फिल्म जख्मी परिंदा पाटीदार फिल्म प्रोडक्शन हाउस की फ़िल्म 24 अप्रैल को 250 सेवा में घरों में होगी रिलीज MTH कंपाउंड प्रेस क्लब इंदौर निर्माता रामेश्वर चौधरी की फ़िल्म फिल्म की कहानी सामाजिक परिवेश 24 अप्रैल को 250 सिनिमाघरों में लगेगी शाजापुर के कलाकारों के साथ ही बंबई के कलाकारों का भी रोल पाटीदार प्रोडक्शन की पहली फिल्म शाजापुर से बॉलीवुड तक: “जख्मी परिंदा” जल्द बड़े पर्दे पर शाजापुर शहर के लिए गर्व की बात सामने आई है। यहां के एक स्थानीय व्यापारी ने बॉलीवुड में कदम रखते हुए “जख्मी परिंदा” नाम से एक फिल्म बनाई है, जिसकी अधिकांश शूटिंग शाजापुर में ही की गई है। खास बात यह है कि फिल्म को सेंसर बोर्ड से भी हरी झंडी मिल चुकी है और अब यह जल्द ही सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। फिल्म के प्रोड्यूसर और एक्टर रामेश्वर चौधरी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर फिल्म से जुड़ी विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि यह फिल्म अब तक की पारंपरिक फिल्मों से अलग है और इसमें दर्शकों को रोमांस, प्यार, कॉमेडी और एक्शन का पूरा पैकेज देखने को मिलेगा। रामेश्वर चौधरी ने यह भी कहा कि फिल्म में कई सामाजिक और भावनात्मक पहलुओं को खास तौर पर उभारा गया है, जिससे दर्शक खुद को कहानी से जोड़ सकेंगे। अंत में उन्होंने शहरवासियों से अपील करते हुए कहा कि अधिक से अधिक संख्या में सिनेमाघरों तक पहुंचें, फिल्म देखें और स्थानीय कलाकारों के इस प्रयास को सफल बनाएं। अब देखना दिलचस्प होगा कि शाजापुर में बनी यह फिल्म बड़े पर्दे पर कितना कमाल दिखाती है। फिल्म जख्मी परिंदा के प्रोड्यूसर रामेश्वर चौधरी, डायरेक्टर राजू चौहान, एक्टर रामेश्वर चौधरी, कीर्ति वर्मा, कल्पना साहनी, अनिल राय मोनू गुर्जर, शिवानी बिजोरिया , शुभम चक,गायक ऋतु पाठक एवं संगीतकार दर्पण अग्रवाल हे, 24 अप्रैल को बड़े पर्दे पर रिलीज होगी।
फिल्म जख्मी परिंदा पाटीदार फिल्म प्रोडक्शन हाउस की फ़िल्म 24 अप्रैल को 250 सेवा में घरों में होगी रिलीज MTH कंपाउंड प्रेस क्लब इंदौर निर्माता रामेश्वर चौधरी की फ़िल्म फिल्म की कहानी सामाजिक परिवेश 24 अप्रैल को 250 सिनिमाघरों में लगेगी शाजापुर के कलाकारों के साथ ही बंबई के कलाकारों का भी रोल पाटीदार प्रोडक्शन की पहली फिल्म शाजापुर से बॉलीवुड तक: “जख्मी परिंदा” जल्द बड़े पर्दे पर शाजापुर शहर के लिए गर्व की बात सामने आई है। यहां के एक स्थानीय व्यापारी ने बॉलीवुड में कदम रखते हुए “जख्मी परिंदा” नाम से एक फिल्म बनाई है, जिसकी अधिकांश शूटिंग शाजापुर में ही की गई है। खास बात यह है कि फिल्म को सेंसर बोर्ड से भी हरी झंडी मिल चुकी है और अब यह जल्द ही सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। फिल्म के प्रोड्यूसर और एक्टर रामेश्वर चौधरी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर फिल्म से जुड़ी विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि यह फिल्म अब तक की पारंपरिक फिल्मों से अलग है और इसमें दर्शकों को रोमांस, प्यार, कॉमेडी और एक्शन का पूरा पैकेज देखने को मिलेगा। रामेश्वर चौधरी ने यह भी कहा कि फिल्म में कई सामाजिक और भावनात्मक पहलुओं को खास तौर पर उभारा गया है, जिससे दर्शक खुद को कहानी से जोड़ सकेंगे। अंत में उन्होंने शहरवासियों से अपील करते हुए कहा कि अधिक से अधिक संख्या में सिनेमाघरों तक पहुंचें, फिल्म देखें और स्थानीय कलाकारों के इस प्रयास को सफल बनाएं। अब देखना दिलचस्प होगा कि शाजापुर में बनी यह फिल्म बड़े पर्दे पर कितना कमाल दिखाती है। फिल्म जख्मी परिंदा के प्रोड्यूसर रामेश्वर चौधरी, डायरेक्टर राजू चौहान, एक्टर रामेश्वर चौधरी, कीर्ति वर्मा, कल्पना साहनी, अनिल राय मोनू गुर्जर, शिवानी बिजोरिया , शुभम चक,गायक ऋतु पाठक एवं संगीतकार दर्पण अग्रवाल हे, 24 अप्रैल को बड़े पर्दे पर रिलीज होगी।
- Post by Vishal Jadhav1
- कलेक्टर श्री शिवम वर्मा ने स्वयं भरा ऑनलाइन स्व-गणना फार्मनागरिकों से जनगणना के कार्य में सहयोग की अपील की इंदौर, 16 अप्रैल 2026 आज से शुरू हुई जनगणना सेल्फ इन्यूमरेशन प्रक्रिया के तहत कलेक्टर श्री शिवम वर्मा ने स्वयं ऑनलाइन स्व-गणना (Self Enumeration) फॉर्म भरकर नागरिकों को प्रेरित किया। कलेक्टर श्री वर्मा ने कहा कि जनगणना देश की विकास योजनाओं की आधारशिला है, इसलिए प्रत्येक नागरिक को इसमें सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए। उन्होंने इंदौरवासियों से अपील की कि वे जनगणना पोर्टल पर जाकर स्वयं अपनी जानकारी दर्ज करें और इस प्रक्रिया को सरल व पारदर्शी बनाने में सहयोग दें। श्री वर्मा ने बताया कि सेल्फ इन्यूमरेशन से समय की बचत होगी और जब टीम घर-घर पहुंचेगी, तब प्रक्रिया और भी आसान हो जाएगी। कलेक्टर श्री शिवम वर्मा ने नागरिकों से आग्रह किया कि वे https://se.census.gov.in पर जाकर अपनी जानकारी दर्ज करें। नागरिकों के लिये पोर्टल पर स्व-गणना का कार्य 16 अप्रैल से प्रारंभ किया गया है जो 30 अप्रैल तक उपलब्ध रहेगा। स्व-गणना की पूरी प्रक्रिया सुरक्षित है और इसे हिंदी, अंग्रेजी सहित 14 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध कराया गया है, ताकि हर वर्ग के लोग आसानी से इसका उपयोग कर सकें। इसमें 5 से 10 मिनट में स्व-गणना की पूरी प्रक्रिया पूर्ण हो जाती है। कलेक्टर श्री वर्मा ने नागरिकों से अपील की है कि इस सुविधा का अधिकतम लाभ उठायें और जिम्मेदार नागरिक होने का परिचय दें।1
- लापरवाही पड़ी भारी: स्कूटी सवार को ट्रक ने कुचला, मौके पर मौत सड़क पर एक छोटी सी गलती ने एक व्यक्ति की जान ले ली। तेज रफ्तार ट्रक की चपेट में आने से स्कूटी सवार की दर्दनाक मौत हो गई। बताया जा रहा है कि स्कूटी चालक ने बिना पीछे देखे अचानक टर्न ले लिया, तभी पीछे से आ रहे ट्रक ने उसे कुचल दिया। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि सड़क पर जरा सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि वाहन चलाते समय हमेशा पीछे देखकर टर्न लें, इंडिकेटर का इस्तेमाल करें और पूरी तरह सतर्क रहें।1
- *इंदौर में क्राइम ब्रांच का बड़ा प्रहार: 12 लाख की ‘MD’ ड्रग्स के साथ तस्कर गिरफ्तार* इंदौर: शहर में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत क्राइम ब्रांच इंदौर पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए अवैध मादक पदार्थ “MD” के साथ एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से करीब 121 ग्राम एमडी ड्रग्स बरामद की है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 12 लाख 10 हजार रुपए बताई जा रही है। पुलिस को यह सफलता मुखबिर से मिली सटीक सूचना के आधार पर मिली। सूचना मिलते ही क्राइम ब्रांच की टीम ने तत्परता दिखाते हुए कार्रवाई की और आरोपी को धर दबोचा। गिरफ्तार आरोपी की पहचान शैलेंद्र चौहान के रूप में हुई है, जो मूल रूप से नाहरगढ़, सीतामऊ, जिला मंदसौर का निवासी है और वर्तमान में इंदौर में सक्रिय था। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी के खिलाफ पहले से ही मंदसौर जिले के नाहरगढ़ थाने में मारपीट से संबंधित एक मामला दर्ज है। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपी के पास से 121 ग्राम एमडी के अलावा एक मोबाइल फोन भी जब्त किया है। जब्त किए गए कुल मश्रूका की कीमत करीब 12 लाख 50 हजार रुपए आंकी गई है। फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि वह यह मादक पदार्थ कहां से लाया और शहर में किन-किन लोगों तक इसकी सप्लाई करता था। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ में ड्रग्स नेटवर्क से जुड़े और बड़े खुलासे हो सकते हैं।1
- दिल्ली शहर में एक दर्दनाक हादसे में युवती की मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक युवती थार गाड़ी की छत पर चढ़कर शराब पी रही थी और मस्ती कर रही थी। इसी दौरान संतुलन बिगड़ने से वह नीचे गिर गई। सिर में गंभीर चोट लगने के कारण मौके पर ही उसकी मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हादसे के वक्त युवती के साथ और कौन मौजूद था। #Foryou #viral #reelsindia #viralreel1
- गाज़ियाबाद की आग: हादसा या सुनियोजित साज़िश,आसपास के CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं और हालिया गिरफ्तारियों के साथ किसी संभावित कनेक्शन को भी परखा जा रहा है। कबाड़ियों के गोदाम एवं झुग्गी-झोपड़ियों में विशेष रिपोर्ट: इंडिया न्यूज़ 7 पवन सूर्यवंशी ब्यूरो चीफ ऑल एनसीआर1
- Post by Ck_news1
- पश्चिम बंगाल की सियासत में उस वक्त हलचल मच गई जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक चुनावी रैली के दौरान विवादित बयान दे दिया… सीएम योगी ने कहा कि “कोई मौलाना क्या बक रहा है, इसकी चिंता करने की जरूरत नहीं है… BJP सरकार आने दीजिए, ये सभी बंगाल की सड़कों पर झाड़ू लगाते नजर आएंगे…” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है और विपक्ष ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है…#viralnews #CMYogi #yogi #bangal #bangalchunav1
- *इनके पाप विधायक है इस लिए ये किसी को भी गाड़ी से उड़ा देते है ?* मध्यप्रदेश की सियासत में एक बार फिर सत्ता के नशे और कानून के डर के बीच की खाई खुलकर सामने आ गई है। शिवपुरी जिले की पिछोर विधानसभा से जुड़ा हालिया मामला सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि उस मानसिकता का आईना है जो सत्ता के करीब आते ही खुद को कानून से ऊपर समझने लगती है। आरोप है कि भाजपा विधायक प्रीतम लोधी के पुत्र ने अपनी गाड़ी से कई लोगों को कुचल दिया, जिससे कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना जितनी भयावह है, उससे कहीं ज्यादा चौंकाने वाला उसका बाद का व्यवहार है। आम तौर पर ऐसे मामलों में आरोपी भयभीत होता है, छिपने की कोशिश करता है या कानून की प्रक्रिया का सामना करता है। लेकिन यहां तस्वीर उलट दिखाई देती है आरोपी का बेखौफ होकर सामान्य जीवन में लौट जाना यह सवाल खड़ा करता है कि आखिर उसे यह भरोसा कहां से मिल रहा है? क्या यह विश्वास सिर्फ इसलिए है क्योंकि उसके पिता सत्ता में हैं? यह घटना किसी एक परिवार या एक नेता की नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की पोल खोलती है जहां “पहचान” और “पद” न्याय से बड़ा बन जाता है। जब आम आदमी सड़क पर चलता है, तो उसे ट्रैफिक नियमों से लेकर कानून की हर धारा का डर होता है। लेकिन वहीं, अगर कोई रसूखदार परिवार से आता है, तो वही सड़क उसके लिए ताकत का प्रदर्शन करने का मंच बन जाती है। सबसे गंभीर सवाल यह है कि क्या इस मामले में कानून अपना काम पूरी निष्पक्षता से करेगा? या फिर यह भी उन फाइलों में दब जाएगा, जहां बड़े नामों के सामने जांच धीमी पड़ जाती है? जनता के मन में यह संदेह यूं ही पैदा नहीं हुआ है। इससे पहले भी कई मामलों में देखा गया है कि प्रभावशाली लोगों के खिलाफ कार्रवाई या तो देर से होती है या फिर कमजोर पड़ जाती है। इस पूरे प्रकरण में पीड़ितों की स्थिति पर भी ध्यान देना जरूरी है। जिन लोगों को कुचला गया, वे किसी के परिवार के सदस्य हैं, किसी के पिता, किसी के बेटे। उनके लिए यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि जिंदगी भर का दर्द बन सकती है। सवाल यह है कि क्या उन्हें न्याय मिलेगा? क्या उनके जख्मों की भरपाई सिर्फ मुआवजे से हो सकती है? राजनीति में अक्सर “जनसेवा” की बात होती है, लेकिन जब जनता ही असुरक्षित महसूस करने लगे, तो यह शब्द खोखला लगने लगता है। सत्ता का मतलब जिम्मेदारी होना चाहिए, न कि दबंगई का लाइसेंस। यदि जनप्रतिनिधियों के परिवार ही कानून तोड़ने लगें और उन पर कार्रवाई न हो, तो यह लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों पर सीधा आघात है। यह भी गौर करने वाली बात है कि इस तरह की घटनाएं बार-बार सामने क्यों आती हैं। क्या राजनीतिक दल अपने नेताओं और उनके परिवारों के आचरण को लेकर कोई आंतरिक अनुशासन लागू करते हैं? या फिर जीत के बाद सब कुछ “मैनेज” हो जाने की मानसिकता हावी हो जाती है? समाज में कानून का सम्मान तभी बना रह सकता है जब हर व्यक्ति, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसके दायरे में आए। अगर कुछ लोगों को छूट मिलती रही, तो यह संदेश जाएगा कि कानून सिर्फ कमजोरों के लिए है। और यह स्थिति किसी भी लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक होती है। आज जरूरत है एक निष्पक्ष और तेज कार्रवाई की। सिर्फ बयानबाजी से काम नहीं चलेगा। पुलिस और प्रशासन को यह साबित करना होगा कि वे किसी दबाव में नहीं हैं। अगर आरोपी दोषी है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए चाहे वह किसी भी परिवार से क्यों न आता हो। यह मामला सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। अगर अब भी व्यवस्था नहीं चेती, तो जनता का भरोसा पूरी तरह टूट सकता है। और जब जनता का विश्वास डगमगाता है, तो लोकतंत्र की नींव भी कमजोर पड़ जाती है। अब देखना यह है कि यह मामला भी बाकी मामलों की तरह समय के साथ ठंडा पड़ जाता है, या फिर सच में न्याय की मिसाल बनता है।1