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ग्वालियर स्थित आदित्य रेजिडेंसी में चल रहे एक विवाद के परिणामस्वरूप पुलिस ने एक बड़ा एक्शन लिया है।
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ग्वालियर स्थित आदित्य रेजिडेंसी में चल रहे एक विवाद के परिणामस्वरूप पुलिस ने एक बड़ा एक्शन लिया है।
More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
- ग्वालियर में बूथ क्रमांक 136 पर भाजपा मंडल मंत्री राजीव श्रीवास्तव के निवास स्थान पर 'मन की बात' कार्यक्रम को सुना गया।1
- करैरा पुलिस ने एक व्यक्ति के बारे में तत्काल सूचना देने की अपील की है, जिसने एक बुजुर्ग महिला को बहला-फुसलाकर अपनी स्कूटी पर बैठाया और फिर उनके सोने के कान लेकर फरार हो गया। पुलिस ने जनता से आग्रह किया है कि यदि यह व्यक्ति कहीं भी दिखाई दे तो तुरंत करैरा पुलिस या हेल्पलाइन नंबर 112 पर इसकी जानकारी दें। आरोपी को जल्द पकड़ने में मदद करने के लिए इस पोस्ट को अधिक से अधिक शेयर करने का अनुरोध भी किया गया है।1
- ग्वालियर की एक महिला ने ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान से अपनी गुहार लगाई है।1
- स्नाना पूर्णिमा के शुभ अवसर पर भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा जी और बलदाऊ जी अपने गर्भग्रह से बाहर आकर स्नान करेंगे। यह स्नान विशेष रूप से स्वर्ण कुएँ के जल से, 108 स्वर्ण कलशों द्वारा, पूरे विधि-विधान के साथ संपन्न किया जाएगा।1
- मध्य प्रदेश के डबरा स्थित ग्राम लोहागढ़ में प्रसव पीड़ा से जूझ रही एक महिला को समय पर 108 एंबुलेंस की सेवा नहीं मिल पाई। ऐसे गंभीर हालात में डायल 112 की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए महज 10 मिनट के भीतर महिला को अस्पताल पहुंचाया। समय पर इलाज मिलने के कारण जच्चा और बच्चा दोनों सुरक्षित हैं। हालांकि, इस घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि अस्पताल परिसर में ही एक 108 एंबुलेंस खड़ी पाई गई और उसके चालक पर सोने का आरोप लगाया गया है।1
- मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले के डबरा में सिटी थाना पुलिस ने कई आपराधिक मामलों में लंबे समय से फरार चल रहे ₹2000 के इनामी बदमाश बुद्धा उर्फ सुमंत गोस्वामी को गिरफ्तार किया है। यह आरोपी लंबे समय से हत्या के प्रयास और गोलीबारी सहित विभिन्न वारदातों में वांछित था। उटिला निवासी बुद्धा उर्फ सुमंत गोस्वामी पर ग्वालियर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह के आदेश पर ₹2000 का इनाम घोषित था। पुलिस को सूचना मिली थी कि फरार आरोपी डबरा सिटी थाना क्षेत्र में घूम रहा है, जिसके बाद कड़ी मशक्कत कर पुलिस ने उसे धर दबोचा। यह आरोपी आदतन अपराधी बताया गया है। गिरफ्तारी के बाद उसे आगामी कानूनी कार्रवाई के लिए कोर्ट में पेश किया गया है।3
- भितरवार से लापता हुई दोनों नाबालिग बालिकाएं आखिरकार सकुशल मिल गई हैं, जिससे नगरवासियों ने राहत की सांस ली है। सोशल मीडिया पर चलाए गए अभियान और लोगों की सतर्कता ने इन बच्चियों का जल्द पता लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे यह मुहिम सफल रही। दोनों बालिकाएं ग्राम कोसा में मिली हैं, जहां ग्राम कोसा निवासी ध्यानेंद्र रावत ने उन्हें पहचान लिया। ध्यानेंद्र रावत ने सराहनीय भूमिका निभाते हुए बच्चियों को सुरक्षित अपने पास रखा, उन्हें भोजन कराया और संबंधित लोगों को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस और बच्चियों के परिजन मौके पर पहुँचे और उन्हें सकुशल अपने साथ ले गए। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, एक महिला इन बच्चियों को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गई थी। सूत्रों के मुताबिक, ज्योति रजक नामक महिला ही दोनों नाबालिग बालिकाओं को अपने साथ ले गई थी। पुलिस इस पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही है।1
- मध्य प्रदेश के डबरा (ग्वालियर) में एक प्रसूता को प्रसव पीड़ा होने पर 108 एंबुलेंस की कथित लापरवाही सामने आई, जिसके बाद डायल 112 उसके लिए देवदूत बनकर पहुंची और समय पर अस्पताल पहुंचाया। यह घटना डबरा के जेल रोड अमरपुरा निवासी सतीश जाटव की पत्नी रेखा जाटव से संबंधित है, जिन्हें रात 3 बजे अचानक प्रसव पीड़ा हुई। परिजनों ने तुरंत 108 एंबुलेंस पर कॉल किया, लेकिन कर्मचारियों ने यह कहते हुए आने से इनकार कर दिया कि वे 'दूसरे इवेंट' पर हैं। घर पर महिला को अस्पताल ले जाने के लिए कोई व्यवस्था न होने के कारण, परिजनों ने मजबूरन डायल 112 को फोन किया। डायल 112 की टीम ने बिना कोई समय गंवाए, महज 5 मिनट के भीतर प्रसूता के घर पहुंचकर उसे सिविल अस्पताल डबरा पहुंचाया, जहां अब महिला की हालत ठीक है। परिजनों ने आरोप लगाया है कि जब वे सिविल अस्पताल डबरा पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि 108 की दोनों एंबुलेंस अस्पताल परिसर में खड़ी थीं और उनके चालक एसी चलाकर सो रहे थे। इस घटना के बाद, परिजनों ने डायल 112 पर तैनात चालक और पुलिसकर्मी का तहे दिल से धन्यवाद किया, जिनकी त्वरित मदद से महिला समय पर अस्पताल पहुंच सकी। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर डायल 112 समय पर नहीं पहुंचती और महिला को कुछ हो जाता, तो इसका जिम्मेदार कौन होता।3
- भितरवार नगर परिषद के वार्ड क्रमांक 5 के पार्षद जितेंद्र सिंह परिहार पर 'पर उपदेश कुशल बहुतेरे' वाली कहावत सटीक बैठ रही है, क्योंकि नगर के मुख्य तिराहे पर महिला सम्मान की दुहाई देकर धरना-प्रदर्शन करने वाले इस पार्षद के अपने ही वार्ड में महिलाएं असुरक्षित हैं। मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम द्वारा लाखों रुपये की लागत से बनाया गया महिला व पुरुष यात्री प्रतीक्षालय वर्तमान में असामाजिक तत्वों और नशेड़ियों का गढ़ बन चुका है। देखरेख के अभाव में यह सरकारी संपत्ति पूरी तरह बर्बाद हो रही है, और जिम्मेदार अपनी आंखें मूंदे हुए हैं। सर्दी, गर्मी और बरसात से बचने के लिए बनाया गया यह यात्री प्रतीक्षालय अब महिलाओं के लिए खौफ का कारण बन गया है। बसों और वाहनों के इंतजार में आने वाली ग्रामीण व स्थानीय महिलाएं नशेड़ियों के डर से इसके अंदर कदम रखने की हिम्मत नहीं जुटा पातीं और उन्हें तपती धूप तथा खुले आसमान के नीचे खड़े होकर गाड़ियों का इंतजार करना पड़ता है। इस बदहाली का मुख्य कारण प्रतीक्षालय के समीप स्थित शराब की दुकान है, जहाँ दिन-रात शराबियों का जमावड़ा लगा रहता है। यात्री प्रतीक्षालय के अंदर अवैध रूप से लगने वाले कबाब, बिरयानी और अंडे के ठेलों ने इस स्थिति को और गंभीर बना दिया है, जहाँ लोग शराब दुकान से बोतलें लेकर सीधे इन्हीं ठेलों पर आकर प्रतीक्षालय को अपना 'मयखाना' बना लेते हैं। दिनदहाड़े होने वाली इस अराजकता से यहाँ का माहौल पूरी तरह दूषित हो चुका है, जिससे महिलाओं और संभ्रांत नागरिकों का यहाँ से गुजरना भी मुश्किल हो गया है। इस बदहाली ने पार्षद जितेंद्र सिंह परिहार की कथनी और करनी को सरेआम बेनकाब कर दिया है। नगर में तीखी चर्चा है कि पार्षद ने पहले मुख्य तिराहे पर शौचालय के बाहर फल का ठेला लगाने वालों को हटाने के लिए 'महिला सम्मान' का कार्ड खेलकर खूब सियासत चमकाई थी। लेकिन अब जब उनके अपने ही वार्ड क्रमांक 5 में महिलाओं के अधिकारों और सुरक्षा की धज्जियां उड़ रही हैं, तो पार्षद महोदय ने रहस्यमयी चुप्पी साध ली है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि दूसरों को नसीहत देने वाले जनप्रतिनिधि का अपने ही क्षेत्र की समस्याओं से मुंह मोड़ना यह साबित करता है कि उनके लिए महिला सम्मान सिर्फ एक राजनीतिक स्टंट था। जनता अब खुले तौर पर सवाल उठा रही है कि मुख्य तिराहे पर फल के ठेले हटवाने के लिए धरना देने वाले पार्षद को अपने वार्ड में यात्री प्रतीक्षालय के अंदर लगने वाले कबाब, बिरयानी और अंडे के अवैध ठेले क्यों नहीं दिखाई देते? वे पूछ रहे हैं कि 'महिला सम्मान' की परिभाषा सिर्फ दूसरे वार्डों के लिए है, और अपने वार्ड में खुले आसमान के नीचे खड़ी रहने को मजबूर महिलाओं की लाचारी पर पार्षद की अंतरात्मा क्यों सो रही है? जनता यह भी जानना चाहती है कि शराब के पियक्कड़ और चखने के ठेलों के कारण प्रतीक्षालय को 'मयखाना' बनाने वाले उपद्रवियों पर पार्षद ने आज तक पुलिस या प्रशासन से कार्रवाई की मांग क्यों नहीं की। नागरिक सवाल कर रहे हैं कि क्या वार्ड क्रमांक 5 की जनता ने उन्हें केवल चुनावी भाषणों और दोहरी राजनीति के लिए चुना था, या फिर सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा और विकास उनकी जिम्मेदारी नहीं है? वे पार्षद से इस 'नशे के अड्डे' पर कभी औचक निरीक्षण करने की हिम्मत दिखाने की चुनौती भी दे रहे हैं।2