एफडीडीआई बिहटा में सीबीएसई प्रधानाचार्यों का एक्सपोज़र विजिट बिहटा: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शनिवार को फुटवियर डिज़ाइन एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (एफडीडीआई), पटना में सीबीएसई के 40 से अधिक प्रधानाचार्यों का एक दिवसीय ‘एक्सपोज़र विजिट’ आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाचार्यों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्कूल प्रमुखों को कौशल आधारित प्रशिक्षण मॉडल से अवगत कराना तथा स्कूली शिक्षा में व्यावसायिक शिक्षा के समावेश की संभावनाओं पर विचार-विमर्श करना था। इस दौरान प्रतिभागियों को संस्थान की फुटवियर, फैशन डिजाइनिंग और रिटेल लैब का भ्रमण कराया गया। साथ ही पाठ्यक्रम, प्रशिक्षण पद्धति और रोजगारोन्मुखी कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यक्रम का उद्घाटन कार्यकारी निदेशक नीरज कुमार, मुख्य अतिथि प्रो. के.सी. सिन्हा, डॉ. संजीव कुमार जैन, प्रो. प्रदीप राजीव एवं प्रियंका कुमारी ने दीप प्रज्वलित कर किया। वक्ताओं ने अपने संबोधन में स्कूल स्तर पर नवाचार, डिजाइन थिंकिंग और तकनीकी शिक्षा के महत्व पर जोर दिया। कार्यक्रम के अंत में निदेशक ने सत्र 2026-27 के लिए प्रवेश की अंतिम तिथि 30 अप्रैल निर्धारित होने की जानकारी दी और छात्रों तक इस सूचना को पहुंचाने की अपील की। उपस्थित प्रधानाचार्यों ने कार्यक्रम को उपयोगी और ज्ञानवर्धक बताया।
एफडीडीआई बिहटा में सीबीएसई प्रधानाचार्यों का एक्सपोज़र विजिट बिहटा: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शनिवार को फुटवियर डिज़ाइन एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (एफडीडीआई), पटना में सीबीएसई के 40 से अधिक प्रधानाचार्यों का एक दिवसीय ‘एक्सपोज़र विजिट’ आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाचार्यों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्कूल प्रमुखों को कौशल आधारित प्रशिक्षण मॉडल से अवगत कराना तथा स्कूली शिक्षा में व्यावसायिक शिक्षा के समावेश की संभावनाओं पर विचार-विमर्श करना था। इस दौरान प्रतिभागियों को संस्थान की फुटवियर, फैशन डिजाइनिंग और रिटेल लैब का भ्रमण कराया गया। साथ ही पाठ्यक्रम, प्रशिक्षण पद्धति और रोजगारोन्मुखी कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यक्रम का उद्घाटन कार्यकारी निदेशक नीरज कुमार, मुख्य अतिथि प्रो. के.सी. सिन्हा, डॉ. संजीव कुमार जैन, प्रो. प्रदीप राजीव एवं प्रियंका कुमारी ने दीप प्रज्वलित कर किया। वक्ताओं ने अपने संबोधन में स्कूल स्तर पर नवाचार, डिजाइन थिंकिंग और तकनीकी शिक्षा के महत्व पर जोर दिया। कार्यक्रम के अंत में निदेशक ने सत्र 2026-27 के लिए प्रवेश की अंतिम तिथि 30 अप्रैल निर्धारित होने की जानकारी दी और छात्रों तक इस सूचना को पहुंचाने की अपील की। उपस्थित प्रधानाचार्यों ने कार्यक्रम को उपयोगी और ज्ञानवर्धक बताया।
- Mukhiyajee Reporter पटना एम्स रोड स्थित होटल रॉयल बिहार में 'न्यूरोवैस्कुलर अपडेट पटना 2026' के तहत एक उच्चस्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें देशभर से आए कई न्यूरो विशेषज्ञ डॉक्टरों ने भाग लिया. कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने न्यूरो संबंधी गंभीर बीमारियों, विशेषकर स्ट्रोक, ब्रेन हेमरेज और अन्य न्यूरोवैस्कुलर समस्याओं के आधुनिक इलाज पर विस्तृत चर्चा की और अपने अनुभव साझा किए। वर्कशॉप में डॉ. विकास चंद्र झा, डॉ. परितोष पांडे, डॉ. अनीता जगेटिया, डॉ. बतुक दियोरा और डॉ. दीपक सिंह सहित कई विशेषज्ञ डॉक्टरों ने भाग लिया। सभी ने ब्रेन एन्यूरिज्म, एवीएम, इस्केमिक स्ट्रोक जैसी जटिल बीमारियों के इलाज में उपयोग होने वाली अत्याधुनिक तकनीकों पर अपने अनुभव साझा किए। इस दौरान युवा डॉक्टरों को हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण भी दिया गया, जिससे उन्हें नई चिकित्सा पद्धतियों की व्यावहारिक जानकारी मिल सके। विशेषज्ञों ने कहा कि न्यूरो बीमारियों के बढ़ते मामलों को देखते हुए आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षित डॉक्टरों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है. कार्यक्रम में डॉ. राजू अग्रवाल, डॉ. संजय पांडे, डॉ. अरुण अग्रवाल, डॉ. समरेंद्र कुमार सिंह और डॉ. राजीव रंजन ने भी अपने विचार व्यक्त किए और ऐसे आयोजनों की आवश्यकता पर जोर दिया. यह कार्यशाला न्यूरो बीमारियों के बेहतर इलाज, जागरूकता और चिकित्सा सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक अहम पहल साबित हुई।2
- 10 साल की छात्रा रोशनी कुमारी हत्याकांड का पटना के सीनियर एसपी ने खुलासा किया , पटना एसएसपी कार्तिकेय शर्मा ने बताया, आरोपी रंजीत कुमार स्टूडेंट को पिछले डेढ़ महीने से सामान, रुपये देकर बहला फुसला रहा था। बुधवार (22 अप्रैल2026) को स्टूडेंट जब दूध देकर लौट रही थी, उस वक्त वो उसे अपने कमरे में ले गया। वहां दरवाजा बंद किया तब स्टूडेंट ने शोर मचाना शुरू कर दिया। इसी बीच आरोपी ने लोढ़ा से सिर पर हमला कर दिया, जिसमें स्टूडेंट की मौत हो गई।मौत के बाद आरोपी ने अपने बेड के नीचे बॉडी छिपा दी। अगली सुबह 23 April 2026 उसे तालाब में लेकर डालने के लिए जा रहा था। 100 मीटर आगे बढ़ा इसी बीच गश्ती गाड़ी वहां से गुजर रही थी।इसे देखकर वह गली में ही डेड बॉडी छोड़कर फरार हो गया। रंजीत के कमरे से लोढ़ा, खून से सना तकिया, दीवार पर लगे खून के छींटे, दूध वाला केन मिला है।घटना बाईपास थाना क्षेत्र की है। गुरुवार को रोशनी की डेड बॉडी मिली थी। इसके बाद से ही पुलिस जांच कर रही थी।इधर, घटना के बाद रंजीत आसपास में पुलिस की एक्टिविटी देखकर एविडेंस मिटाने में लगा था। कमरे को धीरे-धीरे साफ कर रहा था।उसमें से सामान बाहर फेंक रहा था। पुलिस ने इसकी एक्टिविटी देखकर इस पर आशंका जाहिर की और जब इसके कमरे में पहुंची तो इसके भेद खुल गए।#ApnaCityTakNews #PatnaCity #PatnaPolice #Patna #VairlNews1
- पटना में नाबालिक बच्ची की हत्या करने वाला आरोपी गिरफ्तार,प्रेस कॉन्फ्रेंस करते एसएसपी पटना1
- Post by एनामुल हक1
- पटना से एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है, जहां बाईपास थाना क्षेत्र में सामने आए एक नाबालिग बच्ची से जुड़े संवेदनशील मामले का पटना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सफल खुलासा किया है। 23 अप्रैल 2026 को इस मामले की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने तुरंत संज्ञान लिया और वरीय पुलिस अधीक्षक, पटना के निर्देशन में नगर पुलिस अधीक्षक (पूर्वी) की निगरानी तथा अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, पटना सिटी-02 के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। गठित टीम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए वैज्ञानिक और तकनीकी तरीके से जांच शुरू की। एफएसएल टीम, डॉग स्क्वॉड की सहायता ली गई, साथ ही आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज का बारीकी से विश्लेषण किया गया। तकनीकी साक्ष्य और मानवीय अनुसंधान के आधार पर पुलिस ने मामले में संलिप्त आरोपी रंजीत कुमार को छापेमारी कर गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने स्वीकार किया कि वह ठेले पर सामान बेचने का काम करता था और पिछले करीब डेढ़ महीने से बच्ची को बहलाने-फुसलाने का प्रयास कर रहा था। घटना के दिन, जब बच्ची दूध देकर अपने घर लौट रही थी, उसी दौरान आरोपी उसे अपने घर ले गया। वहां बच्ची द्वारा शोर मचाने की कोशिश की गई, जिसके बाद आरोपी ने गंभीर वारदात को अंजाम दिया। घटना के बाद आरोपी ने साक्ष्य छिपाने की कोशिश की। उसने शव को अपने घर में बेड के नीचे छिपा दिया और रात के समय उसे ठिकाने लगाने का प्रयास किया। हालांकि, पुलिस गश्ती को देखकर वह घबरा गया और शव को पास की गली में छोड़कर फरार हो गया। पुलिस को भ्रमित करने के उद्देश्य से उसने कुछ संदिग्ध वस्तुएं कूड़े में भी फेंक दीं। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर उसके घर और आसपास से कई महत्वपूर्ण साक्ष्य बरामद किए हैं, जिनमें खून लगा लोढ़ी, तकिए, कपड़े तथा बच्ची से जुड़ी अन्य वस्तुएं शामिल हैं। ये सभी साक्ष्य मामले की पुष्टि में अहम भूमिका निभा रहे हैं। इस दौरान, घटना के बाद कुछ लोगों द्वारा निजी स्वार्थ के चलते सड़क जाम कर पुलिस की जांच में बाधा डालने की कोशिश की गई। इस पर पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए अलग से मामला दर्ज किया और पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। फिलहाल, पुलिस इस पूरे मामले में आगे की विधिसम्मत कार्रवाई कर रही है और सभी पहलुओं की गहन जांच जारी है। इस त्वरित कार्रवाई के बाद स्थानीय स्तर पर पुलिस की सक्रियता और तत्परता की सराहना की जा रही है।1
- पटना: स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के तहत स्वच्छता सर्वेक्षण 2025-26 को लेकर राजधानी पटना में तैयारियां तेज हो गई हैं। केंद्रीय टीम आज शहर पहुंचेगी और फील्ड असेसमेंट की प्रक्रिया शुरू करेगी, जो 31 मई तक चलेगी। इस सर्वेक्षण में नागरिकों की भागीदारी को सबसे अहम माना गया है। केंद्रीय टीम शहरवासियों से सफाई व्यवस्था को लेकर सीधे सवाल-जवाब करेगी। इन्हीं जवाबों के आधार पर पटना नगर निगम की रैंकिंग तय की जाएगी। नगर निगम ने सर्वेक्षण को लेकर अपनी सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं और अधिक से अधिक नागरिकों से इसमें भाग लेने की अपील की है। लोगों से साफ-सफाई को लेकर जागरूक रहने और सही फीडबैक देने को कहा गया है। नागरिकों से पूछे जा सकते हैं ये सवाल: • क्या कचरा उठाने वाली गाड़ी नियमित आती है? • क्या आप गीला और सूखा कचरा अलग-अलग करते हैं? • क्या सड़कों और गलियों की सफाई से संतुष्ट हैं? • क्या सार्वजनिक शौचालय साफ-सुथरे रहते हैं? • क्या बाजार और व्यावसायिक इलाके साफ रहते हैं? • क्या आसपास कहीं कचरे का ढेर दिखता है? • क्या तालाब, नहर और नाले साफ हैं? • क्या आपको स्वच्छता से जुड़ी शिकायत के लिए ऐप की जानकारी है? नगर निगम ने लोगों से अपील की है कि वे सर्वेक्षण में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें, ताकि पटना को स्वच्छ शहरों की सूची में बेहतर स्थान मिल सके।1
- पटना/बिहटा:पटना से बक्सर जा रही एक ट्रेन में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब बिहटा रेलवे स्टेशन के पास एक युवक चलती ट्रेन से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसा इतना भयावह था कि युवक का एक पैर क"ट गया। घायल की पहचान बक्सर निवासी 22 वर्षीय सुनील पाण्डेय के रूप में हुई है, जो गोरखनाथ पाण्डेय के पुत्र बताए जा रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, युवक अचानक असंतुलित होकर ट्रेन से नीचे गिर गया और ट्रेन की चपेट में आ गया। घटना की सूचना मिलते ही बिहटा जीआरपी पुलिस मौके पर पहुंची और घाय"ल युवक को तुरंत स्थानीय रेफरल अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसका प्राथमिक उपचार किया जा रहा है। बिहटा रेल जीआरपी थाना प्रभारी आरती कुमारी ने बताया कि युवक चलती ट्रेन से कूदने के दौरान हादसे का शिकार हुआ। उन्होंने कहा कि पुलिस की त्वरित कार्रवाई से युवक को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सका।1
- Mukhiyajee Reporter | Patna राजधानी पटना में आयोजित 'न्यूरोवैस्कुलर अपडेट पटना 2026' सम्मेलन ने स्ट्रोक और ब्रेन हेमरेज के इलाज को लेकर एक नयी दिशा तय की, जहां विशेषज्ञों ने स्पष्ट कहा कि हाइब्रिड टेक्नोलॉजी के बिना अब प्रभावी और समयबद्ध इलाज संभव नहीं है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान पटना के न्यूरोसर्जरी विभाग द्वारा बिहार न्यूरोसर्जरी सोसाइटी और एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ ईस्टर्न न्यूरोसाइंटिस्ट्स ऑफ इंडिया के सहयोग से 25-26 अप्रैल को आयोजित इस दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस में देश-विदेश के विशेषज्ञों ने आधुनिक इलाज की चुनौतियों और समाधान पर विस्तार से चर्चा की। सम्मेलन का उद्घाटन एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक प्रो. (डॉ.) ब्रिगेडियर राजू अग्रवाल ने किया। उन्होंने न्यूरोवैस्कुलर देखभाल को मजबूत करने में संस्थान की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए कहा कि उन्नत तकनीक और प्रशिक्षित विशेषज्ञ ही मरीजों की जान बचाने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर के ख्यातिप्राप्त विशेषज्ञों—बसंत कुमार मिश्रा, संजय बिहारी, शरत चंद्र और मानस पाणिग्रही ने संयुक्त रूप से इस बात पर जोर दिया कि आधुनिक न्यूरोवैस्कुलर उपचार के लिए माइक्रोसर्जिकल और एंडोवैस्कुलर तकनीकों में समान दक्षता बेहद जरूरी है। उन्होंने गोल्डन आवर यानी लक्षण शुरू होने के चार घंटे के भीतर इलाज को जीवनरक्षक बताते हुए देशभर में हाइब्रिड ऑपरेटिंग थिएटर की स्थापना को प्राथमिकता देने की बात कही। विशेषज्ञों ने बिहार में न्यूरोवैस्कुलर बीमारियों के बढ़ते बोझ को गंभीर चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि राज्य में हर वर्ष करीब एक लाख मरीज स्ट्रोक और ब्रेन हेमरेज के इलाज के लिए सामने आते हैं, जबकि करीब दस लाख मामले जागरूकता और संसाधनों की कमी के कारण बिना पहचान या इलाज के रह जाते हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम के विस्तार, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास और नीति स्तर पर ठोस पहल की जरूरत बताई गयी। एम्स पटना के न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष तथा सम्मेलन के आयोजन सचिव डॉ. विकास चंद्र झा ने कहा कि देश में व्यापक न्यूरोवैस्कुलर सुविधाएं अभी भी बेहद सीमित हैं। पूरे भारत में लगभग 50 केंद्रों पर ही एंडोवैस्कुलर और माइक्रोसर्जिकल दोनों प्रकार की सेवाएं उपलब्ध हैं, जबकि बिहार में यह संख्या महज 1-2 केंद्रों तक सीमित है। उन्होंने मांग के अनुरूप इन सुविधाओं में कम से कम 100 गुना विस्तार की आवश्यकता बतायी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि देश में केवल 50-60 न्यूरोसर्जन ही दोनों तकनीकों में दक्ष हैं, जिससे प्रशिक्षित मानव संसाधन बढ़ाना समय की मांग बन गया है। इस सम्मेलन में देशभर से 300 से अधिक न्यूरोसाइंटिस्ट ने भाग लिया. डॉ. सुमित सिन्हा, डॉ. अरुण अग्रवाल, डॉ. समरेंद्र कुमार सिंह, डॉ. राजीव रंजन, डॉ. रोहित कुमार, डॉ. संजय कुमार, डॉ. गुंजन कुमार और डॉ. विकास गुप्ता समेत कई विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा करते हुए न्यूरोवैस्कुलर देखभाल को सुदृढ़ बनाने के लिए सामूहिक प्रयास पर जोर दिया।3
- Post by एनामुल हक1