अनुसूचित क्षेत्रों में वन विभाग के हस्तक्षेप पर रोक की मांग जेड ग्राम की ग्राम सभा एवं पहरा समिति ने किया लातेहार: पांच पड़हा जेर के पदाधिकारियों ने उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर अनुसूचित क्षेत्रों में वन विभाग के कथित असंवैधानिक हस्तक्षेप पर रोक लगाने की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया है कि पेसा अधिनियम 1996 की धारा 4(डी) के तहत आदिवासी ग्राम सभाओं को अपने पारंपरिक अधिकार, संस्कृति, संसाधनों और विवाद निपटान की व्यवस्था पर पूर्ण अधिकार प्राप्त है। पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि वन विभाग द्वारा ग्राम सभा की अनुमति के बिना ट्रेंच निर्माण सहित अन्य कार्य किए जा रहे हैं, जो कानून का उल्लंघन है। साथ ही झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा 29 जुलाई 2024 को जेपीआरए 2001 को असंवैधानिक करार देने का भी हवाला दिया गया। ज्ञापन में मांग की गई है कि अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा की अनुमति के बिना किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य और हस्तक्षेप तत्काल प्रभाव से रोका जाए। इसकी प्रतिलिपि डीएफओ और जिला परिषद को भी भेजी गई है।
अनुसूचित क्षेत्रों में वन विभाग के हस्तक्षेप पर रोक की मांग जेड ग्राम की ग्राम सभा एवं पहरा समिति ने किया लातेहार: पांच पड़हा जेर के पदाधिकारियों ने उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर अनुसूचित क्षेत्रों में वन विभाग के कथित असंवैधानिक हस्तक्षेप पर रोक लगाने की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया है कि पेसा अधिनियम 1996 की धारा 4(डी) के तहत आदिवासी ग्राम सभाओं को अपने पारंपरिक अधिकार, संस्कृति, संसाधनों और विवाद निपटान की व्यवस्था पर पूर्ण अधिकार प्राप्त है। पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि वन विभाग द्वारा ग्राम सभा की अनुमति के बिना ट्रेंच निर्माण सहित अन्य कार्य किए जा रहे हैं, जो कानून का उल्लंघन है। साथ ही झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा 29 जुलाई 2024 को जेपीआरए 2001 को असंवैधानिक करार देने का भी हवाला दिया गया। ज्ञापन में मांग की गई है कि अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा की अनुमति के बिना किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य और हस्तक्षेप तत्काल प्रभाव से रोका जाए। इसकी प्रतिलिपि डीएफओ और जिला परिषद को भी भेजी गई है।
- लातेहार: पांच पड़हा जेर के पदाधिकारियों ने उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर अनुसूचित क्षेत्रों में वन विभाग के कथित असंवैधानिक हस्तक्षेप पर रोक लगाने की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया है कि पेसा अधिनियम 1996 की धारा 4(डी) के तहत आदिवासी ग्राम सभाओं को अपने पारंपरिक अधिकार, संस्कृति, संसाधनों और विवाद निपटान की व्यवस्था पर पूर्ण अधिकार प्राप्त है। पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि वन विभाग द्वारा ग्राम सभा की अनुमति के बिना ट्रेंच निर्माण सहित अन्य कार्य किए जा रहे हैं, जो कानून का उल्लंघन है। साथ ही झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा 29 जुलाई 2024 को जेपीआरए 2001 को असंवैधानिक करार देने का भी हवाला दिया गया। ज्ञापन में मांग की गई है कि अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा की अनुमति के बिना किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य और हस्तक्षेप तत्काल प्रभाव से रोका जाए। इसकी प्रतिलिपि डीएफओ और जिला परिषद को भी भेजी गई है।1
- लातेहार: सर्किट हाउस में आयोजित प्रेसवार्ता में कांग्रेस जिला अध्यक्ष कामेश्वर यादव ने महिला आरक्षण बिल को लेकर भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि यह मुद्दा जनता को भ्रमित करने के लिए उठाया जा रहा है और इसे राजनीतिक प्रोपगेंडा के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस महिलाओं के वास्तविक सशक्तिकरण के पक्ष में है और इस विषय पर स्पष्ट नीति रखती है। प्रेसवार्ता के दौरान उन्होंने बिल से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां भी साझा कीं। मौके पर विधायक प्रतिनिधि हरिशंकर यादव, सेवा दल अध्यक्ष बृंद बिहारी यादव, महिला जिलाध्यक्ष अनीता देवी सहित कई कांग्रेसी कार्यकर्ता मौजूद रहे।1
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- ग्रामीण बोले आंगनबाड़ी केंद्र जर्जर होने की वजह से आंगनबाड़ी केंद्र बंद रहता है1
- महुआडांड प्रखंड स्थित ग्राम ओरसापाठ में आज प्रकृति पर्व सरहुल महोत्सव परंपरागत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मुख्य पुजारी बैगा संजय नगेसिया ने सरना स्थल पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और प्रकृति की रक्षा व ग्राम की सुख-समृद्धि की कामना की। *झंडे को लेकर उपजा विवाद* महोत्सव के दौरान उस समय तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई जब सरना स्थल पर 'चिरा झंडा' लगाए जाने का मामला सामने आया। जानकारी के अनुसार, आदिवासी एकता विकास मंच के विजय नगेसिया, विनोद उरांव, मंगलदेव नगेसिया, फतेश्वर मुंडा, चितरंजन उरांव और अम्वाटोली की भूतपूर्व मुखिया निष्ठामणी नगेसिया पर आरोप है कि उन्होंने ओरसापाठ के भोले-भले नगेसिया समाज के लोगों को कथित तौर पर गुमराह कर वहाँ चिरा झंडा लगवाया था। *ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने जताया विरोध* जैसे ही इसकी सूचना अन्य ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों को मिली, उन्होंने इसका पुरजोर विरोध किया। विवाद बढ़ता देख जिला परिषद सदस्य श्रीमती एस्तेला नगेसिया, वनवासी कल्याण आश्रम के जिला अध्यक्ष अजय कुमार उरांव और जनजाति सुरक्षा मंच के जिला संयोजक बालेश्वर बड़ाईक मौके पर पहुंचे। इनके साथ संच प्रमुख संजय कुमार सिंह, मंडल प्रमुख विगन नगेसिया, विश्वनाथ राम, अवधेश जयसवाल, सतेन्द्र जयसवाल, शंकर यादव एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने मिलकर उस विवादित झंडे को वहाँ से हटा दिया। *सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील* स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि धार्मिक स्थलों पर किसी भी प्रकार के बाहरी हस्तक्षेप या गुमराह करने वाली गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने समाज के लोगों से अपनी मूल परंपराओं के प्रति सजग रहने और आपसी भाईचारा बनाए रखने की अपील की। घटना के बाद गांव में स्थिति नियंत्रण में है और सरहुल का पर्व शांतिपूर्ण संपन्न हुआ।1