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मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सोमवार को ओबीसी महासभा के बैनर तले हजारों की संख्या में छात्रों, किसानों, युवाओं और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने विधानसभा का घेराव करने के लिए कूच किया। प्रदर्शनकारी प्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण को पूर्ण रूप से लागू करने और सरकारी भर्तियों में 13% पदों पर लगाए गए होल्ड को तत्काल समाप्त करने की मांग कर रहे थे। विधानसभा की ओर बढ़ रहे इन प्रदर्शनकारियों को जब पुलिस ने रंगमहल चौराहे पर भारी बैरिकेडिंग करके रोका, तो दोनों पक्षों के बीच तीखा संघर्ष देखने को मिला। इस दौरान उग्र प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स पर चढ़कर अपना कड़ा विरोध जताया, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन (वज्र वाहन) का इस्तेमाल किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस की इस कार्रवाई में कई लोग घायल हुए हैं, इसके बावजूद कार्यकर्ताओं का हौसला कम नहीं हुआ और वे वहीं सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। इसके बाद सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए पुलिस ने सैकड़ों कार्यकर्ताओं और प्रमुख नेताओं को हिरासत में ले लिया और बसों में भरकर थाने ले गई। हिरासत में लिए गए लोगों में ओबीसी महासभा राष्ट्रीय कोर कमेटी के सदस्य धर्मेंद्र कुशवाहा, राकेश लोधी, लोकेंद्र गुर्जर, सीबी कुशवाहा, डॉ. बृजेंद्र यादव, रूपेश यादव और ओबीसी महासभा युवा मोर्चा के सतना जिला अध्यक्ष दीपनारायण कुशवाहा (राजा सतना) सहित कई क्रांतिकारी साथी शामिल रहे। ओबीसी महासभा के इस आंदोलन को विपक्षी दलों का भी भारी समर्थन मिला। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघर, कांग्रेस विधायक सचिन यादव और समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज यादव ने खुद प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए। नेताओं ने सरकार को सख्त चेतावनी दी कि यदि ओबीसी वर्ग के अधिकारों की अनदेखी बंद नहीं की गई, तो यह आंदोलन सड़क से लेकर सदन तक और भी उग्र रूप धारण करेगा। वहीं, ओबीसी महासभा के नेताओं ने भी दो टूक शब्दों में कहा कि सरकार का यह दमनकारी रवैया उनके संघर्ष को रोक नहीं सकता और जब तक उन्हें संवैधानिक 27% अधिकार नहीं मिल जाता, तब तक यह लड़ाई लगातार जारी रहेगी।

8 hrs ago
user_Unchehra news
Unchehra news
News Anchor उंचाहरा, सतना, मध्य प्रदेश•
8 hrs ago

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सोमवार को ओबीसी महासभा के बैनर तले हजारों की संख्या में छात्रों, किसानों, युवाओं और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने विधानसभा का घेराव करने के लिए कूच किया। प्रदर्शनकारी प्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण को पूर्ण रूप से लागू करने और सरकारी भर्तियों में 13% पदों पर लगाए गए होल्ड को तत्काल समाप्त करने की मांग कर रहे थे। विधानसभा की ओर बढ़ रहे इन प्रदर्शनकारियों को जब पुलिस ने रंगमहल चौराहे पर भारी बैरिकेडिंग करके रोका, तो दोनों पक्षों के बीच तीखा संघर्ष देखने को मिला। इस दौरान उग्र प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स पर चढ़कर अपना कड़ा विरोध जताया, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन (वज्र वाहन) का इस्तेमाल किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस की इस कार्रवाई में कई लोग घायल हुए हैं, इसके बावजूद कार्यकर्ताओं का हौसला कम नहीं हुआ और वे वहीं सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। इसके बाद सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए पुलिस ने सैकड़ों कार्यकर्ताओं और प्रमुख नेताओं को हिरासत में ले लिया और बसों में भरकर थाने ले गई। हिरासत में लिए गए लोगों में ओबीसी महासभा राष्ट्रीय कोर कमेटी के सदस्य धर्मेंद्र कुशवाहा, राकेश लोधी, लोकेंद्र गुर्जर, सीबी कुशवाहा, डॉ. बृजेंद्र यादव, रूपेश यादव और ओबीसी महासभा युवा मोर्चा के सतना जिला अध्यक्ष दीपनारायण कुशवाहा (राजा सतना) सहित कई क्रांतिकारी साथी शामिल रहे। ओबीसी महासभा के इस आंदोलन को विपक्षी दलों का भी भारी समर्थन मिला। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघर, कांग्रेस विधायक सचिन यादव और समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज यादव ने खुद प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए। नेताओं ने सरकार को सख्त चेतावनी दी कि यदि ओबीसी वर्ग के अधिकारों की अनदेखी बंद नहीं की गई, तो यह आंदोलन सड़क से लेकर सदन तक और भी उग्र रूप धारण करेगा। वहीं, ओबीसी महासभा के नेताओं ने भी दो टूक शब्दों में कहा कि सरकार का यह दमनकारी रवैया उनके संघर्ष को रोक नहीं सकता और जब तक उन्हें संवैधानिक 27% अधिकार नहीं मिल जाता, तब तक यह लड़ाई लगातार जारी रहेगी।

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  • सतना जिले के मैहर अंतर्गत गोरैया गांव में पंचायत द्वारा डाली गई मोटर का बिल जमा न करने के कारण कनेक्शन काट दिया गया है। इस कनेक्शन के कट जाने की वजह से गांव के लोगों को बेहद गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इस असुविधा से परेशान होकर ग्रामीणों ने इस गंभीर समस्या का जल्द से जल्द कोई हल निकालने की गुहार लगाई है।
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    सतना जिले के मैहर अंतर्गत गोरैया गांव में पंचायत द्वारा डाली गई मोटर का बिल जमा न करने के कारण कनेक्शन काट दिया गया है। इस कनेक्शन के कट जाने की वजह से गांव के लोगों को बेहद गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इस असुविधा से परेशान होकर ग्रामीणों ने इस गंभीर समस्या का जल्द से जल्द कोई हल निकालने की गुहार लगाई है।
    user_Ramij Pandey
    Ramij Pandey
    मैहर, सतना, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • मैहर के शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय, पकरिया में 'नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0' अभियान के अंतर्गत थाना अमदरा पुलिस द्वारा एक जन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम के दौरान बच्चों को विभिन्न मनोरंजक एवं सहभागितापूर्ण खेलों के माध्यम से नशे के दुष्परिणामों की जानकारी दी गई। खेल-खेल में विद्यार्थियों को समझाया गया कि नशा उनके स्वास्थ्य, शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य के लिए हानिकारक है। इसके साथ ही, बच्चों को सदैव नशे से दूर रहकर एक सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
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    मैहर के शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय, पकरिया में 'नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0' अभियान के अंतर्गत थाना अमदरा पुलिस द्वारा एक जन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम के दौरान बच्चों को विभिन्न मनोरंजक एवं सहभागितापूर्ण खेलों के माध्यम से नशे के दुष्परिणामों की जानकारी दी गई। खेल-खेल में विद्यार्थियों को समझाया गया कि नशा उनके स्वास्थ्य, शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य के लिए हानिकारक है। इसके साथ ही, बच्चों को सदैव नशे से दूर रहकर एक सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
    user_Tej pratap Kacher
    Tej pratap Kacher
    Local News Reporter मैहर, सतना, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • मध्य प्रदेश के सतना जिले के मैहर अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत लोधोती में विकास कार्यों को लेकर सरपंच साहब के योगदान की जमकर सराहना की जा रही है। सरपंच साहब गाँव में बहुत ही बेहतरीन नाली निर्माण का कार्य करवा रहे हैं, जिसमें उनकी भूमिका बेहद सराहनीय है। उनके इस बेहतरीन कार्य को देखते हुए उन्हें मेडल दिए जाने की मांग उठाई गई है।
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    मध्य प्रदेश के सतना जिले के मैहर अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत लोधोती में विकास कार्यों को लेकर सरपंच साहब के योगदान की जमकर सराहना की जा रही है। सरपंच साहब गाँव में बहुत ही बेहतरीन नाली निर्माण का कार्य करवा रहे हैं, जिसमें उनकी भूमिका बेहद सराहनीय है। उनके इस बेहतरीन कार्य को देखते हुए उन्हें मेडल दिए जाने की मांग उठाई गई है।
    user_Maihar operator Opretor
    Maihar operator Opretor
    मैहर, सतना, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
  • मध्य प्रदेश में जनता को राशन मिलने की जगह सिर्फ आश्वासन दिया जा रहा है, वहीं पेंशन की जगह उन्हें केवल टेंशन मिल रही है।
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    मध्य प्रदेश में जनता को राशन मिलने की जगह सिर्फ आश्वासन दिया जा रहा है, वहीं पेंशन की जगह उन्हें केवल टेंशन मिल रही है।
    user_Satyanarayan tiwari
    Satyanarayan tiwari
    Local News Reporter मैहर•
    3 hrs ago
  • मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सोमवार को ओबीसी महासभा के बैनर तले हजारों की संख्या में छात्रों, किसानों, युवाओं और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने विधानसभा का घेराव करने के लिए कूच किया। प्रदर्शनकारी प्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण को पूर्ण रूप से लागू करने और सरकारी भर्तियों में 13% पदों पर लगाए गए होल्ड को तत्काल समाप्त करने की मांग कर रहे थे। विधानसभा की ओर बढ़ रहे इन प्रदर्शनकारियों को जब पुलिस ने रंगमहल चौराहे पर भारी बैरिकेडिंग करके रोका, तो दोनों पक्षों के बीच तीखा संघर्ष देखने को मिला। इस दौरान उग्र प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स पर चढ़कर अपना कड़ा विरोध जताया, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन (वज्र वाहन) का इस्तेमाल किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस की इस कार्रवाई में कई लोग घायल हुए हैं, इसके बावजूद कार्यकर्ताओं का हौसला कम नहीं हुआ और वे वहीं सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। इसके बाद सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए पुलिस ने सैकड़ों कार्यकर्ताओं और प्रमुख नेताओं को हिरासत में ले लिया और बसों में भरकर थाने ले गई। हिरासत में लिए गए लोगों में ओबीसी महासभा राष्ट्रीय कोर कमेटी के सदस्य धर्मेंद्र कुशवाहा, राकेश लोधी, लोकेंद्र गुर्जर, सीबी कुशवाहा, डॉ. बृजेंद्र यादव, रूपेश यादव और ओबीसी महासभा युवा मोर्चा के सतना जिला अध्यक्ष दीपनारायण कुशवाहा (राजा सतना) सहित कई क्रांतिकारी साथी शामिल रहे। ओबीसी महासभा के इस आंदोलन को विपक्षी दलों का भी भारी समर्थन मिला। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघर, कांग्रेस विधायक सचिन यादव और समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज यादव ने खुद प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए। नेताओं ने सरकार को सख्त चेतावनी दी कि यदि ओबीसी वर्ग के अधिकारों की अनदेखी बंद नहीं की गई, तो यह आंदोलन सड़क से लेकर सदन तक और भी उग्र रूप धारण करेगा। वहीं, ओबीसी महासभा के नेताओं ने भी दो टूक शब्दों में कहा कि सरकार का यह दमनकारी रवैया उनके संघर्ष को रोक नहीं सकता और जब तक उन्हें संवैधानिक 27% अधिकार नहीं मिल जाता, तब तक यह लड़ाई लगातार जारी रहेगी।
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    मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सोमवार को ओबीसी महासभा के बैनर तले हजारों की संख्या में छात्रों, किसानों, युवाओं और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने विधानसभा का घेराव करने के लिए कूच किया। प्रदर्शनकारी प्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण को पूर्ण रूप से लागू करने और सरकारी भर्तियों में 13% पदों पर लगाए गए होल्ड को तत्काल समाप्त करने की मांग कर रहे थे। विधानसभा की ओर बढ़ रहे इन प्रदर्शनकारियों को जब पुलिस ने रंगमहल चौराहे पर भारी बैरिकेडिंग करके रोका, तो दोनों पक्षों के बीच तीखा संघर्ष देखने को मिला।

इस दौरान उग्र प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स पर चढ़कर अपना कड़ा विरोध जताया, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन (वज्र वाहन) का इस्तेमाल किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस की इस कार्रवाई में कई लोग घायल हुए हैं, इसके बावजूद कार्यकर्ताओं का हौसला कम नहीं हुआ और वे वहीं सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। इसके बाद सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए पुलिस ने सैकड़ों कार्यकर्ताओं और प्रमुख नेताओं को हिरासत में ले लिया और बसों में भरकर थाने ले गई। हिरासत में लिए गए लोगों में ओबीसी महासभा राष्ट्रीय कोर कमेटी के सदस्य धर्मेंद्र कुशवाहा, राकेश लोधी, लोकेंद्र गुर्जर, सीबी कुशवाहा, डॉ. बृजेंद्र यादव, रूपेश यादव और ओबीसी महासभा युवा मोर्चा के सतना जिला अध्यक्ष दीपनारायण कुशवाहा (राजा सतना) सहित कई क्रांतिकारी साथी शामिल रहे।

ओबीसी महासभा के इस आंदोलन को विपक्षी दलों का भी भारी समर्थन मिला। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघर, कांग्रेस विधायक सचिन यादव और समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज यादव ने खुद प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए। नेताओं ने सरकार को सख्त चेतावनी दी कि यदि ओबीसी वर्ग के अधिकारों की अनदेखी बंद नहीं की गई, तो यह आंदोलन सड़क से लेकर सदन तक और भी उग्र रूप धारण करेगा। वहीं, ओबीसी महासभा के नेताओं ने भी दो टूक शब्दों में कहा कि सरकार का यह दमनकारी रवैया उनके संघर्ष को रोक नहीं सकता और जब तक उन्हें संवैधानिक 27% अधिकार नहीं मिल जाता, तब तक यह लड़ाई लगातार जारी रहेगी।
    user_Unchehra news
    Unchehra news
    News Anchor उंचाहरा, सतना, मध्य प्रदेश•
    8 hrs ago
  • मध्य प्रदेश के सतना जिले की रामनगर (रामपुर बघेलान) तहसील कार्यालय में जनसुनवाई के बाद भारी हंगामा खड़ा हो गया, जहाँ आक्रोशित ग्रामीणों ने कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस की गाड़ी को चारों तरफ से घेर लिया। जनसुनवाई समाप्त होने के बाद जैसे ही कलेक्टर रवाना होने वाले थे, वैसे ही बाहर पहले से मौजूद महिलाओं सहित सैकड़ों ग्रामीणों ने उनके वाहन को रोक लिया और उन्हें करीब 45 मिनट तक बंधक जैसी स्थिति में रोके रखा। ग्रामीणों का गुस्सा इलाके में लंबे समय से लंबित पड़े राजस्व मामलों, जैसे नामांतरण और सीमांकन, को लेकर भड़का था। इसके साथ ही सरकारी राशन वितरण में भारी गड़बड़ी और खुलेआम होने वाली कालाबाजारी से भी स्थानीय लोग बेहद त्रस्त थे। प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना था कि जब जिले के सबसे बड़े अधिकारी खुद मौके पर आए हैं, तो केवल आवेदन लेकर लौटना कोई समाधान नहीं है, बल्कि लापरवाह अधिकारियों पर मौके पर ही कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। लगातार शिकायतों को नजरअंदाज किए जाने के कारण ही यह विरोध बेहद उग्र हो गया। हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस बल तुरंत मौके पर पहुंचा। इस दौरान कलेक्टर खुद गाड़ी से उतरकर जनता के बीच पहुंचे, लेकिन भारी शोर-शराबे और उग्र नारेबाजी के कारण उनकी बात ठीक से नहीं सुनी जा सकी। आखिरकार, पुलिस ने करीब 45 मिनट की कड़ी मशक्कत और समझाइश के बाद भीड़ को शांत कराया, जिसके बाद ही कलेक्टर का काफिला तहसील परिसर से सुरक्षित बाहर निकल सका।
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    मध्य प्रदेश के सतना जिले की रामनगर (रामपुर बघेलान) तहसील कार्यालय में जनसुनवाई के बाद भारी हंगामा खड़ा हो गया, जहाँ आक्रोशित ग्रामीणों ने कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस की गाड़ी को चारों तरफ से घेर लिया। जनसुनवाई समाप्त होने के बाद जैसे ही कलेक्टर रवाना होने वाले थे, वैसे ही बाहर पहले से मौजूद महिलाओं सहित सैकड़ों ग्रामीणों ने उनके वाहन को रोक लिया और उन्हें करीब 45 मिनट तक बंधक जैसी स्थिति में रोके रखा।

ग्रामीणों का गुस्सा इलाके में लंबे समय से लंबित पड़े राजस्व मामलों, जैसे नामांतरण और सीमांकन, को लेकर भड़का था। इसके साथ ही सरकारी राशन वितरण में भारी गड़बड़ी और खुलेआम होने वाली कालाबाजारी से भी स्थानीय लोग बेहद त्रस्त थे। प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना था कि जब जिले के सबसे बड़े अधिकारी खुद मौके पर आए हैं, तो केवल आवेदन लेकर लौटना कोई समाधान नहीं है, बल्कि लापरवाह अधिकारियों पर मौके पर ही कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। लगातार शिकायतों को नजरअंदाज किए जाने के कारण ही यह विरोध बेहद उग्र हो गया।

हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस बल तुरंत मौके पर पहुंचा। इस दौरान कलेक्टर खुद गाड़ी से उतरकर जनता के बीच पहुंचे, लेकिन भारी शोर-शराबे और उग्र नारेबाजी के कारण उनकी बात ठीक से नहीं सुनी जा सकी। आखिरकार, पुलिस ने करीब 45 मिनट की कड़ी मशक्कत और समझाइश के बाद भीड़ को शांत कराया, जिसके बाद ही कलेक्टर का काफिला तहसील परिसर से सुरक्षित बाहर निकल सका।
    user_Unchehra news
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    News Anchor उंचाहरा, सतना, मध्य प्रदेश•
    13 min ago
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