रिया बड़ी में मानसून की पहली बारिश ने ही नगर पालिका की जल निकासी व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। बारिश के बाद क्षेत्र के कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति बन गई, जिससे सड़कों पर पानी बहने लगा और राहगीरों व स्थानीय लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। स्थानीय निवासियों के अनुसार, कई नालों में पानी के बहाव की जगह मिट्टी, घास, छोटे पौधे और अन्य अवरोध दिखाई दे रहे हैं, जिसके कारण बारिश का पानी नालों में जाने के बजाय सड़कों पर जमा हो गया। स्थानीय अधिवक्ता सुखदेव भाटी ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि नालों, गलियों और मोहल्लों की नियमित सफाई केवल सरकारी रिकॉर्ड तक सीमित है। कागजों में रोजाना सफाई का दावा किया जाता है और सफाई व्यवस्था के नाम पर बड़ी राशि खर्च की जाती है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल अलग है। नगरवासियों ने नगर पालिका प्रशासन से तत्काल नालों की सफाई कराने, जल निकासी सुचारु बनाने, नियमित निगरानी रखने और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। इस संबंध में समाचार लिखे जाने तक नगर पालिका प्रशासन का पक्ष सामने नहीं आ सका है।
रिया बड़ी में मानसून की पहली बारिश ने ही नगर पालिका की जल निकासी व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। बारिश के बाद क्षेत्र के कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति बन गई, जिससे सड़कों पर पानी बहने लगा और राहगीरों व स्थानीय लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। स्थानीय निवासियों के अनुसार, कई नालों में पानी के बहाव की जगह मिट्टी, घास, छोटे पौधे और अन्य अवरोध दिखाई दे रहे हैं, जिसके कारण बारिश का पानी नालों में जाने के बजाय सड़कों पर जमा हो गया। स्थानीय अधिवक्ता सुखदेव भाटी ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि नालों, गलियों और मोहल्लों की नियमित सफाई केवल सरकारी रिकॉर्ड तक सीमित है। कागजों में रोजाना सफाई का दावा किया जाता है और सफाई व्यवस्था के नाम पर बड़ी राशि खर्च की जाती है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल अलग है। नगरवासियों ने नगर पालिका प्रशासन से तत्काल नालों की सफाई कराने, जल निकासी सुचारु बनाने, नियमित निगरानी रखने और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। इस संबंध में समाचार लिखे जाने तक नगर पालिका प्रशासन का पक्ष सामने नहीं आ सका है।
- रिया बड़ी में मानसून की पहली बारिश ने ही नगर पालिका की जल निकासी व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। बारिश के बाद क्षेत्र के कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति बन गई, जिससे सड़कों पर पानी बहने लगा और राहगीरों व स्थानीय लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। स्थानीय निवासियों के अनुसार, कई नालों में पानी के बहाव की जगह मिट्टी, घास, छोटे पौधे और अन्य अवरोध दिखाई दे रहे हैं, जिसके कारण बारिश का पानी नालों में जाने के बजाय सड़कों पर जमा हो गया। स्थानीय अधिवक्ता सुखदेव भाटी ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि नालों, गलियों और मोहल्लों की नियमित सफाई केवल सरकारी रिकॉर्ड तक सीमित है। कागजों में रोजाना सफाई का दावा किया जाता है और सफाई व्यवस्था के नाम पर बड़ी राशि खर्च की जाती है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल अलग है। नगरवासियों ने नगर पालिका प्रशासन से तत्काल नालों की सफाई कराने, जल निकासी सुचारु बनाने, नियमित निगरानी रखने और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। इस संबंध में समाचार लिखे जाने तक नगर पालिका प्रशासन का पक्ष सामने नहीं आ सका है।1
- अजमेर के पीसांगन में विद्यालय के छात्रों के साथ हुई घटना के बाद प्रशासन ने कदम उठाया है। इस घटना के उपरांत पुलिस, प्रशासन और स्थानीय ग्रामीणों के बीच बैठक संपन्न हुई।3
- अजमेर के पीसांगन स्थित भटसूरी ग्राम पंचायत के बखतावरपुरा गांव में बीते 17 जुलाई को 70 वर्षीय विधवा गांधी देवी का शव घर के आंगन में चारपाई पर संदिग्ध अवस्था में मिला था। परिजनों और ग्रामीणों ने इसे सुनियोजित हत्या करार देते हुए पुलिस जांच की धीमी गति पर गहरा रोष प्रकट किया है। घटना के सात दिन बीत जाने के बाद भी मामले का पर्दाफाश न होने से आक्रोशित ग्रामीणों ने पीसांगन थाना पुलिस को ज्ञापन सौंपा है। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही इस मामले का खुलासा नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे। वहीं दूसरी ओर, पुलिस ने एफएसएल (FSL) और फॉरेंसिक साक्ष्यों के तकनीकी विश्लेषण के आधार पर निष्पक्ष जांच करने और जल्द से जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया है।1
- भाजपा समर्थकों और कुछ सोशल मीडिया रिपोर्टों का दावा है कि 'कॉकरोच जनता पार्टी' कोई साधारण छात्र आंदोलन नहीं है। उनका आरोप है कि यह आम आदमी पार्टी और कांग्रेस जैसी विपक्षी पार्टियों द्वारा समर्थित एक सोची-समझी 'सोशल मीडिया टूलकिट' या राजनीतिक प्रयोग है, जिसका सीधा मकसद युवाओं को भड़काना और पीएम मोदी की छवि को नुकसान पहुँचाना है। दूसरी तरफ, आंदोलनकारी छात्रों और स्वतंत्र विश्लेषकों का कहना है कि सरकार अपनी कमियों को छिपाने के लिए छात्रों की वास्तविक आवाज और शांतिपूर्ण विरोध को 'राजनीति से प्रेरित' बता रही है। छात्रों का आरोप है कि सरकार इस तरह के दावे करके जनता को असली मुद्दों से गुमराह करने की कोशिश कर रही है। इसके अलावा, पूरे मामले में 'मोदी विरोध की राजनीति बनाम राहुल गांधी का पीएम चेहरा' का समीकरण भी चर्चा में है। विश्लेषण के अनुसार, भले ही मोदी को टारगेट किया जा रहा हो, लेकिन राहुल गांधी का पीएम बनना अभी दूर की कौड़ी है और विपक्ष की अपनी कई कमजोरियां सामने आ रही हैं।1
- जैतारण क्षेत्र में सहायक उपनिरीक्षक राकेश शर्मा का उनके पैतृक गांव में सैन्य और राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुए इस अंतिम संस्कार में हजारों लोगों की मौजूदगी रही और इस दौरान पूरे गांव में बेहद गमगीन माहौल बना रहा।1
- पाली के जैतारण क्षेत्र में दिवंगत सहायक उप निरीक्षक (ASI) श्री राकेश कुमार शर्मा की अंतिम यात्रा के दौरान उन्हें भावपूर्ण एवं भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस दौरान स्वर्गीय शर्मा को नमन करने और अंतिम विदाई देने के लिए ग्रामवासियों, क्षेत्रवासियों, जनसेवकों तथा समाज के सम्मानित नागरिकों का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। उपस्थित सभी लोगों ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए पुष्पांजलि अर्पित की और शोकाकुल परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएँ व्यक्त कीं।1
- अजमेर के दांतड़ा डोडियाना स्थित सांवरिया सेठ मंदिर में चल रही संगीतमय भागवत कथा में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है। कथा के दौरान कथावाचक शत्रुघ्न जी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि भागवत कथा के श्रवण से ही जीवन का उद्धार हो जाता है।1
- नागौर के मेड़ता में नाड़ी में करंट फैलने से एक भैंस की मौके पर ही मौत हो गई। इस हादसे के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।1