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हमारे पड़ोसी ओम प्रकाश मिश्रा जो कि दो गाय रखे हैं गोबर हमारे जमीन में बहते हैं पानी भी बहते हैं मेरा खेत बर्बाद हो रहा है मना करने की भी बात नहीं मानतेहैं बोलते जो करने कर लेना
Suneel
हमारे पड़ोसी ओम प्रकाश मिश्रा जो कि दो गाय रखे हैं गोबर हमारे जमीन में बहते हैं पानी भी बहते हैं मेरा खेत बर्बाद हो रहा है मना करने की भी बात नहीं मानतेहैं बोलते जो करने कर लेना
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- हमारे पड़ोसी ओम प्रकाश मिश्रा जो कि दो गाय रखे हैं गोबर हमारे जमीन में बहते हैं पानी भी बहते हैं मेरा खेत बर्बाद हो रहा है मना करने की भी बात नहीं मानतेहैं बोलते जो करने कर लेना1
- सड़क किनारे का यह अनोखा नज़ारा सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है। वीडियो में कुछ कुत्ते एक कुत्ते के सामने बैठकर ऐसे दिखाई दे रहे हैं जैसे आशीर्वाद ले रहे हों। लोग इसे मज़ाक में “बाबा डॉगेश्वर जी” कह रहे हैं। मासूमियत और भावनाओं से भरा यह दृश्य लोगों को खूब पसंद आ रहा है और इंटरनेट पर हंसी के साथ पॉजिटिव वाइब्स फैला रहा है। #ViralVideo #DogLovers #InternetSensation #FunnyReels #CuteAnimals #WholesomeContent1
- 💥बड़ी खबर💥 इंदौर से रीवा आ रही जय भवानी ट्रेवल्स की बस में लगी आग बस पूरी तरह जलकर हुई खाक। सभी यात्री सुरक्षित बाहर निकाल लिए गए और किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। पर मौके पर अफरा तफरी मच गई। घटना का वीडियो भी सामने आया है। जानकारी के अनुसार, बस का टायर फटने के बाद उसमें आग भड़क उठी। आग तेजी से फैली और देखते ही देखते पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया। आग लगते ही बस में सवार यात्रियों में हड़कंप मच गया। ढाबा कर्मचारियों और बस स्टाफ की त्वरित मदद से सभी यात्रियों को समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। कुछ ही मिनटों में आग ने पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया और वह जलकर राख हो गई। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। रायसेन जिले के बम्हौरी ढाबा के पास देर रात हुई दुर्घटना।1
- *आधा अधूरा मदरा टेला गंगा घाट के पुल से आवागमन चालू, हो सकती है अप्रिय घटना* मेजा प्रयागरज। हर वर्ष गंगा नदी पर दो जिले की सीमाओं को जोड़ने वाला मदरा टेला गंगा घाट पर बनने वाला कार्टून पुल का निर्माण कर आधा अधूरा किया गया है लेकिन आवागमन सुचारू रूप से चालू कर दिया गया है।मेजा क्षेत्र के मदरा टेला गंगा घाट पर बनाए जा रहे पार्टून पुल का निर्माण अभी आधा-अधूरा है, इसके बावजूद आवागमन चालू किए जाने की संभावना से लोगों की जान जोखिम में पड़ सकती है। पुल के कई हिस्से अभी असुरक्षित स्थिति में हैं, न तो मजबूत जोड़ पूरे हुए हैं और न ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, ऐसे में भारी वाहनों या अधिक भीड़ के दबाव से बड़ा हादसा होने की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय लोगों की माने तो पल के दोनों किनारे पर लगने वाला डिवाइड अभी तक नहीं लग पाया है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जब तक पुल का निर्माण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से पूरा न हो जाए, तब तक आवागमन पर रोक लगाई जाए, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।2
- Post by Vijay Bais2
- मोदी जी के मशीना नहीं ला1
- चिरहुला नाथ स्वामी की कृपा सदैव बनी रहे 🙏🙏1
- संजय टाइगर रिजर्व क्षेत्र में उम्मीद की उड़ान: सीधी के ठोंगा में दिखा गिद्धों का बड़ा समूह, अनुकूल होते पर्यावरण के संकेत सीधी जिले के मझौली जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत ठोंगा में 6 और 11 जनवरी को गिद्धों का एक बड़ा समूह देखे जाने से क्षेत्र में उत्सुकता और उम्मीद का माहौल बन गया है। विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुकी इस दुर्लभ प्रजाति के पक्षियों को ग्रामीणों ने अपने कैमरों में कैद किया, जिसके बाद वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरणविदों के बीच चर्चा तेज हो गई है। वर्षों बाद इस तरह से गिद्धों का झुंड दिखाई देना जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन की दृष्टि से एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। गिद्ध कत्थई और काले रंग के भारी कद के पक्षी होते हैं, जिनकी दृष्टि अत्यंत तेज होती है। शिकारी पक्षियों की तरह इनकी चोंच टेढ़ी और मजबूत होती है, हालांकि इनके पंजे उतने शक्तिशाली नहीं होते। ये झुंड में रहने वाले मुर्दाखोर पक्षी हैं, जो मृत पशुओं और सड़े-गले मांस को खाकर प्रकृति की सफाई में अहम भूमिका निभाते हैं। इसी कारण इन्हें “प्राकृतिक सफाईकर्मी” भी कहा जाता है। गिद्धों की आयु सामान्यतः 40 से 45 वर्ष तक होती है, लेकिन ये चार से छह साल की उम्र में ही प्रजनन योग्य हो पाते हैं। इनकी दृष्टि इंसानों से लगभग आठ गुना बेहतर मानी जाती है और यह खुले मैदान में चार मील दूर से भी शव देख सकते हैं। हालांकि बीते दो दशकों में गिद्धों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। इसका मुख्य कारण पशुचिकित्सा में उपयोग होने वाली डिक्लोफेनिक दवा रही है, जो मृत पशुओं के मांस के साथ गिद्धों के शरीर में पहुंचकर उनकी किडनी फेल कर देती है। वर्ष 2008 में इस दवा पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद इसके दुष्प्रभाव लंबे समय तक देखने को मिले। इसके अलावा हाई लेवल बिजली टॉवर और तारों से टकराने के कारण भी गिद्धों का पलायन और मृत्यु हुई है1