रानीवाड़ा के बड़गांव रोड बस स्टैंड के पास आयोजित विशाल धर्मसभा में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी जी महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान की शरणागति ही ईश्वर प्राप्ति का मुख्य साधन है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति राग, द्वेष, मोह, माया, अहंकार, काम और क्रोध का त्याग कर पूर्ण श्रद्धा व समर्पण भाव से प्रभु की शरण में आता है, उसका निश्चित रूप से कल्याण होता है। अपने आशीर्वचन में जगद्गुरु शंकराचार्य ने भगवान श्रीराम और विभीषण के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि विभीषण शत्रु पक्ष में होने के बावजूद जब भगवान श्रीराम की शरण में आए, तब प्रभु ने उन्हें अपना स्वीकार कर अभय प्रदान किया। उन्होंने कहा कि भगवान का नाम 'शरणागत वत्सल' इसलिए है क्योंकि वे सच्चे मन से उनकी शरण में आने वाले प्रत्येक भक्त की रक्षा करते हैं। उन्होंने कहा कि संसार में रहते हुए भी मनुष्य को प्रत्येक परिस्थिति में स्वयं को प्रभु के हवाले कर देना चाहिए। ऐसा करने वाला व्यक्ति निर्भय, महान और ईश्वर की कृपा का पात्र बन जाता है तथा भगवान उसकी हर स्थान पर रक्षा करते हैं। गौ सेवा पर विशेष बल देते हुए जगद्गुरु ने कहा कि केवल 'गौ माता की जय' बोलने से कार्य पूरा नहीं होता, बल्कि गौ रक्षा, गौ पालन और गौ संरक्षण ही वास्तविक गौ पूजा है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं नंगे पांव गौ चराई और गौ सेवा की, इसलिए भगवत प्राप्ति में गौ माता का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि गौ, गंगा, गायत्री और गीता सनातन धर्म के वटवृक्ष हैं, इनके संरक्षण और इनके बताए मार्ग पर चलने से ही सनातन धर्म की रक्षा संभव है। इस अवसर पर पूर्व विधायक नारायण सिंह देवल का भी संबोधन हुआ। उन्होंने रानीवाड़ा की जनता द्वारा धार्मिक, जनसेवा और गौ सेवा के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि सनातन धर्म की जड़ सत्य पर आधारित है। सत्य से विमुख होने पर धर्म कमजोर पड़ जाता है, जबकि सत्य का पालन धर्माचरण को सरल और सार्थक बनाता है। धर्मसभा से पूर्व नगरवासियों ने जगद्गुरु शंकराचार्य का पुष्पमालाओं, पुष्पवर्षा, मंगल गीत, आरती एवं चरण पादुका पूजन के साथ भव्य स्वागत और अभिनंदन किया। इस दौरान कलश यात्रा भी निकाली गई। कार्यक्रम के अंत में विट्ठल कृष्ण जी महाराज एवं बलदेव नंद जी महाराज ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में हदमत सिंह भोमिया, जगदीश जोशी, कैलाश माली, छैल सिंह, तनु सिंह, कालू सिंह, नवल सिंह, बाबूलाल, गणपत पुरोहित, दिलीप सिंह, भीखाराम सहित नगर के अनेक गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
रानीवाड़ा के बड़गांव रोड बस स्टैंड के पास आयोजित विशाल धर्मसभा में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी जी महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान की शरणागति ही ईश्वर प्राप्ति का मुख्य साधन है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति राग, द्वेष, मोह, माया, अहंकार, काम और क्रोध का त्याग कर पूर्ण श्रद्धा व समर्पण भाव से प्रभु की शरण में आता है, उसका निश्चित रूप से कल्याण होता है। अपने आशीर्वचन में जगद्गुरु शंकराचार्य ने भगवान श्रीराम और विभीषण के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि विभीषण शत्रु पक्ष में होने के बावजूद जब भगवान श्रीराम की शरण में आए, तब प्रभु ने उन्हें अपना स्वीकार कर अभय प्रदान किया। उन्होंने कहा कि भगवान का नाम 'शरणागत वत्सल' इसलिए है क्योंकि वे सच्चे मन से उनकी शरण में आने वाले प्रत्येक भक्त की रक्षा करते हैं। उन्होंने कहा कि संसार में रहते हुए भी मनुष्य को प्रत्येक परिस्थिति में स्वयं को प्रभु के हवाले कर देना चाहिए। ऐसा करने वाला व्यक्ति निर्भय, महान और ईश्वर की कृपा का पात्र बन जाता है तथा भगवान उसकी हर स्थान पर रक्षा करते हैं। गौ सेवा पर विशेष बल देते हुए जगद्गुरु ने कहा कि केवल 'गौ माता की जय' बोलने से कार्य पूरा नहीं होता, बल्कि गौ रक्षा, गौ पालन और गौ संरक्षण ही वास्तविक गौ पूजा है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं नंगे पांव गौ चराई और गौ सेवा की, इसलिए भगवत प्राप्ति में गौ माता का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि गौ, गंगा, गायत्री और गीता सनातन धर्म के वटवृक्ष हैं, इनके संरक्षण और इनके बताए मार्ग पर चलने से ही सनातन धर्म की रक्षा संभव है। इस अवसर पर पूर्व विधायक नारायण सिंह देवल का भी संबोधन हुआ। उन्होंने रानीवाड़ा की जनता द्वारा धार्मिक, जनसेवा और गौ सेवा के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि सनातन धर्म की जड़ सत्य पर आधारित है। सत्य से विमुख होने पर धर्म कमजोर पड़ जाता है, जबकि सत्य का पालन धर्माचरण को सरल और सार्थक बनाता है। धर्मसभा से पूर्व नगरवासियों ने जगद्गुरु शंकराचार्य का पुष्पमालाओं, पुष्पवर्षा, मंगल गीत, आरती एवं चरण पादुका पूजन के साथ भव्य स्वागत और अभिनंदन किया। इस दौरान कलश यात्रा भी निकाली गई। कार्यक्रम के अंत में विट्ठल कृष्ण जी महाराज एवं बलदेव नंद जी महाराज ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में हदमत सिंह भोमिया, जगदीश जोशी, कैलाश माली, छैल सिंह, तनु सिंह, कालू सिंह, नवल सिंह, बाबूलाल, गणपत पुरोहित, दिलीप सिंह, भीखाराम सहित नगर के अनेक गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
- रानीवाड़ा के बड़गांव रोड बस स्टैंड के पास आयोजित विशाल धर्मसभा में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी जी महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान की शरणागति ही ईश्वर प्राप्ति का मुख्य साधन है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति राग, द्वेष, मोह, माया, अहंकार, काम और क्रोध का त्याग कर पूर्ण श्रद्धा व समर्पण भाव से प्रभु की शरण में आता है, उसका निश्चित रूप से कल्याण होता है। अपने आशीर्वचन में जगद्गुरु शंकराचार्य ने भगवान श्रीराम और विभीषण के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि विभीषण शत्रु पक्ष में होने के बावजूद जब भगवान श्रीराम की शरण में आए, तब प्रभु ने उन्हें अपना स्वीकार कर अभय प्रदान किया। उन्होंने कहा कि भगवान का नाम 'शरणागत वत्सल' इसलिए है क्योंकि वे सच्चे मन से उनकी शरण में आने वाले प्रत्येक भक्त की रक्षा करते हैं। उन्होंने कहा कि संसार में रहते हुए भी मनुष्य को प्रत्येक परिस्थिति में स्वयं को प्रभु के हवाले कर देना चाहिए। ऐसा करने वाला व्यक्ति निर्भय, महान और ईश्वर की कृपा का पात्र बन जाता है तथा भगवान उसकी हर स्थान पर रक्षा करते हैं। गौ सेवा पर विशेष बल देते हुए जगद्गुरु ने कहा कि केवल 'गौ माता की जय' बोलने से कार्य पूरा नहीं होता, बल्कि गौ रक्षा, गौ पालन और गौ संरक्षण ही वास्तविक गौ पूजा है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं नंगे पांव गौ चराई और गौ सेवा की, इसलिए भगवत प्राप्ति में गौ माता का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि गौ, गंगा, गायत्री और गीता सनातन धर्म के वटवृक्ष हैं, इनके संरक्षण और इनके बताए मार्ग पर चलने से ही सनातन धर्म की रक्षा संभव है। इस अवसर पर पूर्व विधायक नारायण सिंह देवल का भी संबोधन हुआ। उन्होंने रानीवाड़ा की जनता द्वारा धार्मिक, जनसेवा और गौ सेवा के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि सनातन धर्म की जड़ सत्य पर आधारित है। सत्य से विमुख होने पर धर्म कमजोर पड़ जाता है, जबकि सत्य का पालन धर्माचरण को सरल और सार्थक बनाता है। धर्मसभा से पूर्व नगरवासियों ने जगद्गुरु शंकराचार्य का पुष्पमालाओं, पुष्पवर्षा, मंगल गीत, आरती एवं चरण पादुका पूजन के साथ भव्य स्वागत और अभिनंदन किया। इस दौरान कलश यात्रा भी निकाली गई। कार्यक्रम के अंत में विट्ठल कृष्ण जी महाराज एवं बलदेव नंद जी महाराज ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में हदमत सिंह भोमिया, जगदीश जोशी, कैलाश माली, छैल सिंह, तनु सिंह, कालू सिंह, नवल सिंह, बाबूलाल, गणपत पुरोहित, दिलीप सिंह, भीखाराम सहित नगर के अनेक गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।1
- सिरा पहुंची बेंगलुरू रामदेव एकता साइकिल यात्रा, श्रद्धालुओं ने किया भव्य स्वागत बेंगलुरू/सिरा (दलपतसिंह भायल)बेंगलुरू रामदेव एकता साइकिल यात्रा के सिरा पहुंचने पर श्रद्धालुओं एवं स्थानीय रामदेव भक्तों ने यात्रियों का पुष्पवर्षा, माल्यार्पण एवं जयकारों के साथ भव्य स्वागत किया। यात्रा के स्वागत समारोह में बड़ी संख्या में समाजबंधु एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। रात्रि में भक्ति संध्या एवं जागरण का आयोजन किया गया, जिसमें प्रसिद्ध भजन गायक हेमन्त जोशी एवंम नरपत देवासी एंड पार्टी ने एक से बढ़कर एक रामदेवजी के भजनों की मनमोहक प्रस्तुतियां देकर श्रद्धालुओं को देर रात तक भक्ति रस में सराबोर कर दिया। कार्यक्रम के दौरान बालिका अवनी पटेल ने अपनी आकर्षक नृत्य प्रस्तुति से सभी का मन मोह लिया, जिस पर उपस्थित लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साहवर्धन किया। इसके पश्चात श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में भक्तों ने प्रसाद ग्रहण कर धर्म लाभ प्राप्त किया। इस अवसर पर बाबूलाल पटेल, चौथाराम पटेल, अशोक पटेल, प्रकाश पटेल, विरमराम पटेल, तिलोक पटेल सहित अनेक गणमान्य सदस्य एवं समाज के वरिष्ठजन उपस्थित रहे। सभी ने यात्रा की सफलता एवं समाज में एकता, भाईचारे और धार्मिक चेतना के प्रसार के लिए शुभकामनाएं दीं।1
- राजस्थान के जालोर में संतों और गौ भक्तों ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन में गौ माता की हत्या पर रोक लगाने और उसे राष्ट्र माता का दर्जा देने की मांग की गई है। ज्ञापन में जोर देकर कहा गया है कि गौ माता की रक्षा करना न केवल धार्मिक कर्तव्य है, बल्कि राष्ट्रीय आवश्यकता भी है। संतों का मानना है कि गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा देकर ही इस समस्या का स्थायी समाधान निकल सकता है।1
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- सिवाना उपखंड के काठाडी के संस्कृत विद्यालय में लंबे समय से शिक्षकों के पद रिक्त हैं। इस समस्या को लेकर अभिभावकों ने विभाग और उच्च अधिकारियों को अवगत कराया था, लेकिन उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला। पूर्व में 15 दिन पहले ग्रामीणों ने अधिकारियों को पत्र लिखकर चेतावनी दी थी कि अगर 15 दिन में अध्यापकों की व्यवस्था नहीं हुई तो वे अपने बच्चों के भविष्य को देखते हुए सामूहिक रूप से टीसी की मांग करेंगे। आज सभी छात्रों के अभिभावक विद्यालय में पहुंचे और प्रधानाध्यापक को सामूहिक रूप से प्रार्थना पत्र देकर सभी बच्चों की सामूहिक टीसी की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि उनके बच्चों का भविष्य अंधकार में है। अधिकारी अस्थायी तौर पर शिक्षकों को लगाते हैं, लेकिन वे वापस अपने स्थान पर चले जाते हैं, जिससे समस्या जस की तस बनी रहती है। अब बच्चों के भविष्य पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।1
- जालौर सिटी के अंदर दिनदहाड़े 100 साल के छोटे बच्चों का अपहरण अपराधी बाइक पर लेकर फरार पुलिस ने की जांच शुरू जालौर सिटी के अन्दर दिनदहाड़े 6 साल के छोटे बच्चे का अपरहण1