*बाबा कोड़ी नाथ धाम: अपार आस्था के बीच बदहाल रास्ता और अधूरा निर्माण* महुआडांड़ (लातेहार): प्रखंड अंतर्गत परहाटोली पंचायत के ग्राम बैलटोली स्थित बाबा कोड़ी नाथ धाम क्षेत्र के हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है।घने प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित यह प्राचीन शिवधाम अपने भीतर कई ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व समेटे हुए है। यहां स्थापित प्राचीन शिवलिंग वर्षों से श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।स्थानीय लोगों के अनुसार, इस धाम का इतिहास काफी पुराना है और यहां पूजा-अर्चना की परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। प्रत्येक वर्ष नए साल की शुरुआत और विशेष रूप से महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां हजारों की संख्या में भक्तजन पहुंचते हैं। इस दौरान पूजा-अर्चना के साथ सामूहिक विवाह जैसे सामाजिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जा चुका है, जो इस स्थल की सामाजिक महत्ता को भी दर्शाता है।हालांकि, इतनी ख्याति के बावजूद यहां तक पहुंचने के लिए सड़क की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। श्रद्धालुओं को करीब 2 किलोमीटर पहले ही अपने वाहन छोड़ने पड़ते हैं और उसके बाद पैदल चलते हुए नदी पार कर मंदिर तक पहुंचना पड़ता है। बरसात के मौसम में यह मार्ग और भी कठिन व जोखिम भरा हो जाता है। इतना ही नहीं, मंदिर के विस्तार और सुंदरीकरण के लिए निर्माण कार्य भी शुरू किया गया था, लेकिन धन की कमी के कारण यह कार्य अधूरा ही पड़ा हुआ है। अधूरे निर्माण के चलते न तो मंदिर का समुचित विकास हो पा रहा है और न ही श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल पा रही हैं।स्थानीय ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने प्रशासन से सड़क निर्माण, पुल निर्माण तथा मंदिर के अधूरे कार्य को पूरा कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि इन मूलभूत सुविधाओं का विकास किया जाए, तो बाबा कोड़ी नाथ धाम धार्मिक पर्यटन के रूप में भी उभर सकता है।कठिनाइयों के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था इस धाम से जुड़ी हुई है, जो हर साल यहां उमड़ने वाली भीड़ में साफ दिखाई देती है।
*बाबा कोड़ी नाथ धाम: अपार आस्था के बीच बदहाल रास्ता और अधूरा निर्माण* महुआडांड़ (लातेहार): प्रखंड अंतर्गत परहाटोली पंचायत के ग्राम बैलटोली स्थित बाबा कोड़ी नाथ धाम क्षेत्र के हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है।घने प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित यह प्राचीन शिवधाम अपने भीतर कई ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व समेटे हुए है। यहां स्थापित प्राचीन शिवलिंग वर्षों से श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।स्थानीय लोगों के अनुसार, इस धाम का इतिहास काफी पुराना है और यहां पूजा-अर्चना की परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। प्रत्येक वर्ष नए साल की शुरुआत और विशेष रूप से महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां हजारों की संख्या में भक्तजन पहुंचते हैं। इस दौरान पूजा-अर्चना के साथ सामूहिक विवाह जैसे सामाजिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जा चुका है, जो इस स्थल की सामाजिक महत्ता को भी दर्शाता है।हालांकि, इतनी ख्याति के बावजूद यहां तक पहुंचने के लिए सड़क की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। श्रद्धालुओं को करीब 2 किलोमीटर पहले ही अपने वाहन छोड़ने पड़ते हैं और उसके बाद पैदल चलते हुए नदी पार कर मंदिर तक पहुंचना पड़ता है। बरसात के मौसम में यह मार्ग और भी कठिन व जोखिम भरा हो जाता है। इतना ही नहीं, मंदिर के विस्तार और सुंदरीकरण के लिए निर्माण कार्य भी शुरू किया गया था, लेकिन धन की कमी के कारण यह कार्य अधूरा ही पड़ा हुआ है। अधूरे निर्माण के चलते न तो मंदिर का समुचित विकास हो पा रहा है और न ही श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल पा रही हैं।स्थानीय ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने प्रशासन से सड़क निर्माण, पुल निर्माण तथा मंदिर के अधूरे कार्य को पूरा कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि इन मूलभूत सुविधाओं का विकास किया जाए, तो बाबा कोड़ी नाथ धाम धार्मिक पर्यटन के रूप में भी उभर सकता है।कठिनाइयों के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था इस धाम से जुड़ी हुई है, जो हर साल यहां उमड़ने वाली भीड़ में साफ दिखाई देती है।
- चंदवा में झारखंड दैनिक मजदूर यूनियन के द्वारा आयोजित मजदूर सम्मान रैली का एक झलक1
- तेज आंधी से तुरी टोला में भारी तबाही, पेड़ गिरने से खपरैल मकान ध्वस्त, बेटी की शादी से पहले टूटा आशियाना, पीड़ित परिवार ने प्रशासन से लगाई मदद की गुहार लातेहार: सदर प्रखंड के सांसग पंचायत के समीप तुरी टोला ग्राम में अचानक आए तेज आंधी-तूफान ने भारी तबाही मचाई है। तेज हवा और मूसलधार बारिश के कारण एक विशाल सखुआ का पेड़ संजय तुरी के खपरैल मकान पर गिर पड़ा, जिससे उनका घर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। इस घटना से पीड़ित परिवार के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है।घटना के संबंध में भुक्तभोगी संजय तुरी ने बताया कि अचानक मौसम ने करवट ली और तेज आंधी के साथ बारिश शुरू हो गई। देखते ही देखते बगल में खड़ा सखुआ का बड़ा पेड़ उनके घर पर गिर पड़ा, जिससे छत सहित पूरा खपरैल मकान बर्बाद हो गया। घर में रखे खाने-पीने के सामान सहित दैनिक उपयोग की वस्तुएं भी नष्ट हो गईं।संजय तुरी ने बताया कि वे एक गरीब परिवार से हैं और मजदूरी कर किसी तरह अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। उन्होंने बताया कि इसी वर्ष उनकी बेटी की शादी तय हुई है और अब शादी में मात्र 12 दिन ही शेष हैं। ऐसे में यह घटना उनके लिए किसी बड़ी विपत्ति से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि अब उनके सामने यह संकट खड़ा हो गया है कि वे बेटी की शादी की तैयारी करें या फिर अपने उजड़े हुए घर की मरम्मत। पीड़ित परिवार ने इस घटना में लगभग 2 लाख रुपये के नुकसान की आशंका जताई है। उन्होंने जिला प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए उचित मुआवजा प्रदान करने की मांग की है, ताकि वे इस कठिन परिस्थिति से उबर सकें। इस संबंध में जब अंचलाधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फोन उठाना उचित नहीं समझा। वहीं प्रखंड विकास पदाधिकारी ने पीड़ित परिवार को आश्वासन दिया है कि आपदा प्रबंधन के तहत उन्हें मुआवजा राशि प्रदान की जाएगी।ग्रामीणों ने भी प्रशासन से जल्द सर्वे कराकर पीड़ित परिवार को सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।ताकि प्रभावित परिवार को राहत मिल सके और वे सामान्य जीवन की ओर लौट सकें। *क्या कहते हैं मुखिया पति मंगलदेव उरांव* इस संबंध में मुखिया पति मंगलदेव उरांव ने कहा कि यह जानकारी मुझे मिली है पंचायत स्तर से पीड़ित परिवार के लिए जो भी हमसे बन पाएगा हम उनके लिए करेंगे अंचल अधिकारी और प्रखंड विकास पदाधिकारी से बात कर उनको मुआवजा दिलाने का काम भी हम करेंगे1
- लातेहार में राहुल गांधी का पुतला फूका गया4
- Post by Shamsher Alam1
- अब किराना, कॉस्मेटिक, जनरल आइटम सहित सभी घरेलू सामान मिलेगा सस्ते दरों पर। 🎉 शुरुआती ऑफर के साथ ग्राहकों को मिल रही विशेष छूट। ग्राहकों ने भी सामान के रेट और सुविधा पर जताई संतुष्टि।1
- लोहरदगा उपायुक्त1
- बचाव: रेस्क्यू टीम ने बचाई पानी वाले सांप की जान, समय रहते किया गया सुरक्षित Near Madarsa check, 01/05/26 स्थानीय रेस्क्यू टीम की मुस्तैदी और समय पर की गई कार्रवाई से आज एक 'चेकर्ड कीलबैक' (Checkered Keelback), जिसे आम भाषा में पानी वाला सांप कहा जाता है, को मरने से बचा लिया गया। कैसे हुआ रेस्क्यू? यह घटना उस समय हुई जब स्थानीय निवासियों ने एक सांप को जाल में बुरी तरह फँसा हुआ देखा। गर्मी और धूप के कारण सांप काफी सुस्त पड़ चुका था और खुद को आजाद करने की कोशिश में वह और ज्यादा जख्मी हो रहा था। ग्रामीणों ने तुरंत इसकी सूचना वन्यजीव विशेषज्ञों को दी। विशेषज्ञों की राय रेस्क्यू टीम के सदस्यों ने बताया कि सांप एक मछली पकड़ने वाले जाल के टुकड़े में उलझा हुआ था। "अगर हमें सूचना मिलने में थोड़ी और देरी होती, तो सांप दम तोड़ देता। वह काफी घबराया हुआ था और डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) का शिकार हो रहा था।"1
- गारू प्रखंड में शुक्रवार दिन में लगभग चार बजे आए तेज आंधी-तूफान ने मायापुर पंचायत के मायापुर छोटी, मायापुर बड़ी तथा बारेसाढ़ पंचायत के परेवाटांड टोला में भारी तबाही मचा दी। तीन अलग-अलग स्थानों पर हुई क्षति ने ग्रामीणों को हिलाकर रख दिया है। कहीं मकान की छत उड़ गई, कहीं जल जीवन मिशन की पेयजल व्यवस्था प्रभावित हुई, तो कहीं परिवार खुले आसमान तले आ गया। *मायापुर छोटी में रामराज सिंह के घर की छत उड़ी* मायापुर पंचायत अंतर्गत मायापुर छोटी गांव निवासी रामराज सिंह, पिता बिशेसर सिंह के मकान पर आंधी ने सीधा वार किया। तेज हवा के झोंकों से घर पर लगा अलबेस्टर उड़ गया तथा छप्पर को थामे रखने वाली कंडी बिखर गई। देखते ही देखते मकान की छत खुल गई और घर के भीतर रखा सामान अस्त-व्यस्त हो गया। अचानक आई इस आफत से परिवार के सदस्य दहशत में बाहर निकल आए। *मायापुर बड़ी में जलमीनार का पाइप फटा, सोलर सिस्टम क्षतिग्रस्त* मायापुर पंचायत के ही मायापुर बड़ी गांव में ज्योति टोप्पो के घर के पास जल जीवन मिशन के तहत लगाया गया जलमीनार भी तूफान की चपेट में आ गया। तेज हवा और झटके से जलमीनार का पाइप फट गया, जबकि उससे जुड़ा सोलर सिस्टम क्षतिग्रस्त हो गया। इससे गांव की पेयजल आपूर्ति पर संकट मंडराने लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि भीषण गर्मी के बीच जलमीनार खराब होने से पानी की समस्या गंभीर हो सकती है। *परेवाटांड में आकाश सिंह के मकान को भारी नुकसान* बारेसाढ़ पंचायत अंतर्गत परेवाटांड टोला में आकाश सिंह के मकान पर लगा अलबेस्टर टूटकर उड़ गया तथा छप्पर की कंडी भी बिखर गई। तेज हवा के कारण मकान को भारी क्षति पहुंची। घटना के वक्त परिवार के सदस्य किसी तरह सुरक्षित बाहर निकले। अचानक आई इस प्राकृतिक मार से आसपास के ग्रामीण भी सहम गए और देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।ग्रामीणों ने मांगी राहत व मुआवजा एक ही दिन में तीन अलग-अलग स्थानों पर हुए इस नुकसान ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि तूफान इतनी तेजी से आया कि किसी को संभलने का मौका नहीं मिला। घरों के साथ सरकारी पेयजल व्यवस्था को भी नुकसान पहुंचने से लोगों की चिंता बढ़ गई है। प्रभावित परिवारों एवं ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल क्षति का सर्वे कर मुआवजा, राहत सामग्री तथा जलमीनार की शीघ्र मरम्मत कराने की मांग की है।1