बीना रिपोर्टर राजेश बबेले वृंदावन की तर्ज पर पहनाई पाजेब; संकीर्तन के साथ मंदिर पहुंचे श्रद्धालु लोकेशन बीना रिपोर्टर राजेश अक्षय तृतीया पर ठाकुर जी के हुए चरण दर्शनः वृंदावन की तर्ज पर पहनाई पाजेब; संकीर्तन के साथ मंदिर पहुंचे श्रद्धालु बीना।अक्षय तृतीया पर ठाकुर जी के हुए चरण दर्शनः वृंदावन की तर्ज पर पहनाई पाजेब; संकीर्तन के साथ मंदिर पहुंचे श्रद्धालु। उल्लेखनीय है कि इटावा बाजार स्थित देव श्री बड़केश्वर बिहारी मंदिर में अक्षय तृतीया पर विशेष आयोजन किया गया। इस अवसर पर वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर की परंपरा का पालन करते हुए ठाकुर जी के चरण दर्शन कराए गए। साल में केवल एक बार होने वाले इस दुर्लभ दर्शन के लिए सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। *पाजेब की पूजा के बाद शुरू हुआ संकीर्तन* उत्सव की शुरुआत मां जागेश्वरी धाम से हुई, जहां ठाकुर जी के लिए लाई गई पाजेब (पायल) की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद 'राधे-राधे प्रभात फेरी मंडल' के सदस्य थाल में पाजेब सजाकर और 'राधे कृष्णा' के भजन गाते हुए संकीर्तन करते हुए बड़केश्वर मंदिर पहुंचे।मंदिर प्रांगण में डॉ. रूपनारायण और रमन दीक्षित द्वारा प्रस्तुत भजनों पर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर झूम उठे। *वृंदावन जैसी परंपरा का निर्वहन* उल्लेखनीय है कि वृंदावन के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में अक्षय तृतीया पर साल में एक बार चरण दर्शन कराने की प्राचीन परंपरा है। इसी तर्ज पर बीना के बड़केश्वर मंदिर में भी यह व्यवस्था की गई है। भक्तों की मान्यता है कि इस दिन ठाकुर जी के चरणों के दर्शन करना अत्यंत शुभ और सुख-समृद्धि प्रदायक होता है। *बरगद के नीचे स्थापना से भव्य मंदिर तक का सफर* भक्त रमन दीक्षित ने बताया कि मंदिर का इतिहास जनसहयोग से जुड़ा है। कुछ वर्ष पूर्व वार्ड वासियों ने एक विशाल बरगद के पेड़ के नीचे बड़केश्वर शिवलिंग की स्थापना की थी। इसके बाद समिति के सदस्यों ने विधि-विधान से बड़केश्वर बांके बिहारी जी की प्राण प्रतिष्ठा करवाई। समय के साथ यह स्थान एक भव्य मंदिर के रूप में विकसित हो गया, जहां अब शिव परिवार और बांके बिहारी जी विराजमान हैं।
बीना रिपोर्टर राजेश बबेले वृंदावन की तर्ज पर पहनाई पाजेब; संकीर्तन के साथ मंदिर पहुंचे श्रद्धालु लोकेशन बीना रिपोर्टर राजेश अक्षय तृतीया पर ठाकुर जी के हुए चरण दर्शनः वृंदावन की तर्ज पर पहनाई पाजेब; संकीर्तन के साथ मंदिर पहुंचे श्रद्धालु बीना।अक्षय तृतीया पर ठाकुर जी के हुए चरण दर्शनः वृंदावन की तर्ज पर पहनाई पाजेब; संकीर्तन के साथ मंदिर पहुंचे श्रद्धालु। उल्लेखनीय है कि इटावा बाजार स्थित देव श्री बड़केश्वर बिहारी मंदिर में अक्षय तृतीया पर विशेष आयोजन किया गया। इस अवसर पर वृंदावन के
बांके बिहारी मंदिर की परंपरा का पालन करते हुए ठाकुर जी के चरण दर्शन कराए गए। साल में केवल एक बार होने वाले इस दुर्लभ दर्शन के लिए सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। *पाजेब की पूजा के बाद शुरू हुआ संकीर्तन* उत्सव की शुरुआत मां जागेश्वरी धाम से हुई, जहां ठाकुर जी के लिए लाई गई पाजेब (पायल) की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद 'राधे-राधे प्रभात फेरी मंडल' के सदस्य थाल में पाजेब सजाकर और 'राधे कृष्णा' के
भजन गाते हुए संकीर्तन करते हुए बड़केश्वर मंदिर पहुंचे।मंदिर प्रांगण में डॉ. रूपनारायण और रमन दीक्षित द्वारा प्रस्तुत भजनों पर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर झूम उठे। *वृंदावन जैसी परंपरा का निर्वहन* उल्लेखनीय है कि वृंदावन के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में अक्षय तृतीया पर साल में एक बार चरण दर्शन कराने की प्राचीन परंपरा है। इसी तर्ज पर बीना के बड़केश्वर मंदिर में भी यह व्यवस्था की गई है। भक्तों की मान्यता है कि इस दिन ठाकुर जी के चरणों के दर्शन करना अत्यंत शुभ और
सुख-समृद्धि प्रदायक होता है। *बरगद के नीचे स्थापना से भव्य मंदिर तक का सफर* भक्त रमन दीक्षित ने बताया कि मंदिर का इतिहास जनसहयोग से जुड़ा है। कुछ वर्ष पूर्व वार्ड वासियों ने एक विशाल बरगद के पेड़ के नीचे बड़केश्वर शिवलिंग की स्थापना की थी। इसके बाद समिति के सदस्यों ने विधि-विधान से बड़केश्वर बांके बिहारी जी की प्राण प्रतिष्ठा करवाई। समय के साथ यह स्थान एक भव्य मंदिर के रूप में विकसित हो गया, जहां अब शिव परिवार और बांके बिहारी जी विराजमान हैं।
- लोकेशन बीना रिपोर्टर राजेश अक्षय तृतीया पर ठाकुर जी के हुए चरण दर्शनः वृंदावन की तर्ज पर पहनाई पाजेब; संकीर्तन के साथ मंदिर पहुंचे श्रद्धालु बीना।अक्षय तृतीया पर ठाकुर जी के हुए चरण दर्शनः वृंदावन की तर्ज पर पहनाई पाजेब; संकीर्तन के साथ मंदिर पहुंचे श्रद्धालु। उल्लेखनीय है कि इटावा बाजार स्थित देव श्री बड़केश्वर बिहारी मंदिर में अक्षय तृतीया पर विशेष आयोजन किया गया। इस अवसर पर वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर की परंपरा का पालन करते हुए ठाकुर जी के चरण दर्शन कराए गए। साल में केवल एक बार होने वाले इस दुर्लभ दर्शन के लिए सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। *पाजेब की पूजा के बाद शुरू हुआ संकीर्तन* उत्सव की शुरुआत मां जागेश्वरी धाम से हुई, जहां ठाकुर जी के लिए लाई गई पाजेब (पायल) की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद 'राधे-राधे प्रभात फेरी मंडल' के सदस्य थाल में पाजेब सजाकर और 'राधे कृष्णा' के भजन गाते हुए संकीर्तन करते हुए बड़केश्वर मंदिर पहुंचे।मंदिर प्रांगण में डॉ. रूपनारायण और रमन दीक्षित द्वारा प्रस्तुत भजनों पर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर झूम उठे। *वृंदावन जैसी परंपरा का निर्वहन* उल्लेखनीय है कि वृंदावन के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में अक्षय तृतीया पर साल में एक बार चरण दर्शन कराने की प्राचीन परंपरा है। इसी तर्ज पर बीना के बड़केश्वर मंदिर में भी यह व्यवस्था की गई है। भक्तों की मान्यता है कि इस दिन ठाकुर जी के चरणों के दर्शन करना अत्यंत शुभ और सुख-समृद्धि प्रदायक होता है। *बरगद के नीचे स्थापना से भव्य मंदिर तक का सफर* भक्त रमन दीक्षित ने बताया कि मंदिर का इतिहास जनसहयोग से जुड़ा है। कुछ वर्ष पूर्व वार्ड वासियों ने एक विशाल बरगद के पेड़ के नीचे बड़केश्वर शिवलिंग की स्थापना की थी। इसके बाद समिति के सदस्यों ने विधि-विधान से बड़केश्वर बांके बिहारी जी की प्राण प्रतिष्ठा करवाई। समय के साथ यह स्थान एक भव्य मंदिर के रूप में विकसित हो गया, जहां अब शिव परिवार और बांके बिहारी जी विराजमान हैं।4
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- लोकेशन बीना रिपोर्टर राजेश भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए सभी सनातनियों को एक सूत्र में पिरोना होगा धर्माधिकारी दशरथ लाल पुरोहित अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर भगवान परशुराम जी का प्राकट्योत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाया गया बीना में निकाली ब्राह्मण समाज ने विशाल शोभायात्रा जगह-जगह हुआ शोभायात्रा का स्वागत बीना। सोमवार को भगवान परशुराम जयंती पर सर्व ब्राह्मण समाज ने धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान विशाल शोभायात्रा निकाली गईं, जिससे बीना नगर भगवान परशुराम के जयकारों से गूंज उठा। *वैदिक मंत्रोच्चार के साथ रुद्राभिषेक किया* सुबह से ही नरसिंह मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ रुद्राभिषेक किया गया। इसमें भगवान शिव और भगवान परशुराम की पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की गई। रुद्राभिषेक के बाद परशुराम चालीसा का सामूहिक पाठ हुआ, जिसके उपरांत भजन-कीर्तन और हवन-पूजन का आयोजन किया गया। मंदिर परिसर भक्ति गीतों और वैदिक मंत्रों से गूंज उठा। इसके बाद भगवान परशुराम की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। यह शोभायात्रा नरसिंह मंदिर से शुरू होकर थाने के पीछे, सर्वोदय चौराहा, कॉलेज तिराहा, गांधी चौराहा, महावीर चौक, मां जागेश्वरी मार्ग से होते हुए वापस नरसिंह मंदिर प्रांगण में संपन्न हुई। *हर वर्ष ब्राह्मण समाज द्वारा भगवान परशुराम का प्राकट्योत्सव धूमधाम से मनाया जाता है* गौरतलब है कि अक्षय तृतीया के पावना अवसर पर ब्राह्मण समाज द्वारा भगवान परशुराम का प्राकट्योत्सव हर वर्ष बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। इसी के तहत मुख्य कार्यक्रम नरसिंह मंदिर में संपन्न हुआ, जहां शहर के विद्वान ब्राह्मणों ने वैदिक मंत्रोच्चार और स्वस्तिवाचन के साथ पूजन संपन्न कराया। इसके बाद श्रद्धालुओं ने हनुमान एवं परशुराम चालीसा का सामूहिक पाठ कर भगवान परशुराम की 501 दीपों से महाआरती की, 'जिसमें बड़ी संख्या में विप्र शामिल हुए। आरती के पश्चात सुबह 9 बजे नरसिंह मंदिर से भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में भगवान परशुराम के साथ-साथ महारानी लक्ष्मीबाई, चंद्रशेखर आजाद और मंगल पांडेय की जीवंत झांकियां सजाई गई। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने जगह-जगह स्वागत कर भगवान की आरती उतारी। इसके अलावा झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। यात्रा नरसिंह मंदिर से प्रारंभ होकर पुलिस थाने के पीछे, सर्वोदय चौराहा, स्टेशन रोड, गांधी चौराहा, महावीर चौराहा होते हुए कच्चा रोड मार्ग से पुनः मंदिर पर संपन्न हुई। *भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए सभी सनातनियों को एक सूत्र में पिरोना होगा धर्माधिकारी दशरथ लाल पुरोहित* इस दौरान धर्माधिकारी दशरथ लाल पुरोहित ने कहा कि वर्तमान समय में सनातन समाज विभिन्न जातियों में बंटता जा रहा है, जिन्हें एकजुट - करना समय की आवश्यकता है। - उन्होंने कहा कि सनातन धर्म को - मजबूत बनाने और भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए सभी सनातनियों को एक सूत्र में पिरोना होगा। वहीं ब्राह्मण समाज अध्यक्ष सुनील सारोठिया ने कहा कि ब्राह्मण समाज सदियों से सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार में अग्रणी रहा है और आगे भी सभी वर्गों को साथ लेकर धर्म सनातन को मजबूत करना भी हमारा लक्ष्य होना चाहिए। *इन्होंने सम्पन्न कराया पूजन* नरसिंह मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में विद्वान पंडित दशरथ पुरोहिता, पंडित बृजमोहन शास्त्री, पंडित दशरथ बबेले और पंडित देवशंकर दुबे ने मंत्रोच्चारण के साथ पूजन संपन्न कराया। इसके साथ ही भगवान को भोग लगाया। कार्यक्रम में पंडित' अशोक दुबे, एचडी - गोस्वामी, रामसहाय दुबे, डॉ. रामबाबू तिवारी, पप्पू पराशर, पीपी नायक, कांतिकुमार बिलगैया, सीपी तिवारी, जगदीश पराशर, विनय चतुर्वेदी,शिवेंद्र मिश्रा, राजीव रिछारिया, रामकुमार पुरोहित, जगदीश तिवारी, गोकुल तिवारी, कैलाश मिश्रा, पूनम तिवारी,अंजू सिरोठिया, रेखा स्वाति सहित बड़ी संख्या में विप्रजन शामिल था।4