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मंडला में मिलेट महोत्सव बना विवाद की वजह, स्टॉल से मिली कथित आपत्तिजनक पुस्तकें मंडला में मिलेट महोत्सव बना विवाद की वजह, स्टॉल से मिली कथित आपत्तिजनक पुस्तकें
Sanjay nanda
मंडला में मिलेट महोत्सव बना विवाद की वजह, स्टॉल से मिली कथित आपत्तिजनक पुस्तकें मंडला में मिलेट महोत्सव बना विवाद की वजह, स्टॉल से मिली कथित आपत्तिजनक पुस्तकें
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- गहरी बावली में रातभर जिंदगी से जंग… सुबह पुलिस ने किया रेस्क्यू, प्लास्टिक खोखे ने बचाई जान मंडला जिले के निवास नगर परिषद क्षेत्र में राधा-कृष्ण मंदिर के बगल स्थित एक पुरानी और गहरी बावली से पुलिस ने साहसिक रेस्क्यू कर एक व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकाला। घटना से क्षेत्र में हड़कंप मच गया। पुलिस ने तत्काल घायल व्यक्ति को उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया, जहां उसका इलाज जारी है।1
- मंडला में बेक रहे थे घटिया हेलमेट मंडला पुलिस ने किया ख़ुलासा हेलमेट ख़रीदने से पहले जाँच ज़रूरी1
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- मिलेट फूड फेस्टिवल' में नगरवासियों का जबरदस्त उत्साह घुघरी / स्थानीय व्यंजनों की खुशबू और श्रीअन्न (मिलेट्स) के अनोखे स्वाद ने सभी का दिल जीत लिया। बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों ने व्यंजनों का उठाया लुत्फ1
- मंडला जिले के टिकरिया थाना क्षेत्र में मधुवन ढाबा के पास युवक का शव मिलने से सनसनी फैल गई है। सूचना मिलते ही मंडला पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और जांच प्रारंभ की। मृतक की पहचान सुमित काछी उम्र 30 वर्ष निवासी ग्राम घाना, थाना तिलवारा, जबलपुर के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार सुमित 11 फरवरी से लापता था। उसके भाई द्वारा टिकरिया थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। शनिवार को शाम 4:00 बजे घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक रजत सकलेचा स्वयं घटनास्थल पर पहुंचे और बारीकी से निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद मामले की पूरी जानकारी दी1
- साहब मैं जिंदा हूं…राष्ट्रीय मानव बैगा की गुहार, सिस्टम पर बड़ा सवाल1
- मंडला जिले के मवई विकासखंड की ग्राम पंचायत अमवार से प्रशासनिक लापरवाही का चौंकाने वाला मामला सामने आया है… जहां सत्तो बाई बैगा जिंदा हैं… लेकिन समग्र आईडी में उनका नाम गायब है… यानी कागजों में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया है मामला मवई के अमवार गांव का है…पीड़िता का कहना है कि कई बार पंचायत के चक्कर लगाए, लेकिन नाम नहीं जोड़ा गया… जिसके चलते वह शासकीय योजनाओं के लाभ से वंचित हैं।पीडिता का कहना है कि साहब… मैं जिंदा हूं… लेकिन कागजों में मुझे मार दिया गया है…अब देखना होगा कि मीडिया में मामला उजागर होने के बाद प्रशासन इस बड़ी लापरवाही को कब सुधारता है… और सत्तो बाई बैगा को उनका हक दिलाता है।1