लोकेशन रीवा। 1938 की धरोहर पर संकट, ऐतिहासिक सेंट्रल लाइब्रेरी के संरक्षण और कायाकल्प की मांग। रीवा की ऐतिहासिक सेंट्रल लाइब्रेरी, जिसकी स्थापना वर्ष 1938 में रीवा राज्य के दौर में हुई थी, अब संरक्षण और उन्नयन की मांग को लेकर सुर्खियों में है। जर्जर भवन, छत से पानी का रिसाव और दुर्लभ पुस्तकों के अस्तित्व पर मंडराते खतरे को लेकर आयुक्त के नाम ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में बताया गया कि छत से लगातार पानी रिसने और नमी-दीमक के कारण दुर्लभ पुस्तकों और ऐतिहासिक दस्तावेजों के नष्ट होने का खतरा बढ़ गया है। तत्काल वाटरप्रूफिंग और दस्तावेजों के वैज्ञानिक संरक्षण की मांग की गई है। साथ ही 300 विद्यार्थियों के बैठकर अध्ययन की व्यवस्था, दोनों तल पर पुस्तकालय संचालन, कैंटीन, प्रिंटर- स्कैनर, पृथक स्वच्छ शौचालय, पार्किंग और लॉन के रखरखाव जैसी सुविधाएं विकसित करने की मांग रखी गई। दुर्लभ दस्तावेजों के डिजिटलीकरण, लापता पुस्तकों को रिकॉर्ड के आधार पर चिन्हित कर वापस लाने तथा मूल भूमि के सीमांकन और आवश्यक विस्तार की मांग भी ज्ञापन में शामिल है। जिस धरोहर ने पीढ़ियों को ज्ञान दिया, आज वही नमी और दीमक से जूझ रही है—अब सवाल संरक्षण का नहीं, विरासत बचाने की अंतिम चेतावनी का है। रीवा की यह ऐतिहासिक ज्ञान-धरोहर अब सिर्फ किताबों का घर नहीं, बल्कि शहर की स्मृति है, जिसके संरक्षण की जिम्मेदारी तत्काल तय करने की मांग उठी है।
लोकेशन रीवा। 1938 की धरोहर पर संकट, ऐतिहासिक सेंट्रल लाइब्रेरी के संरक्षण और कायाकल्प की मांग। रीवा की ऐतिहासिक सेंट्रल लाइब्रेरी, जिसकी स्थापना वर्ष 1938 में रीवा राज्य के दौर में हुई थी, अब संरक्षण और उन्नयन की मांग को लेकर सुर्खियों में है। जर्जर भवन, छत से पानी का रिसाव और दुर्लभ पुस्तकों के अस्तित्व पर मंडराते खतरे को लेकर आयुक्त के नाम ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में बताया गया कि छत से लगातार पानी रिसने और नमी-दीमक के कारण दुर्लभ पुस्तकों और ऐतिहासिक दस्तावेजों के नष्ट होने का खतरा बढ़ गया है। तत्काल वाटरप्रूफिंग और दस्तावेजों के वैज्ञानिक संरक्षण की मांग की गई है। साथ ही 300 विद्यार्थियों के बैठकर अध्ययन की व्यवस्था, दोनों तल पर पुस्तकालय संचालन, कैंटीन, प्रिंटर- स्कैनर, पृथक स्वच्छ शौचालय, पार्किंग और लॉन के रखरखाव जैसी सुविधाएं विकसित करने की मांग रखी गई। दुर्लभ दस्तावेजों के डिजिटलीकरण, लापता पुस्तकों को रिकॉर्ड के आधार पर चिन्हित कर वापस लाने तथा मूल भूमि के सीमांकन और आवश्यक विस्तार की मांग भी ज्ञापन में शामिल है। जिस धरोहर ने पीढ़ियों को ज्ञान दिया, आज वही नमी और दीमक से जूझ रही है—अब सवाल संरक्षण का नहीं, विरासत बचाने की अंतिम चेतावनी का है। रीवा की यह ऐतिहासिक ज्ञान-धरोहर अब सिर्फ किताबों का घर नहीं, बल्कि शहर की स्मृति है, जिसके संरक्षण की जिम्मेदारी तत्काल तय करने की मांग उठी है।
- लोकेशन रीवा। जर्जर स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई पर कलेक्टर की दो टूक, कंडम भवनों में नहीं बैठेंगे बच्चे, पटेहरा में खुली अव्यवस्थाओं की पोल। रीवा के तराई क्षेत्र में जर्जर स्कूल भवनों में बच्चों की पढ़ाई का मामला सामने आया है। कई भवन वर्षों पहले चिन्हित हो चुके हैं, लेकिन मरम्मत और वैकल्पिक व्यवस्था अब तक सवालों में है। इसी बीच पटेहरा हाईस्कूल के निरीक्षण में भी शिक्षा व्यवस्था की कई खामियां सामने आईं। रीवा में जर्जर स्कूल भवनों को लेकर प्रशासन अब सख्त नजर आ रहा है। कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी ने साफ कहा है कि कंडम घोषित भवनों में बच्चों को नहीं बैठाया जाएगा, जबकि बारिश से क्षतिग्रस्त भवनों की मरम्मत कराई जाएगी। वहीं मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान से पहले जवा के पटेहरा हाईस्कूल पहुंचे कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ सृष्टि देशमुख गौड़ा को स्कूल में साफ- सफाई और विद्यार्थियों की सुविधाओं से जुड़ी कई अव्यवस्थाएं मिलीं। निरीक्षण में 11वीं के बच्चों को नि:शुल्क किताबें नहीं मिलने और 99 छात्रवृत्ति आवेदन लंबित पाए गए। कलेक्टर ने दो दिन में आवेदनों की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए। प्राचार्य की लापरवाही की शिकायत पर कलेक्टर ने अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश भी दिए हैं। स्कूल की छत कमजोर हो या व्यवस्था, दोनों का खामियाजा बच्चों को नहीं भुगतना चाहिए। अब कलेक्टर का आदेश साफ है, कंडम भवन में बच्चे नहीं बैठेंगे, सवाल सिर्फ इतना है कि यह सख्ती कागज से निकलकर स्कूलों की जमीन तक कितनी जल्दी पहुंचती है।1
- कल्पना मिश्रा मामला: 26 अगस्त से अब तक क्या-क्या हुआ? जानिए पूरा मामला कल्पना मिश्रा की मौत से शुरू हुआ मामला अब बड़े आंदोलन और राजनीतिक टकराव तक पहुंच चुका है। आखिर कब क्या हुआ और विवाद इतना बढ़ा कैसे? इस वीडियो में पूरी टाइमलाइन आसान भाषा में समझिए। #PrakashPathak #RewaNews #KalpanaMishra #RajendraShukla #MadhyaPradesh1
- बेटी के जन्म व अन्नप्राशन संस्कार पर पटेहरा नाथ स्वामी हनुमान मंदिर तेंदुन बैकुण्ठपुर में भक्ति भजन कीर्तन एवं विशाल भण्डारे का हुआ आयोजन बेटी के जन्म व अन्नप्रासन संस्कार पर हनुमान दरबार में बरसी खुशियां, भजन-कीर्तन और विशाल भंडारे का हुआ आयोजन माखन पटेल की रिपोर्ट बैकुण्ठपुर के निकट स्थित पटेहरा नाथ स्वामी हनुमान मंदिर में बेटी के जन्म की खुशी में भजन-कीर्तन एवं विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इस दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय नजर आया। मनमोहक भजनों की प्रस्तुतियों पर श्रद्धालु झूमते और नृत्य करते दिखाई दिए। बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों सहित हजारों की संख्या में भक्त कार्यक्रम में शामिल हुए और भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया। यह आयोजन बैकुण्ठपुर निवासी ओमप्रकाश गुप्ता के पुत्र मुकेश गुप्ता मुक्कू को पुत्री रत्न की प्राप्ति एवं नवजात बालिका के अन्नप्राशन संस्कार के उपलक्ष्य में किया गया। परिवार, रिश्तेदारों और मित्रों के साथ बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी भी इस खुशी में शामिल हुए। बेटी के जन्म को उत्सव बनाकर परिवार ने समाज को बेटियों के सम्मान, शिक्षा और उन्हें आगे बढ़ाने का प्रेरक संदेश दिया। बेटी बोझ नहीं, खुशियों की सौगात है। बेटी को शिक्षा और अवसर दीजिए, वह आसमान छू सकती है।1
- अस्पताल में मोबाइल पर रोक नहीं,अनधिकृत वीडियो पर सख्ती; सोशल मीडिया के दावों पर प्रबंधन का पलटवार "संयुक्त संचालक-अधीक्षक ने वीडियो संदेश जारी कर किया स्थिति स्पष्ट,बोले—मरीजों की निजता से खिलवाड़ की इजाजत नहीं,, "अस्पताल प्रबंधन का दावा भ्रामक और अधूरी जानकारी के आधार पर सोशल मीडिया पर न फैलाएं खबरें,पहले अधिकृत स्रोत से करें पुष्टि, रीवा। संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय में अनधिकृत वीडियोग्राफी को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही खबरों के बीच अस्पताल प्रबंधन ने अब सीधे वीडियो संदेश जारी कर स्थिति स्पष्ट की है। संयुक्त संचालक एवं अधीक्षक ने कहा कि अस्पताल परिसर में मोबाइल फोन ले जाना प्रतिबंधित नहीं है, लेकिन बिना अनुमति वीडियो या फोटो बनाकर उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित करना प्रतिबंधित है। अस्पताल प्रबंधन ने सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही उन खबरों को भ्रामक और अधूरी जानकारी पर आधारित बताया, जिनमें अस्पताल परिसर में मोबाइल या वीडियोग्राफी को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि नियम का उद्देश्य किसी की आवाज दबाना नहीं,बल्कि अस्पताल की संवेदनशील व्यवस्था में मरीजों,परिजनों, चिकित्सकों और कर्मचारियों की निजता एवं सुरक्षा सुनिश्चित करना है। *मोबाइल ले जाने की मनाही नहीं,कैमरे के अनधिकृत इस्तेमाल पर रोक* वीडियो संदेश में अस्पताल अधिकारियों ने विशेष रूप से स्पष्ट किया कि मोबाइल फोन अस्पताल में ले जाना प्रतिबंधित नहीं है। कार्रवाई या रोक का विषय केवल अनधिकृत फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी है। प्रबंधन का कहना है कि अस्पताल में भर्ती मरीजों की बीमारी, उपचार, ऑपरेशन, मेडिकल रिकॉर्ड और व्यक्तिगत परिस्थितियों से जुड़ी जानकारी अत्यंत संवेदनशील होती है। ऐसे में बिना अनुमति कैमरे से रिकॉर्डिंग कर उसे सार्वजनिक करना मरीज की निजता को प्रभावित कर सकता है। *अधूरी जानकारी से बन रही सोशल मीडिया की ‘खबर’!* अस्पताल प्रबंधन ने सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित होने वाली सूचनाओं को लेकर भी सवाल उठाए। अधिकारियों का कहना है कि कई बार किसी घटना का एक पक्ष या अधूरी जानकारी वीडियो के साथ प्रसारित कर दी जाती है, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा होती है और वास्तविक तथ्यों से अलग संदेश लोगों तक पहुंचता है। प्रबंधन ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित हर वीडियो या खबर को अंतिम सत्य न मानें। अस्पताल से संबंधित किसी भी संवेदनशील जानकारी की पुष्टि अधिकृत स्रोतों से करने के बाद ही उसे आगे प्रसारित किया जाए। *मरीजों की निजता के साथ समझौता नहीं, अस्पताल प्रशासन ने साफ किया कि चिकित्सालय एक सार्वजनिक और संवेदनशील स्थान है, जहां गंभीर अवस्था में मरीज उपचार के लिए आते हैं। ऐसे में किसी मरीज या उसके परिजन की अनुमति के बिना उसकी तस्वीर या वीडियो बनाकर सार्वजनिक करना निजता के अधिकार से जुड़ा गंभीर विषय हो सकता है। अधिकारियों ने अस्पताल परिसर में व्यवस्था बनाए रखने, निर्धारित नियमों का पालन करने और मरीजों के हित में सहयोग करने की अपील की है। अस्पताल प्रबंधन के वीडियो संदेश के बाद अब सोशल मीडिया पर मोबाइल प्रतिबंध और अनधिकृत वीडियोग्राफी को लेकर चल रहे दावों पर स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो गई है।1
- *अस्पताल में मोबाइल पर रोक नहीं,अनधिकृत वीडियो पर सख्ती; सोशल मीडिया के दावों पर प्रबंधन का पलटवार* *संयुक्त संचालक-अधीक्षक ने वीडियो संदेश जारी कर किया स्थिति स्पष्ट,बोले—मरीजों की निजता से खिलवाड़ की इजाजत नहीं* *अस्पताल प्रबंधन का दावा भ्रामक और अधूरी जानकारी के आधार पर सोशल मीडिया पर न फैलाएं खबरें,पहले अधिकृत स्रोत से करें पुष्टि* रीवा। संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय में अनधिकृत वीडियोग्राफी को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही खबरों के बीच अस्पताल प्रबंधन ने अब सीधे वीडियो संदेश जारी कर स्थिति स्पष्ट की है। संयुक्त संचालक एवं अधीक्षक ने कहा कि अस्पताल परिसर में मोबाइल फोन ले जाना प्रतिबंधित नहीं है, लेकिन बिना अनुमति वीडियो या फोटो बनाकर उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित करना प्रतिबंधित है। अस्पताल प्रबंधन ने सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही उन खबरों को भ्रामक और अधूरी जानकारी पर आधारित बताया, जिनमें अस्पताल परिसर में मोबाइल या वीडियोग्राफी को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि नियम का उद्देश्य किसी की आवाज दबाना नहीं,बल्कि अस्पताल की संवेदनशील व्यवस्था में मरीजों,परिजनों, चिकित्सकों और कर्मचारियों की निजता एवं सुरक्षा सुनिश्चित करना है। *मोबाइल ले जाने की मनाही नहीं,कैमरे के अनधिकृत इस्तेमाल पर रोक* वीडियो संदेश में अस्पताल अधिकारियों ने विशेष रूप से स्पष्ट किया कि मोबाइल फोन अस्पताल में ले जाना प्रतिबंधित नहीं है। कार्रवाई या रोक का विषय केवल अनधिकृत फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी है। प्रबंधन का कहना है कि अस्पताल में भर्ती मरीजों की बीमारी, उपचार, ऑपरेशन, मेडिकल रिकॉर्ड और व्यक्तिगत परिस्थितियों से जुड़ी जानकारी अत्यंत संवेदनशील होती है। ऐसे में बिना अनुमति कैमरे से रिकॉर्डिंग कर उसे सार्वजनिक करना मरीज की निजता को प्रभावित कर सकता है। *अधूरी जानकारी से बन रही सोशल मीडिया की ‘खबर’!* अस्पताल प्रबंधन ने सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित होने वाली सूचनाओं को लेकर भी सवाल उठाए। अधिकारियों का कहना है कि कई बार किसी घटना का एक पक्ष या अधूरी जानकारी वीडियो के साथ प्रसारित कर दी जाती है, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा होती है और वास्तविक तथ्यों से अलग संदेश लोगों तक पहुंचता है। प्रबंधन ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित हर वीडियो या खबर को अंतिम सत्य न मानें। अस्पताल से संबंधित किसी भी संवेदनशील जानकारी की पुष्टि अधिकृत स्रोतों से करने के बाद ही उसे आगे प्रसारित किया जाए। *मरीजों की निजता के साथ समझौता नहीं* अस्पताल प्रशासन ने साफ किया कि चिकित्सालय एक सार्वजनिक और संवेदनशील स्थान है, जहां गंभीर अवस्था में मरीज उपचार के लिए आते हैं। ऐसे में किसी मरीज या उसके परिजन की अनुमति के बिना उसकी तस्वीर या वीडियो बनाकर सार्वजनिक करना निजता के अधिकार से जुड़ा गंभीर विषय हो सकता है। अधिकारियों ने अस्पताल परिसर में व्यवस्था बनाए रखने, निर्धारित नियमों का पालन करने और मरीजों के हित में सहयोग करने की अपील की है। अस्पताल प्रबंधन के वीडियो संदेश के बाद अब सोशल मीडिया पर मोबाइल प्रतिबंध और अनधिकृत वीडियोग्राफी को लेकर चल रहे दावों पर स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो गई है।1
- मध्यप्रदेश से जुड़ी आज की बड़ी खबरें देखिए, #जनसंपर्क_खबरें मध्यप्रदेश से जुड़ी आज की बड़ी खबरें देखिए, #जनसंपर्क_खबरें 🗓️ 12 सितम्बर 2026 ➡️1
- ।.✍️.रीवा संभाग ब्यरो रिप्पू पाण्डेय ✍️.....................चिकित्सालय में अनाधिकृत वीडियोग्राफी निषेध के बारे में सोशल मीडिया में चल रही भ्रामक खबरों के संबंध में संयुक्त संचालक एवं अधीक्षक द्वारा जारी वीडियो संदेश. ।.✍️.रीवा संभाग ब्यरो रिप्पू पाण्डेय ✍️.....................चिकित्सालय में अनाधिकृत वीडियोग्राफी निषेध के बारे में सोशल मीडिया में चल रही भ्रामक खबरों के संबंध में संयुक्त संचालक एवं अधीक्षक द्वारा जारी वीडियो संदेश.1
- लोकेशन रीवा। 1938 की धरोहर पर संकट, ऐतिहासिक सेंट्रल लाइब्रेरी के संरक्षण और कायाकल्प की मांग। रीवा की ऐतिहासिक सेंट्रल लाइब्रेरी, जिसकी स्थापना वर्ष 1938 में रीवा राज्य के दौर में हुई थी, अब संरक्षण और उन्नयन की मांग को लेकर सुर्खियों में है। जर्जर भवन, छत से पानी का रिसाव और दुर्लभ पुस्तकों के अस्तित्व पर मंडराते खतरे को लेकर आयुक्त के नाम ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में बताया गया कि छत से लगातार पानी रिसने और नमी-दीमक के कारण दुर्लभ पुस्तकों और ऐतिहासिक दस्तावेजों के नष्ट होने का खतरा बढ़ गया है। तत्काल वाटरप्रूफिंग और दस्तावेजों के वैज्ञानिक संरक्षण की मांग की गई है। साथ ही 300 विद्यार्थियों के बैठकर अध्ययन की व्यवस्था, दोनों तल पर पुस्तकालय संचालन, कैंटीन, प्रिंटर- स्कैनर, पृथक स्वच्छ शौचालय, पार्किंग और लॉन के रखरखाव जैसी सुविधाएं विकसित करने की मांग रखी गई। दुर्लभ दस्तावेजों के डिजिटलीकरण, लापता पुस्तकों को रिकॉर्ड के आधार पर चिन्हित कर वापस लाने तथा मूल भूमि के सीमांकन और आवश्यक विस्तार की मांग भी ज्ञापन में शामिल है। जिस धरोहर ने पीढ़ियों को ज्ञान दिया, आज वही नमी और दीमक से जूझ रही है—अब सवाल संरक्षण का नहीं, विरासत बचाने की अंतिम चेतावनी का है। रीवा की यह ऐतिहासिक ज्ञान-धरोहर अब सिर्फ किताबों का घर नहीं, बल्कि शहर की स्मृति है, जिसके संरक्षण की जिम्मेदारी तत्काल तय करने की मांग उठी है।1