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मंडला मध्यप्रदेश में बैगा जनजाति के उत्थान के लिए सरकार बड़े-बड़े दावे... कागजों तक सीमित...जमीनी हकीकत कैमरे में कैद...आज भी बैगा जनजाति परिवार शासकीय लाभ से कोषो दूर...
Govardhan kushwaha
मंडला मध्यप्रदेश में बैगा जनजाति के उत्थान के लिए सरकार बड़े-बड़े दावे... कागजों तक सीमित...जमीनी हकीकत कैमरे में कैद...आज भी बैगा जनजाति परिवार शासकीय लाभ से कोषो दूर...
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- मुख्यमंत्री तीर्थ योजना के अंतर्गत नैनपुर रेल्वे स्टेशन से 250 वृद्धजनों का जत्था रामेश्वर रवाना... जिला प्रशासन मंडला की और से प्रति निधि के रूप में एसडीएम नैनपुर आशुतोष महादेव ठाकुर एवं तहसीलदार हरि सिंह धुर्वे पहुंचे सुनिश्चित सफल यात्रा और वृद्ध जनों का जिला प्रशासन की टीम में स्वागत किया और सफल यात्रा की शुभकामनाएं दी1
- Post by Neelesh THAKUR1
- *‘नशे से दूरी है जरूरी’ अभियान में बड़ी कार्यवाही — आरोपी गिरफ्तार* मोहगांव पुलिस की बड़ी कार्रवाई — 106.92 लीटर अवैध शराब व ईनोवा क्रिस्टा कार जप्त पुलिस अधीक्षक मंडला श्री रजत सकलेचा के निर्देशन में जिले में *“नशे से दूरी है जरूरी” ऑपरेशन क्लीन स्वीप अभियान* के तहत *अवैध शराब कारोबारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जा रही है।* इसी क्रम में *दिनांक 17.02.2026 की रात्रि प्राप्त मुखबिर सूचना के आधार पर थाना मोहगांव पुलिस द्वारा ग्राम इंद्रा माल क्षेत्र में रेड कार्यवाही* की गई। कार्रवाई के दौरान *आरोपी निशांत करमंडे के कब्जे से कुल 12 कार्टून में भरी देशी एवं अंग्रेजी शराब (कुल 106.92 लीटर) बरामद की गई। साथ ही शराब परिवहन में प्रयुक्त ईनोवा क्रिस्टा कार क्रमांक MP-18 BB-2251 को भी जप्त* किया गया। प्राथमिक पूछताछ में ज्ञात हुआ कि *आरोपी अपने सहयोगी अभिषेक गोड़ निवासी कटरा मंडला के साथ उक्त अवैध शराब बिक्री हेतु ला रहा था। रेड कार्रवाई के दौरान सह-अभियुक्त अभिषेक गोड़ अंधेरे का लाभ उठाकर मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश जारी है। मामले में प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना की जा रही है।* *आरोपी* *गिरफ्तार आरोपी:* निशांत करमंडे (झारिया) पिता स्व. रामकुमार झारिया, उम्र 21 वर्ष निवासी — राम मंदिर के पास, रामनगर, थाना महाराजपुर, जिला मंडला *फरार आरोपी* अभिषेक गोड़, निवासी कटरा मंडला (तलाश जारी) *जप्त सामान* *1=* कुल 106.92 लीटर देशी एवं अंग्रेजी शराब(कुल अनुमानित कीमत — ₹67,620/-) *2=* ईनोवा क्रिस्टा कार क्रमांक MP-18 BB-2251 (वाहन की अनुमानित कीमत — ₹23,00,000/-) *सराहनीय भूमिका* उक्त कार्यवाही में थाना प्रभारी मोहगांव निरीक्षक वेदराम हनोते, उप निरीक्षक मनोज कुमार गौतम, उप निरीक्षक नंदश्याम धुर्वे, उप निरीक्षक वंदना शर्मा, प्रधान आरक्षक प्रीतम उईके, आरक्षक हेमंत मरावी, शिव परस्ते, चालक आरक्षक रेवा मरावी की सराहनीय भूमिका रही।1
- *रोती मां ने कहा... मेरा सहारा चला गया...* *हाई टेंशन तार की चपेट में आया शिवराज* *इलाज के दौरान मौत*1
- ~ जबलपुर के कटंगा स्थित जॉनसन स्कूल में 10वीं कक्षा की छात्रा का एडमिट कार्ड रोके जाने का मामला सामने आया है। फीस विवाद के बाद ABVP कार्यकर्ताओं ने स्कूल पहुंचकर प्रदर्शन किया। स्कूल प्रबंधन ने कहा कि केवल फीस के आधार पर एडमिट कार्ड नहीं रोका गया। पुलिस और प्रशासन मामले पर नजर बनाए हुए हैं। ~ 📍 Location: Katanga, Jabalpur Report: Deepak Vishwakarma Sach Tak Patrika News1
- *ग्राम पंचायत घुसिया के वाशिदों के लिए पानी की टंकी बनी दिखावा* *लगभग 6 सालों में बूंद भर पानी भी न हो सका नशीब* *कागजों में सरपट दौड़ता जल जीवन मिशन* डिंडोरी --- आदिवासी बाहुल्य इस जिले में शासन की अति महत्वाकांक्षी योजनाएं जमीन पर दम तोड़ती नजर आ रही हैं!पर इससे न तो जनप्रतिनधियों को कोई सरोकार है! और न ही सम्बंधित विभाग के आला अफसरों को जिसका नतीजा योजनाएं जमीन पर तो नहीं लेकिन सरकारी दावों पर जरूर सरपट दौड़ रही हैं! जिसका ताज़ा तरीन मामला है! जनपद पंचायत डिंडोरी अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत घुसिया का जहां जल जीवन मिशन अंतर्गत जिले के पी, एच, ई विभाग एवं ठेकेदार के द्वारा लगभग 6 - 7 साल पहले पेय जल के लिए पानी की टंकी के पाइप लाईन का विस्तार तो किया गया लेकिन लगभग 3500 से 3600 सौ की आवादी वाली ग्राम पंचयत के वाशिदों को अब तक बूंद भर पानी नशीब नहीं हुआ ग्रामीणों ने इस बावद संबंधित विभाग सहित जिला कलेक्टर को अनेकों शिकायत पत्र दिये पर नतीजा सिफ़र ही रहा उल्लेखनीय है!कि केंद्र व राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना क्षेत्र में पूरी तरह विफल होती नजर आ रही है। योजना के अंतर्गत गांव में टंकी निर्माण और पाइपलाइन विस्तार का कार्य करीब 6 वर्ष पूर्व पूरा कर लिया गया था, लेकिन हैरानी की बात यह है कि आज तक ग्रामीणों को पेयजल की एक बूंद भी नसीब नहीं हो पाई है। ग्रामीणों का कहना है कि योजना के नाम पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए गए, टंकी बनाए गए और घर-घर पाइपलाइन बिछाई गई, लेकिन न तो टंकी में पानी भरा गया और न ही नलों से पानी आया। वर्तमान स्थिति यह है कि टंकी सूखी पड़ी हैं और पाइपलाइन शोपीस बनकर रह गई है। पेयजल संकट के चलते ग्रामीणों को कई किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ रहा है। महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, जिन्हें रोजाना समय और मेहनत दोनों खर्च कर पानी की व्यवस्था करनी पड़ रही है। गर्मी के मौसम में हालात और भी बदतर हो जाते हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से योजना में भारी अनियमितताएं और भ्रष्टाचार हुआ है। कागजों में योजना को पूर्ण दिखाकर भुगतान कर लिया गया, जबकि जमीनी स्तर पर योजना आज तक शुरू ही नहीं हो पाई। कई बार शिकायत करने के बावजूद जिम्मेदार विभाग और प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। अब सवाल यह है कि जब सरकार हर घर नल से जल का दावा कर रही है, तो फिर 6 वर्षों से पानी को तरस रहे इन ग्रामीणों की जिम्मेदारी कौन लेगा?7
- मध्यप्रदेश में बैगा जनजाति के उत्थान के लिए सरकार बड़े-बड़े दावे... कागजों तक सीमित...जमीनी हकीकत कैमरे में कैद...आज भी बैगा जनजाति परिवार शासकीय लाभ से कोषो दूर...1
- Post by Neelesh THAKUR1
- डिंडोरी -- आदिवासी बाहुल्य जिले में नियम कायदों की धज्जियाँ उड़ाना अवैध कार्य करने वालों का मानो शगल बन गया है! और ऐसा होना भी इसलिए लाजमी है! क्योंकि जिनके हाथों में इन पर नकेल कसने की जिम्मेदारी है वही इन्हें संरक्षण प्रदान किये हुए हैं! किसान लुटता है तो लुटता रहे इन्हें इससे जरा भी कोई सरोकार नहीं है! जिसका उदाहरण है विक्रमपुर में संचालित दुबे बीज भंडार की दुकान जहां बीज की आड़ में बिना लाइसेंस यूरिया एवं डी, ए, पी, खाद किसानों को शासकीय मूल्य से अधिक दामों में बेचीं जा रही है! जिसकी खबर बीते दिनों प्रमुखता के साथ प्रकाशित होने के बाद उपसंचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास की टीम ने बीते 31 जनवरी को छापेमार कार्यवाई की थी कार्यवाई के संबंध में विभाग के जिम्मेदारों से जानकारी मांगने पर अब तक गोलमोल जवाब ही दे रहे हैं! यूरिया और डीएपी खाद की अवैध बिक्री पर कृषि विभाग द्वारा हाल ही में छापामार कार्रवाई की गई थी। जो अब महज दिखावा साबित हो रही है विभाग ने सख्ती का दावा करते हुए लाइसेंस जांच, स्टॉक मिलान और नमूने लेने की प्रक्रिया पूरी की थी। लेकिन हैरानी की बात यह है कि कार्रवाई के कुछ ही दिनों बाद वही विक्रेता खुलेआम यूरिया–डीएपी की बिक्री करता नजर आ रहा है। किसानों का आरोप है कि छापे की सूचना पहले ही लीक कर दी जाती है, जिससे औपचारिकता पूरी कर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। कई किसानों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि निर्धारित दर से अधिक कीमत वसूली जा रही है और बिना बिल के खाद बेची जा रही है। स्थानीय किसानों का कहना है कि यदि विभाग ने सख्त कार्रवाई की होती तो संबंधित दुकान सील होती या लाइसेंस निलंबित किया जाता। लेकिन वर्तमान स्थिति यह संकेत दे रही है कि या तो कार्रवाई अधूरी थी या फिर प्रभावहीन। अब सवाल यह उठ रहा है कि जब छापे के बाद भी अवैध बिक्री जारी है तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी? क्या विभाग केवल दिखावटी कार्रवाई कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है? किसानों ने उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच और कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है, ताकि खाद की कालाबाजारी पर वास्तव में रोक लग सके।5