मधेपुरा जिले में मुहर्रम का पर्व शुक्रवार को आपसी भाईचारे और सौहार्द के साथ मनाया गया, जिसने गम, शहादत और इंसानियत का संदेश दिया। शहर के विभिन्न हिस्सों से पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाले गए, जो सदर प्रखंड कार्यालय के समीप उत्तरी राष्ट्रीय राजमार्ग किनारे स्थित कर्बला मैदान पहुंचे। यहाँ बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति में धार्मिक रस्में पूरी की गईं। मुहर्रम मेले में बच्चों, महिलाओं और युवाओं की भारी भीड़ उमड़ी, जहाँ लोगों ने लगे विभिन्न स्टॉलों और पारंपरिक आयोजनों का भरपूर आनंद लिया। इस अवसर पर विभिन्न अखाड़ों के उस्तादों और प्रतिभागियों ने तलवारबाजी, लाठी और अन्य पारंपरिक युद्धक कलाओं का शानदार प्रदर्शन कर उपस्थित दर्शकों को रोमांचित कर दिया। उनके हैरतअंगेज करतबों पर दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साह बढ़ाया। पर्व को शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा, जिसमें कर्बला मैदान और मेला परिसर में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। एसडीएम संतोष कुमार, एएसपी प्रवेंद्र भारती, बीडीओ अखिलेश्वर कुमार और सदर थानाध्यक्ष विमलेंदु कुमार सहित कई प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने लगातार पूरे आयोजन की निगरानी की और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। समाजसेवी शौकत अली ने बताया कि मधेपुरा में यह पर्व वर्षों से आपसी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक रहा है। उन्होंने ज़ोर दिया कि सभी समुदायों के लोगों के सहयोग और सहभागिता से यह आयोजन हर साल शांतिपूर्ण और गरिमापूर्ण तरीके से संपन्न होता है, जिससे जिले की सामाजिक एकता मजबूत होती है। कार्यक्रम का संचालन पृथ्वीराज यदुवंशी ने किया। पूरे आयोजन के दौरान स्थानीय लोगों और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय देखने को मिला, जिसके परिणामस्वरूप सुरक्षा व्यवस्था और सामाजिक सहयोग से कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली। मुहर्रम के इस आयोजन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि मधेपुरा की पहचान केवल धार्मिक आयोजनों से नहीं, बल्कि आपसी विश्वास, भाईचारे और सामाजिक सौहार्द की मजबूत परंपरा से भी है।
मधेपुरा जिले में मुहर्रम का पर्व शुक्रवार को आपसी भाईचारे और सौहार्द के साथ मनाया गया, जिसने गम, शहादत और इंसानियत का संदेश दिया। शहर के विभिन्न हिस्सों से पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाले गए, जो सदर प्रखंड कार्यालय के समीप उत्तरी राष्ट्रीय राजमार्ग किनारे स्थित कर्बला मैदान पहुंचे। यहाँ बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति में धार्मिक रस्में पूरी की गईं। मुहर्रम मेले में बच्चों, महिलाओं और युवाओं की भारी भीड़ उमड़ी, जहाँ लोगों ने लगे विभिन्न स्टॉलों और पारंपरिक
आयोजनों का भरपूर आनंद लिया। इस अवसर पर विभिन्न अखाड़ों के उस्तादों और प्रतिभागियों ने तलवारबाजी, लाठी और अन्य पारंपरिक युद्धक कलाओं का शानदार प्रदर्शन कर उपस्थित दर्शकों को रोमांचित कर दिया। उनके हैरतअंगेज करतबों पर दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साह बढ़ाया। पर्व को शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा, जिसमें कर्बला मैदान और मेला परिसर में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। एसडीएम संतोष कुमार, एएसपी प्रवेंद्र
भारती, बीडीओ अखिलेश्वर कुमार और सदर थानाध्यक्ष विमलेंदु कुमार सहित कई प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने लगातार पूरे आयोजन की निगरानी की और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। समाजसेवी शौकत अली ने बताया कि मधेपुरा में यह पर्व वर्षों से आपसी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक रहा है। उन्होंने ज़ोर दिया कि सभी समुदायों के लोगों के सहयोग और सहभागिता से यह आयोजन हर साल शांतिपूर्ण और गरिमापूर्ण तरीके से संपन्न होता है, जिससे जिले
की सामाजिक एकता मजबूत होती है। कार्यक्रम का संचालन पृथ्वीराज यदुवंशी ने किया। पूरे आयोजन के दौरान स्थानीय लोगों और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय देखने को मिला, जिसके परिणामस्वरूप सुरक्षा व्यवस्था और सामाजिक सहयोग से कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली। मुहर्रम के इस आयोजन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि मधेपुरा की पहचान केवल धार्मिक आयोजनों से नहीं, बल्कि आपसी विश्वास, भाईचारे और सामाजिक सौहार्द की मजबूत परंपरा से भी है।
- मधेपुरा जिले में मुहर्रम का पर्व शुक्रवार को आपसी भाईचारे और सौहार्द के साथ मनाया गया, जिसने गम, शहादत और इंसानियत का संदेश दिया। शहर के विभिन्न हिस्सों से पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाले गए, जो सदर प्रखंड कार्यालय के समीप उत्तरी राष्ट्रीय राजमार्ग किनारे स्थित कर्बला मैदान पहुंचे। यहाँ बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति में धार्मिक रस्में पूरी की गईं। मुहर्रम मेले में बच्चों, महिलाओं और युवाओं की भारी भीड़ उमड़ी, जहाँ लोगों ने लगे विभिन्न स्टॉलों और पारंपरिक आयोजनों का भरपूर आनंद लिया। इस अवसर पर विभिन्न अखाड़ों के उस्तादों और प्रतिभागियों ने तलवारबाजी, लाठी और अन्य पारंपरिक युद्धक कलाओं का शानदार प्रदर्शन कर उपस्थित दर्शकों को रोमांचित कर दिया। उनके हैरतअंगेज करतबों पर दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साह बढ़ाया। पर्व को शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा, जिसमें कर्बला मैदान और मेला परिसर में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। एसडीएम संतोष कुमार, एएसपी प्रवेंद्र भारती, बीडीओ अखिलेश्वर कुमार और सदर थानाध्यक्ष विमलेंदु कुमार सहित कई प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने लगातार पूरे आयोजन की निगरानी की और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। समाजसेवी शौकत अली ने बताया कि मधेपुरा में यह पर्व वर्षों से आपसी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक रहा है। उन्होंने ज़ोर दिया कि सभी समुदायों के लोगों के सहयोग और सहभागिता से यह आयोजन हर साल शांतिपूर्ण और गरिमापूर्ण तरीके से संपन्न होता है, जिससे जिले की सामाजिक एकता मजबूत होती है। कार्यक्रम का संचालन पृथ्वीराज यदुवंशी ने किया। पूरे आयोजन के दौरान स्थानीय लोगों और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय देखने को मिला, जिसके परिणामस्वरूप सुरक्षा व्यवस्था और सामाजिक सहयोग से कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली। मुहर्रम के इस आयोजन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि मधेपुरा की पहचान केवल धार्मिक आयोजनों से नहीं, बल्कि आपसी विश्वास, भाईचारे और सामाजिक सौहार्द की मजबूत परंपरा से भी है।4
- सौर बाजार प्रखंड क्षेत्र के चंदौर पूर्वी पंचायत अंतर्गत मुख्य सड़क मार्ग स्थित बीडीओ चौक पर वेपर लाइट न होने के कारण रात के समय वाहन चालकों और पैदल राहगीरों को आवागमन में हमेशा दुर्घटना का खतरा बना रहता है। स्थानीय लोगों ने बताया कि इस मुख्य सड़क मार्ग से दो टोलों के लिए सड़कें निकलती हैं, जहां देर रात तक लोगों का आना-जाना लगा रहता है। अंधेरे के कारण मुख्य सड़क मार्ग से इन अंदरूनी सड़कों पर प्रवेश करते समय लोगों को रास्ता ठीक से दिखाई नहीं देता, जिससे कई बार वे दुर्घटनाओं का शिकार होने से बाल-बाल बचे हैं। इसके अतिरिक्त, मुख्य सड़क मार्ग से पूर्व दिशा की ओर दर्जनों किसानों के खेत हैं। किसान अपनी खेतीबाड़ी के काम से इस रास्ते से आते-जाते रहते हैं और कभी-कभी उन्हें देर रात तक भी खेतों में काम करना पड़ता है। इन परिस्थितियों को देखते हुए, लोगों ने इस सड़क मार्ग के किनारे वेपर लाइट लगाने की पुरजोर मांग की है, ताकि सभी को आवागमन में काफी सुविधा मिल सके और दुर्घटनाओं का जोखिम कम हो।1
- देना भद्र का मेला लग गया है। यह मेला शंखरपुर मोरकाही में आयोजित किया गया है। पोस्ट में उन दोस्तों से टिप्पणी करने का आग्रह किया गया है जो शंखरपुर मोरकाही जगह को जानते हैं।1
- सुपौल जिले के पिपरा बाजार में बिजली की गंभीर समस्या बनी हुई है, जहां सुबह 1 बजे से बिजली की आपूर्ति पूरी तरह ठप है। शाम के 7 बजने तक भी बिजली नहीं आई है, जिसके कारण स्थानीय लोग लगभग 18 घंटे से बिजली के बिना परेशान हैं। निवासियों ने तत्काल बिजली बहाली की मांग की है और इस पूरे मामले पर 'बरस बाद कार्रवाई' किए जाने की अपील की है।1
- मधेपुरा जिले के मुरलीगंज में मोहर्रम का पर्व अत्यंत शांतिपूर्ण ढंग से मनाया गया। इस दौरान क्षेत्र में कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई।1
- सुपौल जिले में एक सड़क पर मिट्टी डाल दिए जाने से स्थानीय लोगों को आवाजाही में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस स्थिति के कारण बारिश का सारा पानी भी सड़क पर जमा हो जाता है, जिससे समस्या और बढ़ जाती है। जब मिट्टी डालने वाले व्यक्ति से इस बारे में बात की जाती है, तो वह यह कहकर जवाब देता है कि यह सड़क उसकी निजी जमीन पर बनी है और वह अपनी मर्जी के अनुसार ही काम करेगा। शिकायतकर्ता के अनुसार, यह व्यक्ति चौबीसों घंटे शराब के नशे में रहता है। प्रभावित लोगों ने इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए तत्काल मदद की गुहार लगाई है।1
- प्राणपुर में मै० रेणु संतोष पेट्रोलियम का भव्य शुभारंभ किया गया है। यह प्रतिष्ठान अब अपनी सेवाएं प्रदान करने के लिए तैयार है।1
- ग्रामीण इलाकों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के सरकारी दावों के उलट, मधेपुरा जिले के कई उपस्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति बेहद खराब है। घैलाढ़ प्रखंड स्थित भान टेकती पंचायत और सदर प्रखंड के मिठाही पंचायत के उपस्वास्थ्य केंद्रों की तस्वीरें सामने आई हैं, जहाँ स्वास्थ्यकर्मी समय पर नहीं पहुँच रहे हैं और महंगे चिकित्सीय उपकरण बिना उपयोग के धूल फांक रहे हैं, जिससे मरीजों को इलाज और जांच की बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत इन हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों में एक सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ), दो एएनएम और एक पुरुष स्वास्थ्य कार्यकर्ता की तैनाती का प्रावधान है। हालांकि, जमीनी हकीकत इससे काफी अलग है। भान टेकती उपस्वास्थ्य केंद्र में सुबह साढ़े दस बजे तक कोई स्वास्थ्यकर्मी मौजूद नहीं मिला, जबकि सीएचओ और एएनएम दोनों केंद्र परिसर के ऊपरी हिस्से में ही रहते हैं। काफी देर बाद एएनएम अमला कुमारी अस्पताल पहुँचीं, लेकिन अन्य स्वास्थ्यकर्मी नदारद रहे। वहीं, मिठाही उपस्वास्थ्य केंद्र में केवल सीएचओ सोनम कुमारी ही मौजूद थीं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति उजागर हुई। स्थानीय निवासी अशोक कुमार ने बताया कि अस्पताल में सिर्फ दवा बांटने का काम होता है और अन्य स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिलती हैं, उन्होंने सरकार से सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की। ग्रामीणों का आरोप है कि मरीजों को बिना किसी समुचित जांच के दवाइयां दे दी जाती हैं, और जांच उपकरण व प्रसव कक्ष में रखे महंगे चिकित्सीय उपकरण भी बेकार पड़े हुए हैं। ग्रामीण उत्तमलाल यादव ने कहा कि मरीजों की जांच की कोई बेहतर व्यवस्था नहीं है और बिना जांच के ही दवा देने से लोगों को परेशानी होती है। लोगों ने केंद्रों में साफ-सफाई की व्यवस्था को भी असंतोषजनक बताया, जिससे दवाइयों के रखरखाव से लेकर मरीजों के उपचार तक कई स्तरों पर लापरवाही साफ दिख रही है। मधेपुरा के सिविल सर्जन डॉ. विजय कुमार ने स्वीकार किया कि कुछ स्थानों पर कमियाँ मौजूद हैं, जिन्हें दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की कमी के बावजूद व्यवस्था सुधारने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। हालांकि, सरकार के ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने के दावों के बीच, मधेपुरा के इन उपस्वास्थ्य केंद्रों की बदहाली गंभीर सवाल खड़े कर रही है कि जब स्वास्थ्यकर्मी समय पर उपलब्ध नहीं होंगे और संसाधनों का उपयोग नहीं होगा, तो ग्रामीणों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं कैसे पहुंचेंगी। अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग इन शिकायतों पर क्या कार्रवाई करता है।4