पॉलिप्लेक्स फैक्ट्री एक बार फिर विवादों के घेरे मजदूरों ने किया प्रदर्शन बाजपुर में पॉलिप्लेक्स फैक्ट्री के ‘काले साम्राज्य’ के खिलाफ महाजंग बाजपुर में स्थित पॉलिप्लेक्स फैक्ट्री एक बार फिर विवादों के घेरे में है, जहां सैकड़ों मजदूरों का गुस्सा अब सड़कों पर फूट पड़ा है। वर्षों से अंदर ही अंदर सुलग रही नाराजगी ने आखिरकार बड़ा रूप ले लिया। मजदूरों का आरोप है कि कंपनी उनके खून-पसीने से करोड़ों की कमाई कर रही है, लेकिन बदले में उन्हें न तो उचित वेतन मिल रहा है और न ही सुरक्षित कार्यस्थल। बताया जा रहा है कि फैक्ट्री के अंदर सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी हो रही है। मजदूरों का कहना है कि कई बार हादसे हो चुके हैं, जिनमें कुछ लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए, लेकिन कंपनी प्रबंधन ने न तो उनकी उचित चिकित्सा करवाई और न ही कोई मुआवजा दिया। आरोप है कि घायल मजदूरों को चुपचाप बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है, ताकि मामला दबा रहे। घटना के दिन हालात तब बिगड़ गए जब एक और मजदूर के घायल होने की खबर फैली। इसके बाद मजदूरों ने काम बंद कर दिया और फैक्ट्री गेट पर इकट्ठा होकर जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया। “खून-पसीना हमारा, तिजोरी कंपनी की — अब नहीं चलेगा” जैसे नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। प्रदर्शन के दौरान मजदूरों ने कंपनी प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर अड़े रहे। मजदूरों की मुख्य मांगों में सुरक्षित कार्यस्थल, उचित वेतन, हादसों में घायल होने पर इलाज और मुआवजा, तथा नौकरी की सुरक्षा शामिल है। उनका कहना है कि जब तक इन मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन भी हरकत में आया। मौके पर पहुंची पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थिति को संभालने की कोशिश की और मजदूरों से बातचीत कर मामला शांत कराने का प्रयास किया। अधिकारियों ने जांच और उचित कार्रवाई का भरोसा दिया है। फिलहाल बाजपुर में माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। मजदूरों का कहना है कि यह सिर्फ शुरुआत है, अगर उनकी आवाज नहीं सुनी गई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। अब सबकी नजर प्रशासन और कंपनी प्रबंधन के अगले कदम पर टिकी है—क्या मजदूरों को न्याय मिलेगा या फिर यह ‘काला साम्राज्य’ यूं ही चलता रहेगा?
पॉलिप्लेक्स फैक्ट्री एक बार फिर विवादों के घेरे मजदूरों ने किया प्रदर्शन बाजपुर में पॉलिप्लेक्स फैक्ट्री के ‘काले साम्राज्य’ के खिलाफ महाजंग बाजपुर में स्थित पॉलिप्लेक्स फैक्ट्री एक बार फिर विवादों के घेरे में है, जहां सैकड़ों मजदूरों का गुस्सा अब सड़कों पर फूट पड़ा है। वर्षों से अंदर ही अंदर सुलग रही नाराजगी ने आखिरकार बड़ा रूप ले लिया। मजदूरों का आरोप है कि कंपनी उनके खून-पसीने से करोड़ों की कमाई कर रही है, लेकिन बदले में उन्हें न तो उचित वेतन मिल रहा है और न ही सुरक्षित कार्यस्थल। बताया जा रहा है कि फैक्ट्री के अंदर सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी हो रही है। मजदूरों का कहना है कि कई बार हादसे हो चुके हैं, जिनमें कुछ लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए, लेकिन कंपनी प्रबंधन ने न तो उनकी उचित चिकित्सा करवाई और न ही कोई मुआवजा दिया। आरोप है कि घायल मजदूरों को चुपचाप बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है, ताकि मामला दबा रहे। घटना के दिन हालात तब बिगड़ गए जब एक और मजदूर के घायल होने की खबर फैली। इसके बाद मजदूरों ने काम बंद कर दिया और फैक्ट्री गेट पर इकट्ठा होकर जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया। “खून-पसीना हमारा, तिजोरी कंपनी की — अब नहीं चलेगा” जैसे नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। प्रदर्शन के दौरान मजदूरों ने कंपनी प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर अड़े रहे। मजदूरों की मुख्य मांगों में सुरक्षित कार्यस्थल, उचित वेतन, हादसों में घायल होने पर इलाज और मुआवजा, तथा नौकरी की सुरक्षा शामिल है। उनका कहना है कि जब तक इन मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन भी हरकत में आया। मौके पर पहुंची पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थिति को संभालने की कोशिश की और मजदूरों से बातचीत कर मामला शांत कराने का प्रयास किया। अधिकारियों ने जांच और उचित कार्रवाई का भरोसा दिया है। फिलहाल बाजपुर में माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। मजदूरों का कहना है कि यह सिर्फ शुरुआत है, अगर उनकी आवाज नहीं सुनी गई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। अब सबकी नजर प्रशासन और कंपनी प्रबंधन के अगले कदम पर टिकी है—क्या मजदूरों को न्याय मिलेगा या फिर यह ‘काला साम्राज्य’ यूं ही चलता रहेगा?
- बाजपुर में पॉलिप्लेक्स फैक्ट्री के ‘काले साम्राज्य’ के खिलाफ महाजंग बाजपुर में स्थित पॉलिप्लेक्स फैक्ट्री एक बार फिर विवादों के घेरे में है, जहां सैकड़ों मजदूरों का गुस्सा अब सड़कों पर फूट पड़ा है। वर्षों से अंदर ही अंदर सुलग रही नाराजगी ने आखिरकार बड़ा रूप ले लिया। मजदूरों का आरोप है कि कंपनी उनके खून-पसीने से करोड़ों की कमाई कर रही है, लेकिन बदले में उन्हें न तो उचित वेतन मिल रहा है और न ही सुरक्षित कार्यस्थल। बताया जा रहा है कि फैक्ट्री के अंदर सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी हो रही है। मजदूरों का कहना है कि कई बार हादसे हो चुके हैं, जिनमें कुछ लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए, लेकिन कंपनी प्रबंधन ने न तो उनकी उचित चिकित्सा करवाई और न ही कोई मुआवजा दिया। आरोप है कि घायल मजदूरों को चुपचाप बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है, ताकि मामला दबा रहे। घटना के दिन हालात तब बिगड़ गए जब एक और मजदूर के घायल होने की खबर फैली। इसके बाद मजदूरों ने काम बंद कर दिया और फैक्ट्री गेट पर इकट्ठा होकर जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया। “खून-पसीना हमारा, तिजोरी कंपनी की — अब नहीं चलेगा” जैसे नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। प्रदर्शन के दौरान मजदूरों ने कंपनी प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर अड़े रहे। मजदूरों की मुख्य मांगों में सुरक्षित कार्यस्थल, उचित वेतन, हादसों में घायल होने पर इलाज और मुआवजा, तथा नौकरी की सुरक्षा शामिल है। उनका कहना है कि जब तक इन मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन भी हरकत में आया। मौके पर पहुंची पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थिति को संभालने की कोशिश की और मजदूरों से बातचीत कर मामला शांत कराने का प्रयास किया। अधिकारियों ने जांच और उचित कार्रवाई का भरोसा दिया है। फिलहाल बाजपुर में माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। मजदूरों का कहना है कि यह सिर्फ शुरुआत है, अगर उनकी आवाज नहीं सुनी गई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। अब सबकी नजर प्रशासन और कंपनी प्रबंधन के अगले कदम पर टिकी है—क्या मजदूरों को न्याय मिलेगा या फिर यह ‘काला साम्राज्य’ यूं ही चलता रहेगा?1
- उत्तराखंड के रुद्रपुर से बड़ी खबर: मेट्रोपोलिस में गेट तोड़ा तो मचा हड़कंप, 37 वर्षीय युवक ने पत्नी से वीडियो कॉल पर बात करते हुए फांसी लगाकर दी जान1
- बाजपुर में पॉलिप्लेक्स फैक्ट्री के 'काले साम्राज्य' के खिलाफ महाजंग सैकड़ों मजदूरों का फूटा गुस्सा,खून-पसीना हमारा, तिजोरी कंपनी की',अब नहीं चलेगा पॉलिप्लेक्स में सुरक्षा के नाम पर 'मौत का खेल', घायल हुए तो सीधे बाहर का रास्ता1
- गर्मी बनी ‘हेल्थ इमरजेंसी’, 43°C पार तापमान से हालात बेहाल देशभर में गर्मी अब सिर्फ मौसम नहीं, बल्कि गंभीर Health Emergency का रूप ले चुकी है। कई शहरों में तापमान 43°C के पार पहुंच चुका है, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा छा रहा है, वहीं अस्पतालों में हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक, लगातार बढ़ती गर्मी और लू के कारण बुजुर्ग, बच्चे और मजदूर वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। प्रशासन की ओर से एडवाइजरी जारी की जा रही है, लेकिन सवाल ये है कि क्या सिस्टम इस चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है? आपके शहर में हालात कैसे हैं? क्या वहां भी गर्मी ने ‘आपदा’ का रूप ले लिया है — ये सवाल अब हर किसी के मन में है।1
- रामपुर में लगातार हो रही बिजली कटौती से जनता परेशान है। समाजसेवी मामून शाह खान ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोगों को बिना वजह परेशान किया जा रहा है। पतंग के तार के नाम पर हो रही कटौती से आम लोग काफी दिक्कत में हैं।मामून शाह खान ने इस मामले को लेकर बिजली विभाग के अधिकारियों से मुलाकात भी की और जल्द समाधान की मांग की। साथ ही स्मार्ट मीटर को लेकर आ रही समस्याओं पर भी उन्होंने नाराजगी जताई। वीडियो में जानिए पूरा मामला और क्या कहा मामून शाह खान ने।1
- ना रोड हे न नाली हे ना लाइट हे वार्ड 9 झंडा चोक स्टेडियम रोड1
- gram Shahpura Jila Rampur post dhanupura Tahsil Tanda1
- उधम सिंह नगर के गदरपुर क्षेत्र के ग्राम सेमल पूरी की एक जनजाति महिला ने गंभीर आरोप लगाते हुए स्थानीय विधायक अरविन्द पांडे और उनके पुत्र अतुल पांडे पर करीब 4 एकड़ भूमि हड़पने का आरोप लगाया है। पीड़ित महिला, गुलरभोज नगर पंचायत के चेयरमैन सतीश चुघ के साथ एसडीएम अमृता शर्मा के पास पहुंची और पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई। महिला का आरोप है कि उसकी जमीन पर दबाव बनाकर कब्जा किया गया है। उसने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और जमीन वापस दिलाने की मांग की है। वहीं, एसडीएम अमृता शर्मा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश देने की बात कही है। प्रशासन का कहना है कि जांच के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी और उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस मामले ने क्षेत्र में राजनीतिक हलचल तेज कर दी है और अब सभी की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है।1