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Sindhu Devi
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More news from बिहार and nearby areas
- इंग्लिशमोड़–पुनसिया मुख्य मार्ग पर चांदन नदी का पुल अब खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है। पुल के एक्सपेंशन जॉइंट के पास करीब दो फीट गहरा गड्ढा हो गया है, जिससे नीचे बहती नदी साफ दिखाई दे रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार पुल का कंक्रीट टूट चुका है और सरिया बाहर निकल आई है, जिससे वाहन चालकों के लिए गुजरना जोखिम भरा हो गया है। रात और बारिश में हादसे की आशंका और बढ़ जाती है।1
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- Post by User7197 मेराज सिलवर1
- बिहार बांका -में “मुस्कान अभियान” के तहत पुलिस ने एक बार फिर भरोसा जीतने का काम किया है। एसपी उपेंद्रनाथ वर्मा के नेतृत्व में गठित टीम ने जिलेभर के साथ-साथ बिहार के अन्य जिलों और दूसरे राज्यों से कुल 51 खोए और चोरी हुए मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इन मोबाइल की कीमत करीब 11 लाख रुपये बताई जा रही है। मंगलवार को एसपी कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में सभी मोबाइल धारकों को बुलाकर उनके फोन वापस सौंपे गए। अपना खोया मोबाइल वापस पाकर लोगों के चेहरे पर खुशी साफ झलक उठी। सभी ने एसपी उपेंद्रनाथ वर्मा और बांका पुलिस का आभार जताते हुए इस पहल की सराहना की। इस मौके पर बौंसी के एसडीपीओ इंद्रजीत बैठा सहित कई पुलिस पदाधिकारी भी मौजूद रहे। मुस्कान अभियान के जरिए पुलिस ने न सिर्फ मोबाइल लौटाए, बल्कि लोगों का भरोसा भी और मजबूत किया है।1
- Post by N.k.choudhary1
- बिहार का गौरव कहे जाने वाले हेरिटेज स्थल 'मंदार' की पापहरनी सरोवर में सोमवार को एक बार फिर एक परिवार का चिराग बुझ गया। अमरपुर थाना क्षेत्र के सलेमपुर निवासी सुभाष मंडल का 21 वर्षीय पुत्र आशीष कुमार स्नान करने के दौरान पैर फिसलने से गहरे पानी में समा गया। लेकिन इस हादसे से भी ज्यादा दर्दनाक रहा घटनास्थल पर मौजूद प्रशासन का रवैया, जिसने यह साबित कर दिया कि आम आदमी की जान की कीमत सरकारी फाइलों और कुर्सियों के सामने कुछ भी नहीं है। घटना का विवरण और लापरवाही की पराकाष्ठा प्राप्त जानकारी के अनुसार, आशीष अपने दो दोस्तों के साथ मंदार घूमने आया था। दोपहर करीब 2:20 बजे पापहरनी सरोवर में स्नान के दौरान उसका पैर फिसल गया। बगल में ही थाना होने के बावजूद, किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने तत्परता नहीं दिखाई। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि जब लोग मदद के लिए गुहार लगा रहे थे, तब प्रशासन 'गोताखोर आने' का बहाना बनाकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ता रहा। बदहाल सिस्टम: जब रक्षक ही बन जाएं मूकदर्शक हैरानी की बात यह है कि घटनास्थल के बिल्कुल समीप थाना होने के बावजूद कोई आला अधिकारी समय पर नहीं पहुंचा। हद तो तब हो गई जब स्थानीय लोगों ने खुद जाकर अधिकारियों को सूचना दी, फिर भी टालमटोल का सिलसिला जारी रहा। * थाना प्रभारी, BDO और CO की अनुपस्थिति: घटना के घंटों बाद तक न तो प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO), न ही अंचलाधिकारी (CO) और न ही थाना प्रभारी ने मौके पर पहुंचकर पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया। * SDRF का गायब होना: बिहार सरकार बड़े-बड़े दावे करती है कि आपदा प्रबंधन के लिए SDRF की टीमें मुस्तैद हैं, लेकिन मंदार जैसे महत्वपूर्ण पर्यटक स्थल पर रेस्क्यू के नाम पर शून्य व्यवस्था दिखी। "बिना पैसे के नहीं हिलता सिस्टम" – पीड़ितों का आरोप मृतक के परिजनों और ग्रामीणों ने व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि "सिस्टम पूरी तरह से करप्ट हो चुका है, जब तक जेब गरम न की जाए, प्रशासन के कान पर जूं तक नहीं रेंगती।" आशीष, जो तीन भाइयों और दो बहनों में सबसे बड़ा था, उस घर की उम्मीद था। आज उस उम्मीद को प्रशासन की सुस्ती और संवेदनहीनता ने गहरे पानी में दफन कर दिया। स्थानीय गोताखोर बने सहारा, प्रशासन रहा नाकाम जिस शव को निकालने के लिए प्रशासन SDRF और सरकारी अमले का इंतजार कर रहा था, उसे अंततः क्षेत्रीय और स्थानीय गोताखोरों ने अपनी जान जोखिम में डालकर बाहर निकाला। यह जिला प्रशासन और बांसी अंचल के अधिकारियों के मुंह पर करारा तमाचा है कि जिस काम के लिए उन्हें वेतन मिलता है, उसे आम जनता को खुद के संसाधनों से करना पड़ा। मंदार 24 न्यूज़ के तीखे सवाल: * बांका जिला प्रशासन और बिहार सरकार से सवाल है कि क्या मंदार जैसे पवित्र और भीड़भाड़ वाले स्थल पर परमानेंट गोताखोरों या रेस्क्यू टीम की व्यवस्था क्यों नहीं है? * BDO और CO की जिम्मेदारी क्या केवल कागजों तक सीमित है? क्या किसी की जान जाने पर घटनास्थल पर पहुंचना उनकी प्राथमिकता में नहीं आता? * क्या प्रशासन केवल वीआईपी दौरों के लिए सुरक्षित रहता है? आम जनता की पुकार पर "गोताखोर आएगा तब निकालेंगे" जैसे गैर-जिम्मेदाराना जवाब देने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी? निष्कर्ष: अब जागने का वक्त है यह घटना महज एक हादसा नहीं, बल्कि 'प्रशासनिक हत्या' है। अगर समय रहते स्थानीय पुलिस और प्रशासन सक्रिय होता, तो शायद आशीष की जान बचाई जा सकती थी। मंदार 24 न्यूज़ मांग करता है कि इस घोर लापरवाही के लिए जिम्मेदार थाना प्रभारी, BDO और CO पर तत्काल उच्चस्तरीय जांच बैठाई जाए और उन्हें निलंबित किया जाए। यदि आज कार्रवाई नहीं हुई, तो कल फिर कोई मां अपना बेटा खोएगी और प्रशासन फिर से 'गोताखोर' का इंतजार करेगा। माननीय मुख्यमंत्री और जिला पदाधिकारी महोदय, क्या आप इस सोए हुए तंत्र को जगाएंगे? रिपोर्ट: मंदार 24 न्यूज़ टीम1
- तारापुर थाना क्षेत्र में पुलिस और खनन विभाग ने संयुक्त रूप से अवैध गिट्टी परिवहन के खिलाफ कार्रवाई करते हुए एक हाइवा ट्रक जब्त किया। यह कार्रवाई तारापुर बाजार के समीप की गई, जहां 14 चक्का वाहन में गिट्टी लदा पाया गया। 6 अप्रैल 2026 को अवर निरीक्षक संदीप कुमार झा के नेतृत्व में जांच के दौरान चालक से वैध चालान मांगा गया, लेकिन वह कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके बाद वाहन को जब्त कर थाना परिसर में रखा गया। मामले में बांका निवासी चालक हीरा कुमार यादव और उपचालक राकेश सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। खनन विभाग ने 9 लाख 9 हजार 163 रुपये का जुर्माना लगाया है। अपर पुलिस अधीक्षक संकेत कुमार ने बताया कि अवैध खनन और परिवहन के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। खान निरीक्षक अभिमन्यु कुमार के आवेदन पर प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।1
- मंदार में दर्दनाक हादसा: पापहरनी पोखर में डूबा युवक, 21 वर्षीय आशीष की मौत से पसरा मातम 🔴 घूमने गया था, मौत ने घेर लिया बांका जिले के अमरपुर थाना क्षेत्र के सलेमपुर गांव निवासी 21 वर्षीय आशीष कुमार राय की रविवार को दर्दनाक मौत हो गई। आशीष मंदार घूमने गया था, जहां पापहरनी पोखर में स्नान के दौरान वह गहरे पानी में चला गया और डूबने से उसकी जान चली गई। 😢 परिवार का सहारा था आशीष मृतक आशीष कुमार राय, सुवास राय का बड़ा बेटा था। वह कश्मीर में चाट बेचकर अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। करीब एक महीने पहले ही वह घर लौटा था। उसकी असमय मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। 👨👩👧👦 बहन-जीजा के साथ गया था घूमने रविवार को आशीष अपनी छोटी बहन मुस्कान कुमारी के घर धोरैया थाना क्षेत्र के धोबिया गांव गया था। सुबह वह अपने जीजा जयंत कुमार और चचेरे भाई दिलखुश कुमार के साथ मंदार घूमने निकला था। घूमने के दौरान सभी लोग पापहरनी पोखर में स्नान कर रहे थे, तभी यह हादसा हो गया। ⚠️ गहराई बनी जानलेवा बताया जा रहा है कि स्नान के दौरान आशीष अचानक गहरे पानी में चला गया और डूबने लगा। आसपास मौजूद लोगों ने उसे बाहर निकाला, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। 💔 घर में मचा कोहराम आशीष अपने परिवार का सबसे बड़ा बेटा था। परिवार में दो बहनें—मुस्कान (18) और जुली कुमारी (17) तथा दो छोटे भाई—प्रिंस (14) और आसुतोष उर्फ गोलू (13) हैं। पिता फिलहाल कश्मीर में हैं। घटना के बाद मां सुधा देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है और हर कोई इस दुखद घटना से स्तब्ध है। 🚨 पुलिस कार्रवाई और अंतिम विदाई हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए बांका सदर अस्पताल भेज दिया। पोस्टमार्टम के बाद जैसे ही आशीष का शव सलेमपुर गांव पहुंचा, गांव में मातमी भीड़ उमड़ पड़ी और माहौल गमगीन हो गया। ⚡ बड़ी खबर: इस हादसे ने एक बार फिर मंदार के पापहरनी पोखर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।1