पियक्कड़ से अपनी अभिनय से मंत्रमुग्ध कर दिया पूरे बीकानेर शहर में अलग-अलग स्थानों पर नाट्य मंचन, साहित्यिक चर्चाएँ, पुस्तक दीर्घा, कार्यशाला, परिचर्चा, संगीत कार्यक्रम, लोक कला प्रस्तुतियां, हेरिटेज वॉक और नुक्कड़ नाटक जैसे अनेक आयोजन किए गए। प्रतिदिन सुबह 8 बजे से रात 11 बजे तक विभिन्न आयोजनों के साथ संचालित होता है। देशभर से आए 1000 से अधिक रंगकर्मी और साहित्यकारों की सहभागिता से यह महोत्सव पूरे शहर को मानो एक सांस्कृतिक कुंभ का रूप दे देता है। इसी महोत्सव में वरिष्ठ साहित्यकार कुंदन माली ने उदयपुर के साहित्यिक योगदान पर अपने विचार प्रस्तुत किए, वहीं नाट्य निर्देशक सुनील टांक ने उदयपुर के रंगमंच, लोक कलाओं और यहां की कला-संस्कृति से उपस्थित लोगों को परिचित कराते हुए शहर का प्रतिनिधित्व किया। साथ ही उदयपुर शहर और संभाग की विभिन्न कलाओं एवं सांस्कृतिक परंपराओं से परिचित कराया |
देवघर में संत समाज की ऐतिहासिक घोषणा : कालकानंद गिरी बनीं जमशेदपुर किन्नर अखाड़ा की महामंडलेश्वर, देश-विदेश से मिल रही बधाइयाँ बीकानेर में आयोजित बीकानेर थिएटर फेस्टिवल के दसवें संस्करण में उदयपुर के रंगमंच और साहित्य का उल्लेखनीय प्रतिनिधित्व देखने को मिला। इस अवसर पर उदयपुर के रंगमंच से नाट्य निर्देशक सुनील टांक तथा वरिष्ठ साहित्यकार कुंदन माली को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया। देश के प्रतिष्ठित रंग समारोहों में शामिल यह महोत्सव **राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के भारत रंग महोत्सव के बाद देश का दूसरा बड़ा नाट्य उत्सव माना जाता है। नाटकों के इस महाकुंभ के रूप में प्रसिद्ध यह उत्सव इस वर्ष यह महोत्सव छह दिनों तक चला, जिसमें देशभर से रंगकर्मी अपनी नाट्य प्रस्तुतियों के साथ शामिल हुए। महोत्सव में लगभग 30 से अधिक रंगमंचीय प्रस्तुतियाँ और करीब 50 नुक्कड़ नाटक मंचित किए गए। इसके साथ ही रंगमंच और साहित्य से जुड़े विषयों पर कई रंग चर्चाएँ आयोजित की गईं, जिनमें देश के अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकारों और रंगकर्मियों ने भाग लिया। इनमें प्रमुख रूप से नंद किशोर आचार्य, प्रदीप भटनागर, अर्जुन देव चारण, गोपाल आचार्य, मधु आचार्य, हरीश बी. शर्मा तथा सुरेन्द्र धारणिया सहित अनेक साहित्यकार और नाटककार उपस्थित रहे। महोत्सव का समर्पण राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के पूर्व निदेशक देवेंद्र राज अंकुर को समर्पित किया गया और उनकी उपस्थिति में इस महोत्सव का शुभारंभ हुआ। इस आयोजन
को सुदेश व्यास और उनकी टीम ने निरंतर प्रयासों से राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। महोत्सव के दौरान निर्मोही व्यास सम्मान अजय कुमार को प्रदान किया गया। साथ ही राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के रंगमंडल प्रमुख राजेश सिंह की उपस्थिति में एनएसडी रंगमंडल की ओर से रामगोपाल बजाज के अंधायुग जैसे कई कालजयी नाटकों के मंचन हुए तो वहीं दूसरी और फिल्म सरफरोश, स्वदेश, मकड़ी, जंगल फिल्मों के अभिनेता मकरंद देशपांडे ने नाटक पियक्कड़ से अपनी अभिनय से मंत्रमुग्ध कर दिया पूरे बीकानेर शहर में अलग-अलग स्थानों पर नाट्य मंचन, साहित्यिक चर्चाएँ, पुस्तक दीर्घा, कार्यशाला, परिचर्चा, संगीत कार्यक्रम, लोक कला प्रस्तुतियां, हेरिटेज वॉक और नुक्कड़ नाटक जैसे अनेक आयोजन किए गए। प्रतिदिन सुबह 8 बजे से रात 11 बजे तक विभिन्न आयोजनों के साथ संचालित होता है। देशभर से आए 1000 से अधिक रंगकर्मी और साहित्यकारों की सहभागिता से यह महोत्सव पूरे शहर को मानो एक सांस्कृतिक कुंभ का रूप दे देता है। इसी महोत्सव में वरिष्ठ साहित्यकार कुंदन माली ने उदयपुर के साहित्यिक योगदान पर अपने विचार प्रस्तुत किए, वहीं नाट्य निर्देशक सुनील टांक ने उदयपुर के रंगमंच, लोक कलाओं और यहां की कला-संस्कृति से उपस्थित लोगों को परिचित कराते हुए शहर का प्रतिनिधित्व किया। साथ ही उदयपुर शहर और संभाग की विभिन्न कलाओं एवं सांस्कृतिक परंपराओं से परिचित कराया |
- Post by VAGAD news241
- डूंगरपुर। जनजाति अंचल के डूंगरपुर में मई ओर जून माह से पहले ही मार्च में जहा तापमान में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। जिसके चलते आगामी गर्मी को लेकर जिला प्रशासन पेयजल व्यवस्थाओं को लेकर मुस्तैदी दिखा रहा है। वही दूसरी ओर लचर विभागीय कार्यप्रणाली के चलते हजारों लीटर अमृत जल सड़को ओर नालियों में व्यर्थ बह रहा है। बुधवार को शहर ब्रह्मस्थली कॉलोनी में जलदाय विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है।1
- Post by Devilalmeena Meena1
- साप्ताहिक समीक्षा बैठक आयोजित डूंगरपुर। जिला कलेक्टर अंकित कुमार सिंह ने पीएचईडी अधीक्षण अभियंता को गर्मियों से पूर्व जिले में पेयजल वितरण के उचित प्रबंधन हेतु समीक्षा बैठक आयोजित कर आवश्यक व्यवस्थाओं को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने यह निर्देश जिला परिषद के ईडीपी सभागार में आयोजित साप्ताहिक समीक्षा बैठक में विभाग वार समीक्षा करते हुए दिए। बैठक में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की समीक्षा के दौरान पालनहार योजना, पेंशन योजना के तहत सत्यापन आदि की जानकारी दी तथा सीमलवाड़ा, चिखली, गलियाकोट में न्यून प्रगति पर तीव्रता से कार्य करने के निर्देश दिए। बैठक में उद्योग विभाग की समीक्षा के दौरान विभिन्न योजनाओं में मार्च पूर्व लक्ष्य के अनुसार स्वीकृतियां जारी करने के निर्देश दिए। बैठक में पीएचइडी अधीक्षण अभियंता ने पेयजल वितरण, हेड पंप, ट्यूब वेल, विभागीय कार्य एवं योजनाओं की क्रियान्वित के संबंध में जानकारी दी। इसी क्रम में पीडब्ल्यूडी, एवीएनएल, टीएडी, पशुपालन, उद्योग, जल संसाधन, सहकारिता, आईसीडीएस, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभागों की समीक्षा करते हुए सभी प्रगतिरत कार्यों को तय समय अवधि में पूर्ण करने तथा न्यून प्रगति वाली योजनाओं में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने संपर्क पोर्टल पर लंबित प्रकरणों के तत्काल निस्तारण करने तथा प्रभावी मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। बैठक में अतिरिक्त जिला कलेक्टर दिनेश चंद्र धाकड़, मुख्य कार्यकारी अधिकारी हनुमान सिंह राठौड़ सहित समस्त जिला स्तरीय अधिकारी गण मौजूद रहें।3
- उदयपुर/डूंगरपुर। लोकसभा क्षेत्र उदयपुर के जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों में शिक्षा के स्तर को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने दिल्ली के सदन में पुरजोर आवाज उठाई है। मंगलवार को संसद में नियम 377 के तहत विशेष उल्लेख करते हुए डॉ. रावत ने जिले की पांच महत्वपूर्ण पंचायत समितियों - ओगणा, सुलाव, देवला, नाई और कल्याणपुर में नवीन एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय खोलने की मांग केंद्र सरकार के समक्ष रखी। उन्होंने तर्क दिया कि ये क्षेत्र न केवल भौगोलिक रूप से दुर्गम हैं, बल्कि शिक्षा के संसाधनों के अभाव में यहां की प्रतिभाएं पिछड़ रही हैं। सांसद डॉ. रावत ने सदन को सांख्यिकीय आंकड़ों के साथ अवगत कराया कि ये पांचों पंचायत समितियां पूर्णतः जनजाति बाहुल्य हैं और विद्यालय स्थापना की सभी पात्रता शर्तों को पूरा करती हैं। उन्होंने 2011 की जनगणना का हवाला देते हुए बताया कि देवला में 98 प्रतिशत, सुलाव में 95 प्रतिशत, कल्याणपुर में 88 प्रतिशत, नाई में 86 प्रतिशत और ओगणा में 68 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या निवास करती है। वर्तमान में इन क्षेत्रों में एक भी एकलव्य विद्यालय संचालित नहीं होने के कारण यहां के बालक-बालिकाओं को गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा के लिए भटकना पड़ता है या उच्च शिक्षा के अवसरों से वंचित रहना पड़ता है। डॉ. रावत ने अपने संबोधन में क्षेत्र की भौगोलिक चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि दुर्गम अरावली पहाड़ियों में बसे इन गांवों के विद्यार्थियों के लिए प्रतिस्पर्धात्मक वातावरण तैयार करना समय की मांग है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि संविधान के अनुच्छेद 275 (1) के अंतर्गत विशेष बजट प्रावधान कर इन पांचों स्थानों पर एकलव्य विद्यालयों की स्वीकृति जल्द प्रदान की जाए। सांसद की इस पहल से स्थानीय नागरिकों में हर्ष की लहर है, क्योंकि इन क्षेत्रों में लंबे समय से शिक्षा के इस आधुनिक ढांचे की मांग की जा रही थी। यदि यह मांग स्वीकार होती है, तो इन सुदूर क्षेत्रों के जनजाति विद्यार्थियों को भी समग्र और वैश्विक स्तर की शिक्षा सुलभ हो सकेगी।1
- देवास में किसानों को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण, 40 किसानों ने लिया भाग1
- उदयपुर जिला कलेक्टर नमित मेहता ने मंगलवार को कुराबड़ क्षेत्र का दौरा कर विभिन्न सरकारी कार्यालयों और क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने निर्माणाधीन परियोजनाओं की मौका निरीक्षण करते हुए प्रगति की समीक्षा की अधिकारियों को गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।1
- डूंगरपुर। खेतों me फसल काटने गई युवती की जहरीले जानवर के काटने से तबियत बिगड़ गई। वही युवती का जिला अस्पताल में उपचार चल रहा है। पाप जानकारी अनुसार जिले के निकटवर्ती खांड़ी ओबरी गांव निवासी रीना पिता प्रेमशंकर भनात मंगलवार शाम अपने घर के पास खेतों में गेहूं की फसल काटने के लिए गई थी। तभी फसल में छिपे जहरीले जानवर ने युवती के हाथ पर काट लिया। जिसके बाद युवती को चक्कर ओर उल्टी की शिकायत होने पर उसे निजी वाहन से जिला अस्पताल लाया गया। युवती का उपचार चल रहा है।1