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कैलाश भाई कि मदद कपड़े कि फैक्ट्री है!, मिस्टी हेल्पिंग फाउंडेशन के ट्रस्टी के द्वारा

2 hrs ago
user_Misty Helping Foundation
Misty Helping Foundation
Voice of people Bilaspur, Yamunanagar•
2 hrs ago

कैलाश भाई कि मदद कपड़े कि फैक्ट्री है!, मिस्टी हेल्पिंग फाउंडेशन के ट्रस्टी के द्वारा

More news from Yamunanagar and nearby areas
  • कैलाश भाई कि मदद कपड़े कि फैक्ट्री है!, मिस्टी हेल्पिंग फाउंडेशन के ट्रस्टी के द्वारा
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    कैलाश भाई कि मदद कपड़े कि फैक्ट्री है!, मिस्टी हेल्पिंग फाउंडेशन के ट्रस्टी के द्वारा
    user_Misty Helping Foundation
    Misty Helping Foundation
    Voice of people Bilaspur, Yamunanagar•
    2 hrs ago
  • प्रदर्शन के माध्यम से यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि महिलाओं के सम्मान और उनके अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। आज देश की महिलाएं जागरूक हैं और अपने अधिकारों के लिए मजबूती से खड़ी हैं। यह रोष प्रदर्शन महिलाओं की आवाज बुलंद करने का प्रतीक है। भारतीय जनता पार्टी सदैव महिला सशक्तिकरण के पक्ष में खड़ी रही है और आगे भी महिलाओं को उनका हक दिलाने के लिए निरंतर संघर्ष करती रहेगी।
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    प्रदर्शन के माध्यम से यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि महिलाओं के सम्मान और उनके अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। आज देश की महिलाएं जागरूक हैं और अपने अधिकारों के लिए मजबूती से खड़ी हैं।
यह रोष प्रदर्शन महिलाओं की आवाज बुलंद करने का प्रतीक है। भारतीय जनता पार्टी सदैव महिला सशक्तिकरण के पक्ष में खड़ी रही है और आगे भी महिलाओं को उनका हक दिलाने के लिए निरंतर संघर्ष करती रहेगी।
    user_Kulwant Singh Reporter India T
    Kulwant Singh Reporter India T
    Local News Reporter जगाधरी, यमुनानगर, हरियाणा•
    1 hr ago
  • Post by Jagadhri Breaking News
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    Post by Jagadhri Breaking News
    user_Jagadhri Breaking News
    Jagadhri Breaking News
    Local News Reporter जगाधरी, यमुनानगर, हरियाणा•
    4 hrs ago
  • 22-04-2026 आज यमुनानगर के Anand Public School, Professor Colony के बाहर अभिभावकों द्वारा जोरदार रोष प्रदर्शन किया गया। यह प्रदर्शन निजी स्कूलों द्वारा की जा रही किताबों की लूट के खिलाफ आयोजित किया गया। प्रदर्शन के दौरान अभिभावकों ने आरोप लगाया कि स्कूल प्रशासन द्वारा अभिभावकों को विशेष पब्लिशर्स (Publishers) की किताबें खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है।
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    22-04-2026
आज यमुनानगर के Anand Public School, Professor Colony के बाहर अभिभावकों द्वारा जोरदार रोष प्रदर्शन किया गया। यह प्रदर्शन निजी स्कूलों द्वारा की जा रही किताबों की लूट के खिलाफ आयोजित किया गया।
प्रदर्शन के दौरान अभिभावकों ने आरोप लगाया कि स्कूल प्रशासन द्वारा अभिभावकों को विशेष पब्लिशर्स (Publishers) की किताबें खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है।
    user_Gulshan Dhiman
    Gulshan Dhiman
    रादौर, यमुनानगर, हरियाणा•
    1 hr ago
  • Post by Suresh gautam
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    Post by Suresh gautam
    user_Suresh gautam
    Suresh gautam
    बेहट, सहारनपुर, उत्तर प्रदेश•
    23 hrs ago
  • भाई दिन धर्म पर बैठकर कोई फायदा नहीं एक दूसरे की मदद करो और लखनऊ वालों की ज्यादा से ज्यादा मदद करें
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    भाई दिन धर्म पर बैठकर कोई फायदा नहीं एक दूसरे की मदद करो और लखनऊ वालों की ज्यादा से ज्यादा मदद करें
    user_Isran ali
    Isran ali
    Voice of people Behat, Saharanpur•
    23 hrs ago
  • मीडिया के जमीर से जनता का सवाल: "हम किसके रक्षक और काहे के पत्रकार, जब अपनों की चोट पर ही हम लाचार?" ​कुरुक्षेत्र की चौपालों से गूंजा कड़वा सच— "जो पत्रकार अपनों के साथ नहीं खड़ा, वो जनता की लड़ाई क्या लड़ेगा?" ​कुरुक्षेत्र (India News 9 Live): आज कुरुक्षेत्र की जागरूक जनता ने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी मीडिया को वह आईना दिखाया है जिसमें चेहरा देखना शायद हर पत्रकार के लिए मुश्किल होगा। जनता ने किसी राजनेता से नहीं, बल्कि सीधा पत्रकारों की बिरादरी से पूछा है कि आप किसका प्रचार कर रहे हैं और किसकी ढाल बन रहे हैं? ​आईने के सामने खड़े मीडिया से जनता के सीधे सवाल: ​लाचार पत्रकार या सरकारी प्रचारक? जनता पूछ रही है कि जब सच दिखाने वाले एक पत्रकार के परिवार को निशाना बनाया जाता है, उसे डराया-धमकाया जाता है, तो बाकी पत्रकार चुप क्यों रहते हैं? क्या हम वाकई जनता की आवाज़ हैं या सिर्फ सत्ता के गुणगान का जरिया बन कर रह गए हैं? ​अपनों की बेरुखी और जनता का अविश्वास: ग्रामीणों का कहना है कि जब पत्रकार ही पत्रकार के अधिकार के लिए साथ खड़ा नहीं होता, तो आम आदमी किस पर भरोसा करे? " काहे की भ्रष्टाचार विरोधी सरकार और काहे के फिर पत्रकार, जब हम ही हैं लाचार"—यह जुमला आज हर उस शख्स की ज़ुबान पर है जो मीडिया को उम्मीद की नज़रों से देखता था। ​भ्रष्टाचार पर मौन क्यों? फैमिली आईडी की गड़बड़ी से डेढ़ साल तक तड़पते गरीब और कटे हुए राशन कार्डों पर मीडिया का एक बड़ा हिस्सा खामोश क्यों है? क्या अधिकारियों के गैर-जिम्मेदार रवैये को उजागर करना अब पत्रकारों के एजेंडे में नहीं रहा? ​रक्षक या भक्षक की मंशा? जो लोग चौथे स्तंभ को टारगेट कर रहे हैं, वे हमारे बच्चों के भविष्य को अंधकार में धकेल रहे हैं। जनता पूछ रही है कि क्या मीडिया इन 'क्रिमिनल माइंडसेट' वाले लोगों के खिलाफ खड़ा होने का साहस दिखाएगा? ​निष्कर्ष: जनता की खरी-खरी अब वक्त आ गया है कि मीडिया अपनी भूमिका को फिर से पहचाने। जनता का साफ संदेश है—वोट मांगने वाले चेहरे पुराने हो सकते हैं, लेकिन अगर उन्हें आइना दिखाने वाला पत्रकार ही डर गया या बिक गया, तो लोकतंत्र का भविष्य क्या होगा? ​मीडिया के आत्ममंथन की एक रिपोर्ट— विशाल शर्मा (Freelancer Journalist Researcher) जनता की आवाज
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    मीडिया के जमीर से जनता का सवाल: "हम किसके रक्षक और काहे के पत्रकार, जब अपनों की चोट पर ही हम लाचार?"
​कुरुक्षेत्र की चौपालों से गूंजा कड़वा सच— "जो पत्रकार अपनों के साथ नहीं खड़ा, वो जनता की लड़ाई क्या लड़ेगा?"
​कुरुक्षेत्र (India News 9 Live): आज कुरुक्षेत्र की जागरूक जनता ने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी मीडिया को वह आईना दिखाया है जिसमें चेहरा देखना शायद हर पत्रकार के लिए मुश्किल होगा। जनता ने किसी राजनेता से नहीं, बल्कि सीधा पत्रकारों की बिरादरी से पूछा है कि आप किसका प्रचार कर रहे हैं और किसकी ढाल बन रहे हैं?
​आईने के सामने खड़े मीडिया से जनता के सीधे सवाल:
​लाचार पत्रकार या सरकारी प्रचारक? जनता पूछ रही है कि जब सच दिखाने वाले एक पत्रकार के परिवार को निशाना बनाया जाता है, उसे डराया-धमकाया जाता है, तो बाकी पत्रकार चुप क्यों रहते हैं? क्या हम वाकई जनता की आवाज़ हैं या सिर्फ सत्ता के गुणगान का जरिया बन कर रह गए हैं?
​अपनों की बेरुखी और जनता का अविश्वास: ग्रामीणों का कहना है कि जब पत्रकार ही पत्रकार के अधिकार के लिए साथ खड़ा नहीं होता, तो आम आदमी किस पर भरोसा करे? " काहे की भ्रष्टाचार विरोधी सरकार और काहे के फिर पत्रकार, जब हम ही हैं
लाचार"—यह जुमला आज हर उस शख्स की ज़ुबान पर है जो मीडिया को उम्मीद की नज़रों से देखता था।
​भ्रष्टाचार पर मौन क्यों? फैमिली आईडी की गड़बड़ी से डेढ़ साल तक तड़पते गरीब और कटे हुए राशन कार्डों पर मीडिया का एक बड़ा हिस्सा खामोश क्यों है? क्या अधिकारियों के गैर-जिम्मेदार रवैये को उजागर करना अब पत्रकारों के एजेंडे में नहीं रहा?
​रक्षक या भक्षक की मंशा? जो लोग चौथे स्तंभ को टारगेट कर रहे हैं, वे हमारे बच्चों के भविष्य को अंधकार में धकेल रहे हैं। जनता पूछ रही है कि क्या मीडिया इन 'क्रिमिनल माइंडसेट' वाले लोगों के खिलाफ खड़ा होने का साहस दिखाएगा?
​निष्कर्ष: जनता की खरी-खरी
अब वक्त आ गया है कि मीडिया अपनी भूमिका को फिर से पहचाने। जनता का साफ संदेश है—वोट मांगने वाले चेहरे पुराने हो सकते हैं, लेकिन अगर उन्हें आइना दिखाने वाला पत्रकार ही डर गया या बिक गया, तो लोकतंत्र का भविष्य क्या होगा?
​मीडिया के आत्ममंथन की एक रिपोर्ट—
विशाल शर्मा (Freelancer Journalist Researcher) जनता की आवाज
    user_IndiaNews 9Live
    IndiaNews 9Live
    Media company Ladwa, Kurukshetra•
    20 min ago
  • जय सिटी कॉलोनी में आज उस समय हड़कंप मच गया जब डीटीपी विभाग की टीम ने अचानक पहुंचकर कार्रवाई शुरू कर दी। बिना किसी पूर्व सूचना के हुई इस कार्रवाई से स्थानीय लोगों में भारी रोष देखने को मिला। कॉलोनीवासियों का आरोप है कि उन्हें न तो कोई नोटिस दिया गया और न ही अपनी बात रखने का मौका मिला। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि क्या बिना प्रक्रिया पूरी किए इस तरह की कार्रवाई जायज है? जगाधरी की जय सिटी कॉलोनी में डीटीपी विभाग की टीम ने कथित अवैध निर्माण को लेकर तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू की। टीम के पहुंचते ही कॉलोनी के लोग इकट्टा हो गए और विरोध प्रदर्शन करने लगे। लोगों का कहना है कि उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई से यहां मकान बनाए हैं और सरकार व नगर निगम के नाम पर सभी जरूरी शुल्क भी जमा करवाए हैं। बावजूद इसके, बिना किसी नोटिस के इस तरह की कार्रवाई करना सरासर अन्याय है। कॉलोनीवासियों का आरोप है कि अधिकारियों ने उनके घरों के सामने गड्ढे खोद दिए और तोड़फोड़ शुरू कर दी, जिससे इलाके में तनाव का माहौल बन गया।
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    जय सिटी कॉलोनी में आज उस समय हड़कंप मच गया जब डीटीपी विभाग की टीम ने अचानक पहुंचकर कार्रवाई शुरू कर दी। बिना किसी पूर्व सूचना के हुई इस कार्रवाई से स्थानीय लोगों में भारी रोष देखने को मिला। कॉलोनीवासियों का आरोप है कि उन्हें न तो कोई नोटिस दिया गया और न ही अपनी बात रखने का मौका मिला। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि क्या बिना प्रक्रिया पूरी किए इस तरह की कार्रवाई जायज है?
जगाधरी की जय सिटी कॉलोनी में डीटीपी विभाग की टीम ने कथित अवैध निर्माण को लेकर तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू की। टीम के पहुंचते ही कॉलोनी के लोग इकट्टा  हो गए और विरोध प्रदर्शन करने लगे। लोगों का कहना है कि उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई से यहां मकान बनाए हैं और सरकार व नगर निगम के नाम पर सभी जरूरी शुल्क भी जमा करवाए हैं। बावजूद इसके, बिना किसी नोटिस के इस तरह की कार्रवाई करना सरासर अन्याय है।
कॉलोनीवासियों का आरोप है कि अधिकारियों ने उनके घरों के सामने गड्ढे खोद दिए और तोड़फोड़ शुरू कर दी, जिससे इलाके में तनाव का माहौल बन गया।
    user_Kulwant Singh Reporter India T
    Kulwant Singh Reporter India T
    Local News Reporter जगाधरी, यमुनानगर, हरियाणा•
    2 hrs ago
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