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छापे के बाद भी बेखौफ कालाबाजारी कृषि विभाग की कार्यवाई पर उठ रहे गंभीर सवाल यूरिया - डी ए पी की अवैध बिक्री पर छापा, लेकिन वही विक्रेता फिर धड़ल्ले से बेंच रहा खाद डिंडोरी -- आदिवासी बाहुल्य जिले में नियम कायदों की धज्जियाँ उड़ाना अवैध कार्य करने वालों का मानो शगल बन गया है! और ऐसा होना भी इसलिए लाजमी है! क्योंकि जिनके हाथों में इन पर नकेल कसने की जिम्मेदारी है वही इन्हें संरक्षण प्रदान किये हुए हैं! किसान लुटता है तो लुटता रहे इन्हें इससे जरा भी कोई सरोकार नहीं है! जिसका उदाहरण है विक्रमपुर में संचालित दुबे बीज भंडार की दुकान जहां बीज की आड़ में बिना लाइसेंस यूरिया एवं डी, ए, पी, खाद किसानों को शासकीय मूल्य से अधिक दामों में बेचीं जा रही है! जिसकी खबर बीते दिनों प्रमुखता के साथ प्रकाशित होने के बाद उपसंचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास की टीम ने बीते 31 जनवरी को छापेमार कार्यवाई की थी कार्यवाई के संबंध में विभाग के जिम्मेदारों से जानकारी मांगने पर अब तक गोलमोल जवाब ही दे रहे हैं! यूरिया और डीएपी खाद की अवैध बिक्री पर कृषि विभाग द्वारा हाल ही में छापामार कार्रवाई की गई थी। जो अब महज दिखावा साबित हो रही है विभाग ने सख्ती का दावा करते हुए लाइसेंस जांच, स्टॉक मिलान और नमूने लेने की प्रक्रिया पूरी की थी। लेकिन हैरानी की बात यह है कि कार्रवाई के कुछ ही दिनों बाद वही विक्रेता खुलेआम यूरिया–डीएपी की बिक्री करता नजर आ रहा है। किसानों का आरोप है कि छापे की सूचना पहले ही लीक कर दी जाती है, जिससे औपचारिकता पूरी कर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। कई किसानों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि निर्धारित दर से अधिक कीमत वसूली जा रही है और बिना बिल के खाद बेची जा रही है। स्थानीय किसानों का कहना है कि यदि विभाग ने सख्त कार्रवाई की होती तो संबंधित दुकान सील होती या लाइसेंस निलंबित किया जाता। लेकिन वर्तमान स्थिति यह संकेत दे रही है कि या तो कार्रवाई अधूरी थी या फिर प्रभावहीन। अब सवाल यह उठ रहा है कि जब छापे के बाद भी अवैध बिक्री जारी है तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी? क्या विभाग केवल दिखावटी कार्रवाई कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है? किसानों ने उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच और कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है, ताकि खाद की कालाबाजारी पर वास्तव में रोक लग सके।

5 hrs ago
user_वाइस ऑफ़ राइट्स न्यूज चैनल
वाइस ऑफ़ राइट्स न्यूज चैनल
डिंडोरी, डिंडोरी, मध्य प्रदेश•
5 hrs ago
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छापे के बाद भी बेखौफ कालाबाजारी कृषि विभाग की कार्यवाई पर उठ रहे गंभीर सवाल यूरिया - डी ए पी की अवैध बिक्री पर छापा, लेकिन वही विक्रेता फिर धड़ल्ले से बेंच रहा खाद डिंडोरी -- आदिवासी बाहुल्य जिले में नियम कायदों की धज्जियाँ उड़ाना अवैध कार्य करने वालों का मानो शगल बन गया है! और ऐसा होना भी इसलिए लाजमी है! क्योंकि जिनके हाथों में इन पर नकेल कसने की जिम्मेदारी है वही इन्हें संरक्षण प्रदान किये हुए हैं! किसान

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लुटता है तो लुटता रहे इन्हें इससे जरा भी कोई सरोकार नहीं है! जिसका उदाहरण है विक्रमपुर में संचालित दुबे बीज भंडार की दुकान जहां बीज की आड़ में बिना लाइसेंस यूरिया एवं डी, ए, पी, खाद किसानों को शासकीय मूल्य से अधिक दामों में बेचीं जा रही है! जिसकी खबर बीते दिनों प्रमुखता के साथ प्रकाशित होने के बाद उपसंचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास की टीम ने बीते 31 जनवरी को छापेमार कार्यवाई की थी कार्यवाई के संबंध

में विभाग के जिम्मेदारों से जानकारी मांगने पर अब तक गोलमोल जवाब ही दे रहे हैं! यूरिया और डीएपी खाद की अवैध बिक्री पर कृषि विभाग द्वारा हाल ही में छापामार कार्रवाई की गई थी। जो अब महज दिखावा साबित हो रही है विभाग ने सख्ती का दावा करते हुए लाइसेंस जांच, स्टॉक मिलान और नमूने लेने की प्रक्रिया पूरी की थी। लेकिन हैरानी की बात यह है कि कार्रवाई के कुछ ही दिनों बाद वही विक्रेता खुलेआम यूरिया–डीएपी की

बिक्री करता नजर आ रहा है। किसानों का आरोप है कि छापे की सूचना पहले ही लीक कर दी जाती है, जिससे औपचारिकता पूरी कर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। कई किसानों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि निर्धारित दर से अधिक कीमत वसूली जा रही है और बिना बिल के खाद बेची जा रही है। स्थानीय किसानों का कहना है कि यदि विभाग ने सख्त कार्रवाई की होती तो संबंधित दुकान सील होती या लाइसेंस

निलंबित किया जाता। लेकिन वर्तमान स्थिति यह संकेत दे रही है कि या तो कार्रवाई अधूरी थी या फिर प्रभावहीन। अब सवाल यह उठ रहा है कि जब छापे के बाद भी अवैध बिक्री जारी है तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी? क्या विभाग केवल दिखावटी कार्रवाई कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है? किसानों ने उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच और कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है, ताकि खाद की कालाबाजारी पर वास्तव में रोक लग सके।

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  • *ग्राम पंचायत घुसिया के वाशिदों के लिए पानी की टंकी बनी दिखावा* *लगभग 6 सालों में बूंद भर पानी भी न हो सका नशीब* *कागजों में सरपट दौड़ता जल जीवन मिशन* डिंडोरी --- आदिवासी बाहुल्य इस जिले में शासन की अति महत्वाकांक्षी योजनाएं जमीन पर दम तोड़ती नजर आ रही हैं!पर इससे न तो जनप्रतिनधियों को कोई सरोकार है! और न ही सम्बंधित विभाग के आला अफसरों को जिसका नतीजा योजनाएं जमीन पर तो नहीं लेकिन सरकारी दावों पर जरूर सरपट दौड़ रही हैं! जिसका ताज़ा तरीन मामला है! जनपद पंचायत डिंडोरी अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत घुसिया का जहां जल जीवन मिशन अंतर्गत जिले के पी, एच, ई विभाग एवं ठेकेदार के द्वारा लगभग 6 - 7 साल पहले पेय जल के लिए पानी की टंकी के पाइप लाईन का विस्तार तो किया गया लेकिन लगभग 3500 से 3600 सौ की आवादी वाली ग्राम पंचयत के वाशिदों को अब तक बूंद भर पानी नशीब नहीं हुआ ग्रामीणों ने इस बावद संबंधित विभाग सहित जिला कलेक्टर को अनेकों शिकायत पत्र दिये पर नतीजा सिफ़र ही रहा उल्लेखनीय है!कि केंद्र व राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना क्षेत्र में पूरी तरह विफल होती नजर आ रही है। योजना के अंतर्गत गांव में टंकी निर्माण और पाइपलाइन विस्तार का कार्य करीब 6 वर्ष पूर्व पूरा कर लिया गया था, लेकिन हैरानी की बात यह है कि आज तक ग्रामीणों को पेयजल की एक बूंद भी नसीब नहीं हो पाई है। ग्रामीणों का कहना है कि योजना के नाम पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए गए, टंकी बनाए गए और घर-घर पाइपलाइन बिछाई गई, लेकिन न तो टंकी में पानी भरा गया और न ही नलों से पानी आया। वर्तमान स्थिति यह है कि टंकी सूखी पड़ी हैं और पाइपलाइन शोपीस बनकर रह गई है। पेयजल संकट के चलते ग्रामीणों को कई किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ रहा है। महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, जिन्हें रोजाना समय और मेहनत दोनों खर्च कर पानी की व्यवस्था करनी पड़ रही है। गर्मी के मौसम में हालात और भी बदतर हो जाते हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से योजना में भारी अनियमितताएं और भ्रष्टाचार हुआ है। कागजों में योजना को पूर्ण दिखाकर भुगतान कर लिया गया, जबकि जमीनी स्तर पर योजना आज तक शुरू ही नहीं हो पाई। कई बार शिकायत करने के बावजूद जिम्मेदार विभाग और प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। अब सवाल यह है कि जब सरकार हर घर नल से जल का दावा कर रही है, तो फिर 6 वर्षों से पानी को तरस रहे इन ग्रामीणों की जिम्मेदारी कौन लेगा?
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    *ग्राम पंचायत घुसिया के वाशिदों के लिए पानी की टंकी बनी दिखावा*
*लगभग 6 सालों में बूंद भर पानी भी न हो सका नशीब*
*कागजों में सरपट दौड़ता जल जीवन मिशन*
डिंडोरी --- आदिवासी बाहुल्य इस जिले में शासन की अति महत्वाकांक्षी योजनाएं जमीन पर दम तोड़ती नजर आ रही हैं!पर इससे न तो जनप्रतिनधियों को कोई सरोकार है! और न ही सम्बंधित विभाग के आला अफसरों को जिसका नतीजा योजनाएं जमीन पर तो नहीं लेकिन सरकारी दावों पर जरूर सरपट दौड़ रही हैं! जिसका ताज़ा तरीन मामला है! जनपद पंचायत डिंडोरी अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत घुसिया का जहां जल जीवन मिशन अंतर्गत जिले के पी, एच, ई विभाग एवं ठेकेदार के द्वारा लगभग 6 - 7 साल पहले पेय जल के लिए पानी की टंकी के पाइप लाईन का विस्तार तो किया गया लेकिन लगभग 3500 से 3600 सौ की आवादी वाली ग्राम पंचयत के वाशिदों को अब तक बूंद भर पानी नशीब नहीं हुआ ग्रामीणों ने इस बावद संबंधित विभाग सहित जिला कलेक्टर को अनेकों शिकायत पत्र दिये पर नतीजा सिफ़र ही रहा उल्लेखनीय है!कि केंद्र व राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना क्षेत्र में पूरी तरह विफल होती नजर आ रही है। योजना के अंतर्गत गांव में टंकी निर्माण और पाइपलाइन विस्तार का कार्य करीब 6 वर्ष पूर्व पूरा कर लिया गया था, लेकिन हैरानी की बात यह है कि आज  तक ग्रामीणों को पेयजल की एक बूंद भी नसीब नहीं हो पाई है।
ग्रामीणों का कहना है कि योजना के नाम पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए गए, टंकी बनाए गए और घर-घर पाइपलाइन बिछाई गई, लेकिन न तो टंकी में पानी भरा गया और न ही नलों से पानी आया। वर्तमान स्थिति यह है कि टंकी सूखी पड़ी हैं और पाइपलाइन शोपीस बनकर रह गई है।
पेयजल संकट के चलते ग्रामीणों को कई किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ रहा है। महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, जिन्हें रोजाना समय और मेहनत दोनों खर्च कर पानी की व्यवस्था करनी पड़ रही है। गर्मी के मौसम में हालात और भी बदतर हो जाते हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ रही हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से योजना में भारी अनियमितताएं और भ्रष्टाचार हुआ है। कागजों में योजना को पूर्ण दिखाकर भुगतान कर लिया गया, जबकि जमीनी स्तर पर योजना आज तक शुरू ही नहीं हो पाई। कई बार शिकायत करने के बावजूद जिम्मेदार विभाग और प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
अब सवाल यह है कि जब सरकार हर घर नल से जल का दावा कर रही है, तो फिर 6 वर्षों से पानी को तरस रहे इन ग्रामीणों की जिम्मेदारी कौन लेगा?
    user_वाइस ऑफ़ राइट्स न्यूज चैनल
    वाइस ऑफ़ राइट्स न्यूज चैनल
    डिंडोरी, डिंडोरी, मध्य प्रदेश•
    5 hrs ago
  • घुघरी सड़क सुरक्षा को लेकर मोहगांव पुलिस अब पूरी तरह सख्त नजर आ रही है। आज पुलिस प्रशासन द्वारा क्षेत्र में एक विशेष चेकिंग अभियान चलाया गया, जिसमें आने-जाने वाले वाहनों की सघन जांच की गई। पुलिस अधिकारियों ने न केवल वाहनों के दस्तावेजों को चेक किया, बल्कि दोपहिया वाहन चालकों को हेलमेट पहनने और यातायात नियमों का कड़ाई से पालन करने की समझाइश भी दी। पुलिस का कहना है कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना है। साथ ही, विभाग ने चेतावनी दी है कि यह कार्रवाई आगे भी इसी तरह जारी रहेगी।"
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    घुघरी 
सड़क सुरक्षा को लेकर मोहगांव पुलिस अब पूरी तरह सख्त नजर आ रही है। आज पुलिस प्रशासन द्वारा क्षेत्र में एक विशेष चेकिंग अभियान चलाया गया, जिसमें आने-जाने वाले वाहनों की सघन जांच की गई।
पुलिस अधिकारियों ने न केवल वाहनों के दस्तावेजों को चेक किया, बल्कि दोपहिया वाहन चालकों को हेलमेट पहनने और यातायात नियमों का कड़ाई से पालन करने की समझाइश भी दी। पुलिस का कहना है कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना है। साथ ही, विभाग ने चेतावनी दी है कि यह कार्रवाई आगे भी इसी तरह जारी रहेगी।"
    user_Akash Chakarwarti
    Akash Chakarwarti
    घुघरी, मंडला, मध्य प्रदेश•
    48 min ago
  • Post by Ashok Sondhiya
    1
    Post by Ashok Sondhiya
    user_Ashok Sondhiya
    Ashok Sondhiya
    Paan shop Sohagpur, Shahdol•
    17 hrs ago
  • Post by Boss Sdl
    1
    Post by Boss Sdl
    user_Boss Sdl
    Boss Sdl
    सोहागपुर, शहडोल, मध्य प्रदेश•
    18 hrs ago
  • मध्यप्रदेश में बैगा जनजाति के उत्थान के लिए सरकार बड़े-बड़े दावे... कागजों तक सीमित...जमीनी हकीकत कैमरे में कैद...आज भी बैगा जनजाति परिवार शासकीय लाभ से कोषो दूर...
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    मध्यप्रदेश में बैगा जनजाति के उत्थान के लिए सरकार बड़े-बड़े दावे... कागजों तक सीमित...जमीनी हकीकत कैमरे में कैद...आज भी बैगा जनजाति परिवार शासकीय लाभ से कोषो दूर...
    user_Govardhan kushwaha
    Govardhan kushwaha
    पत्रकार Mandla, Madhya Pradesh•
    37 min ago
  • Post by Neelesh THAKUR
    1
    Post by Neelesh THAKUR
    user_Neelesh THAKUR
    Neelesh THAKUR
    मंडला, मंडला, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • कवर्धा। पुलिस अधीक्षक श्री धर्मेन्द्र सिंह द्वारा जिले में सभी प्रकार की आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने हेतु समस्त थाना प्रभारियों को निर्देशित किया गया है। उक्त निर्देशों के परिपालन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री पुष्पेन्द्र सिंह बघेल एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री अमित पटेल के मार्गदर्शन तथा पुलिस अनुविभागीय अधिकारी लोहारा श्री कृष्ण कुमार चन्द्रकार के पर्यवेक्षण में अवैध कार्यों एवं नशे के विरुद्ध लगातार कार्यवाही किया जा रहा है। इस तारतम्य में थाना प्रभारी लोहारानेतृत्व में दिनांक 18.02.2026 को मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई कि मुन्ना कबाड़ी की दुकान के पीछे ग्राम सीलहाटी क्षेत्र में एक व्यक्ति अवैध रूप से देशी प्लेन शराब की बिक्री कर रहा है। सूचना की तस्दीक हेतु पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुँची। मौके पर आरोपी गौकरण मिर्जा (सतनामी) पिता फिरन सतनामी उम्र 55 वर्ष निवासी वार्ड क्रमांक 05 सतनामी पारा स. लोहारा जिला कबीरधाम (छ.ग.) को पकड़ा गया। आरोपी के कब्जे से 22 पौवा देशी प्लेन शराब एवं 200/- रुपये बिक्री रकम जप्त की गई। आरोपी के विरुद्ध थाना स. लोहारा में धारा 34(1)(ख) आबकारी एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध कर कार्यवाही किया गया। उक्त कार्यवाही में थाना प्रभारी निरीक्षक मनीष मिश्रा के नेतृत्व में ASI संदीप चौबे, प्रधान आरक्षक अश्वनी पाण्डेय, आरक्षक शैलेन्द्र सिंह, आरक्षक राजू सोनवानी एवं आरक्षक डोमेंद्र ठाकुर का विशेष योगदान रहा।
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    कवर्धा। पुलिस अधीक्षक श्री धर्मेन्द्र सिंह द्वारा जिले में सभी प्रकार की आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने हेतु समस्त थाना प्रभारियों को निर्देशित किया गया है। उक्त निर्देशों के परिपालन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री पुष्पेन्द्र सिंह बघेल एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री अमित पटेल के मार्गदर्शन तथा पुलिस अनुविभागीय अधिकारी लोहारा श्री कृष्ण कुमार चन्द्रकार के पर्यवेक्षण में अवैध कार्यों एवं नशे के विरुद्ध लगातार कार्यवाही किया जा रहा है।  इस तारतम्य में थाना प्रभारी लोहारानेतृत्व में दिनांक 18.02.2026 को मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई कि मुन्ना कबाड़ी की दुकान के पीछे ग्राम सीलहाटी क्षेत्र में एक व्यक्ति अवैध रूप से देशी प्लेन शराब की बिक्री कर रहा है।
सूचना की तस्दीक हेतु पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुँची। मौके पर आरोपी गौकरण मिर्जा (सतनामी) पिता फिरन सतनामी उम्र 55 वर्ष निवासी वार्ड क्रमांक 05 सतनामी पारा स. लोहारा जिला कबीरधाम (छ.ग.) को पकड़ा गया।
आरोपी के कब्जे से 22 पौवा देशी प्लेन शराब एवं 200/- रुपये बिक्री रकम जप्त की गई। आरोपी के विरुद्ध थाना स. लोहारा में धारा 34(1)(ख) आबकारी एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध कर कार्यवाही किया गया।
उक्त कार्यवाही में थाना प्रभारी निरीक्षक मनीष मिश्रा के नेतृत्व में ASI संदीप चौबे, प्रधान आरक्षक अश्वनी पाण्डेय, आरक्षक शैलेन्द्र सिंह, आरक्षक राजू सोनवानी एवं आरक्षक डोमेंद्र ठाकुर का विशेष योगदान रहा।
    user_Vishvnath Sahu
    Vishvnath Sahu
    Newspaper publisher पंडरिया, कबीरधाम, छत्तीसगढ़•
    3 hrs ago
  • डिंडोरी -- आदिवासी बाहुल्य जिले में नियम कायदों की धज्जियाँ उड़ाना अवैध कार्य करने वालों का मानो शगल बन गया है! और ऐसा होना भी इसलिए लाजमी है! क्योंकि जिनके हाथों में इन पर नकेल कसने की जिम्मेदारी है वही इन्हें संरक्षण प्रदान किये हुए हैं! किसान लुटता है तो लुटता रहे इन्हें इससे जरा भी कोई सरोकार नहीं है! जिसका उदाहरण है विक्रमपुर में संचालित दुबे बीज भंडार की दुकान जहां बीज की आड़ में बिना लाइसेंस यूरिया एवं डी, ए, पी, खाद किसानों को शासकीय मूल्य से अधिक दामों में बेचीं जा रही है! जिसकी खबर बीते दिनों प्रमुखता के साथ प्रकाशित होने के बाद उपसंचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास की टीम ने बीते 31 जनवरी को छापेमार कार्यवाई की थी कार्यवाई के संबंध में विभाग के जिम्मेदारों से जानकारी मांगने पर अब तक गोलमोल जवाब ही दे रहे हैं! यूरिया और डीएपी खाद की अवैध बिक्री पर कृषि विभाग द्वारा हाल ही में छापामार कार्रवाई की गई थी। जो अब महज दिखावा साबित हो रही है विभाग ने सख्ती का दावा करते हुए लाइसेंस जांच, स्टॉक मिलान और नमूने लेने की प्रक्रिया पूरी की थी। लेकिन हैरानी की बात यह है कि कार्रवाई के कुछ ही दिनों बाद वही विक्रेता खुलेआम यूरिया–डीएपी की बिक्री करता नजर आ रहा है। किसानों का आरोप है कि छापे की सूचना पहले ही लीक कर दी जाती है, जिससे औपचारिकता पूरी कर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। कई किसानों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि निर्धारित दर से अधिक कीमत वसूली जा रही है और बिना बिल के खाद बेची जा रही है। स्थानीय किसानों का कहना है कि यदि विभाग ने सख्त कार्रवाई की होती तो संबंधित दुकान सील होती या लाइसेंस निलंबित किया जाता। लेकिन वर्तमान स्थिति यह संकेत दे रही है कि या तो कार्रवाई अधूरी थी या फिर प्रभावहीन। अब सवाल यह उठ रहा है कि जब छापे के बाद भी अवैध बिक्री जारी है तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी? क्या विभाग केवल दिखावटी कार्रवाई कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है? किसानों ने उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच और कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है, ताकि खाद की कालाबाजारी पर वास्तव में रोक लग सके।
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    डिंडोरी -- आदिवासी बाहुल्य जिले में नियम कायदों की धज्जियाँ उड़ाना अवैध कार्य करने वालों का मानो शगल बन गया है! और ऐसा होना भी इसलिए लाजमी है! क्योंकि जिनके हाथों में इन पर नकेल कसने की जिम्मेदारी है वही इन्हें संरक्षण प्रदान किये हुए हैं! किसान लुटता है तो लुटता रहे इन्हें इससे जरा भी कोई सरोकार नहीं है! जिसका उदाहरण है विक्रमपुर में संचालित दुबे बीज भंडार की दुकान जहां बीज की आड़ में बिना लाइसेंस यूरिया एवं डी, ए, पी, खाद किसानों को शासकीय मूल्य से अधिक दामों में बेचीं जा रही है! जिसकी खबर बीते दिनों प्रमुखता के साथ प्रकाशित होने के बाद उपसंचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास की टीम ने बीते 31 जनवरी को छापेमार कार्यवाई की थी कार्यवाई के संबंध में विभाग के जिम्मेदारों से जानकारी मांगने पर अब तक गोलमोल जवाब ही दे रहे हैं! यूरिया और डीएपी खाद की अवैध बिक्री पर कृषि विभाग द्वारा हाल ही में छापामार कार्रवाई की गई थी। जो अब महज दिखावा साबित हो रही है विभाग ने सख्ती का दावा करते हुए लाइसेंस जांच, स्टॉक मिलान और नमूने लेने की प्रक्रिया पूरी की थी। लेकिन हैरानी की बात यह है कि कार्रवाई के कुछ ही दिनों बाद वही विक्रेता खुलेआम यूरिया–डीएपी की बिक्री करता नजर आ रहा है।
किसानों का आरोप है कि छापे की सूचना पहले ही लीक कर दी जाती है, जिससे औपचारिकता पूरी कर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। कई किसानों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि निर्धारित दर से अधिक कीमत वसूली जा रही है और बिना बिल के खाद बेची जा रही है।
स्थानीय किसानों का कहना है कि यदि विभाग ने सख्त कार्रवाई की होती तो संबंधित दुकान सील होती या लाइसेंस निलंबित किया जाता। लेकिन वर्तमान स्थिति यह संकेत दे रही है कि या तो कार्रवाई अधूरी थी या फिर प्रभावहीन।
अब सवाल यह उठ रहा है कि जब छापे के बाद भी अवैध बिक्री जारी है तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी? क्या विभाग केवल दिखावटी कार्रवाई कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है? किसानों ने उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच और कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है, ताकि खाद की कालाबाजारी पर वास्तव में रोक लग सके।
    user_वाइस ऑफ़ राइट्स न्यूज चैनल
    वाइस ऑफ़ राइट्स न्यूज चैनल
    डिंडोरी, डिंडोरी, मध्य प्रदेश•
    5 hrs ago
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