*ग्राम पंचायत घुसिया के वाशिदों के लिए पानी की टंकी बनी दिखावा* *लगभग 6 सालों में बूंद भर पानी भी न हो सका नशीब* *कागजों में सरपट दौड़ता जल जीवन मिशन* डिंडोरी --- आदिवासी बाहुल्य इस जिले में शासन की अति महत्वाकांक्षी योजनाएं जमीन पर दम तोड़ती नजर आ रही हैं!पर इससे न तो जनप्रतिनधियों को कोई सरोकार है! और न ही सम्बंधित विभाग के आला अफसरों को जिसका नतीजा योजनाएं जमीन पर तो नहीं लेकिन सरकारी दावों पर जरूर सरपट दौड़ रही हैं! जिसका ताज़ा तरीन मामला है! जनपद पंचायत डिंडोरी अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत घुसिया का जहां जल जीवन मिशन अंतर्गत जिले के पी, एच, ई विभाग एवं ठेकेदार के द्वारा लगभग 6 - 7 साल पहले पेय जल के लिए पानी की टंकी के पाइप लाईन का विस्तार तो किया गया लेकिन लगभग 3500 से 3600 सौ की आवादी वाली ग्राम पंचयत के वाशिदों को अब तक बूंद भर पानी नशीब नहीं हुआ ग्रामीणों ने इस बावद संबंधित विभाग सहित जिला कलेक्टर को अनेकों शिकायत पत्र दिये पर नतीजा सिफ़र ही रहा उल्लेखनीय है!कि केंद्र व राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना क्षेत्र में पूरी तरह विफल होती नजर आ रही है। योजना के अंतर्गत गांव में टंकी निर्माण और पाइपलाइन विस्तार का कार्य करीब 6 वर्ष पूर्व पूरा कर लिया गया था, लेकिन हैरानी की बात यह है कि आज तक ग्रामीणों को पेयजल की एक बूंद भी नसीब नहीं हो पाई है। ग्रामीणों का कहना है कि योजना के नाम पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए गए, टंकी बनाए गए और घर-घर पाइपलाइन बिछाई गई, लेकिन न तो टंकी में पानी भरा गया और न ही नलों से पानी आया। वर्तमान स्थिति यह है कि टंकी सूखी पड़ी हैं और पाइपलाइन शोपीस बनकर रह गई है। पेयजल संकट के चलते ग्रामीणों को कई किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ रहा है। महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, जिन्हें रोजाना समय और मेहनत दोनों खर्च कर पानी की व्यवस्था करनी पड़ रही है। गर्मी के मौसम में हालात और भी बदतर हो जाते हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से योजना में भारी अनियमितताएं और भ्रष्टाचार हुआ है। कागजों में योजना को पूर्ण दिखाकर भुगतान कर लिया गया, जबकि जमीनी स्तर पर योजना आज तक शुरू ही नहीं हो पाई। कई बार शिकायत करने के बावजूद जिम्मेदार विभाग और प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। अब सवाल यह है कि जब सरकार हर घर नल से जल का दावा कर रही है, तो फिर 6 वर्षों से पानी को तरस रहे इन ग्रामीणों की जिम्मेदारी कौन लेगा?
*ग्राम पंचायत घुसिया के वाशिदों के लिए पानी की टंकी बनी दिखावा* *लगभग 6 सालों में बूंद भर पानी भी न हो सका नशीब* *कागजों में सरपट दौड़ता जल जीवन मिशन* डिंडोरी --- आदिवासी बाहुल्य इस जिले में शासन की अति महत्वाकांक्षी योजनाएं जमीन पर दम तोड़ती नजर आ रही हैं!पर इससे न तो जनप्रतिनधियों को कोई सरोकार है! और न ही सम्बंधित विभाग के आला
अफसरों को जिसका नतीजा योजनाएं जमीन पर तो नहीं लेकिन सरकारी दावों पर जरूर सरपट दौड़ रही हैं! जिसका ताज़ा तरीन मामला है! जनपद पंचायत डिंडोरी अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत घुसिया का जहां जल जीवन मिशन अंतर्गत जिले के पी, एच, ई विभाग एवं ठेकेदार के द्वारा लगभग 6 - 7 साल पहले पेय जल के लिए पानी की टंकी के पाइप
लाईन का विस्तार तो किया गया लेकिन लगभग 3500 से 3600 सौ की आवादी वाली ग्राम पंचयत के वाशिदों को अब तक बूंद भर पानी नशीब नहीं हुआ ग्रामीणों ने इस बावद संबंधित विभाग सहित जिला कलेक्टर को अनेकों शिकायत पत्र दिये पर नतीजा सिफ़र ही रहा उल्लेखनीय है!कि केंद्र व राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना क्षेत्र में पूरी तरह
विफल होती नजर आ रही है। योजना के अंतर्गत गांव में टंकी निर्माण और पाइपलाइन विस्तार का कार्य करीब 6 वर्ष पूर्व पूरा कर लिया गया था, लेकिन हैरानी की बात यह है कि आज तक ग्रामीणों को पेयजल की एक बूंद भी नसीब नहीं हो पाई है। ग्रामीणों का कहना है कि योजना के नाम पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए गए, टंकी
बनाए गए और घर-घर पाइपलाइन बिछाई गई, लेकिन न तो टंकी में पानी भरा गया और न ही नलों से पानी आया। वर्तमान स्थिति यह है कि टंकी सूखी पड़ी हैं और पाइपलाइन शोपीस बनकर रह गई है। पेयजल संकट के चलते ग्रामीणों को कई किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ रहा है। महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, जिन्हें रोजाना समय और
मेहनत दोनों खर्च कर पानी की व्यवस्था करनी पड़ रही है। गर्मी के मौसम में हालात और भी बदतर हो जाते हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से योजना में भारी अनियमितताएं और भ्रष्टाचार हुआ है। कागजों में योजना को पूर्ण दिखाकर भुगतान कर लिया गया, जबकि जमीनी स्तर पर योजना
आज तक शुरू ही नहीं हो पाई। कई बार शिकायत करने के बावजूद जिम्मेदार विभाग और प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। अब सवाल यह है कि जब सरकार हर घर नल से जल का दावा कर रही है, तो फिर 6 वर्षों से पानी को तरस रहे इन ग्रामीणों की जिम्मेदारी कौन लेगा?
- *ग्राम पंचायत घुसिया के वाशिदों के लिए पानी की टंकी बनी दिखावा* *लगभग 6 सालों में बूंद भर पानी भी न हो सका नशीब* *कागजों में सरपट दौड़ता जल जीवन मिशन* डिंडोरी --- आदिवासी बाहुल्य इस जिले में शासन की अति महत्वाकांक्षी योजनाएं जमीन पर दम तोड़ती नजर आ रही हैं!पर इससे न तो जनप्रतिनधियों को कोई सरोकार है! और न ही सम्बंधित विभाग के आला अफसरों को जिसका नतीजा योजनाएं जमीन पर तो नहीं लेकिन सरकारी दावों पर जरूर सरपट दौड़ रही हैं! जिसका ताज़ा तरीन मामला है! जनपद पंचायत डिंडोरी अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत घुसिया का जहां जल जीवन मिशन अंतर्गत जिले के पी, एच, ई विभाग एवं ठेकेदार के द्वारा लगभग 6 - 7 साल पहले पेय जल के लिए पानी की टंकी के पाइप लाईन का विस्तार तो किया गया लेकिन लगभग 3500 से 3600 सौ की आवादी वाली ग्राम पंचयत के वाशिदों को अब तक बूंद भर पानी नशीब नहीं हुआ ग्रामीणों ने इस बावद संबंधित विभाग सहित जिला कलेक्टर को अनेकों शिकायत पत्र दिये पर नतीजा सिफ़र ही रहा उल्लेखनीय है!कि केंद्र व राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना क्षेत्र में पूरी तरह विफल होती नजर आ रही है। योजना के अंतर्गत गांव में टंकी निर्माण और पाइपलाइन विस्तार का कार्य करीब 6 वर्ष पूर्व पूरा कर लिया गया था, लेकिन हैरानी की बात यह है कि आज तक ग्रामीणों को पेयजल की एक बूंद भी नसीब नहीं हो पाई है। ग्रामीणों का कहना है कि योजना के नाम पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए गए, टंकी बनाए गए और घर-घर पाइपलाइन बिछाई गई, लेकिन न तो टंकी में पानी भरा गया और न ही नलों से पानी आया। वर्तमान स्थिति यह है कि टंकी सूखी पड़ी हैं और पाइपलाइन शोपीस बनकर रह गई है। पेयजल संकट के चलते ग्रामीणों को कई किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ रहा है। महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, जिन्हें रोजाना समय और मेहनत दोनों खर्च कर पानी की व्यवस्था करनी पड़ रही है। गर्मी के मौसम में हालात और भी बदतर हो जाते हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से योजना में भारी अनियमितताएं और भ्रष्टाचार हुआ है। कागजों में योजना को पूर्ण दिखाकर भुगतान कर लिया गया, जबकि जमीनी स्तर पर योजना आज तक शुरू ही नहीं हो पाई। कई बार शिकायत करने के बावजूद जिम्मेदार विभाग और प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। अब सवाल यह है कि जब सरकार हर घर नल से जल का दावा कर रही है, तो फिर 6 वर्षों से पानी को तरस रहे इन ग्रामीणों की जिम्मेदारी कौन लेगा?7
- घुघरी सड़क सुरक्षा को लेकर मोहगांव पुलिस अब पूरी तरह सख्त नजर आ रही है। आज पुलिस प्रशासन द्वारा क्षेत्र में एक विशेष चेकिंग अभियान चलाया गया, जिसमें आने-जाने वाले वाहनों की सघन जांच की गई। पुलिस अधिकारियों ने न केवल वाहनों के दस्तावेजों को चेक किया, बल्कि दोपहिया वाहन चालकों को हेलमेट पहनने और यातायात नियमों का कड़ाई से पालन करने की समझाइश भी दी। पुलिस का कहना है कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना है। साथ ही, विभाग ने चेतावनी दी है कि यह कार्रवाई आगे भी इसी तरह जारी रहेगी।"1
- Post by Ashok Sondhiya1
- Post by Boss Sdl1
- कलेक्टर श्री सोमेश मिश्रा के निर्देशन एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी शालिनी तिवारी के मार्गदर्शन में जिले में बाल विवाह के विरुद्ध जनजागरूकता के लिए चलाए जा रहे 100 दिवसीय अभियान के तृतीय चरण के अंतर्गत गुरुवार को दोपहर 3 बजे माहिष्मती सामुदायिक प्रशिक्षण केंद्र, बीआरसी भवन मंडला में जागरूकता एवं शपथ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी समूहों की महिलाओं को बाल विवाह रोकथाम के लिए संकल्प दिलाया गया। वन स्टॉप सेंटर प्रभारी प्रशासक श्रीमती मधुलिका उपाध्याय ने उपस्थित महिलाओं से ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ के निर्माण में सक्रिय सहयोग की अपील करते हुए शपथ दिलाई। उन्होंने बताया कि 18 वर्ष से कम आयु की लड़की तथा 21 वर्ष से कम आयु के लड़के का विवाह बाल विवाह की श्रेणी में आता है, जो कानूनन अपराध है। बाल विवाह कराने, करवाने अथवा इसमें सहभागी बनने पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना और दो वर्ष तक का कारावास या दोनों का प्रावधान है। कार्यक्रम में जिला स्तर पर संचालित कंट्रोल रूम की जानकारी दी गई तथा कम उम्र में विवाह न करने के संबंध में समझाइश दी गई। कार्यक्रम में प्रभारी जिला प्रबंधक आईबीसीबी नीलू सोनी, सहायक विकासखंड प्रबंधक श्री योगेंद्र तिवारी, श्री प्रदीप पाठक, सलमा बेगम तथा म.प्र. ग्रामीण आजीविका मिशन के सदस्य एवं बहुउद्देशीय कार्यकर्ता श्री हरिशंकर कछवाहा सहित अन्य उपस्थित रहे।1
- मोहगांव में अवैध शराब पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई106.92 लीटर शराब व इनोवा क्रिस्टा जप्त, एक आरोपी गिरफ्तार — एक फरार1
- Post by Neelesh THAKUR1
- डिंडोरी -- आदिवासी बाहुल्य जिले में नियम कायदों की धज्जियाँ उड़ाना अवैध कार्य करने वालों का मानो शगल बन गया है! और ऐसा होना भी इसलिए लाजमी है! क्योंकि जिनके हाथों में इन पर नकेल कसने की जिम्मेदारी है वही इन्हें संरक्षण प्रदान किये हुए हैं! किसान लुटता है तो लुटता रहे इन्हें इससे जरा भी कोई सरोकार नहीं है! जिसका उदाहरण है विक्रमपुर में संचालित दुबे बीज भंडार की दुकान जहां बीज की आड़ में बिना लाइसेंस यूरिया एवं डी, ए, पी, खाद किसानों को शासकीय मूल्य से अधिक दामों में बेचीं जा रही है! जिसकी खबर बीते दिनों प्रमुखता के साथ प्रकाशित होने के बाद उपसंचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास की टीम ने बीते 31 जनवरी को छापेमार कार्यवाई की थी कार्यवाई के संबंध में विभाग के जिम्मेदारों से जानकारी मांगने पर अब तक गोलमोल जवाब ही दे रहे हैं! यूरिया और डीएपी खाद की अवैध बिक्री पर कृषि विभाग द्वारा हाल ही में छापामार कार्रवाई की गई थी। जो अब महज दिखावा साबित हो रही है विभाग ने सख्ती का दावा करते हुए लाइसेंस जांच, स्टॉक मिलान और नमूने लेने की प्रक्रिया पूरी की थी। लेकिन हैरानी की बात यह है कि कार्रवाई के कुछ ही दिनों बाद वही विक्रेता खुलेआम यूरिया–डीएपी की बिक्री करता नजर आ रहा है। किसानों का आरोप है कि छापे की सूचना पहले ही लीक कर दी जाती है, जिससे औपचारिकता पूरी कर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। कई किसानों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि निर्धारित दर से अधिक कीमत वसूली जा रही है और बिना बिल के खाद बेची जा रही है। स्थानीय किसानों का कहना है कि यदि विभाग ने सख्त कार्रवाई की होती तो संबंधित दुकान सील होती या लाइसेंस निलंबित किया जाता। लेकिन वर्तमान स्थिति यह संकेत दे रही है कि या तो कार्रवाई अधूरी थी या फिर प्रभावहीन। अब सवाल यह उठ रहा है कि जब छापे के बाद भी अवैध बिक्री जारी है तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी? क्या विभाग केवल दिखावटी कार्रवाई कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है? किसानों ने उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच और कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है, ताकि खाद की कालाबाजारी पर वास्तव में रोक लग सके।5