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जर्जर मकान की दीवार गिरी, बुजुर्ग की दबकर मौत से गांव में शोक
भानु प्रताप सिंह कानपुर देहात
जर्जर मकान की दीवार गिरी, बुजुर्ग की दबकर मौत से गांव में शोक
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- कंचौसी स्थित रामरतन इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट की परीक्षा देकर घर लौट रहे दो परीक्षार्थी सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना सोमवार शाम करीब 5:45 बजे कंचौसी–झींझक कैनाल रोड पर सरदारपुर गांव के पास हुई, जब उनकी मोटरसाइकिल अचानक अनियंत्रित होकर गिर गई। हादसे में घायल छात्रों की पहचान आशीष पाल पुत्र हरिश्चंद्र पाल और शिरोमणि पुत्र रामकुमार शर्मा, निवासी ग्राम बद्दापुरवा थाना मंगलपुर के रूप में हुई है। साथियों ने दोनों को तुरंत घायल अवस्था में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र झींझक पहुंचाया, जहां मौजूद डॉक्टर धीरेन्द्र सिंह ने प्राथमिक उपचार किया। डॉक्टर ने बताया कि दोनों की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया है। घटना के बाद परिजनों को सूचना दे दी गई है और मामले की जानकारी पुलिस को भी दे दी गई है।1
- Post by भानु प्रताप सिंह कानपुर देहात1
- हाई स्कूल की परीक्षा देकर लौट रहे छात्रों की बाइको की भिड़ंत में एक छात्र को जोरदार टककर लगने के कारण गंभीर रूप से जख्मी हो गया l जबकि अन्य बाइक सवार छात्र मौका पाकर बाइक समेत भागने में सफल रहे l दरअसल पूरी घटना जनपद कानपुर देहात के थाना सट्टी क्षेत्र के जहांगीरपुर गांव के सामने मुग़ल रोड की है l जहाँ हाई स्कूल की परीक्षा देकर वापस घर लौट रहे छात्रो की मोटर साइकिल में सामने से आ रही तेज रफ्तार मोटर साइकिल से भिड़ंत हो गयी l टककर इतनी तेज थी कि छात्र मोटर साइकिल से उछलकर रोड से दूर जा गिरा जिसको राहगीरों की मदद से निजी अस्पताल शाहजहांपुर भेजा गया l घटना में घायल छात्र अमन अली पुत्र यूनुस अली निवासी भोगनीपुर जबकि साथ में अन्य छात्र हर्षित कुमार निवासी हलधरपुर के रूप में पहचान हुई l वहीं परिजनों को घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे तथा गंभीर हालत देखते हुए घायल छात्र अमन अली को परिजन आनन फानन में उरई इलाज के लिए ले गए जहाँ छात्र अमन अली की हालत नाजुक बनी हुई है l1
- बासनाओं पर विजय ही सच्चा ब्रह्मचर्य: बहिन कंचन प्रभा शुक्ला इकबाल अहमद, कानपुर देहात। सिकंदरा तहसील क्षेत्र के रोहिणी गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कथा वाचिका आचार्य कंचन प्रभा शुक्ला ने कहा कि बासनाओं पर विजय पाना ही सच्चा ब्रह्मचर्य है। उन्होंने नारद मुनि की कथा का वर्णन करते हुए बताया कि ज्ञान और तपस्या पर गर्व करना भी मोह का कारण बन सकता है। भगवान विष्णु ने नारद मुनि की परीक्षा लेकर यह संदेश दिया कि सच्चा भक्त वही है जो अहंकार और कामना से दूर रहे। वहीं जय-विजय की कथा सुनाते हुए उन्होंने बताया कि भगवान विष्णु के द्वारपालों को सनकादिक ऋषियों के श्राप के कारण राक्षस योनि में जन्म लेना पड़ा और वे क्रमशः हिरण्याक्ष, हिरण्यकश्यप, रावण, कुंभकरण, शिशुपाल और दन्तवक्र के रूप में जन्मे। कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।2
- Post by Arvind Tiwari1
- औरैया। कस्बा खानपुर स्थित अस्थाई गौ आश्रय स्थल में उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी प्रेमचंद निरंजन ने गोकाष्ठ (गोबर से बनी लकड़ी) मशीन का पूजन कर शुभारंभ किया। पूजन सुरभि स्वयं सहायता समूह की पूनम शुक्ला द्वारा किया गया। गौशाला संचालक एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, कानपुर प्रांत के सह गौ सेवा संयोजक संतोष जी ने बताया कि मशीन में गोबर, सूखा भूसा और घास डालकर लकड़ी तैयार की जाएगी, जिसे बिक्री के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि गोकाष्ठ का उपयोग हवन, पूजा-पाठ, होलिका दहन एवं अंतिम संस्कार में किया जा सकेगा, जिससे पेड़ों की कटाई कम होगी और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। इस अवसर पर उत्कर्ष शुक्ला, रमा गुप्ता, विशाल, सुशील, बृजेश बंधु सहित अन्य लोग मौजूद रहे।2
- गाय का गोबर कई प्रकार की वस्तुओं को बनाने में उपयोग किया जाता है-: प्रेमचन्द निंरजन जी उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी औरैया, गाय गोबर भी कई प्रकार की वस्तुओं को बनाने में उपयोग किया जाता है। जैसे - खाद, बायोगैस, मच्छरमार अगरबत्ती, गमला आदि जो कि पूरी तरह प्राकृतिक और रसायन-मुक्त तरीके से बनाए जाते हैं। अब इस गोबर का इस्तेमाल गोकाष्ट (गाय के गोबर से बनी लकड़ी) बनाने में भी किया जाने लगा है। उक्त जानकारी उप मुख्य पशुचिकित्साधिकारी प्रेमचन्द निंरजन जी ने अस्थाई गौ आश्रय स्थल कस्बा खानपुर, औरैया में गोकाक मशीन का पूजन व उसे प्रारम्भ करते हुये दी। मशीन का पूजन पूनम शुक्ला, सुरभि स्वयं सहायता समूह के द्वारा किया गया। उन्होंने कहा कि यह गौशालाओं को स्वाबंलम्बी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी है। गौशाला संचालक एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, कानपुर प्रान्त के सह गौ सेवा संयोजक संतोष जी ने बताया कि गोकाक मशीन में आपको गाय का गोबर, सूखा भूसा और घास को मशीन में डालना होगा जिससे ये लकड़ी तैयार करेगा, जो कि लकड़ी केंद्र पर बिक्री के लिए उपलब्ध होगी। इससे गौशाला स्वावलम्बी बनने के साथ-साथ धार्मिक, सांस्कृतिक वैज्ञानिक एवं पर्यावरण रक्षा में अपनी महती भूमिका का निर्वहन करेगी। उन्होनें बताया कि गौकाष्ठ के जलने से नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है तथा इसका धुंआ कीटाणू रहित होता है। होलिका दहन के समय काफी लकड़ी को जलाया जाता है, यदि हम गौकाष्ट के द्वारा होलिका दहन करते है तो यह पर्यावरण संरक्षण में काफी महत्वपूर्ण पहल होगी। इसी तरह अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी प्राप्त करने के लिए भी बड़ी संख्या में पेड़ों को काट दिया जाता है जो कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है और अधिक धुआं भी पैदा करता है। इसी वजह से पर्यावरण को अनुकूल बनाने के लिए गोबर से बनी लकड़ी काफी फायदेमंद है। इस लकड़ी का उपयोग आप हवन, यज्ञ -पूजा पाठ, संस्कार आदि के लिए किया जायेगा और इसके साथ ही युवाओं के लिए भी रोजगार के साधन खुलेंगे। इसके साथ ही गौशाला में गाय के गोबर से बने अन्य उत्पाद जैसे मूर्तियां, फेसपैक धूपबती, हवनकप, पंचगव्य औषधि, मूर्ति दीपक, और दवा आदि उत्पाद भी उपलब्ध है। इस असवसर पर उत्कर्ष शुक्ला, रमा गुप्ता, विशाल, सुशील बृजेश बन्धु सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।1
- डेरापुर थाना क्षेत्र के एक गांव में शादी समारोह के दौरान जयमाल की रस्म के समय कहासुनी होने पर विवाह संबंध टूट गया। दोनों पक्षों की आपसी सहमति से शादी रद्द कर दी गई और बारात बिना विवाह के वापस लौट गई। हालांकि बारात लौटने का स्पष्ट कारण आधिकारिक रूप से सामने नहीं आया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार दूल्हा कथित रूप से शराब के नशे में था, जिसकी जानकारी दुल्हन को जयमाल के दौरान हुई और उसने रिश्ता ठुकरा दिया। जानकारी के मुताबिक क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति की 26 वर्षीय पुत्री का विवाह कानपुर नगर के बिठूर थाना क्षेत्र निवासी मोहित से 22 फरवरी को तय था। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार रविवार देर शाम बारात पूरे उत्साह के साथ गांव पहुंची। बारातियों का स्वागत सत्कार किया गया और प्रारंभिक वैवाहिक रस्में विधिवत संपन्न हुईं। इसी दौरान जयमाल की रस्म में किसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी हो गई, जो धीरे-धीरे विवाद में बदल गई। देर रात तक समझौते के प्रयास चलते रहे, लेकिन सहमति नहीं बन सकी। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। सोमवार को दोनों पक्ष डेरापुर थाने पहुंचे, जहां पुलिस की मौजूदगी में वार्ता हुई, पर विवाह आगे बढ़ाने पर सहमति नहीं बन पाई। अंततः दोनों पक्षों ने आपसी समझौते से रिश्ता समाप्त करने का निर्णय लिया। सूत्रों के अनुसार समझौते के तहत गहने, जेवर और गृहस्थी का सामान एक-दूसरे को लौटा दिया गया। डेरापुर थाना पुलिस ने सोमवार शाम करीब 5 बजे बताया कि उन्हें समझौते की जानकारी है, लेकिन औपचारिक समझौता पत्र मिलने के बाद ही आधिकारिक पुष्टि की जाएगी। घटना क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।1