Shuru
Apke Nagar Ki App…
सिवनी जिले के कान्हीवाड़ा थाना क्षेत्र में एक 50 वर्षीय व्यक्ति ने जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया। बताया गया है कि उसे जिला अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया।
Devendra thakur
सिवनी जिले के कान्हीवाड़ा थाना क्षेत्र में एक 50 वर्षीय व्यक्ति ने जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया। बताया गया है कि उसे जिला अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया।
More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
- दिल्ली के एक ज्वेलर को सिवनी के एक मोबाइल नंबर से ₹2 करोड़ की फिरौती के लिए धमकी दी गई है। इस मामले में गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम सामने आया है, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने इस धमकी की जांच शुरू कर दी है।1
- मध्य प्रदेश के डिंडोरी जिले के एक व्यवसायी ने अपनी ईमानदारी का परिचय दिया है। उन्होंने सरकार को ₹2.64 करोड़ रुपये की राशि वापस की है।1
- सिवनी जिले में बाढ़ प्रबंधन और आपदा से निपटने की तैयारियों के तहत शुक्रवार को एक मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। यह अभ्यास कलेक्टर श्रीमती नेहा मीना के निर्देशानुसार और डिस्ट्रिक्ट कमांडेंट होमगार्ड के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। मॉक ड्रिल के दौरान, संभावित बाढ़ की स्थिति में त्वरित और प्रभावी बचाव कार्यों का प्रदर्शन किया गया, जिसमें प्रभावित व्यक्तियों को सुरक्षित निकालने और राहत कार्यों के संचालन की प्रक्रिया का डेमोंस्ट्रेशन शामिल था। इस अभ्यास में लाइफ बॉय, लाइफ जैकेट, बोट, आउटबोर्ड मोटर (ओबीएम) और डीप डाइविंग सेट जैसे आवश्यक बाढ़ बचाव उपकरणों का उपयोग दिखाया गया। प्लाटून कमांडर श्री धनेंद्र अंगारे और एएसआई श्री आनंद कौशल सहित होमगार्ड के कर्मचारी और क्यूआरटी/एसडीईआरएफ के जवान इस आयोजन में उपस्थित रहे। जिला प्रशासन ने जानकारी दी है कि मानसून को देखते हुए सभी संबंधित विभागों को सतर्क रहने और आपदा प्रबंधन के लिए आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इस तरह की मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य आपदा की स्थिति में विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और त्वरित राहत एवं बचाव कार्यों की क्षमता को मजबूत करना है।1
- सिवनी की कलेक्टर नेहा मीना ने शुक्रवार, 19 जून को विकासखंड सिवनी के आंगनबाड़ी केंद्र कोहका एवं केकड़वानी का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने बच्चों के बीच पहुंचकर उनसे आत्मीय संवाद किया और उनकी शैक्षणिक गतिविधियों का अवलोकन भी किया, साथ ही बच्चों को दिए जा रहे भोजन की गुणवत्ता की भी पड़ताल की। निरीक्षण के दौरान, कलेक्टर ने बच्चों के लिए तैयार किए गए भोजन एवं नाश्ते की गुणवत्ता का स्वयं परीक्षण किया। उन्होंने भोजन चखकर उसके स्वाद, स्वच्छता और गुणवत्ता की जाँच की तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए कि वे निर्धारित मेन्यू के अनुसार पौष्टिक एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराएँ। श्रीमती मीना ने बच्चों से कविताएँ सुनीं और उन्हें एबीसीडी तथा अंक लिखने के लिए प्रोत्साहित किया; बच्चों द्वारा उत्साहपूर्वक कविताएँ सुनाने और अंक एवं अक्षर पहचानकर लिखने पर उन्होंने उनकी सराहना करते हुए शाबाशी दी और उनका उत्साह बढ़ाया। कलेक्टर नेहा मीना ने इस अवसर पर कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों के पोषण, प्रारंभिक शिक्षा और सर्वांगीण विकास की एक मजबूत आधारशिला हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण पोषण, बेहतर शिक्षा और स्नेहपूर्ण वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। निरीक्षण के समापन पर, उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं को बच्चों के समग्र विकास के लिए नियमित रूप से नवाचार आधारित गतिविधियाँ आयोजित करने तथा प्रत्येक बच्चे की सीखने की क्षमता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश भी दिए।1
- बालाघाट जिले में कोसुंबा-बांडारेव सड़क मार्ग की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। इस मार्ग की बदहाली के कारण स्थानीय ग्रामीणों को आवागमन में लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।1
- मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के परासिया में एक कुकिंग कॉम्पिटिशन का आयोजन किया गया, जहाँ विभिन्न रसोइयों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इस प्रतियोगिता के संबंध में यह जानकारी परासिया संवाददाता शेख फरीद द्वारा दी गई है।1
- मध्य प्रदेश के बिछुआ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से धड़ाम हो गई है, जहाँ एक बुजुर्ग महिला कई घंटों तक ऑक्सीजन के बिना साँसों के लिए तड़पती रही। अस्पताल में न तो रात के समय ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध था, न ही डॉक्टर और स्टाफ मौजूद थे, और एंबुलेंस का भी कोई अता-पता नहीं था। मजबूरन परिजनों को बाहर से निजी ऑक्सीजन सिलेंडर मंगाना पड़ा और निजी वाहन से मरीज को छिंदवाड़ा रेफर करना पड़ा, जिससे उनकी जान बच सकी। यह घटना बिछुआ अस्पताल की घोर लापरवाही को उजागर करती है, जहाँ मरीजों को इलाज की बजाय मौत का इंतजार करना पड़ता है। ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, बिछुआ अस्पताल में रात होते ही स्वास्थ्य व्यवस्था वेंटिलेटर पर चली जाती है। एक गंभीर मरीज 3 घंटे से अधिक समय तक बिस्तर पर तड़पता रहा, जबकि हाथ में कैनुला लगा था और ऑक्सीजन मास्क की सख्त जरूरत थी। आश्चर्यजनक रूप से, अस्पताल में एक भी ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं था, और सरकारी ऑक्सीजन प्लांट महज एक शोपीस बनकर रह गया है, जिसके सिलेंडर खाली पड़े हैं। सबसे शर्मनाक बात यह है कि रात के समय अस्पताल में कोई जिम्मेदार स्टाफ — न डॉक्टर, न नर्स, न वार्ड बॉय — मौजूद नहीं था, जिससे परिजनों को मदद के लिए इधर-उधर भटकना पड़ा और चिल्लाना पड़ा। स्थानीय लोगों का सीधा आरोप है कि BMO (ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर) की गैर-जिम्मेदारी ही इस बदहाली की जड़ है। BMO कथित तौर पर रोज़ाना सुबह हाजिरी लगाकर शाम होते ही अपने घर चले जाते हैं, जिससे रात में अस्पताल भगवान भरोसे रहता है। शासन के नियमों के अनुसार BMO को 24x7 अस्पताल में मौजूद रहना चाहिए और आपात स्थिति में रात में भी ड्यूटी देनी चाहिए, लेकिन बिछुआ में ये नियम ताक पर रख दिए गए हैं। ग्रामीण इसे BMO की लापरवाही का नतीजा मान रहे हैं, जिसने बिछुआ अस्पताल को मरीजों के लिए 'मौत का फरमान' बना दिया है। इस गंभीर लापरवाही के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। वे सवाल उठा रहे हैं कि 3 घंटे तक मरीज के तड़पने के दौरान अस्पताल का इंचार्ज कहाँ था, ऑक्सीजन सिलेंडर क्यों नहीं था, और सरकारी एंबुलेंस क्यों नदारद थी। स्वास्थ्य विभाग के बड़े अधिकारियों से तुरंत बिछुआ अस्पताल का रात में औचक निरीक्षण करने, दोषी BMO और लापरवाह स्टाफ पर कड़ी कार्रवाई करने, 24 घंटे डॉक्टर-स्टाफ की ड्यूटी सुनिश्चित करने और ऑक्सीजन प्लांट को तुरंत चालू करने की मांग की गई है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि इन मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो अगली खबर किसी मरीज की लाश की होगी, और उसके लिए सीधे तौर पर BMO की 'डेली अप-डाउन' वाली लापरवाही ही जिम्मेदार होगी।1
- सिवनी जिले के कान्हीवाड़ा थाना क्षेत्र में एक 50 वर्षीय व्यक्ति ने जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया। बताया गया है कि उसे जिला अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया।1