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मंडला पुलिस ने सरदार पटेल की 150वीं जयंती पर साइकिल रैली का आयोजन किया पुलिस अधीक्षक रजत सकलेचा ने साइकिल रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। रैली शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरी, एकता, अनुशासन और स्वास्थ्य का संदेश दिया। पुलिस विभाग और मंडला साइक्लिंग क्लब के सदस्यों ने हिस्सा लिया।

3 hrs ago
user_Govardhan kushwaha
Govardhan kushwaha
Local News Reporter मंडला, मंडला, मध्य प्रदेश•
3 hrs ago

मंडला पुलिस ने सरदार पटेल की 150वीं जयंती पर साइकिल रैली का आयोजन किया पुलिस अधीक्षक रजत सकलेचा ने साइकिल रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। रैली शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरी, एकता, अनुशासन और स्वास्थ्य का संदेश दिया। पुलिस विभाग और मंडला साइक्लिंग क्लब के सदस्यों ने हिस्सा लिया।

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  • Post by Salim khan
    1
    Post by Salim khan
    user_Salim khan
    Salim khan
    Local News Reporter मंडला, मंडला, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • आदिवासी बहुल क्षेत्र मवई इन दिनों महुआ की मिठास से सराबोर है। जंगल की धरती पर बिछे महुआ के फूल केवल प्राकृतिक सौंदर्य का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि यह यहां के हजारों परिवारों की आजीविका का आधार हैं। सुबह की पहली किरण से पहले ही महिलाएं, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चे टोकरी-बोरे लेकर जंगल की ओर निकल पड़ते हैं। यह केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन जीने का जरिया है—जहां हर गिरा हुआ फूल उनके घर के चूल्हे को जलाने की उम्मीद बन जाता है। जंगल की हरियाली और साल का वैभव मवई का वन क्षेत्र अपनी अनूठी प्रकृति के कारण विशेष पहचान रखता है। जब अन्य स्थानों पर पतझड़ के कारण पेड़ सूने हो जाते हैं, तब यहां के साल वृक्ष निरंतर हरियाली बनाए रखते हैं। साल के पत्ते धीरे-धीरे गिरते हैं और उसी क्रम में नए पत्ते आते रहते हैं, जिससे जंगल साल भर जीवंत और हरा-भरा दिखाई देता है। महुआ के बाद साल में फूल और फल (बीज/वीजा) लगते हैं, जो ग्रामीणों की आय का दूसरा बड़ा स्रोत है। पहले इन वन उपजों की खरीदी सहकारी समितियों और वन विभाग के माध्यम से समर्थन मूल्य पर होती थी, जिससे ग्रामीणों को उचित दाम मिल जाता था। लेकिन वर्तमान में यह व्यवस्था कमजोर हो गई है, जिससे ग्रामीणों को अपनी मेहनत का फल औने-पौने दामों पर व्यापारियों को बेचना पड़ रहा है। आजीविका का एकमात्र आधार मवई क्षेत्र में रोजगार के अवसर बेहद सीमित हैं। खेती भी पूरी तरह मौसम पर निर्भर है। ऐसे में महुआ और साल बीज ही ग्रामीणों की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। इन्हीं से मिलने वाली आय से वे बीज, बैल, खाद, बच्चों की पढ़ाई और दैनिक जरूरतों की पूर्ति करते हैं। मनरेगा जैसी योजनाएं कागजों तक सीमित होकर रह गई हैं। निजी रोजगार के अवसर नगण्य हैं। परिणामस्वरूप वन संपदा ही यहां के लोगों का एकमात्र सहारा बन गई है। लेकिन जब इस संपदा का उचित मूल्य नहीं मिलता, तो यह सहारा भी कमजोर पड़ने लगता है। वन कटाई : बढ़ता हुआ संकट वन विभाग द्वारा निरंतर और अनियंत्रित कटाई से जंगलों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। जहां पहले घने वृक्षों की छाया थी, वहां अब खालीपन नजर आने लगा है। यदि यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले समय में यह वनांचल अपनी पहचान खो सकता है। वन कटाई के दुष्परिणाम केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं हैं जल स्रोतों का सूखना वन्य जीवों का पलायन जलवायु असंतुलन ग्रामीणों की आय में गिरावट यह संकट पर्यावरणीय होने के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक भी है। बाजार और मूल्य का असंतुलन एक ओर शहरों में महुआ से बने उत्पाद—जैसे मिठाइयां, चॉकलेट और अन्य खाद्य सामग्री—महंगे दामों पर बिकते हैं, वहीं दूसरी ओर वनांचल में महुआ का मूल्य इतना कम मिलता है कि मजदूरी तक नहीं निकल पाती। यह स्पष्ट रूप से बाजार व्यवस्था की असमानता को दर्शाता है। इसी प्रकार, महुआ से पारंपरिक रूप से बनाई जाने वाली शराब भी ग्रामीणों के लिए आय का स्रोत है, लेकिन उसे न तो उचित पहचान मिल पाई है और न ही बेहतर बाजार। संभावनाएं और समाधान यदि सरकार और समाज मिलकर प्रयास करें, तो मवई का वनांचल आत्मनिर्भरता का एक आदर्श मॉडल बन सकता है। महुआ और साल बीज की समर्थन मूल्य पर खरीदी पुनः शुरू की जाए। टोना-पत्तल (पत्तों से बने उत्पाद) जैसी वन उपज को भी बाजार और न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया जाए। मनरेगा और अन्य रोजगार योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। वन कटाई पर नियंत्रण रखते हुए स्थानीय समुदाय को वन प्रबंधन में भागीदार बनाया जाए। महुआ आधारित उत्पादों (खाद्य पदार्थ और पेय) पर शोध कर उनकी गुणवत्ता, स्वाद और सुगंध में सुधार किया जाए, ताकि उन्हें बड़े बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक स्थान मिल सके। महुआ से बनने वाले पारंपरिक पेय को वैज्ञानिक तरीके से विकसित कर उसे कानूनी और आर्थिक रूप से संगठित उद्योग का रूप दिया जाए, जिससे आदिवासी समुदाय को सीधा लाभ मिल सके। मवई का जंगल केवल पेड़ों का समूह नहीं, बल्कि वहां के आदिवासी समाज की जीवनरेखा है। महुआ की खुशबू में उनकी आशाएं बसती हैं और साल के वृक्षों में उनका भविष्य छिपा है। यदि जंगल सुरक्षित रहेगा, तो ही यह जीवन चक्र चलता रहेगा। अन्यथा, यह वनांचल केवल स्मृतियों और कहानियों में सिमट कर रह जाएगा। वनों का संरक्षण केवल पर्यावरण की रक्षा नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों के अस्तित्व की रक्षा है, जिनकी रोजी-रोटी इन जंगलों से जुड़ी हुई है।
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    आदिवासी बहुल क्षेत्र मवई इन दिनों महुआ की मिठास से सराबोर है। जंगल की धरती पर बिछे महुआ के फूल केवल प्राकृतिक सौंदर्य का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि यह यहां के हजारों परिवारों की आजीविका का आधार हैं। सुबह की पहली किरण से पहले ही महिलाएं, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चे टोकरी-बोरे लेकर जंगल की ओर निकल पड़ते हैं। यह केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन जीने का जरिया है—जहां हर गिरा हुआ फूल उनके घर के चूल्हे को जलाने की उम्मीद बन जाता है।
जंगल की हरियाली और साल का वैभव
मवई का वन क्षेत्र अपनी अनूठी प्रकृति के कारण विशेष पहचान रखता है। जब अन्य स्थानों पर पतझड़ के कारण पेड़ सूने हो जाते हैं, तब यहां के साल वृक्ष निरंतर हरियाली बनाए रखते हैं। साल के पत्ते धीरे-धीरे गिरते हैं और उसी क्रम में नए पत्ते आते रहते हैं, जिससे जंगल साल भर जीवंत और हरा-भरा दिखाई देता है।
महुआ के बाद साल में फूल और फल (बीज/वीजा) लगते हैं, जो ग्रामीणों की आय का दूसरा बड़ा स्रोत है। पहले इन वन उपजों की खरीदी सहकारी समितियों और वन विभाग के माध्यम से समर्थन मूल्य पर होती थी, जिससे ग्रामीणों को उचित दाम मिल जाता था। लेकिन वर्तमान में यह व्यवस्था कमजोर हो गई है, जिससे ग्रामीणों को अपनी मेहनत का फल औने-पौने दामों पर व्यापारियों को बेचना पड़ रहा है।
आजीविका का एकमात्र आधार
मवई क्षेत्र में रोजगार के अवसर बेहद सीमित हैं। खेती भी पूरी तरह मौसम पर निर्भर है। ऐसे में महुआ और साल बीज ही ग्रामीणों की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। इन्हीं से मिलने वाली आय से वे बीज, बैल, खाद, बच्चों की पढ़ाई और दैनिक जरूरतों की पूर्ति करते हैं।
मनरेगा जैसी योजनाएं कागजों तक सीमित होकर रह गई हैं। निजी रोजगार के अवसर नगण्य हैं। परिणामस्वरूप वन संपदा ही यहां के लोगों का एकमात्र सहारा बन गई है। लेकिन जब इस संपदा का उचित मूल्य नहीं मिलता, तो यह सहारा भी कमजोर पड़ने लगता है।
वन कटाई : बढ़ता हुआ संकट
वन विभाग द्वारा निरंतर और अनियंत्रित कटाई से जंगलों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। जहां पहले घने वृक्षों की छाया थी, वहां अब खालीपन नजर आने लगा है। यदि यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले समय में यह वनांचल अपनी पहचान खो सकता है।
वन कटाई के दुष्परिणाम केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं हैं
जल स्रोतों का सूखना
वन्य जीवों का पलायन
जलवायु असंतुलन
ग्रामीणों की आय में गिरावट
यह संकट पर्यावरणीय होने के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक भी है।
बाजार और मूल्य का असंतुलन
एक ओर शहरों में महुआ से बने उत्पाद—जैसे मिठाइयां, चॉकलेट और अन्य खाद्य सामग्री—महंगे दामों पर बिकते हैं, वहीं दूसरी ओर वनांचल में महुआ का मूल्य इतना कम मिलता है कि मजदूरी तक नहीं निकल पाती। यह स्पष्ट रूप से बाजार व्यवस्था की असमानता को दर्शाता है।
इसी प्रकार, महुआ से पारंपरिक रूप से बनाई जाने वाली शराब भी ग्रामीणों के लिए आय का स्रोत है, लेकिन उसे न तो उचित पहचान मिल पाई है और न ही बेहतर बाजार।
संभावनाएं और समाधान
यदि सरकार और समाज मिलकर प्रयास करें, तो मवई का वनांचल आत्मनिर्भरता का एक आदर्श मॉडल बन सकता है।
महुआ और साल बीज की समर्थन मूल्य पर खरीदी पुनः शुरू की जाए।
टोना-पत्तल (पत्तों से बने उत्पाद) जैसी वन उपज को भी बाजार और न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया जाए।
मनरेगा और अन्य रोजगार योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।
वन कटाई पर नियंत्रण रखते हुए स्थानीय समुदाय को वन प्रबंधन में भागीदार बनाया जाए।
महुआ आधारित उत्पादों (खाद्य पदार्थ और पेय) पर शोध कर उनकी गुणवत्ता, स्वाद और सुगंध में सुधार किया जाए, ताकि उन्हें बड़े बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक स्थान मिल सके।
महुआ से बनने वाले पारंपरिक पेय को वैज्ञानिक तरीके से विकसित कर उसे कानूनी और आर्थिक रूप से संगठित उद्योग का रूप दिया जाए, जिससे आदिवासी समुदाय को सीधा लाभ मिल सके।
मवई का जंगल केवल पेड़ों का समूह नहीं, बल्कि वहां के आदिवासी समाज की जीवनरेखा है। महुआ की खुशबू में उनकी आशाएं बसती हैं और साल के वृक्षों में उनका भविष्य छिपा है।
यदि जंगल सुरक्षित रहेगा, तो ही यह जीवन चक्र चलता रहेगा। अन्यथा, यह वनांचल केवल स्मृतियों और कहानियों में सिमट कर रह जाएगा।
वनों का संरक्षण केवल पर्यावरण की रक्षा नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों के अस्तित्व की रक्षा है, जिनकी रोजी-रोटी इन जंगलों से जुड़ी हुई है।
    user_Neelesh THAKUR
    Neelesh THAKUR
    मंडला, मंडला, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • Post by प्रशांत पटैल
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    Post by प्रशांत पटैल
    user_प्रशांत पटैल
    प्रशांत पटैल
    Local News Reporter मंडला, मंडला, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • पुलिस अधीक्षक रजत सकलेचा ने साइकिल रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। रैली शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरी, एकता, अनुशासन और स्वास्थ्य का संदेश दिया। पुलिस विभाग और मंडला साइक्लिंग क्लब के सदस्यों ने हिस्सा लिया।
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    पुलिस अधीक्षक रजत सकलेचा ने साइकिल रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। रैली शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरी, एकता, अनुशासन और स्वास्थ्य का संदेश दिया। पुलिस विभाग और मंडला साइक्लिंग क्लब के सदस्यों ने हिस्सा लिया।
    user_Govardhan kushwaha
    Govardhan kushwaha
    Local News Reporter मंडला, मंडला, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
  • शिव सिंह राजपूत दहिया जर्नलिस्ट अमरपाटन सतना मैहर मध्य प्रदेश भोपाल 9974778863
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    शिव सिंह राजपूत दहिया जर्नलिस्ट अमरपाटन सतना मैहर मध्य प्रदेश भोपाल 9974778863
    user_Shiv Singh rajput dahiya journalist MP
    Shiv Singh rajput dahiya journalist MP
    Court reporter Mandla, Madhya Pradesh•
    6 hrs ago
  • पुलिस मुख्यालय भोपाल के निर्देशानुसार *लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर पुलिस अधीक्षक मंडला रजत सकलेचा के निर्देशन में शनिवार को सुबह 8:00 बजे मंडला में साइकिल रैली का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में देशभक्ति, एकता, अनुशासन एवं स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना रहा। पुलिस अधीक्षक मंडला रजत सकलेचा द्वारा पुलिस लाइन मंडला में साइकिल रैली को हरी झंडी दिखाकर शहर के मुख्य मार्गों में भ्रमण हेतु रवाना किया गया। साइकिल रैली शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए पुनः पुलिस परेड ग्राउंड में संपन्न हुई। इस आयोजन के माध्यम से मंडला पुलिस ने समाज में एकता, स्वास्थ्य एवं अनुशासन का संदेश देते हुए जनसहभागिता को बढ़ावा देने की दिशा में एक सराहनीय पहल की है। इस अवसर पर पुलिस विभाग के डीएसपी सतीश चतुर्वेदी, रक्षित निरीक्षक सुनील नागवंशी रक्षित केंद्र मंडला , मंडला साइक्लिंग क्लब के सदस्य, फुटबॉल कोच पंकज उसराठे सहित छात्र-छात्राएं सम्मिलित हुए।
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    पुलिस मुख्यालय भोपाल के निर्देशानुसार *लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर पुलिस अधीक्षक मंडला रजत सकलेचा के निर्देशन में शनिवार को सुबह 8:00 बजे मंडला में  साइकिल रैली का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में देशभक्ति, एकता, अनुशासन एवं स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना रहा। पुलिस अधीक्षक मंडला रजत सकलेचा द्वारा पुलिस लाइन मंडला में साइकिल रैली को हरी झंडी दिखाकर शहर के मुख्य मार्गों में भ्रमण हेतु रवाना किया गया। साइकिल रैली शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए पुनः पुलिस परेड ग्राउंड में संपन्न हुई। इस आयोजन के माध्यम से मंडला पुलिस ने समाज में एकता, स्वास्थ्य एवं अनुशासन का संदेश देते हुए जनसहभागिता को बढ़ावा देने की दिशा में एक सराहनीय पहल की है।
इस अवसर पर पुलिस विभाग के डीएसपी सतीश चतुर्वेदी, रक्षित निरीक्षक सुनील नागवंशी रक्षित केंद्र  मंडला , मंडला साइक्लिंग क्लब के सदस्य, फुटबॉल कोच पंकज उसराठे सहित छात्र-छात्राएं सम्मिलित हुए।
    user_Vinay Namdeo Nainpur
    Vinay Namdeo Nainpur
    मंडला, मंडला, मध्य प्रदेश•
    14 hrs ago
  • सुप्रसिद्ध ज्वारे का हुआ विसर्जन, चौगान में उमड़ा जनसैलाब घुघरी/चौगान में आज सुप्रसिद्ध ज्वारे का विसर्जन पूरे विधि-विधान और भक्ति भाव के साथ सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और पूरे क्षेत्र में आस्था का माहौल देखने को मिला। सुबह से ही ज्वारे की शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर ज्वारे रखकर भजन-कीर्तन करती नजर आईं। ढोल-नगाड़ों और जयकारों से पूरा चौगान गूंज उठा।
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    सुप्रसिद्ध ज्वारे का हुआ विसर्जन, चौगान में उमड़ा जनसैलाब
घुघरी/चौगान में आज सुप्रसिद्ध ज्वारे का विसर्जन पूरे विधि-विधान और भक्ति भाव के साथ सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और पूरे क्षेत्र में आस्था का माहौल देखने को मिला।
सुबह से ही ज्वारे की शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर ज्वारे रखकर भजन-कीर्तन करती नजर आईं। ढोल-नगाड़ों और जयकारों से पूरा चौगान गूंज उठा।
    user_Akash Chakarwarti
    Akash Chakarwarti
    Local News Reporter घुघरी, मंडला, मध्य प्रदेश•
    17 hrs ago
  • Post by Neelesh THAKUR
    1
    Post by Neelesh THAKUR
    user_Neelesh THAKUR
    Neelesh THAKUR
    मंडला, मंडला, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
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