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दर्शकों से एक वीडियो अपने बच्चों को दिखाने का आग्रह किया गया है। यह सुझाव इस उम्मीद के साथ दिया गया है कि संभवतः इस वीडियो को देखने के बाद बच्चे मोबाइल फोन का इस्तेमाल करना छोड़ सकते हैं।
Shahdol news
दर्शकों से एक वीडियो अपने बच्चों को दिखाने का आग्रह किया गया है। यह सुझाव इस उम्मीद के साथ दिया गया है कि संभवतः इस वीडियो को देखने के बाद बच्चे मोबाइल फोन का इस्तेमाल करना छोड़ सकते हैं।
More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
- अनूपपुर जिले के बिजुरी स्थित प्राथमिक चिकित्सालय परिसर में दोपहर लगभग 2 बजे एक व्यक्ति की मोटरसाइकिल की डिक्की से ₹50,000 की चोरी हो गई। अज्ञात चोर ने पहले आराम से इलाके की रेकी की और फिर मौका पाकर बाइक की डिक्की से रुपये निकालकर फरार हो गया। यह घटना एक बार फिर दर्शाती है कि मोटरसाइकिल की डिक्की नकदी या अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज रखने के लिए एक सुरक्षित स्थान नहीं है। ऐसी थोड़ी सी लापरवाही से बड़ी आर्थिक हानि हो सकती है। लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है कि वे बाइक की डिक्की में अधिक नकदी न रखें और जरूरी दस्तावेज व कीमती सामान अपने साथ रखें। अस्पताल, बाजार और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने की अपील की गई है। इसके अतिरिक्त, किसी भी संदिग्ध गतिविधि के दिखाई देने पर तुरंत पुलिस को सूचना देने को कहा गया है, क्योंकि अपराधी अक्सर ऐसी लापरवाही के मौकों की तलाश में रहते हैं।1
- Post by पंडित कृष्णा मिश्रा पत्रकार1
- दर्शकों से एक वीडियो अपने बच्चों को दिखाने का आग्रह किया गया है। यह सुझाव इस उम्मीद के साथ दिया गया है कि संभवतः इस वीडियो को देखने के बाद बच्चे मोबाइल फोन का इस्तेमाल करना छोड़ सकते हैं।1
- मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले के जैतहरी क्षेत्र से 16 दिन पहले छत्तीसगढ़ राज्य में प्रवेश करने वाले चार हाथियों का एक समूह आज सोमवार को घुसरिया बीट के चिचगोहना गांव में अरुण राय के खेत में पहुँचकर धान की फसल को अपना आहार बना रहा है। ये हाथी पिछले 13 दिनों से मरवाही वन मंडल एवं वन परिक्षेत्र के घुसरिया बीट में ठहरे हुए थे, और सोमवार को दिनभर लेंगरा डोंगरी पहाड़ के जंगल में बिताने के बाद शाम होते ही जंगल से बाहर आ गए। यह क्षेत्र छत्तीसगढ़ की सीमा से मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले की जैतहरी तहसील एवं वन परिक्षेत्र से लगभग 15 से 17 किलोमीटर दूर स्थित है। इस चार हाथियों के समूह में तीन हाथी 159 दिन पहले छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले अंतर्गत कटघोरा वन मंडल के जड़गा वन परिक्षेत्र में रहने वाले 50 से अधिक हाथियों के बड़े समूह से अलग हो गए थे। इन तीनों हाथियों के साथ विगत दो माह से एक बड़ा नर हाथी भी जुड़कर विचरण कर रहा है। यह समूह छत्तीसगढ़ के मरवाही वन मंडल एवं वन परिक्षेत्र से निकलकर मध्यप्रदेश के अनूपपुर, शहडोल और डिंडोरी होते हुए विगत 16 दिनों से एक बार फिर छत्तीसगढ़ राज्य के मरवाही वन मंडल एवं वन परिक्षेत्र के क्षेत्र में वापस आ गया है। इस दौरान, उन्होंने एक दिन शिवनी बीट में, दो दिन गुल्लीडांड़ के माडाकोट जंगल में बिताए, और पिछले 13 दिनों से वे घुसरिया बीट के लेंगरा डोंगरी जंगल में स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहे थे, जिसके बाद अब वे चिचगोहना गांव के खेत में धान खा रहे हैं।1
- उमरिया जिले में जनगणना के अंतर्गत मकानसूचीकरण का कार्य निर्धारित समय से पूर्व सफलतापूर्वक पूर्ण होने पर सोमवार को कलेक्टर सभागार में एक सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में कलेक्टर एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी श्रीमती राखी सहाय ने जनगणना कार्य में उत्कृष्ट योगदान देने वाले चार्ज अधिकारियों और तहसील स्तरीय अधिकारियों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्रीमती राखी सहाय ने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के समर्पण, टीम भावना और सक्रिय सहयोग की सराहना की, जिसकी बदौलत मकानसूचीकरण का कार्य तय समय से पहले पूरा किया जा सका। उन्होंने जनगणना को शासन की एक महत्वपूर्ण एवं आधारभूत प्रक्रिया बताया और भविष्य में भी इसी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने की अपेक्षा व्यक्त की। श्रीमती सहाय ने इस उपलब्धि को उमरिया जिले की पूरी टीम की मेहनत और समन्वय का परिणाम बताया। जिला जनगणना अधिकारी एवं अपर कलेक्टर प्रमोद कुमार सेन गुप्ता ने जानकारी दी कि मकानसूचीकरण कार्य के लिए जिले में 12 चार्ज अधिकारियों की नियुक्ति की गई थी, जिसमें 1203 प्रगणकों और 204 सुपरवाइजरों की सेवाएँ ली गईं। इनके माध्यम से कुल 1412 हाउस लिस्टिंग ब्लॉक (एचएलबी) का कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किया गया। उन्होंने चार्ज अधिकारियों, मास्टर ट्रेनरों, पटवारियों और शिक्षकों के योगदान की भी सराहना करते हुए भविष्य में इसी प्रकार सहयोग बनाए रखने का आह्वान किया। सम्मान समारोह के दौरान कलेक्टर एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी श्रीमती राखी सहाय ने जिला जनगणना अधिकारी एवं अपर कलेक्टर प्रमोद कुमार सेन गुप्ता, एसडीएम मानपुर हरनीत कौर कलसी, एसडीएम बांधवगढ़ अंबिकेश प्रताप सिंह, एसडीएम पाली मीनाक्षी इंगले, डिप्टी कलेक्टर एवं जिला जनगणना नोडल अधिकारी प्रत्यूष श्रीवास्तव, और जनगणना जिला उमरिया के पर्यवेक्षक अजय सिंह रजावत सहित विभिन्न चार्ज अधिकारियों एवं तहसील स्तरीय अधिकारियों को प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन मास्टर ट्रेनर सुशील मिश्रा ने किया।1
- मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में प्रदेश सरकार ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस संबंध में एक बड़ा बयान दिया है, जिसमें उन्होंने बताया कि UCC लागू करने से पहले प्रदेशभर के नागरिकों से सुझाव लिए जाएंगे। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस व्यवस्था से विभिन्न धर्मों की महिलाओं एवं बहनों को विवाह, विवाह-विच्छेद और पारिवारिक मामलों में समान अधिकार एवं बेहतर सुविधा मिल सकेगी। इस उद्देश्य के लिए प्रदेश में एक समिति का भी गठन किया गया है, जो सभी पक्षों से चर्चा कर सुझाव एकत्र करेगी। प्रदेश सरकार ने UCC को लागू करने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है और समिति जल्द ही सभी धर्मों के नागरिकों से सुझाव लेगी। इस मुद्दे को लेकर उमरिया सहित पूरे प्रदेश में चर्चाएं तेज हो गई हैं।1
- केशवाही के पुराना बस स्टैंड पर नया शॉपिंग डेस्टिनेशन, आकृति वस्त्रालय, खुल गया है, जो पूरे परिवार के लिए सभी प्रकार के कपड़े उपलब्ध कराता है। यहाँ ग्राहकों को ब्रांडेड जींस, बैगी शर्ट, टी-शर्ट के साथ-साथ छोटे बच्चों के लिए विशेष वीआईपी प्रिंट टी-शर्ट भी मिलेंगी। महिलाओं के लिए बेहतरीन साड़ियाँ और सलवार सूट भी इस वस्त्रालय की खास पेशकश हैं। आकृति वस्त्रालय अपने ग्राहकों से एक बार सेवा का मौका देने का अनुरोध करता है।1
- मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के बुढार थाना क्षेत्र से पुलिस की कथित 'पहचान चूक' का एक संवेदनशील और गंभीर मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली और डिजिटल वेरिफिकेशन के दावों पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बुढार के प्रतिष्ठित नागरिक श्री सत्यजीत शुक्ला के निवास पर बुढार थाना पुलिस की एक टीम अचानक पहुँच गई। पुलिस ने परिवार को बताया कि श्री सत्यजीत शुक्ला के खिलाफ धोखाधड़ी का कोई पुराना आपराधिक मामला लंबित है और वे उसी सिलसिले में पूछताछ तथा कार्रवाई के लिए आए हैं। पुलिस की इस अप्रत्याशित दस्तक से पूरा परिवार हैरान और भारी मानसिक तनाव में आ गया। इस विकट परिस्थिति में श्री सत्यजीत शुक्ला के पुत्र विकास शुक्ला ने घबराने के बजाय सूझबूझ का परिचय देते हुए तत्काल पूरी पुलिसिया कार्रवाई की लाइव वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू कर दी। कैमरे की मौजूदगी और विकास शुक्ला द्वारा पूछे गए तीखे, तथ्यात्मक और कानूनी सवालों के बाद पुलिस टीम असमंजस में पड़ गई। जब विकास शुक्ला ने पुलिस अधिकारियों से संबंधित मामले के पुख्ता अभिलेख, केस डायरी और पहचान संबंधी ठोस दस्तावेज मांगे, तब जाकर पुलिसिया तंत्र ने अपनी फाइलें दोबारा जाँचीं। गहन पूछताछ, दस्तावेजों के मिलान और वीडियो ग्राफ़ी के साक्ष्य के सामने आखिरकार बुढार पुलिस को अपनी तकनीकी और प्रक्रियात्मक चूक स्वीकार करनी पड़ी। पुलिस ने माना कि उन्हें जिस व्यक्ति की तलाश थी, वह कोई और था और यह भारी भ्रम नाम तथा उपनाम (सत्यजीत शुक्ला) की समानता के कारण उत्पन्न हुआ था। बाद में पुलिस अधिकारियों ने स्थिति को संभालते हुए स्पष्ट किया कि इस पीड़ित परिवार के श्री सत्यजीत शुक्ला के नाम पर बुढार थाने में ऐसा कोई भी आपराधिक रिकॉर्ड दर्ज नहीं है और न ही उनके खिलाफ कोई कार्रवाई लंबित है। इसके बाद पुलिस ने परिवार को आश्वस्त किया और वहाँ से लौट गई। हालाँकि, पुलिस की 'सॉरी' के साथ मामला खत्म होने के बावजूद, पत्रकारों और समाजसेवियों ने इस घटना के बाद प्रशासनिक व्यवस्था से कुछ सीधे और कड़े सवाल पूछे हैं। उन्होंने सवाल उठाया है कि क्या सिर्फ नाम की समानता किसी को भी संदिग्ध बना देगी और क्या शाहडोल पुलिस के पास किसी के घर दबिश देने से पहले 'मल्टी-लेवल वेरिफिकेशन' (जैसे पिता का नाम, उम्र, हुलिया, पता और आधार/पहचान पत्र का मिलान) की कोई व्यवस्था नहीं है। इसके साथ ही, इस गरिमापूर्ण परिवार को पुलिस के घर पहुँचने से जो मानसिक आघात और सामाजिक असहजता झेलनी पड़ी, उसकी भरपाई कौन करेगा, इस पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। यह भी पूछा गया कि यदि जागरूक युवा विकास शुक्ला ने पूरी सजगता से वीडियो रिकॉर्डिंग न की होती और तीखे सवाल न पूछे होते, तो क्या पुलिस अपनी गलती इतनी आसानी से मानती या फिर किसी निर्दोष को थाने के चक्कर काटने पड़ते। इस घटना के बाद पीड़ित शुक्ला परिवार और स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने इस पूरे घटनाक्रम की उच्च स्तरीय प्रशासनिक समीक्षा की मांग की है। उनका कहना है कि आधुनिक पुलिसिंग के इस दौर में, जहाँ डिजिटल रिकॉर्ड और सीसीटीएनएस जैसी प्रणालियाँ मौजूद हैं, वहाँ इस तरह की मानवीय और प्रक्रियात्मक त्रुटियां असहनीय हैं। नागरिकों ने भविष्य में बुढार या पूरे शहडोल संभाग में किसी भी अन्य निर्दोष नागरिक के मौलिक अधिकारों, सम्मान और मानसिक शांति के साथ ऐसा खिलवाड़ न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए पुलिस द्वारा रिकॉर्ड के शत-प्रतिशत सत्यापन की मांग की है।1