सीतापुर में भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने देश के किसानों, कृषि मजदूरों और ग्रामीण भारत के ज्वलंत मुद्दों को लेकर राष्ट्रपति के नाम संबोधित एक 15 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा है। संगठन का कहना है कि लगातार बढ़ती खेती की लागत, फसलों का लाभकारी मूल्य न मिलने, गन्ने के लंबित भुगतान, उर्वरकों की कमी और प्राकृतिक आपदाओं के कारण देश का किसान गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है। ऐसे में केंद्र सरकार को किसानों के हित में तत्काल ठोस कदम उठाने की जरूरत है। भाकियू ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते सहित विभिन्न मुक्त व्यापार समझौतों पर गहरी चिंता जताई है। संगठन का मानना है कि यदि कृषि और डेयरी क्षेत्र को विदेशी प्रतिस्पर्धा के लिए बिना पर्याप्त सुरक्षा के खोला गया, तो इससे देश के करोड़ों छोटे और सीमांत किसानों तथा दुग्ध उत्पादकों को सीधा नुकसान होगा। भाकियू ने ऐसे किसी भी समझौते का कड़ा विरोध किया है जिससे एमएसपी, सार्वजनिक खरीद और खाद्य सुरक्षा प्रभावित हो। इसके अलावा, डीजल, बिजली, बीज और कृषि यंत्रों की बढ़ती कीमतों ने खेती को घाटे का सौदा बना दिया है। संगठन ने राष्ट्रपति के समक्ष प्रमुख मांगें रखी हैं, जिनमें स्वामीनाथन आयोग के सी2+50% फार्मूले के तहत सभी फसलों पर एमएसपी की कानूनी गारंटी देना, गन्ने का न्यूनतम राज्य परामर्श मूल्य ₹500 प्रति क्विंटल घोषित कर ब्याज सहित लंबित भुगतान कराना, और किसानों व कृषि मजदूरों की संपूर्ण कर्ज माफी व ब्याजमुक्त ऋण देना शामिल है। इसके साथ ही कृषि के लिए मुफ्त बिजली, ग्रामीण उपभोक्ताओं को 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने, बिजली बिल 2025 व निजीकरण को वापस लेने और डीएपी व यूरिया जैसे उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कर कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई है। भाकियू ने प्राकृतिक आपदाओं को राष्ट्रीय आपदा घोषित कर उचित मुआवजा देने, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की समीक्षा करने और डेयरी क्षेत्र में विदेशी दुग्ध उत्पादों के आयात पर रोक लगाने की भी अपील की है। भाकियू का स्पष्ट कहना है कि कृषि देश की खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव है। यदि किसानों की इन समस्याओं का समय रहते समाधान नहीं किया गया, तो इसका सीधा असर पूरे देश की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण समाज पर पड़ेगा। संगठन ने केंद्र सरकार से इन सभी मांगों पर गंभीरता से विचार कर जल्द से जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की है ताकि किसान सम्मानपूर्वक आजीविका चला सकें और देश की खाद्य सुरक्षा मजबूत बनी रहे।
सीतापुर में भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने देश के किसानों, कृषि मजदूरों और ग्रामीण भारत के ज्वलंत मुद्दों को लेकर राष्ट्रपति के नाम संबोधित एक 15 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा है। संगठन का कहना है कि लगातार बढ़ती खेती की लागत, फसलों का लाभकारी मूल्य न मिलने, गन्ने के लंबित भुगतान, उर्वरकों की कमी और प्राकृतिक आपदाओं के कारण देश का किसान गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है। ऐसे में केंद्र सरकार को किसानों के हित में तत्काल ठोस कदम उठाने की जरूरत है। भाकियू ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते सहित विभिन्न मुक्त व्यापार समझौतों पर गहरी चिंता जताई है।
संगठन का मानना है कि यदि कृषि और डेयरी क्षेत्र को विदेशी प्रतिस्पर्धा के लिए बिना पर्याप्त सुरक्षा के खोला गया, तो इससे देश के करोड़ों छोटे और सीमांत किसानों तथा दुग्ध उत्पादकों को सीधा नुकसान होगा। भाकियू ने ऐसे किसी भी समझौते का कड़ा विरोध किया है जिससे एमएसपी, सार्वजनिक खरीद और खाद्य सुरक्षा प्रभावित हो। इसके अलावा, डीजल, बिजली, बीज और कृषि यंत्रों की बढ़ती कीमतों ने खेती को घाटे का सौदा बना दिया है। संगठन ने राष्ट्रपति के समक्ष प्रमुख मांगें रखी हैं, जिनमें स्वामीनाथन आयोग के सी2+50% फार्मूले के तहत सभी फसलों पर एमएसपी की
कानूनी गारंटी देना, गन्ने का न्यूनतम राज्य परामर्श मूल्य ₹500 प्रति क्विंटल घोषित कर ब्याज सहित लंबित भुगतान कराना, और किसानों व कृषि मजदूरों की संपूर्ण कर्ज माफी व ब्याजमुक्त ऋण देना शामिल है। इसके साथ ही कृषि के लिए मुफ्त बिजली, ग्रामीण उपभोक्ताओं को 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने, बिजली बिल 2025 व निजीकरण को वापस लेने और डीएपी व यूरिया जैसे उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कर कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई है। भाकियू ने प्राकृतिक आपदाओं को राष्ट्रीय आपदा घोषित कर उचित मुआवजा देने, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की समीक्षा करने और
डेयरी क्षेत्र में विदेशी दुग्ध उत्पादों के आयात पर रोक लगाने की भी अपील की है। भाकियू का स्पष्ट कहना है कि कृषि देश की खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव है। यदि किसानों की इन समस्याओं का समय रहते समाधान नहीं किया गया, तो इसका सीधा असर पूरे देश की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण समाज पर पड़ेगा। संगठन ने केंद्र सरकार से इन सभी मांगों पर गंभीरता से विचार कर जल्द से जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की है ताकि किसान सम्मानपूर्वक आजीविका चला सकें और देश की खाद्य सुरक्षा मजबूत बनी रहे।
- सीतापुर के थाना कमलापुर पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए लखनऊ के कामता से बुक कर लूटी गई सफेद रंग की वैगन-आर कार को बरामद कर लिया है। पुलिस ने चेकिंग के दौरान दो शातिर अंतर्जनपदीय अपराधियों को अवैध शस्त्रों के साथ गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक श्री अंकुर अग्रवाल के निर्देश पर, अपर पुलिस अधीक्षक (दक्षिणी) श्री दुर्गेश कुमार सिंह के पर्यवेक्षण, क्षेत्राधिकारी (सिधौली) श्री विशाल गुप्ता के निर्देशन और थाना प्रभारी श्रीमती इतुल चौधरी के कुशल नेतृत्व में की गई। पुलिस टीम ने दोनों अभियुक्तों को उस समय दबोचा जब वे लूटी गई वैगन-आर कार (नंबर UP 32RT5039) लेकर कम्हरिया चौराहे से भज्जा पुल की तरफ आ रहे थे। पकड़े गए अभियुक्तों की पहचान आशीष कुमार (निवासी ग्राम जगतपुर, थाना शिवरतगंज, जनपद अमेठी) और अजय प्रताप सिंह उर्फ अंकित सिंह (निवासी ग्राम पूरे संत सिंह मजरा सलोनी मोम्मदपुर, थाना उमरी बेगम गंज, जनपद गोंडा) के रूप में हुई है। इनके पास से लूट की वैगन-आर कार के अलावा एक अवैध चाकू, एक 315 बोर का तमंचा, एक जिंदा कारतूस और वादी प्रमोद कुमार सिंह का लूटा हुआ भूरे रंग का पर्स बरामद हुआ है। पर्स में पोस्ट ऑफिस पेमेंट कार्ड, आधार कार्ड, वोटर कार्ड, पैन कार्ड और दो ड्राइविंग लाइसेंस मिले हैं। पुलिस ने अभियुक्तों को गिरफ्तार कर अग्रिम कानूनी कार्रवाई के लिए माननीय न्यायालय भेज दिया है। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कुबूला कि उन्होंने 18/19 जुलाई 2026 की रात करीब 12:15 बजे लखनऊ के कामता बस स्टैंड से कमलापुर के लिए ₹1400 में यह कार बुक की थी। कमलापुर से करीब 4 किलोमीटर पहले ग्राम विक्रमपुर जाने वाली सुनसान लिंक रोड पर उन्होंने चालक के साथ मारपीट की और चाकू दिखाकर कार व पर्स लूट लिया था। आरोपियों ने बताया कि वे हाल ही में जेल से छूटकर बाहर आए थे। वे लूटी गई कार में सवारियां बैठाकर किराया वसूलते हुए घूम रहे थे और इस फिराक में थे कि कोई ठीक-ठाक सवारी मिलते ही उसके जेवर और नकदी लूटकर गाड़ी किसी सुनसान जगह पर छोड़कर फरार हो जाएं।7
- नीट परीक्षा को लेकर किरण रिजीजू ने मीडिया के सामने बड़ी बात बोली है।1
- सीतापुर में भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने देश के किसानों, कृषि मजदूरों और ग्रामीण भारत के ज्वलंत मुद्दों को लेकर राष्ट्रपति के नाम संबोधित एक 15 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा है। संगठन का कहना है कि लगातार बढ़ती खेती की लागत, फसलों का लाभकारी मूल्य न मिलने, गन्ने के लंबित भुगतान, उर्वरकों की कमी और प्राकृतिक आपदाओं के कारण देश का किसान गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है। ऐसे में केंद्र सरकार को किसानों के हित में तत्काल ठोस कदम उठाने की जरूरत है। भाकियू ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते सहित विभिन्न मुक्त व्यापार समझौतों पर गहरी चिंता जताई है। संगठन का मानना है कि यदि कृषि और डेयरी क्षेत्र को विदेशी प्रतिस्पर्धा के लिए बिना पर्याप्त सुरक्षा के खोला गया, तो इससे देश के करोड़ों छोटे और सीमांत किसानों तथा दुग्ध उत्पादकों को सीधा नुकसान होगा। भाकियू ने ऐसे किसी भी समझौते का कड़ा विरोध किया है जिससे एमएसपी, सार्वजनिक खरीद और खाद्य सुरक्षा प्रभावित हो। इसके अलावा, डीजल, बिजली, बीज और कृषि यंत्रों की बढ़ती कीमतों ने खेती को घाटे का सौदा बना दिया है। संगठन ने राष्ट्रपति के समक्ष प्रमुख मांगें रखी हैं, जिनमें स्वामीनाथन आयोग के सी2+50% फार्मूले के तहत सभी फसलों पर एमएसपी की कानूनी गारंटी देना, गन्ने का न्यूनतम राज्य परामर्श मूल्य ₹500 प्रति क्विंटल घोषित कर ब्याज सहित लंबित भुगतान कराना, और किसानों व कृषि मजदूरों की संपूर्ण कर्ज माफी व ब्याजमुक्त ऋण देना शामिल है। इसके साथ ही कृषि के लिए मुफ्त बिजली, ग्रामीण उपभोक्ताओं को 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने, बिजली बिल 2025 व निजीकरण को वापस लेने और डीएपी व यूरिया जैसे उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कर कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई है। भाकियू ने प्राकृतिक आपदाओं को राष्ट्रीय आपदा घोषित कर उचित मुआवजा देने, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की समीक्षा करने और डेयरी क्षेत्र में विदेशी दुग्ध उत्पादों के आयात पर रोक लगाने की भी अपील की है। भाकियू का स्पष्ट कहना है कि कृषि देश की खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव है। यदि किसानों की इन समस्याओं का समय रहते समाधान नहीं किया गया, तो इसका सीधा असर पूरे देश की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण समाज पर पड़ेगा। संगठन ने केंद्र सरकार से इन सभी मांगों पर गंभीरता से विचार कर जल्द से जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की है ताकि किसान सम्मानपूर्वक आजीविका चला सकें और देश की खाद्य सुरक्षा मजबूत बनी रहे।4
- लखनऊ में डीसीपी मध्य, एडीसीपी मध्य जितेन्द्र कुमार दुबे, एसीपी महानगर अंकित कुमार और मदेयगंज थाना प्रभारी अनुज तिवारी की पुलिस टीम ने महज 24 घंटे के भीतर लूटकांड का खुलासा करते हुए 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने पकड़े गए आरोपियों के पास से 1.92 लाख रुपये बरामद किए हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने एक दुकानदार को सस्ते दाम में सामान दिलाने का झांसा देकर इस लूट की वारदात को अंजाम दिया था।1
- छात्रों को लेकर कंगना रनौत और अखिलेश यादव आमने-सामने आ गए हैं। इस पूरे घटनाक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।1
- दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों और पुलिस के बीच तनाव बढ़ गया है। प्रदर्शनकारी छात्रों के संसद की ओर बढ़ने पर पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े हैं। इस घटना के बाद एहतियात के तौर पर संसद भवन के सभी प्रवेश द्वारों पर सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया गया है। दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर दिल्ली पुलिस द्वारा आंसू गैस के गोले छोड़े जाने से तनाव की स्थिति पैदा हो गई है।1