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कैलारस नगर में 28 मई 2026 को ईद के त्योहार के मद्देनजर कैलारस थाना पुलिस ने एक फ्लैग मार्च निकाला। नगर में भ्रमण के दौरान कैलारस एसडीपीओ उमेश मिश्रा और कैलारस थाना प्रभारी निरीक्षक सत्येंद्र सिंह कुशवाह अपने स्टाफ के साथ पैदल फ्लैग मार्च करते दिखे। पुलिस प्रशासन ने इस अवसर पर सभी नगरवासियों से अपील की है कि वे ईद के त्योहार को भाईचारे और सद्भावना के साथ मनाएं।
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कैलारस नगर में 28 मई 2026 को ईद के त्योहार के मद्देनजर कैलारस थाना पुलिस ने एक फ्लैग मार्च निकाला। नगर में भ्रमण के दौरान कैलारस एसडीपीओ उमेश मिश्रा और कैलारस थाना प्रभारी निरीक्षक सत्येंद्र सिंह कुशवाह अपने स्टाफ के साथ पैदल फ्लैग मार्च करते दिखे। पुलिस प्रशासन ने इस अवसर पर सभी नगरवासियों से अपील की है कि वे ईद के त्योहार को भाईचारे और सद्भावना के साथ मनाएं।
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- राजस्थान के बाड़ी में युवाओं और छात्रों ने मारवाड़ी भाषा को राजस्थानी भाषा बनाए जाने के प्रस्ताव के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारी उपखंड अधिकारी कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए और मुख्यमंत्री के नाम उपखंड अधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा। पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष पुष्पेंद्र गुर्जर के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में स्पष्ट किया गया कि पूर्वी राजस्थान किसी भी स्थिति में मारवाड़ी भाषा को स्वीकार नहीं करेगा। प्रदर्शनकारियों ने ब्रज भाषा को ही क्षेत्र की पहचान बनाए रखने की पुरजोर मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि इस विरोध प्रदर्शन को आगे जिला और संभाग मुख्यालयों तक ले जाया जाएगा।2
- मोदी सरकार के 12 वर्षों के कार्यकाल को लेकर हरियाणा के एक युवक ने एक बड़ा बदलाव बताया है। युवक के अनुसार, इन 12 वर्षों में श्री रामलला टेंट से निकलकर भव्य मंदिर में विराजमान हुए हैं।1
- आज भागवत कथा का चौथा दिन है, जिसमें लाखों की संख्या में भक्त उमड़ रहे हैं। इस विशाल धार्मिक आयोजन में विभासतापक की महत्वपूर्ण सहभागिता रही है, जिसके चलते बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी है।2
- श्री राष्ट्रीय क्षत्रिय युवा एकता भारत के राष्ट्रीय संरक्षक डॉ. रघुराज प्रताप सिंह परमार ने मारवाड़ी भाषा को लेकर एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील बयान दिया है। उन्होंने संगठन के एक स्थानीय कार्यक्रम में स्पष्ट शब्दों में कहा कि मारवाड़ी भाषा को पूर्वी राजस्थान पर जबरदस्ती थोपा जा रहा है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। डॉ. परमार ने इस बात पर जोर दिया कि राजस्थान विविधताओं से भरा प्रदेश है, जहाँ हर क्षेत्र की अपनी एक समृद्ध सांस्कृतिक और भाषाई पहचान है। उन्होंने विशेष रूप से पूर्वी राजस्थान (ढूंढाड़, मेवात, हाड़ौती और बृज क्षेत्र) की लोक भाषाओं और बोलियों का उल्लेख किया, जिनका अपना एक गौरवशाली इतिहास है। उनके अनुसार, पिछले कुछ समय से एक सोची-समझी रणनीति के तहत पूरे प्रदेश पर केवल मारवाड़ी भाषा को थोपकर पूर्वी राजस्थान की भाषाई अस्मिता को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। डॉ. रघुराज प्रताप सिंह परमार ने बताया कि श्री राष्ट्रीय क्षत्रिय युवा एकता भारत हर क्षेत्र की क्षेत्रीय भाषा और संस्कृति के सम्मान का पक्षधर है। उन्होंने इसे पूर्वी राजस्थान के युवाओं और वहाँ की संस्कृति के साथ अन्याय बताया कि किसी एक क्षेत्र की बोली को पूरे राज्य की एकमात्र प्रतिनिधि भाषा के रूप में प्रस्तुत किया जाए। इसी के मद्देनजर, उन्होंने भाषाई नीतियों में संतुलन बनाए रखने और पूर्वी राजस्थान की बोलियों को भी उनका उचित हक एवं सम्मान दिए जाने की मांग की। इस कार्यक्रम में संगठन के संस्थापक कृष्णा परमार सैंपऊ के साथ-साथ कई राष्ट्रीय और प्रदेश स्तरीय पदाधिकारी, कार्यकर्ता और समाज के प्रबुद्धजन उपस्थित थे, जिन्होंने डॉ. रघुराज प्रताप सिंह परमार के इस बयान का पुरजोर समर्थन किया। इस बयान के बाद प्रदेश के भाषाई और राजनीतिक हलकों में एक नई बहस छिड़ने की संभावना जताई जा रही है।1
- मध्य प्रदेश के श्योपुर स्थित सरकारी अस्पताल में मानवता की एक भावुक कर देने वाली मिसाल देखने को मिली, जहाँ बल्लू टी स्टॉल फेमस श्योपुर ने ढोढर से आए एक बुजुर्ग व्यक्ति, पन्नालाल जी, की मदद की। पन्नालाल जी सुबह लगभग 10:00 बजे से अस्पताल में परेशान होकर भटक रहे थे क्योंकि उन्हें अस्पताल की प्रक्रियाओं और जाँच संबंधी कोई सही जानकारी नहीं मिल पा रही थी। उनकी बेटी और परिवार की अन्य महिलाएँ भी उनके साथ थीं, लेकिन सभी असहाय और चिंतित दिख रहे थे। शाम करीब 5:00 बजे, जब बल्लू टी स्टॉल के प्रतिनिधि अस्पताल पहुँचे और स्थिति देखी, तो पन्नालाल जी उनके पैरों में पड़ गए और मदद की गुहार लगाई। यह देखकर तुरंत काउंटर पर जाकर जानकारी ली गई, उनकी जाँच की पर्ची बनवाई गई और अक्षरा की जाँच भी करवाई गई। इसके बाद डॉक्टर मैडम से बात करके उन्हें 11 नंबर वार्ड में भर्ती कराने की प्रक्रिया पूरी की गई। डॉक्टर साहब ने भर्ती की आवश्यकता लिखी, जिसके बाद बाबा जी को वार्ड में ले जाकर भर्ती कराया गया, उन्हें दवाइयाँ और गोलियाँ दिलवाई गईं, और आखिरकार उन्हें एक बिस्तर मिल गया। सबसे भावुक क्षण तब आया जब पन्नालाल जी ने मदद करने वाले से पूछा कि उन्हें क्या चाहिए, तो जवाब मिला कि उन्हें कुछ नहीं चाहिए, बस बाबा जी का ठीक हो जाना ही सबसे बड़ी जरूरत है। बल्लू टी स्टॉल फेमस श्योपुर मध्य प्रदेश ने इस घटना को आज के समय में इंसानियत को सबसे बड़ा धर्म और परेशान व अनजान व्यक्ति की मदद को सबसे बड़ी सेवा बताया, और यह भी कहा कि वे हमेशा जरूरतमंद लोगों के साथ खड़े रहेंगे।1
- धौलपुर के बाड़ी उपखंड पर युवा वर्ग और विद्यार्थी वर्ग ने पूरे राजस्थान में मारवाड़ी भाषा को थोपने का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने उच्च न्यायालय के आदेश का सम्मान करने की बात कहते हुए भी छात्रों के भविष्य को देखते हुए यह कदम उठाया। इस दौरान छात्रसंघ अध्यक्ष पुष्पेंद्र गुर्जर ने बताया कि पूर्वी राजस्थान में ब्रज भाषा का प्रचलन है, और यदि मारवाड़ी भाषा को जबरन थोपा जाता है तो यह इस क्षेत्र के जिलों के साथ अन्याय होगा और ब्रज भाषा के अस्तित्व को खत्म करने का प्रयास भी होगा। शेर गुर्जर ने इस संदर्भ में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 29(1) का हवाला दिया, जो नागरिकों को उनकी भाषा, लिपि और संस्कृति के संरक्षण का अधिकार देता है, तथा अनुच्छेद 350A का भी उल्लेख किया, जो मातृभाषा आधारित प्राथमिक शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की अपेक्षा करता है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि किसी क्षेत्र की वास्तविक भाषाई परिस्थिति का अध्ययन किए बिना भाषा नीति लागू की जाती है, तो इसका विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया, परीक्षा परिणाम और विद्यालयी अनुकूलन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, विशेषकर पूर्वी राजस्थान के लगभग 20 प्रतिशत छात्र-छात्राओं पर जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। इसलिए, स्थानीय भाषाई अध्ययन को आवश्यक बताया गया। समरथ गुर्जर और मनोज राजावत ने राजस्थान के पूर्वी जिलों जैसे धौलपुर, भरतपुर, डीग, करौली, सवाई माधोपुर, अलवर और दौसा की वास्तविक भाषाई स्थिति का अध्ययन करने के लिए जिला या संभाग स्तरीय विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग की। मानवेंद्र बैंसला और देशराज कंसाना ने भी कहा कि इन पूर्वी जिलों में ब्रज और हिंदी का प्रचलन पहले से ही है, ऐसे में अचानक से इस प्रकार का भाषा का बोझ थोपना अनुचित है। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान ऋषभ शर्मा, अजय कंसाना, चेतन शर्मा, बंटू प्रजापति, अमन गुर्जर, आदित्य, विपिन, ललित दर्शन गुर्जर, प्रदीप, हंसराम, तन्वेश, तनवी, यश, शिवा, विक्रम, रिहान, शिवानी, अदिति, आर्यन, लोकेश, संदीप, मोहित, राहुल गुर्जर, बबलू, हिमांक, प्रियांशी, भयांश जाट, सचिन योगेश मीना, हेमंत, पायल सहित सैकड़ों युवा मौजूद रहे। इस संबंध में बाड़ी के उपखंड अधिकारी को ज्ञापन भी सौंपा गया।3
- श्योपुर के गुलंबर चौक पर मृतक देवेंद्र गोयल के परिजन धरना दे रहे हैं। इस स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुँचे हैं। इनमें जिला कलेक्टर शीला दाहिमा, पुलिस अधीक्षक सुधीर कुमार अग्रवाल, एसडीएम गगन मीणा और एसडीएम बी एस श्रीवास्तव जैसे अधिकारी तथा अन्य कर्मचारी शामिल हैं। अधिकारी लगातार परिजनों को समझाने का प्रयास कर रहे हैं।1
- पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना जिले में एक टीएमसी नेता के विभिन्न ठिकानों पर की गई कार्रवाई के दौरान ₹80 लाख नकद और राहत सामग्री बरामद की गई है। यह वही राहत सामग्री है जो बाढ़ और तूफान से तड़पते हुए गरीब लोगों तक पहुँचनी थी। इस घटना ने टीएमसी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि बंगाल की जनता ने जिस भरोसे के साथ पार्टी को वोट दिया था, उसे टीएमसी ने अपनी तिजोरियों में बंद कर दिया। इस भ्रष्टाचार के चलते गरीब जनता का दर्द भी अनदेखा किया गया, जिससे एक ओर जहाँ बंगाल खोखला होता रहा, वहीं दूसरी ओर टीएमसी के नेताओं की तिजोरियां भरती रहीं। यह कार्रवाई केवल एक सामान्य घटना नहीं, बल्कि हिसाब की शुरुआत बताई जा रही है। जोर देकर कहा गया है कि बंगाल की जनता की हर पाई का हिसाब होगा और टीएमसी को अपने हर भ्रष्टाचार का जवाब देना पड़ेगा।1
- धौलपुर जिले के बाड़ी उपखंड के सोने का गुर्जा थाना क्षेत्र के नया गांव में जमीन विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच जमकर झगड़ा हुआ। इस दौरान एक पक्ष की मां और बेटे पर दूसरे पक्ष के करीब आधा दर्जन लोगों ने लाठी-डंडों से जानलेवा हमला कर दिया, जिससे मां और बेटा गंभीर रूप से घायल हो गए। घायल महिला ने सोने का गुर्जा थाने में इस पूरे मामले की रिपोर्ट दर्ज कराई है। बताया गया है कि इस झगड़े का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। सोने का गुर्जा के एसएचओ कैलाश सामरी इस पूरे मामले की गहनता से जांच कर रहे हैं।1