अटरिया में ‘ज़हर की धारा’: अस्पताल के दूषित पानी से तबाह हो रही खेती, किसानों में उबाल अटरिया में ‘ज़हर की धारा’: अस्पताल के दूषित पानी से तबाह हो रही खेती, किसानों में उबाल अटरिया/सिधौली (सीतापुर): इलाके में एक गंभीर पर्यावरणीय संकट सामने आया है, जहाँ सेवा और उपचार का केंद्र माने जाने वाला एक निजी अस्पताल अब विवादों के घेरे में है। आरोप है कि अस्पताल से निकलने वाला दूषित और रसायनयुक्त पानी सीधे टिकवाली माइनर में छोड़ा जा रहा है, जिससे नहर का पानी जहरीला होता जा रहा है। 🌾 खेती पर संकट, मिट्टी हो रही बंजर स्थानीय किसानों का कहना है कि इस प्रदूषित पानी से सिंचाई करने पर फसलें खराब हो रही हैं। खेतों में रसायनों का असर साफ दिखाई दे रहा है—पौधे सूख रहे हैं और मिट्टी की उर्वरता लगातार घट रही है। 🐄 पशुओं की जान पर बन आई ग्रामीणों के अनुसार, नहर का पानी पीने से कई पशु बीमार पड़ चुके हैं, जबकि कुछ की मौत होने की भी बात सामने आ रही है। इससे लोगों में डर और आक्रोश दोनों बढ़ रहे हैं। 🚧 सरकारी नहर पर कब्जे के आरोप आरोप यह भी है कि संबंधित अस्पताल प्रबंधन ने नहर के किनारे अवैध रूप से बाउंड्री वॉल खड़ी कर दी है, जिससे सरकारी संपत्ति का निजी उपयोग किया जा रहा है। 🏛️ प्रशासन की चुप्पी पर सवाल मामला लंबे समय से चलने के बावजूद संबंधित विभागों और अधिकारियों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। ⚖️ नियमों की अनदेखी? पर्यावरण से जुड़े नियमों के अनुसार, किसी भी अस्पताल को बिना ट्रीटमेंट के अपशिष्ट जल खुले स्रोतों में छोड़ने की अनुमति नहीं होती। ऐसे में यह मामला नियमों के उल्लंघन की ओर इशारा करता है। 🔥 आंदोलन की चेतावनी क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। 📌 निष्कर्ष: अटरिया की यह स्थिति केवल एक स्थानीय समस्या नहीं, बल्कि पर्यावरण और जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुकी है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन कब तक इस मामले में ठोस कदम उठाता है।
अटरिया में ‘ज़हर की धारा’: अस्पताल के दूषित पानी से तबाह हो रही खेती, किसानों में उबाल अटरिया में ‘ज़हर की धारा’: अस्पताल के दूषित पानी से तबाह हो रही खेती, किसानों में उबाल अटरिया/सिधौली (सीतापुर): इलाके में एक गंभीर पर्यावरणीय संकट सामने आया है, जहाँ सेवा और उपचार का केंद्र माने जाने वाला एक निजी अस्पताल अब विवादों के घेरे में है। आरोप है कि अस्पताल से निकलने वाला दूषित और रसायनयुक्त पानी सीधे टिकवाली माइनर में छोड़ा जा रहा है, जिससे नहर का पानी जहरीला होता जा रहा है। 🌾 खेती
पर संकट, मिट्टी हो रही बंजर स्थानीय किसानों का कहना है कि इस प्रदूषित पानी से सिंचाई करने पर फसलें खराब हो रही हैं। खेतों में रसायनों का असर साफ दिखाई दे रहा है—पौधे सूख रहे हैं और मिट्टी की उर्वरता लगातार घट रही है। 🐄 पशुओं की जान पर बन आई ग्रामीणों के अनुसार, नहर का पानी पीने से कई पशु बीमार पड़ चुके हैं, जबकि कुछ की मौत होने की भी बात सामने आ रही है। इससे लोगों में डर और आक्रोश दोनों बढ़ रहे हैं। 🚧 सरकारी नहर पर कब्जे
के आरोप आरोप यह भी है कि संबंधित अस्पताल प्रबंधन ने नहर के किनारे अवैध रूप से बाउंड्री वॉल खड़ी कर दी है, जिससे सरकारी संपत्ति का निजी उपयोग किया जा रहा है। 🏛️ प्रशासन की चुप्पी पर सवाल मामला लंबे समय से चलने के बावजूद संबंधित विभागों और अधिकारियों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। ⚖️ नियमों की अनदेखी? पर्यावरण से जुड़े नियमों के अनुसार, किसी भी अस्पताल को
बिना ट्रीटमेंट के अपशिष्ट जल खुले स्रोतों में छोड़ने की अनुमति नहीं होती। ऐसे में यह मामला नियमों के उल्लंघन की ओर इशारा करता है। 🔥 आंदोलन की चेतावनी क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। 📌 निष्कर्ष: अटरिया की यह स्थिति केवल एक स्थानीय समस्या नहीं, बल्कि पर्यावरण और जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुकी है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन कब तक इस मामले में ठोस कदम उठाता है।
- अटरिया में ‘ज़हर की धारा’: अस्पताल के दूषित पानी से तबाह हो रही खेती, किसानों में उबाल अटरिया/सिधौली (सीतापुर): इलाके में एक गंभीर पर्यावरणीय संकट सामने आया है, जहाँ सेवा और उपचार का केंद्र माने जाने वाला एक निजी अस्पताल अब विवादों के घेरे में है। आरोप है कि अस्पताल से निकलने वाला दूषित और रसायनयुक्त पानी सीधे टिकवाली माइनर में छोड़ा जा रहा है, जिससे नहर का पानी जहरीला होता जा रहा है। 🌾 खेती पर संकट, मिट्टी हो रही बंजर स्थानीय किसानों का कहना है कि इस प्रदूषित पानी से सिंचाई करने पर फसलें खराब हो रही हैं। खेतों में रसायनों का असर साफ दिखाई दे रहा है—पौधे सूख रहे हैं और मिट्टी की उर्वरता लगातार घट रही है। 🐄 पशुओं की जान पर बन आई ग्रामीणों के अनुसार, नहर का पानी पीने से कई पशु बीमार पड़ चुके हैं, जबकि कुछ की मौत होने की भी बात सामने आ रही है। इससे लोगों में डर और आक्रोश दोनों बढ़ रहे हैं। 🚧 सरकारी नहर पर कब्जे के आरोप आरोप यह भी है कि संबंधित अस्पताल प्रबंधन ने नहर के किनारे अवैध रूप से बाउंड्री वॉल खड़ी कर दी है, जिससे सरकारी संपत्ति का निजी उपयोग किया जा रहा है। 🏛️ प्रशासन की चुप्पी पर सवाल मामला लंबे समय से चलने के बावजूद संबंधित विभागों और अधिकारियों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। ⚖️ नियमों की अनदेखी? पर्यावरण से जुड़े नियमों के अनुसार, किसी भी अस्पताल को बिना ट्रीटमेंट के अपशिष्ट जल खुले स्रोतों में छोड़ने की अनुमति नहीं होती। ऐसे में यह मामला नियमों के उल्लंघन की ओर इशारा करता है। 🔥 आंदोलन की चेतावनी क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। 📌 निष्कर्ष: अटरिया की यह स्थिति केवल एक स्थानीय समस्या नहीं, बल्कि पर्यावरण और जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुकी है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन कब तक इस मामले में ठोस कदम उठाता है।4
- Post by Jhalko india news Akash Yadav1
- लखनऊ काकोरी पुलिस की सक्रियता से मात्र एक घण्टे में पांच दिन का खोया बैग पीड़ित को वापस लौटाया बैग मिला मिल गया सोना सारा सामान पाकर खुश हुवा पीड़ित दिया पुलिस को धन्यवाद लखनऊ के तारा का पुरवा थाना B,B,D निवासी लवकुश मौर्या पुत्र स्व0 राधेश्याम मौर्या अपने घर से 23 अप्रैल को काकोरी काम से आये थे कि काकोरी पहुँचने पर टैक्सी चालक को अपने फोन से किराया दिया और बैग उसी टैक्सी में छूट गया । टैक्सी जाने के बाद लवकुश को पता चला कि मेरा बैग टैक्सी में छूट गया इधर उधर बहुत खोजा लेकिन कुछ पता नही चला । थक हार कर 5 दिन बाद काकोरी थाना आकर अपनी समस्या को लिखित में शिकायत किया । थाना प्रभारी निरीक्षक सतीश राठौर ने शिकायत का संज्ञान लेते हुए कार्यवाही शुरू किया और मात्र एक घंटे में टैक्सी चालक तक काकोरी पुलिस पहुँच कर पीड़ित का बैग बरामद करते हुए कब्जे में ले लिया और बैग पीड़ित को वापस किया बैग मिलने के बाद पीड़ित काकोरी पुलिस को कोटि कोटि धन्यवाद देते हुए कहा कि लोगों ने कहा था कि अब कुछ होने वाला नही है लेकिन हम पांच दिन बाद मन नही माना और पुलिस के संपर्क में आये और हमारा करीब डेढ़ लाख का सोना व जरूरी कागजात सहित बैग सकुशल हमें काकोरी पुलिस ने वापस करा दिया जिससे हमें कहने में कोई गुरेज नही की हमारी पुलिस ईमानदारी व लग्न से पीड़ितों की समस्याओं का निस्तारण कर रही है।2
- अरविंद केजरीवाल की राजनीति खत्म #viralvideo #kejriwal #viralshort #viral #shorts1
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- Post by Sanjeev kumar4
- बाराबंकी के फतेहपुर कोतवाली क्षेत्र में एक शादी समारोह से मोटरसाइकिल चोरी का मामला सामने आया है। ग्राम पालपाटन निवासी प्रवेश कुमार ने अपनी परिचित की बाइक चोरी होने की रिपोर्ट दर्ज कराई है, जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। प्रवेश कुमार ने पुलिस को बताया कि 21 अप्रैल को वह अपने परिचित सुनील कुमार की काले रंग की पैशन प्रो मोटरसाइकिल (संख्या UP41P6166) लेकर ग्राम इसरौली में एक शादी समारोह में शामिल होने गए थे। समारोह में शामिल होने और भोजन करने के बाद जब वह रात करीब 10 बजे बाहर आए, तो मोटरसाइकिल मौके से गायब मिली। पीड़ित ने कई दिनों तक आसपास काफी खोजबीन की, लेकिन बाइक का कोई सुराग नहीं लग सका। इसके बाद, प्रवेश कुमार ने थाने पहुंचकर अज्ञात चोरों के खिलाफ तहरीर दी और मुकदमा दर्ज करने की मांग की। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए रिपोर्ट दर्ज कर ली है। कोतवाली प्रभारी अमित प्रताप सिंह ने जानकारी दी कि पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है और संदिग्ध लोगों से पूछताछ भी की जा रही है। अमित प्रताप सिंह ने बताया कि पुलिस जल्द ही मामले का खुलासा कर चोरी गई मोटरसाइकिल बरामद करने का प्रयास करेगी। इस घटना के बाद क्षेत्र में लोगों के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है और वे पुलिस से गश्त बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।1
- नहीं थम रहा इटौंजा थाना क्षेत्र का अवैध खनन रात भर गुजरते हैं थाने के गेट से काली मिट्टी भरे डंपर इटौंजा थाने से मात्र 500 मी नगर मोड़ पर देखी जा सकती हैं डाली गई काली मिट्टी सूत्रों के अनुसार 26 27 अप्रैल ग्राम पंचायत करौंदी के छतरतला तालाब की है काली मिट्टी अभी 2 महीना पहले ही नगर मोड़ पर ही तहसील द्वारा सीज हुआ था एक डंपर सवाल उठ रहा है बिना पुलिस के मिले मजाल है कोई एक ट्रैक्टर ट्रॉली मिट्टी ले जा सकता है यह बहुत बड़ा सवाल 👇2