लखीमपुर खीरी जनपद में मोहर्रम के अवसर पर निकलने वाले ताजिया और शोक जुलूसों को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न कराने के लिए खीरी पुलिस ने व्यापक तैयारी की है। पुलिस प्रशासन ने पूरे जिले में विस्तृत और बहुस्तरीय सुरक्षा प्रबंधन सुनिश्चित किया है, ताकि कानून-व्यवस्था पूरी तरह दुरुस्त बनी रहे। इस संदर्भ में, खीरी पुलिस के आलाधिकारियों द्वारा लगातार अलर्ट रहते हुए सभी संबंधित आयोजकों, ताजिया समितियों, धर्मगुरुओं और शांति समिति के सदस्यों के साथ बैठकें आयोजित की जा रही हैं। इसके अतिरिक्त, जुलूस मार्गों का संयुक्त रूप से निरीक्षण किया गया है, जहाँ सुरक्षा, यातायात प्रबंधन (ट्रैफिक डायवर्जन) और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का बारीकी से परीक्षण किया गया है। संबंधित थाना प्रभारियों और अधिकारियों को इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं। सुरक्षा व्यवस्था के तहत, संपूर्ण जनपद में पर्याप्त संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस की टीमें लगातार क्षेत्र में भ्रमण कर (फ्लैग मार्च) रही हैं और सीधे ताजियादारों से संवाद स्थापित करके उन्हें शासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों से अवगत करा रही हैं। जनपद पुलिस ने स्पष्ट रूप से आश्वस्त किया है कि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं और यदि किसी भी असामाजिक तत्व ने शांति एवं कानून-व्यवस्था को भंग करने का प्रयास किया, तो उसके विरुद्ध कानूनन बेहद कठोर कार्रवाई की जाएगी। खीरी पुलिस ने जनपद के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे इस महत्वपूर्ण अवसर पर आपसी सहयोग, संयम और पारस्परिक सद्भाव बनाए रखें, ताकि मोहर्रम का यह पर्व पूरी शांति और गरिमामय वातावरण में संपन्न हो सके।
लखीमपुर खीरी जनपद में मोहर्रम के अवसर पर निकलने वाले ताजिया और शोक जुलूसों को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न कराने के लिए खीरी पुलिस ने व्यापक तैयारी की है। पुलिस प्रशासन ने पूरे जिले में विस्तृत और बहुस्तरीय सुरक्षा प्रबंधन सुनिश्चित किया है, ताकि कानून-व्यवस्था पूरी तरह दुरुस्त बनी रहे। इस संदर्भ में, खीरी पुलिस के आलाधिकारियों द्वारा लगातार अलर्ट रहते हुए सभी संबंधित आयोजकों, ताजिया समितियों, धर्मगुरुओं और शांति समिति के सदस्यों के साथ बैठकें आयोजित की जा रही हैं। इसके
अतिरिक्त, जुलूस मार्गों का संयुक्त रूप से निरीक्षण किया गया है, जहाँ सुरक्षा, यातायात प्रबंधन (ट्रैफिक डायवर्जन) और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का बारीकी से परीक्षण किया गया है। संबंधित थाना प्रभारियों और अधिकारियों को इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं। सुरक्षा व्यवस्था के तहत, संपूर्ण जनपद में पर्याप्त संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस की टीमें लगातार क्षेत्र में भ्रमण कर (फ्लैग मार्च) रही हैं और सीधे ताजियादारों से संवाद स्थापित करके उन्हें शासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों से
अवगत करा रही हैं। जनपद पुलिस ने स्पष्ट रूप से आश्वस्त किया है कि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं और यदि किसी भी असामाजिक तत्व ने शांति एवं कानून-व्यवस्था को भंग करने का प्रयास किया, तो उसके विरुद्ध कानूनन बेहद कठोर कार्रवाई की जाएगी। खीरी पुलिस ने जनपद के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे इस महत्वपूर्ण अवसर पर आपसी सहयोग, संयम और पारस्परिक सद्भाव बनाए रखें, ताकि मोहर्रम का यह पर्व पूरी शांति और गरिमामय वातावरण में संपन्न हो सके।
- गोला कुकरा जंगल मार्ग पर पुलिया का निर्माण कार्य पूरा हो गया है, जिससे अब यह आवागमन के लिए तैयार है। इस पुलिया के बनने से तीन दर्जन से अधिक गांवों के लोगों को बड़ी राहत मिली है।1
- लखीमपुर खीरी के मितौली थाना क्षेत्र में एक महिला अध्यापिका का शव शुक्रवार दोपहर करीब ढाई बजे उसके किराए के मकान में पंखे से लटका हुआ मिला। इस दुखद घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस तत्काल मौके पर पहुँची और मामले की गहन जाँच शुरू कर दी है। मृतका की पहचान 32 वर्षीय प्रियंका यादव के रूप में हुई है, जो मूल रूप से अयोध्या की निवासी थीं। वह वर्ष 2021 से मितौली ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय रौतापुर में प्राथमिक विद्यालय की अध्यापिका के पद पर कार्यरत थीं। बताया जाता है कि प्रियंका ने राहुल यादव से प्रेम विवाह किया था और उनके पति राहुल पंजाब में नौकरी करते हैं। प्रियंका अपनी 3 साल की बेटी के साथ मितौली में किराए के मकान में रहती थीं। शुक्रवार दोपहर को प्रियंका के पति राहुल ने मितौली निवासी अपने एक परिचित दोस्त और मकान मालिक को फोन कर किसी अनहोनी की आशंका जताई थी। जब वे दोनों मौके पर पहुँचे, तब तक बहुत देर हो चुकी थी और उन्हें शिक्षिका का शव पंखे से फांसी के फंदे से लटका हुआ मिला। घटना की सूचना पर क्षेत्राधिकारी मितौली यादवेंद्र, थाना प्रभारी महेश पाठक, एसआई धर्मेंद्र सिंह और महिला एसआई महिमा पांडे सहित भारी पुलिस बल मौके पर पहुँचा। थाना प्रभारी महेश पाठक ने बताया कि शिक्षिका के परिजनों को घटना की सूचना दे दी गई है। पुलिस के अनुसार, आत्महत्या के कारणों का अभी तक पता नहीं चल सका है, हालांकि यह बताया जा रहा है कि शिक्षिका ने खुदकुशी करने से पहले अपने पति से फोन पर बात की थी। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की तैयारी शुरू कर दी है, लेकिन खबर लिखे जाने तक शव को पोस्टमार्टम के लिए नहीं भेजा गया था।4
- कोतवाली पसगवां की पुलिस चौकी बरबर में तैनात आरक्षी राहुल पर ड्यूटी के दौरान वर्दी पहनकर सोशल मीडिया पर रील बनाने का आरोप है। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री के उन सख्त आदेशों की खुल्लम-खुल्ला अवहेलना मानी जा रही है, जिनमें ड्यूटी के समय किसी भी पुलिसकर्मी को रील बनाने से मना किया गया है। आरक्षी राहुल सोशल मीडिया पर लगातार सक्रिय नजर आते हैं और नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। आरक्षी राहुल का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। इस मामले की शिकायत आलाधिकारियों से की गई है, और जानकारी 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) के माध्यम से भी उच्चाधिकारियों तक पहुंचाई गई। इसके बाद पसगवां थाना को इस पूरे मामले में आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। अब देखना यह होगा कि इस मामले में आरक्षी के खिलाफ कब और क्या कार्रवाई की जाती है। मामले को लेकर यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा, या फिर नियम-कानून केवल आम और गरीब लोगों पर ही लागू होते हैं, पुलिसकर्मियों पर नहीं।1
- केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी जल जीवन मिशन (हर घर जल योजना), जिसका उद्देश्य प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक स्वच्छ पेयजल पहुँचाना है, विकास खंड मितौली की ग्राम पंचायत बबौना में अपने लक्ष्य से बहुत दूर दिख रही है। वर्ष 2022 में शुरू हुआ ओवरहेड पानी की टंकी का निर्माण कार्य, चार साल का लंबा समय बीत जाने के बावजूद, आज भी अधूरा पड़ा है और बांस-बल्लियों के सहारे खड़ा है। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया, जिससे योजना की गति बेहद धीमी रही है। इस अधूरे कार्य के कारण भीषण गर्मी और गिरते भूजल स्तर ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है, और गांव में लगे कई घरेलू नलों से पानी की आपूर्ति प्रभावित होने लगी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि टंकी और जलापूर्ति व्यवस्था का निर्माण समय पर पूरा हो गया होता, तो आज उन्हें इस समस्या का सामना नहीं करना पड़ता। अब गांव में यह चर्चा तेज है कि आखिर करोड़ों रुपये की लागत वाली यह योजना चार साल बाद भी अधूरी क्यों है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि 2022 में शुरू हुआ काम अब तक पूरा क्यों नहीं हुआ, कार्य में देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर क्या कार्रवाई हुई, करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद उन्हें पानी क्यों नहीं मिल रहा, और क्या निर्माण कार्य और खर्च की जांच कराई जाएगी। इसी विकास खंड की ग्राम पंचायत कस्ता के मजरा रतहरा में भी ऐसी ही स्थिति है, जहाँ कस्ता कॉलोनी पर बनी टंकी से रतहरा गांव को एक लंबे अरसे पहले कुछ दिनों तक पानी की सप्लाई तो हुई, लेकिन उसके बाद से वर्षों से पानी नहीं मिल रहा। ग्रामीण पूछते हैं कि क्या पानी की सप्लाई केवल दिखावा मात्र करने के लिए की गई थी और सालों गुजरने के बाद भी उनके गांव को पानी क्यों नहीं मिल रहा। बबौना और रतहरा दोनों गांवों के ग्रामीणों ने जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी और जल निगम के अधिकारियों से मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने, अधूरे निर्माण कार्य को शीघ्र पूरा करने और गांव में नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है। ग्रामीणों का स्पष्ट मत है कि "हर घर जल का सपना तभी साकार होगा, जब योजनाएं कागजों से निकलकर धरातल पर पूरी होंगी।"2
- पलिया नगर के मोहल्ला ढाकिन नई बस्ती स्थित एक खाली पड़े प्लॉट में शनिवार को एक अज्ञात अधेड़ का शव मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई। शव पड़े होने की सूचना मिलते ही आसपास के लोगों की भीड़ मौके पर जुट गई और पूरे मोहल्ले में हड़कंप मच गया। सूचना मिलने पर पलिया कोतवाली पुलिस तत्काल घटनास्थल पर पहुंची और निरीक्षण के बाद शव को अपने कब्जे में ले लिया। मृतक की उम्र लगभग 50 वर्ष बताई जा रही है, हालांकि अभी तक उसकी शिनाख्त नहीं हो सकी है। थानाध्यक्ष पंकज त्रिपाठी ने जानकारी दी कि पुलिस शव की पहचान कराने का प्रयास कर रही है। पहचान होने के बाद परिजनों को सूचित किया जाएगा। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की तैयारी की जा रही है, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर ही मौत के सही कारणों का पता चल सकेगा। इसके उपरांत मामले में अग्रिम विधिक कार्रवाई की जाएगी।4
- उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के निघासन थाना क्षेत्र की झंडी चौकी अंतर्गत पचपेड़ी गांव में मोहर्रम के दौरान बनाए जा रहे 55 फीट ऊँचे ताजिए पर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया। मानक से अधिक ऊंचाई का ताजिया तैयार किए जाने की सूचना मिलने के बाद तहसील और पुलिस प्रशासन तुरंत मौके पर पहुँचा। प्रशासन ने ताजिए को गिराकर उसकी ऊंचाई कम करवाई, जिसके बाद ग्रामीणों में भारी नाराजगी और आक्रोश देखा गया। प्रशासन की इस कार्रवाई से गुस्साए ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ताजिया खड़ा होने के बाद उसे जबरन गिराकर काटा गया, जिससे उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। स्थानीय लोगों ने यह सवाल भी उठाया कि जब पूरी रात ताजिया तैयार किया जा रहा था, तो झंडी चौकी पुलिस को इसकी भनक क्यों नहीं लगी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम और सीओ मौके पर पहुंचे। उन्होंने लोगों से बातचीत कर माहौल को शांत कराया और स्थिति को नियंत्रण में लिया। एहतियात के तौर पर गांव में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। फिलहाल, क्षेत्र में स्थिति नियंत्रित बताई जा रही है और प्रशासन पूरे मामले पर अपनी नजर बनाए हुए है।2
- लखीमपुर के ओयल कस्बे में मोहर्रम का जुलूस लखीमपुर, सीतापुर और नेशनल हाईवे मार्ग से होते हुए कर्बला की ओर रवाना हो चुका है। इस दौरान, ओयल पुलिस चौकी प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट है और कस्बे के चप्पे-चप्पे पर कड़ी नजर रखी जा रही है, जिससे वाहनों की आवाजाही में कोई परेशानी न हो।1
- अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा, उत्तर प्रदेश के आह्वान पर गुरुवार, 25 जून को प्रदेशव्यापी कार्यक्रम के तहत गोला गोकर्णनाथ/लखीमपुर खीरी के ब्लॉक मुख्यालय पर एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया गया। इस प्रदर्शन के उपरांत, संगठन के पदाधिकारियों ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम संबोधित एक ज्ञापन खंड विकास अधिकारी को सौंपते हुए ग्रामीण मजदूरों और गरीबों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की। ज्ञापन में संगठन ने प्रमुखता से मांग की कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत सभी जॉब कार्ड धारकों को नियमित रोजगार उपलब्ध कराया जाए, साथ ही 18 वर्ष से अधिक आयु के सभी मजदूरों के जॉब कार्ड बनाए जाएं। इसके अतिरिक्त, मनरेगा के तहत वर्तमान मजदूरी दर को बढ़ाकर ₹729 प्रतिदिन किए जाने की मांग भी उठाई गई। संगठन ने प्रदेश में बिजली की बढ़ी हुई दरों और स्मार्ट मीटर व्यवस्था पर गंभीर आपत्ति जताते हुए बिजली की दरों में वृद्धि वापस लेने, स्मार्ट मीटर पर तत्काल रोक लगाने तथा सभी उपभोक्ताओं को 200 यूनिट मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने की मांग की। इनके अलावा, ज्ञापन में माइक्रोफाइनेंस कंपनियों एवं निजी संस्थाओं द्वारा ग्रामीण गरीबों से की जा रही कथित मनमानी पर रोक लगाने, ₹2 लाख तक के कर्ज माफ करने और आरबीआई की गाइडलाइन का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराने की मांग भी शामिल थी। संगठन ने यह भी मांग की कि प्रदेश में बंजर, परती एवं आबादी की भूमि पर बसे लोगों को उजाड़ने के बजाय उनका विधिवत पुनर्वास किया जाए और ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। धरना-प्रदर्शन के दौरान संगठन के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी इन मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो भविष्य में इस आंदोलन को और भी व्यापक रूप दिया जाएगा।4
- लखीमपुर खीरी जनपद के कस्बा खीरी में मोहर्रम की 10 तारीख यानी यौमे आशूरा के अवसर पर अकीदतमंदों का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस दौरान एक से बढ़कर एक खूबसूरत और दिलों को छू लेने वाले ताज़ियों को पूरे एहतराम, मोहब्बत और अकीदत के साथ ज़ियारत के बाद नम आँखों से सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इस मंज़र में हर आँख नम थी, हर चेहरा ग़मगीन था और हर ज़ुबान पर सिर्फ़ "या हुसैन… या हुसैन…" की सदा गूँज रही थी। मोहर्रम केवल एक तारीख या रस्म नहीं, बल्कि सब्र, कुर्बानी, इंसाफ और हक़ की राह पर कायम रहने का पैगाम है। यह दिन कर्बला के उस अज़ीम वाकये की याद दिलाता है, जहाँ इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और उनके जानिसार साथियों ने इंसानियत, अमन, इंसाफ और सच्चाई के लिए तपती हुई रेत पर ऐसी मिसाल कायम की जिसे दुनिया कभी भूल नहीं सकती। उन्होंने कठिन हालात, प्यास और तकलीफ़ों के बावजूद हक़ के सामने झुकने के बजाय कुर्बानी को चुना, यही कारण है कि सदियाँ बीत जाने के बाद भी आज दुनिया भर में शहीदाने कर्बला को याद किया जाता है। कस्बा खीरी में भी उसी अकीदत और एहतराम की झलक देखने को मिली, जहाँ छोटे बच्चे, नौजवान और बुजुर्ग सहित हर उम्र के लोग इस ग़म में शरीक हुए। रास्तों पर लोगों की भीड़, ताज़ियों की रौनक और ग़म का माहौल एक साथ छाया रहा। दूर-दूर से आए कई अकीदतमंदों ने फ़ातिहा पढ़ी, दुआ की और ख़ामोशी से खड़े होकर अपनी अकीदत पेश की। जैसे-जैसे ताज़िये अपने आखिरी मरहले की तरफ बढ़ते गए, माहौल और ज़्यादा पुरअसर होता गया। ताज़ियों को सुपुर्द-ए-खाक किए जाने के दौरान कई लोगों की आँखें नम थीं और फ़िज़ाओं में "लब्बैक या हुसैन" की सदाएँ गूँज उठीं, जब लोगों ने शहीदाने कर्बला की कुर्बानियों को सलाम पेश किया। यह मोहर्रम हमें यह भी सिखाता है कि इंसानियत, सब्र, इखलास और सच्चाई का रास्ता कभी ख़त्म नहीं होता; वक्त बदल जाता है लेकिन कुर्बानी और हक़ की आवाज़ हमेशा ज़िंदा रहती है।1