झारखंड के पलामू जिले में अनुसूचित जाति बहुल गांवों के विकास के लिए संचालित प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना (पीएमएजीवाई) पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि यह योजना 'छलावा' साबित हो रही है, क्योंकि केंद्र सरकार द्वारा करोड़ों रुपये उपलब्ध कराए जाने के बावजूद चयनित गांवों तक अपेक्षित राशि नहीं पहुँच रही है, जिससे योजना की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न लग गया है। वर्ष 2018 से 2026 तक की अवधि के लिए पलामू जिले में इस योजना के तहत कुल 285 गांवों का चयन किया गया है। प्रावधानों के अनुसार, प्रत्येक गांव पर लगभग 20 लाख रुपये खर्च किए जाने थे, लेकिन अब तक केवल 137 गांवों को 60-60 हजार रुपये और 9 गांवों को 30-30 हजार रुपये ही मिल पाए हैं। करीब आठ वर्षों में कुल मिलाकर केवल 84.90 लाख रुपये का ही आवंटन हो पाया है। सतबरवा प्रखंड के ठेमी, हुड़मुड़, सलइया और चपरना जैसे गांवों को सीमित राशि मिली है, जबकि जोड़ा, नौरंगा, तुम्बागड़ा और पोची जैसे कई गांवों को तो अब तक कोई राशि मिली ही नहीं है, जिस पर ग्रामीणों ने फंड आवंटन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। रबदा पंचायत के सलइया गांव स्थित परहिया टोला में आज भी सड़क, स्वास्थ्य और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है, जहाँ ग्रामीण नदी और चुआड़ी के पानी पर निर्भर रहने को मजबूर हैं। वार्ड सदस्य बबलू परहिया ने बताया कि आर्थिक तंगी के कारण बीमार सुगनी देवी को समुचित इलाज नहीं मिल पाया और बाद में उनकी मौत हो गई। इस मामले पर प्रभारी बीडीओ प्रदीप दास ने दो दिन पूर्व जानकारी लेकर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास करने की बात कही थी, लेकिन कोई आलाधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। वहीं समाजसेवी अरबिंद सिंह ने इस योजना को विफल करार देते हुए कहा है कि कई टोले आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं और आदर्श ग्राम का दर्जा केवल कागजों तक ही सीमित रह गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि इरफान अंसारी, हेमंत सोरेन और डीसी पलामू साहब को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर ट्वीट करने के बाद भी परहिया जाति के दर्द को नहीं सुना गया। उनका यह भी मानना है कि यदि नेता और पदाधिकारी चाहते तो इस जांच को बचाया जा सकता था।
झारखंड के पलामू जिले में अनुसूचित जाति बहुल गांवों के विकास के लिए संचालित प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना (पीएमएजीवाई) पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि यह योजना 'छलावा' साबित हो रही है, क्योंकि केंद्र सरकार द्वारा करोड़ों रुपये उपलब्ध कराए जाने के बावजूद चयनित गांवों तक अपेक्षित राशि नहीं पहुँच रही है, जिससे योजना की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न लग गया है। वर्ष 2018 से 2026 तक की अवधि के लिए पलामू जिले में इस योजना के तहत कुल 285 गांवों का चयन किया गया है। प्रावधानों के अनुसार,
प्रत्येक गांव पर लगभग 20 लाख रुपये खर्च किए जाने थे, लेकिन अब तक केवल 137 गांवों को 60-60 हजार रुपये और 9 गांवों को 30-30 हजार रुपये ही मिल पाए हैं। करीब आठ वर्षों में कुल मिलाकर केवल 84.90 लाख रुपये का ही आवंटन हो पाया है। सतबरवा प्रखंड के ठेमी, हुड़मुड़, सलइया और चपरना जैसे गांवों को सीमित राशि मिली है, जबकि जोड़ा, नौरंगा, तुम्बागड़ा और पोची जैसे कई गांवों को तो अब तक कोई राशि मिली ही नहीं है, जिस पर ग्रामीणों ने फंड आवंटन प्रक्रिया पर सवाल
उठाए हैं। रबदा पंचायत के सलइया गांव स्थित परहिया टोला में आज भी सड़क, स्वास्थ्य और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है, जहाँ ग्रामीण नदी और चुआड़ी के पानी पर निर्भर रहने को मजबूर हैं। वार्ड सदस्य बबलू परहिया ने बताया कि आर्थिक तंगी के कारण बीमार सुगनी देवी को समुचित इलाज नहीं मिल पाया और बाद में उनकी मौत हो गई। इस मामले पर प्रभारी बीडीओ प्रदीप दास ने दो दिन पूर्व जानकारी लेकर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास करने की बात कही थी, लेकिन कोई आलाधिकारी मौके
पर नहीं पहुंचा। वहीं समाजसेवी अरबिंद सिंह ने इस योजना को विफल करार देते हुए कहा है कि कई टोले आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं और आदर्श ग्राम का दर्जा केवल कागजों तक ही सीमित रह गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि इरफान अंसारी, हेमंत सोरेन और डीसी पलामू साहब को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर ट्वीट करने के बाद भी परहिया जाति के दर्द को नहीं सुना गया। उनका यह भी मानना है कि यदि नेता और पदाधिकारी चाहते तो इस जांच को बचाया जा सकता था।
- रंका पुलिस ने मारपीट के एक आरोपी को गिरफ्तार कर गढ़वा न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान अरुण ठाकुर, पिता रमेश ठाकुर के रूप में हुई है। वहीं, इस मामले का एक अन्य आरोपी अभी भी फरार बताया जा रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना मई माह में हुई थी जब मानपुर पंचायत के पूरेगाड़ा निवासी होरीलाल प्रजापति के साथ रमेश ठाकुर और उनके पुत्र अरुण ठाकुर द्वारा कथित रूप से बेरहमी से मारपीट की गई थी। इस घटना में होरीलाल प्रजापति गंभीर रूप से घायल हो गए थे, उनके शरीर के कई हिस्सों में चोटें आई थीं और एक पैर भी क्षतिग्रस्त हो गया था। घटना के बाद, होरीलाल प्रजापति ने न्याय की मांग को लेकर रंका थाना में आवेदन देकर कार्रवाई की गुहार लगाई थी। पुलिस की जांच के दौरान, रंका पुलिस ने एक आरोपी अरुण ठाकुर को गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि, मामले का दूसरा आरोपी अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। एक आरोपी की गिरफ्तारी से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।1
- लातेहार में पीवीयूएनएल बनहरदी कोयला खनन परियोजना द्वारा आयोजित दो माह के सिलाई प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हो गया है। 15 जून 2026 को हुए इस कार्यक्रम में पीवीयूएनएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री अशोक कुमार सहगल ने 40 प्रशिक्षित महिलाओं को सिलाई मशीनों का वितरण किया। इस पहल का उद्देश्य स्थानीय समुदाय की महिलाओं को स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करना है। इस अवसर पर बनहरदी कोयला खनन परियोजना के महाप्रबंधक श्री निरोद कुमार मलिक, एजीएम (माइनिंग) श्री असीम मिश्रा, एजीएम (एलए/आर एंड आर) श्री आर. बी. सिंह, और एजीएम (इन्फ्रा) श्री सिद्धार्थ शंकर सहित अन्य अधिकारीगण, स्थानीय ग्रामीण और मीडिया प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रत्येक बैच में 20-20 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था, जिसमें कुल 40 प्रशिक्षार्थियों ने सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा किया। कार्यक्रम के दौरान सभी 40 प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए, साथ ही उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली पाँच प्रतिभागियों को स्मृति-चिह्न और शॉल देकर सम्मानित किया गया। मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री अशोक कुमार सहगल ने इस अवसर पर कहा कि पीवीयूएनएल स्थानीय समुदायों के सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह सिलाई प्रशिक्षण और मशीनों का वितरण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनके परिवारों की आजीविका को सुदृढ़ करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। कार्यक्रम का समापन सभी प्रतिभागियों के उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाओं के साथ किया गया।4
- झारखंड के प्रतापपुर प्रखंड की जोगिडीह पंचायत के कल्याणपुर गांव में 'हर घर नल योजना' विफल हो गई है। लाखों रुपये की लागत से बना जलमीनार पिछले एक साल से बंद पड़ा है, जिसके कारण गांव के लगभग 30 घरों तक नल का पानी नहीं पहुँच पा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, जलमीनार एक साल पहले वज्रपात से खराब हुआ था। मरम्मत के लिए दो महीने पहले समरसेबल पंप और अन्य उपकरण ले जाए गए, लेकिन इसके बावजूद जलमीनार अब तक चालू नहीं हो सका है। हालत तब और बिगड़ गई जब गांव का चापाकल भी मरम्मत के नाम पर खोल दिया गया, जिससे भीषण गर्मी में महिलाओं और बच्चों को दूर से पानी लाने को मजबूर होना पड़ रहा है। ग्रामीण रामप्रवेश ठाकुर, सतेंद्र ठाकुर और अन्य ने उपायुक्त रवि आनंद से इस मामले में हस्तक्षेप कर जल्द से जल्द जलापूर्ति बहाल करने की मांग की है। वहीं, मुखिया बीरेंद्र यादव ने बताया कि इस संबंध में विभाग को सूचना दे दी गई है और मरम्मत का कार्य शीघ्र ही किया जाएगा।1
- गढ़वा जिले के धुरकी थाना क्षेत्र के भंडार गांव में एक मामले को लेकर सनसनी फैल गई है। बताया जा रहा है कि एक घर से ऐसे सबूत मिले हैं, जिन्हें जांच में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पुलिस ने घटनास्थल से प्राप्त इन सामानों को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए पुलिस द्वारा हर पहलू से पड़ताल की जा रही है। अब लोगों की नजर पुलिस की इस जांच और आगे होने वाले खुलासों पर टिकी हुई है, खास तौर पर इस बात पर कि क्या घर से मिले ये सबूत किसी संभावित हत्या के पूरे रहस्य को उजागर कर पाएंगे।1
- तमिलनाडु को 'मंदिरों की भूमि' के रूप में जाना जाता है, जहाँ कई प्रमुख और ऐतिहासिक मंदिर स्थित हैं। यह राज्य भारत में जीवित मंदिर दर्शन की एक अनूठी झलक प्रस्तुत करता है। इन प्रमुख मंदिरों में मदुरै का मीनाक्षी अम्मन मंदिर देवी मीनाक्षी और भगवान सुंदरेश्वर को समर्पित है, जो अपनी विशाल वास्तुकला, भव्य गोपुरम और नक्काशीदार खंभों के लिए विश्व प्रसिद्ध है। त्रिची के श्रीरंगम में स्थित श्री रंगनाथस्वामी मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित दुनिया के सबसे बड़े सक्रिय मंदिर परिसरों में से एक है। रामेश्वरम का रामनाथस्वामी मंदिर, जो भारत के चार धामों में से एक है, अपने विशाल गलियारों और समुद्र तट के पास स्थित होने के कारण बहुत महत्वपूर्ण है। तंजावुर का बृहदीश्वर मंदिर यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित है और यह चोल राजवंश की शानदार वास्तुकला का प्रतीक है। वहीं, चेन्नई के मायलापुर में स्थित कपालेश्वर मंदिर एक बहुत ही जीवंत और प्रसिद्ध शिव मंदिर है। इसके अतिरिक्त, महाबलीपुरम में बंगाल की खाड़ी के तट पर स्थित तटीय मंदिर पल्लव वास्तुकला का बेहतरीन उदाहरण और एक विश्व धरोहर स्थल है।2
- एक पोस्ट के माध्यम से हैरानी व्यक्त करते हुए सवाल उठाया गया है कि आखिर क्यों किसी स्थिति को 'मौत का कुआं' बनाकर छोड़ दिया जाता है।1
- लातेहार के जालिम इचाक ग्राम में विवाह के मात्र एक माह के भीतर एक विवाहिता ने कथित तौर पर दहेज प्रताड़ना के कारण फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। इस घटना ने क्षेत्र में दुख और आक्रोश पैदा कर दिया है। मृतका के पिता योगेंद्र सिंह, जो पलामू जिले के लेस्लीगंज थाना अंतर्गत हरगुड़िया ग्राम के निवासी हैं, ने लातेहार थाने में अपनी बेटी को दहेज के लिए प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। उन्होंने रविवार दोपहर 3:00 बजे लातेहार थाने में एक आवेदन प्रस्तुत किया, जिसे उन्होंने अपनी पत्नी तरुणा देवी, यानी मृतका की मां के माध्यम से दिया। इस आवेदन में उन्होंने संबंधित आरोपी पक्ष पर कठोर कार्रवाई की मांग की है।1
- अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) झारखंड प्रदेश का चार दिवसीय अभ्यास वर्ग 12 से 15 जून तक कोडरमा में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस समापन सत्र के दौरान संगठन के विभिन्न दायित्वों की घोषणा की गई, जिसमें ABVP के कर्मठ कार्यकर्ता विशाल कुमार प्रजापति को चतरा जिला संयोजक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनके मनोनयन की घोषणा होते ही जिले के कार्यकर्ताओं और छात्र-छात्राओं में खुशी और उत्साह की लहर दौड़ गई। विशाल कुमार प्रजापति लंबे समय से संगठन के कार्यों, छात्रहित और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। पदाधिकारियों ने विश्वास जताया है कि उनके नेतृत्व में जिले में परिषद का और अधिक विस्तार होगा, तथा छात्र संबंधी मुद्दे प्रभावी ढंग से उठाए जाएंगे। दायित्व घोषणा के बाद, कार्यकर्ताओं ने विशाल कुमार प्रजापति को बधाई दी और उनके सफल कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं भी व्यक्त कीं।1
- झारखंड के गढ़वा जिले में मोहर्रम पर्व को लेकर एक बड़ा ऐलान किया गया है, जिसके बाद जिले भर में इसकी तैयारियाँ तेज़ हो गई हैं। इस वर्ष मोहर्रम के दौरान हजारों ताजिया और लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं व दर्शकों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। प्रशासन ने इस आयोजन के लिए सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और शांति व्यवस्था बनाए रखने हेतु विशेष इंतजाम करने की बात कही है। मोहर्रम जुलूस के निर्धारित मार्गों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी, और सभी अखाड़ा समितियों से प्रशासन ने सहयोग की अपील की है। इसके साथ ही, प्रशासन ने आम जनता से अनुरोध किया है कि वे आपसी भाईचारा और सौहार्द बनाए रखते हुए इस पर्व को मनाएँ।1