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पुलिस उपायुक्त पूर्वी महोदया के निर्देशन में मोहर्रम के त्यौहार को ध्यान में रखते हुए, प्रभारी निरीक्षक गाजीपुर ने अपने पुलिस बल के साथ थाना क्षेत्र के महत्वपूर्ण स्थानों और मार्गों पर फ्लैग मार्च किया। इस दौरान, आम जनता को सुरक्षा का एहसास कराया गया और शांति, सौहार्द तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
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पुलिस उपायुक्त पूर्वी महोदया के निर्देशन में मोहर्रम के त्यौहार को ध्यान में रखते हुए, प्रभारी निरीक्षक गाजीपुर ने अपने पुलिस बल के साथ थाना क्षेत्र के महत्वपूर्ण स्थानों और मार्गों पर फ्लैग मार्च किया। इस दौरान, आम जनता को सुरक्षा का एहसास कराया गया और शांति, सौहार्द तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
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- अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद, दान की गिनती में लगे लगभग 40 कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। इन कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई थी, जिसके बाद उनकी जगह अब बैंक द्वारा नए कर्मचारियों की तैनाती की गई है। इस घटनाक्रम के मद्देनजर मंदिर की सुरक्षा और निगरानी को मजबूत करते हुए सीसीटीवी कैमरों की संख्या में भी बढ़ोतरी की गई है। वहीं, इस पूरे मामले पर पवन पांडेय ने टिप्पणी करते हुए कहा है कि प्रभु श्रीराम ने खुद चढ़ावा चोरी की बात अखिलेश को बताई।1
- पुलिस उपायुक्त पूर्वी महोदया के निर्देशन में मोहर्रम के त्यौहार को ध्यान में रखते हुए, प्रभारी निरीक्षक गाजीपुर ने अपने पुलिस बल के साथ थाना क्षेत्र के महत्वपूर्ण स्थानों और मार्गों पर फ्लैग मार्च किया। इस दौरान, आम जनता को सुरक्षा का एहसास कराया गया और शांति, सौहार्द तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।1
- लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने अधिकारियों को तत्काल मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, घायलों के समुचित उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने और इस घटना की जांच कराने के भी आदेश दिए गए हैं।1
- लखनऊ में योगीराज के तहत, थाना विभूतिखंड क्षेत्र के जलवा क्लब, साइबर हाइट्स के बाहर एक किशोरी के साथ हुई गंभीर आपराधिक घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि जलवा क्लब में गांजा और अफीम परोसा जा रहा है, और इसी क्लब के बाहर एक महिला से मारपीट, नशेबाज़ी और वीडियो बनाकर उसे बदनाम करने का प्रयास किया गया। समिट पुलिस चौकी प्रभारी पर कार्रवाई न करने का भी गंभीर आरोप है। पीड़िता किशोरी ने बताया कि 25 जनवरी 2026 की रात करीब 12:10 बजे कुछ युवतियों ने उसे कागज़ात लौटाने के बहाने बुलाकर योजनाबद्ध तरीके से बेरहमी से पीटा। इस दौरान न केवल मारपीट की गई, बल्कि गाली-गलौज करते हुए उसका वीडियो भी बनवाया गया, जिससे उसे बदनाम करने की धमकी दी गई। किशोरी का कहना है कि आरोपी युवतियां पहले भी चोरी, धमकी और नशे की हालत में हिंसा जैसी घटनाओं में शामिल रही हैं। जलवा क्लब के बाहर देर रात तक खुलेआम नशेबाज़ी और गांजा पीने के कई वीडियो भी सामने आए हैं, जो कानून-व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाते हैं। घटना सीसीटीवी में कैद होने और 112 पर कॉल करने के बावजूद, अब तक प्राथमिकी (FIR) दर्ज न होना पुलिस की लापरवाही को दर्शाता है। किशोरी पीड़ित ने स्पष्ट किया है कि यदि लखनऊ पुलिस उनकी सुनवाई नहीं करती है, तो उन्हें न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा। उसने प्रशासन पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि एक तरफ योगी सरकार है और दूसरी तरफ लखनऊ पुलिस बेलगाम हो चुकी है, जिसके कारण उसकी शिकायत पर मुकदमा दर्ज नहीं किया जा रहा है। यह सवाल बना हुआ है कि क्या इस मामले में कार्रवाई होगी या इसे भी दबा दिया जाएगा।1
- लखनऊ में हुई एक घटना को लेकर मुख्यमंत्री ने एक बयान जारी किया है।1
- लखनऊ में अलीगंज स्थित लाइब्रेरी में लगी आग की घटना ने राजधानी की भवन सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है। इस हादसे के बाद अवैध निर्माण, अग्नि सुरक्षा मानकों की अनदेखी और अधिकारियों की कथित मिलीभगत को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यह घटना केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि व्यवस्थागत लापरवाही का परिणाम मानी जा रही है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मांग की है कि जिन भवनों में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हो रहा है, उन्हें तत्काल प्रभाव से बंद किया जाए। साथ ही, अवैध निर्माण को संरक्षण देने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि हर हादसे के बाद केवल शोक व्यक्त करना और घायलों के इलाज का आश्वासन देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी घटनाओं को जन्म देने वाली व्यवस्था में सुधार किया जाना बेहद ज़रूरी है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि भ्रष्टाचार और लापरवाही पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो भविष्य में भी ऐसे हादसे दोहराए जा सकते हैं। यह मामला केवल अलीगंज लाइब्रेरी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल भी उठाता है कि राजधानी में कितनी ऐसी इमारतें हैं जो बिना सुरक्षा मानकों के संचालित हो रही हैं और कभी भी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती हैं। नागरिकों ने सभी सार्वजनिक भवनों का विशेष सुरक्षा ऑडिट कराने और दोषियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था नहीं जागी, तो अगली दुर्घटना और भी गंभीर साबित हो सकती है। इस प्रकार, प्रशासन के लिए यह घटना एक कड़ी चेतावनी है कि जनता की सुरक्षा से जुड़े दावों को वास्तविक धरातल पर उतारा जाए।1